क्या विधायक, क्या कमिश्नर और क्या डीएम, इंजीनियर। सबके सब हाथ बांधे तबाही की इबारत लिखने को बेताब घाघरा को निहार रहे हैं। घाघरा का प्रकोप रोकने के लिए ग्रामीण ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं तो औरतें, बच्चे आशियानों से तिनका-तिनका बटोर रहे हैं। सैलाब से मचने वाली तबाही को रोकने के लिए जिला प्रशासन के पास अब कोई बैरिकेडिंग नहीं बची है।