उत्तराखंड में शेड्यूल कास्ट की संख्या 20% है, और कुछ ही लोगों को उच्च स्तरीय शिक्षा मिल पाती है जिसके लिए छात्रों को उनका गांव छोड़ कर शहरों में आना पड़ता है. बदकिस्मती से उनकी कास्ट का स्टेटस उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है, शहरों में भी छात्रों को अपनी जाती की वजह से आसानी से घर नहीं मिल पाता है.