00:00शीतलपुर नाम का एक चोटा सा प्यारा गांव था।
00:04वहां के रहने वाले रामू अपने पत्नी लक्ष्मी और उसके पिता के साथ एक चोटा सा घर में रहता था।
00:11रामू के पिता एक बहुत मेहनती इंसान था।
00:14जब वह जवान थे पाई-पाई जोड़कर उसने कुछ धन इकठा किया था।
00:18क्योंकि उसका उम्र बढ़ने के साथ-साथ वहां काम पर नहीं जा पाता।
00:22रामू के पत्नी उसे रोज कुछ ना कुछ सुनाता रहता है।
00:38ऐसा कहकर लक्ष्मी उधर से चले जाते हैं।
00:44येरे बना भुरा आद्मी इसमें क्या ही कर सकता हूँ।
00:47मेरे से तो चला भी नहीं जाता।
00:50फोरा टैम चलने से दिन की धरकरे तेज़ने लगती है।
00:54हे उपरवाले मुझे जितना जल्दी हो सके तुम अपने पास बुला लो। उन्हें पास बुला लो।
01:01इतने में ही रामू अपने घर आता है।
01:03वो अपने पिता को रोते हुए देखकर कुछ नहीं बोलता है।
01:06वो सीधा अपने पत्नी के पास चला जाता है।
01:09अरे लक्ष्मी, पिता जी रोख क्यों रहे है?
01:13क्या ही बोलू?
01:15आपको तो पता ही ही आपके पिता ने जितना धन जमा किया था,
01:19वो सब थीरे थीरे खत्म होने वाला है।
01:22घर में जितने जदा लोग उतना जदा खर्चा।
01:25इतने में अगर अपके बुड़े पिता हमारे साथ रहेंगे,
01:28तो जितना भी पच्चा को चरण है, वो सब बहुत चल्दी खत्म हो जाएगा।
01:33बात तो तुम सही कह रहे हो लक्षमी.
01:35क्या सही बोल रही हूँ?
01:37क्यों न तुम अपने पिता को घर से निकाल ही दो?
01:41पर एसे कैसे उन्हें निकाल दू?
01:44क्यों नहीं निकाल सके?
01:46वो कुछ न कुछ करके अपना जिन्दकी खुशार ही लेगा।
02:02पिता जी, आपको तो पता ही है,
02:05मेरा कोई काम दन्दा नहीं है,
02:07इतना में आपको पलना हमरे वस्की बात नहीं है,
02:10यही बेतर होगा कि आप घर चर कर चले जाओ।
02:13रामू के पिता कुछ बोल पाते,
02:15इतना में रामू वहाँ से चला गया,
02:18हे उपरवाले, ये दिन दिखने से पेले मैं मर क्यों नहीं जाता,
02:22अब मैं क्या करूँ, कहा जाओ,
02:25कोई तो मेरी मदद करो।
02:28ऐसा कहकर रामू के पिता घर चोड़ कर जाने लगता है,
02:32अच्छा हुआ, बुद्धा चला गया,
02:35अब तो मैं सुकून का जिन्दगी जीओंगी,
02:38मेरे तो मजे ही मजे है।
02:40रामू के पिता एक जंगल के बीच में से चलने लगता है,
02:43वहाँ एक बाबा को पैर के नीचे बैठा हुआ देखकर,
02:46उन्होंने बाबा के पास जाकर बैठ जाता है।
03:13उपाए, कैसा उपाए?
03:16बाबा ने रामू के पिता को एक उपाए दिया,
03:19वो फिर से अपने घर के और चल पड़ा।
03:21अरे, आप तो चले गये थे न घर से,
03:24फिर से क्यों आपसाए?
03:26हाँ, पर जाने से पहले,
03:29कुछ बोलना था तुम लोगों को।
03:32क्या है बोलो?
03:33गूप्त धन
03:34क्या? गूप्त धन?
03:36हाँ बेटा, एक एसा खाज़ाना जो तेरे दादाजी ने तेरे लिए रखे गया था,
03:43तेरे दादाजी ने मेरे को बोल के गया।
03:46बेटा, ये मैं अपने बोते के लिए रखे जाता हूँ,
03:50जब तेरा भी समय आएगा उपरवाले के पास जाने का, उससे कुछी दिन पहले तु ये गूप्त धन के बारे में उन्हें बताना,
03:58तु जितना दिन जादा जीएगा, ये धन का मुल्ला उतना ही जादा बरेगा।
04:05आज मैं ये तुमको बताने आया हूँ, मैं तो जाओंगा और शायद जादा दिन जिन्दा भी ना रहू।
04:14या, जितना दिन जीएगा उतना मुल्ली पड़ीगा?
04:21अरे अरे पिता जी, आप कहां जा रहे हो, और आपको क्या होगा?
04:26आपको कुछ नहीं होगा, और आप कहीं नहीं जाओगे, आप हमारे साथ ही रोगे, और ये धन के पारे में आप अभी मत बताईए।
04:35ठीक है, ठीक है, जैसी तुम लोग की मरची।
04:41राम उसके पतनी से कहते हैं,
04:44अरे लक्षमी, अच्छा कसा जा रहा था, और गुपति धन के बारे में भी बता रहा था, तो भला तुम ने उने की रोका?
04:52अरे, आपका कोई दिमान है ही नहीं, आपने नहीं सुना क्या, कि वो जितना दिन जादा जियेंगे, उतना मुल्या पड़ेगा?
05:03हाँ, बात तो सही कहें.
05:06तो आप अभी कोई काम धन न ढूंढिये, नितर हम लोगों को कौन पालेगा?
05:12हाँ, मैं अभी जाता हूँ.
05:14ऐसा कहके रामु काम के तलाश में निकल जाता है, और उसे काम भी मिल जाता है.
05:19रामु अब पहले से ज्यादा काम करने लगे, और बहत पैसा कमाने लगे.
05:24यह देखकर, रामु के पत्नी और पिता दोनों खुश होता है.
05:28दिन गुजरता है, एक दिन अचानक से रामु के पिता की मृत्यू हो जाती है.
05:45अब रामु को सब समझ आता है.
05:46दूखी मत हो, मुझे मिल गया, मुझे मिल गया धन.
05:51आपको मिला धन, कहा है, कहा है, मेरे को बतते हिये न जल्दी, जल्दी बतते हिये न.
05:58पिता जी हमारे महान थे, उसने धन तो उसी दिन दे दिया था, जी दिन ओं लोटकर फीर से घार आये.
06:06ये जी, आप क्या पोल रहे हो?
06:10आ लक्षमी, तुम नहीं देखा क्या, उस दिन से मैं कितना मेंनत कर रहा हूँ, और मेंनत करके बहुत पेसा भी कमा लिया, यही है धन, आप से मैं और मेंनत करूंगा, और बहुत धन कमाऊंगा.
06:35ऐसे ही और मज़ेदार कहानी सुनने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें.