00:00 मेरी बेहने यहां बैठी हैं, सबसे बड़ा भोज इन पर हैं
00:06 समाज का भोज, महङाई का भोज मेरी बेहने उठाती हैं सबसे ज़ादा
00:12 आज रसोई के लिए सामान खरीदना है, तेल खरीदनी है, वो भी नहीं मिलती
00:18 गैस का सिलिंडर मिलता तो था, उसमें गैस भरना ही मुश्किल हो गया है आज आपको खरीदने जाना है तो हजार रुपे से कम नहीं मिल रहा है
00:30 बच्चों की परवरिष कैसे होगी, सुबे उठके आप अगले दिन का सामना कैसे करते हैं, कोई बिमार पर जाता है
00:39 तो घबराहट उनकी भी होती है और इस बात की भी होती है कि मैं दवाई कहां से खरीद के लाऊँ हूँ, घर पे बिमार पड़ा है लेकिन दुकान जाकर इतनी महंगाई है कि दवाई ही नहीं मिलेगी मैं क्या करूँ, आज ये हैं आपकी परिस्थितियां
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