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  • 6 years ago


इस रोग के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन का असामान्य प्रडक्शन होता है। हीमोग्लोबिन ब्लड फ्लो के साथ बॉडी में ऑक्सिजन पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होता है। इसकी संख्या कम होने पर शरीर में ऑक्सिजन के साथ ही खून की भी कमी होती है। ऐसे मरीजों को बार-बार ब्लड की आवश्कयता रहती है । हालांकी पिछले कुछ सालों में जिस तरह से देशभर में ब्लड डोनेट करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है उससे थैलसीमिया रोग से पीड़ित लोगों को काफी फायदा मिला है ।

थैलसीमिया के लक्षण-
-अक्सर थकान और कमजोरी महसूस करना
-शरीर का रंग पीला पड़ना
-चेहरे की हड्डियों के आकार में गड़बड़ी होना
-पेट के हिस्से में अक्सर सूजन बने रहना
-शरीर के विकास में रुकावट
-गहरे रंग का यूरिन

थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है -
मेजर थैलेसीमिया-यह उन बच्चों को होती है, जिनके माता और पिता दोनों के जींस में गड़बड़ी होती है। यदि माता और पिता दोनों थैलेसीमिया माइनर हों तो होने वाले बच्चे को मेजर थैलेसीमिया होने का खतरा अधिक रहता है।

माइनर थैलेसीमिया- यह बीमारी उन बच्चों को होती है, जिन्हें प्रभावित जींस माता या पिता द्वारा प्राप्त होता है। इस प्रकार से पीड़ित थैलेसीमिया के रोगियों में अक्सर कोई लक्षण नजर नहीं आता है। यह रोगी थैलेसीमिया वाहक होते हैं।

थैलेसीमिया का इलाज-

थैलेसीमिया का इलाज करने के लिए नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत होती है। कुछ रोगियों को हर 10 से 15 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है। सामान्यत: पीड़ित बच्चे की मृत्यु 12 से 15 वर्ष की आयु में हो जाती है। सही उपचार लेने पर 25 वर्ष से ज्यादा समय तक जीवित रह सकते हैं। इस बीमारी से पीड़ित रोगियों को विटामिन ,आयरन, स्पलीमेंट्स और संतुलित आहार लेकेन की सलाह दी जाती है । जबकि गंभीर हालात में खून बदलने , बोनमैरो ट्रांसप्लांट और पित्ताशय की थैली को हटाने के लिए सर्जरी का सहारा लिया जाता है ।

एक पीड़ित को हर साल पड़ती 10 यूनिट खून की आवश्यकता
थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे को हर साल औसतन 10 यूनिट खून की आवश्यकता पड़ती है। पीड़ित को महीने या फिर डेढ़ महीने के अंतराल में रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ जाती है। ऐसा नहीं होने पर उसकी तबीयत बिगड़ जाती है। इलाज और रक्त चढ़ाने के बाद ही उसकी स्थिति में सुधार होती है। रक्त की इतनी आवश्यकता की पूर्ति निकट संबंधी तक नहीं कर पाते। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाता उनके लिए जीवनदाता साबित होते हैं।

एसएमएस में हर रोज 40 से 50 थैलसीमिया मरीजों को देना होता है ब्लड-
सवाई मानसिंह अस्पताल स्थित ब्लड बैंक से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल में हर रोज 40 से 50 थैलसीमिया रोग से पीड़ित मरीजों को ब्लड की आवश्यकता रहतीहै ।

रोकने के लिए करें ये उपाय-
अधिक से अधिक लोग करें रक्तदान
इस बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए हम यहीं अपील करना चाहते है की अधिक से अधिक लोग रकतदान के लिए आगे आए ताकि इस गंभीर रोग से पीड़ित रोगियों को जीवनदान मिलता रहे।

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