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  • 5 years ago
बीते हफ़्ते एक तरफ़ जहां कुछ बेहद अहम मुद्दे चर्चा में रहे वहीं कुछ घटनाएं मीडिया गलियारों में सनसनी की तरह छाईं रहीं. इस हफ़्ते की चर्चा में हमने उन्हीं में से कुछ को विषयों के लिया. उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर में सांसद और विधायक के बीच हुई जूतम-पैजार की घटना और भारतीय राजनीति की अहंकार-नीति, अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद और विवाद सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा हुई तीन मध्यस्थों की नियुक्ति, राफेल डील से जुड़े कुछ दस्तावेज़ों की चोरी, सरकार के रवैये और द हिन्दू को निशाने पर लिए जाने और प्रधानमंत्री द्वारा मानवीय गरिमा और समझ-बूझ को परे रखते हुए बेहद संवेदनहीनता से डिस्लेक्सिया पीड़ितों का मज़ाक उड़ाए जाने की घटना को चर्चा के विषय के तौर पर लिया गया.

चर्चा में इस बार ‘पेट्रियट’ न्यूज़पेपर के सीनियर एसोसिएट एडिटर मिहिर श्रीवास्तव ने बतौर मेहमान शिरकत की. साथ ही चर्चा में लेखक-पत्रकार अनिल यादव भी शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.

चर्चा की शुरुआत में ‘न्यूडिटी’ पर अपने शोध और क़िताबों के लिए मशहूर मिहिर इस विषय पर अपनी संक्षिप्त राय रखते हुए कहते हैं, “जहां तक न्यूडिटी का सवाल है, इसके नाम पर कुछ लोग संस्कृति के ठेकेदार बने फिरते हैं. लोगों को मारते हैं, पेंटिंग फाड़ देते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि जिस चीज़ की वह सुरक्षा करने में लगे हैं, वह भारत की संस्कृति नहीं है. वह ‘विक्टोरियन मोरैलिटी’ है. यह ‘विक्टोरियन मोरैलिटी’ ढाई-तीन सौ साल पहले अंग्रेज़ी शासन के दौरान हम पर थोपी गई है.”

इसके बाद उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में हुए ‘जूता-प्रकरण’ से चर्चा के निर्धारित विषयों की ओर लौटते हुए चर्चा की शुरुआत हुई. भारतीय समाज और राजनीति में पद-प्रतिष्ठा और नाम की भूख और इससे पैदा अहंकार पर बात करते हुए अतुल सवाल करते हैं, “नाम की भूख और यश लोलुपता की यह परंपरा इस स्तर तक पहुंच जाए कि वह ‘जूता’ चलने की एक परंपरा को जन्म दे और वह परंपरा अमर हो जाए, आप इसे कैसे देखते हैं?”

जवाब में बरसों पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा में जूतम-पैजार की घटना का ज़िक्र करते हुए अनिल कहते हैं, “जो लोग पॉलिटिक्स में हैं, वो अपनी जो छवि पेश करते हैं, वो असल में वैसे हैं नहीं. वो पोज़ करते ह?

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