नक्सलियों के खिलाफ यु्द्ध के मैदान में उतरने से पहले किसी भी सशस्त्र जवान को 45 दिन के प्रशिक्षण में 14 रातें तथा 16 दिन घने जंगल में बिताने पड़ते हैं। वहां सांपों से तो सामना होता ही है, जंगली जानवरों से मुठभेड़ भी वहां आम बात है। कैसे जहरीले सांप को काबू करके दूर उछाल फेंकना है,और कैसे भूखे जानवरों के बीच रातें गुजारना है, यह सब उनके गुरिल्ला युद्धकला के प्रशिक्षण का हिस्सा होता है।
आर्म्ड फोर्स को इस गुरिल्ला युध्दकला को सिखाने के लिए 2005 में छत्तीसगढ़ के जंगलों से घिरे कस्बे कांकेर में जंगलवार फेयर कालेज शुरू किया गया था। 300 एकड़ में फैले काऊंटर टेररिज्म एंड जंगलवार फेयर कालेज के नाम से जाने जाने वाले इस गुरिल्ला प्रशिक्षण कालेज में 11 वर्षो के दौरान अब तक 31 हजार से अधिक जवानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।