वो बिल जिसका मकसद आज़ाद भारत को बुलंद भारत बनाना था वही बिल जो भ्रष्टाचार के भसमासुर को ख़त्म करके आम जनता की ताक़त बनने वाला था अब सियासी बिसात पर है विधानसभा चुनाव में पिट चुकी कॉंग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले लोकपाल बिल को लाकर अपने दामन पे लगे दाग को धोने की कोशिश कर रही है. वही दूसरी ओर बीजेपी अन्ना के जनलोकपाल के साथ है.
यहाँ सवाल ये उठता है की कहीं लोकपाल के नाम पर लीपापोती तो नही हो रही? आख़िर एक मज़बूत लोकपाल से परहेज़ क्यों बढ़ता जा रा है?