रामलीला मैदान से दिल्ली की सड़कों तक और सड़कों से सीधे दिल्ली विधासभा तक पहुचने वाले अरविंद केजरीवाल का अब तक का सफ़र बिल्कुल हिन्दी सिनेमा के 70 और 80 के दशक के उस हीरो जैसा रहा है जो सिस्टम के खिलाफ खड़ा होता है, शून्य से चलना शुरू करता है और सिस्टम की सभी बुराइयों पर झाड़ू फेर कर आख़िर में फिल्म की एक हॅपी एंडिंग करवाता है.
झाड़ू यहाँ पर भी फिरी है लेकिन केजरीवाल की इस फिल्म की हॅपी एंडिंग होगी, ये कहना जल्दबाज़ी होगी. क्यों यहाँ हर गुज़रते सीन में नये-नये ट्विस्ट आ रहे है.
कल तक जो एक दूसरे की ओर देखना पसंद नही करते थे, आज साथ मिल कर सरकार बना रहे है. ये अलग बात है की दोनो में तलवारें अभी भी खीची है और हाँ केजरीवाल के सीएम बनने को फिल्म का द एंड मानने की भूल मत कीजिएगा क्यों की पिक्चर अभी बाकी है.
आइए देखते है हमारा खास कार्यक्रम "आगे क्या होगा रामा रे!"