आपको वो वक़्त ज़रूर याद होगा जब सभी सिलेंडर पर सब्सिडी मिलती थी. आज की तुलना में वो वक़्त ज़रूर सुनहरा कहा जा सकता है. लिकिन फिर सरकार को कंपनियो की चिंता सताने लगी और सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या छ: कर दी गई.
आम आदमी पर अचानक ही बोझ आ गया. लेकिन सरकार की आदत बन गयी है की पहले चोट दो फिर मलहम लगाओ. इसी के चलते सिलेंडरों की गिनती को नौ कर दिया गया. लेकिन लोगों का बोझ कम नही हुआ. ऐसे में कॉंग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा की सिलेंडरों की गिनती बढ़ा कर 12 कर देनी चाहिए. अब भला राहुल की मर्ज़ी के आगे किसी की क्या चलती. कॅबिनेट की बैठक हुई और सिलेंडरों की संख्या को 12 कर दिया गया. इसके अलावा महँगाई का बोझ तो कई तरह से आम आदमी की जेब पर पद रहा है. तो फिर सिलेंडर ही क्यो?
आख़िरकार ये सब चुनावों से ठीक पहले ही क्यो किया गया. क्या सिलेंडर पर सियासत हो रही है? इसी मुद्दे पर है हमारी खास पेशकश "आज का मुद्दा"