शनिवार को दिल्ली के कैंटोनमेंट इलाके में शैलजा द्विवेदी नाम की महिला की हत्या निखिल राय हांडा नाम के एक सेना के एक मेजर ने कर दी. शैलजा शादीशुदा थी, उनके पति अमित द्विवेदी खुद भी सेना में मेजर हैं. पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आ रहा है कि मामला एकतरफा प्यार का है. हत्या के आरोपी मेजर हांडा, शैलजा के प्रति आसक्त थे, पजेसिव थे.
लेकिन हिंदी समाचार चैनलों के लिए यह टीआरपी बटोरने का एक और मौका भर साबित हुआ. एक शादीशुदा महिला की हत्या पर आज तक ने हेडलाइन लगाई “एक महबूबा, दो मेजर”. यह हेडलाइन अपने आप में न सिर्फ भ्रामक है बल्कि संवेदनहीनता का भी चरम है. इस हेडलाइन से आजतक के किसी दर्शक को ऐसा लगेगा कि किसी एक लड़की के पीछे सेना के दो मेजर पड़े हुए थे. जबकि सच्चाई यह है कि मृतका उनमें से एक मेजर की पत्नी थी और दूसरा मेजर जबर्दस्ती, अवैध तरीके से महिला के ऊपर शादी का दबाव बना रहा था, उसकी इच्छा के विपरीत.
किसी कहानी में हाई सोसाइटी, अवैध संबंध, महिला-पुरुष जैसे मसाले दिखते ही हिंदी टीवी चैनलों की बांझे खिल जाती हैं. टीवी चैनलों की मनगढ़ंत कहानियों के ये जरूरी तत्व हैं. चैनलों की सनसनी का जरिया हमेशा दिल्ली कैंट, डिफेंस कॉलोनी, जीके, श्रीदेवी, जिया खान की मौत जैसे मौके ही बनते हैं.