00:00एक दिन दर्द ने दौलत से कहा, तु कितना खुष नसीव है, हर कोई तुम्हें पाने की खुशिस करता है, मैं इतना बदनसीव हूँ, कि हर कोई मुझसे दूर जाना चाहता है, दौलत ने बहुत प्यारा जगार दी, खुष नसीव तो तुम हैं, जिसे पाकर लोग अप
00:30समधान है, सुखार गए, बदल दें या छोड़ दें, अगर सुखार नहीं कर सकतें, तो बदल कर देखें, अगर बदल नहीं सकतें, तो भेतर है, उसे इश्वर भी छोड़ दें, एक बात हमेसा याद रखना, कि संगर्स में इनसान हमेसा अकेला होता है, इस समय कोई �