कार्ल मार्क्स ने अब से करीब पौने दो सौ साल पहले कहा था कि जनता के लिए धर्म अफीम की तरह है । धर्म जब दिमाग पर चढ़ता है, तो फिर अच्छा-बुरा कुछ नहीं दिखता । सिर्फ धर्म दिखता है । भारत में तो अब चारों तरफ धर्म ही धर्म नजर आ रहा है । जुमे के दिन दोपहर में सड़कों पर नमाज के रूप में धर्म दिखता है । कभी जुलूस और यात्राओं के रूप में धर्म दिखता है, तो कभी छबील, भंडारा, जागरण-कीर्तन के रूप में । धर्म चाहे जो भी हो, जब वो सड़क आयोजन या कर्मकांड बनकर आता है, तो सबकी राह रोक कर खड़ा हो जाता है । इन दिनों हरियाणा के गुड़गांव में सड़क और खुले स्थानों पर जुमे की नमाज का मामला गरमाया हुआ है ।
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