पश्चिम बंगाल आज पूरे दिन सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता रहा। जानते हैं क्यों...अच्छी वजह से नहीं...बल्कि फिर से बुरी वजह से।
यहां एक बीजेपी कार्यकर्ता की लाश एक तालाब में तैरती मिली। धर्मराज हजरा जो की दलित थे। बीजेपी के जिला स्तर के कार्यकर्ता थे। उनका शव जब तालाब में तैरता मिला तो उसके दोनों हाथ और पैर कपड़े से बंधे हुए थे ।
स्थानीय लोगों ने जब हाजरा का शव देखा तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया । मौके पर मौजूद लोगों ने क्या कहा वो सुनिए?
हमलोग जानते हैं पुलिस कुछ नहीं करेगी । ये तृणमूल का काम है । सबको पता है
बीजेपी की राज्य ईकाई के अध्यक्ष ने क्या लिखा है वो देखिए.
हजरा बीजेपी को समर्पित कार्यकर्ता थे। वो 56 शक्तिपुर मंडल कमिटी के सदस्य भी थे। पंचायत चुनाव में बीजेपी को खुला समर्थन देने और दिलाने की वजह से तृणमूल के कार्यकर्ता उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां दे रहे थे। रविवार को उनकी हत्या कर शव को तालाब में डुबो दिया गया।
दिलीप घोष, बीजेपी राज्य ईकाई अध्यक्ष
बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने भी ट्वीट कर इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है । जबकि तृणमूल कांग्रेस की तरफ से फिर से ये कहा गया है कि हजरा की मौत से उनकी पार्टी का कोई लेना-देना नहीं । लेकिन सवाल ये है कि क्यों बार-बार बंगाल में बीजेपी नेताओं या कार्यकर्ताओं की हत्या हो रही है। पंचायत चुनाव के बाद से राजनीतिक हत्या का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा।
देखिए सिर्फ डेढ़ महीने में तीन बड़ी राजनीतिक हत्याएं हो गई । 31 मई को त्रिलोचन महतो की हत्या पुरुलिया जिले में कर दी गई। 2 जून को दुलाल महतो का शव मिला ।
हालत ये है कि बंगाल में बीजेपी के कार्यकर्ता डरे हुए हैं । वो पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं ।
ये हत्या क्यों हो रही हैं ? बीजेपी का कहना है कि ममता बनर्जी बंगाल में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव से बुरी तरह डरी गई हैं। लिहाजा उनकी पार्टी 2019 से पहले पूरे बंगाल में डर का ऐसा माहौल कायम करना चाहती है ताकि वोटर्स ख़ौफ में रहें। वो तृणमूल को छोड़ किसी और के बारे में सोंचे तो परिणाम के बारे में सोचकर सिहर जाएं।
वैसे आज सुप्रीम कोर्ट ने भी बंगाल को लेकर तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने पंचायत चुनाव में निर्विरोध जीते सारे उम्मीदवारों का पूरा ब्योरा मंगवाया है। सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कहा कि लग रहा है कि बंगाल में निचले स्तर पर लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं बची है ।
हम आपको बारी-बारी से बताते हैं कि कोर्ट में आज क्या हुआ ?
ख़ैर...बंगाल को लेकर ऐसी तल्ख टिप्पणियां पहले भी कोर्ट कर चुका है। लेकिन बंगाल की सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ना ही यूपीए के दूसरे घटक दल इस पर ममता से कड़ाई से जवाब मांगते नजर आते हैं। अगर ये सब बीजेपी के लिए कोर्ट ने कहा होता तो शायद कितने अवॉर्ड लौट जाते, कैंडल मार्च और पता नहीं क्या-क्या होने लगता। मैं कोई बीजेपी या कांग्रेस का पक्ष नहीं ले रहा। बस आपके सामने दोहरे मापदंड को रख रहा हूं । राजनीति में विचारधारा अलग हो सकती है लेकिन अलग विचारधारा वाले किसी इंसान को इस तरह से मारा जाए ये कहां तक जायज है । और ये राजनीतिक हत्याएं नहीं है तो फिर कानून व्यवस्था का मामला तो हैं और ममता सरकार इस बात से तो पल्ला नहीं झाड़ सकती कि राज्य के हर नागरिक की सुरक्षा उसकी ही जिम्मेदारी है.