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  • 5 years ago
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के अन्वय नाइक की आत्महत्या के मामले में बुधवार को रिपब्लिक टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी समेत सह आरोपी नीतीश सारदा और फिरोज मोहम्मद शेख की अंतरिम रिहाई की अनुमति दे दी है।
ज़मानत देते हुए कोर्ट नें अर्नब गोस्वामी की व्यक्तिगत आज़ादी यानी पर्सनल लिबर्टी की बात की।

ऐसे में सवाल यही उठता है कि और भी लोग जैसे सिद्दिक कप्पन, आसिफ सुल्तान और पैट्रीशिया मुखीम जैसे पत्रकारों या उमर ख़ालिद, स्टेन स्वामी, गौतम नवलखा, वरवरा राव, आनंद तेलतुम्बडे, सुधा भारद्वाज, मीरान हैदर, आसिफ़ इक़बाल तन्हा, शरज़ील इमाम, शिफ़ा उर रहमान, नताशा नरवाल और देवांगना कलीता जैसे एक्टिविस्टों या युवा छात्र छात्राओं की गिरफ़्तारी पर पर्सनल लिबर्टी की बात क्यों नहीं होती है?


इसी क्रम में द वायर की पत्रकार इस्मत अरा और सुकन्या संथा नें ऐसे ही कुछ मामलों की सूची तैयार की है।

अंग्रेज़ी रिपोर्ट का लिंक:
https://m.thewire.in/article/rights/jail-bail-hearings-court-delhi-riots-elgar-parishad/amp?__twitter_impression=true&fbclid=IwAR1FLeBQD8LTvHJx7iaA1RM8dCRq3mlQs92IWuQIXKhKNlAqtAo7vwvV-xE

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