पिछले साल के दिल्ली गैंगरेप के बाद महिला अधिकारों को लेकर जहाँ एक और जागरूकता बढ़ी है वहीं दूसरी ओर पीड़ित के समर्थन और आरोपी के लिए घ्रणा भी उसी तेज़ी से बढ़ी है.
लेकिन क्या जिसपे भी आरोप लगता है उसे हम दोषी मानने की जल्दबाज़ी तो नही कर देते? एक सामाजिक कार्यकर्ता खुर्शीद अनवर ने आत्महत्या कर ली. उन पर भी बलात्कार का आरोप लगा था.
ये आरोप सही था या ग़लत ये जाँच का विषय है. लेकिन जिस तरह उन्होने अपनी ज़िंदगी को ख़त्म किया, वो हम सबके लिए गंभीर सवाल छोड़ गया है.