भोपाल (दीपेश कौरव). प्रदेश में निजी संस्थान और उद्योगों में काम करने वाले 10.60 लाख निजी कर्मचारियों को बीमा अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर उनके वेतन से हर महीने करीब 95 करोड़ रुपए काटे जाते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इन अस्पतालों में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही दवाएं। सीटी स्कैन-एमआरआई तो दूर एक्स-रे और सोनोग्राफी की भी सुविधा नहीं है। इन अस्पतालो में अपेक्षित इलाज न मिलने पर मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में रेफर कराने के लिए कई चक्कर काटना पड़ते हैं। व्यवस्था में सुधार के लिए भोपाल के राज्य स्तरीय बीमा अस्पताल को 3 साल पहले श्रम विभाग से लेकर ईएसआईसी (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) को सौंपने का निर्णय लिया गया था लेकिन सरकार की उदासीनता की वजह से अब तक इस पर अमल नहीं हो सका है।