प्रियंका गाँधी के सक्रिय राजनीति में उतरने की अटकलें कोई नई नही है. साल 2004 से हर आम चुनाव में प्रियंका गाँधी का नाम सामने आता रहा है लेकिन प्रियंका कभी अमेठी और रायबरेली से बाहर नही निकल पाई. कॉंग्रेस कार्यकर्ता माँग करते रहे और पार्टी खारिज करती रही. लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है की कॉंग्रेस की किसी कमिटी ने प्रियंका गाँधी की उम्मीदवारी पर कोई प्रस्ताव पास किया है. अब सवाल ये है की ये सब प्रियंका के लिए कॉंग्रेसियों का प्यार है या राहुल के उपर अविश्वास?