00:00नमस्कार दोस्तों, आप देख रहे हैं H1, ये डिवाइन टेल्स चैनल।
00:04आज हम बात करेंगे अहोई अश्टमी वरत की, तो चलिए शुरू करते हैं।
00:09इस साल 24 अक्टूबर को अहोई अश्टमी वरत रखा जाएगा।
00:14कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अश्टमी तिथी को संतान की दीरगायू और तरक्की के लिए माताएं अहोई अश्टमी वरत का निर्जला वरत रखती हैं।
00:23अहोई अश्टमी का वरत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अश्टमी के दिन किया जाता है।
00:28पुत्रवती महिलाओं के लिए यह वरत अत्यंत महत्वपूर्ण है।
00:32माताएं अहोई अश्टमी के वरत में दिन भर उपवास रखती हैं।
00:37और सायंकाल तारे दिखाई देने के समय होई का पूजन किया जाता है।
00:42तारों को करवा से अर्घ्य भी दिया जाता है।
00:58करवा चौत के ठीक चार दिन आगे अश्टमी तिथी को देवी अहोई माता का वरत किया जाता है।
01:05यह वरत संतान की लंबी आयू और सुखमे जीवन की कामना से पुत्रवती महिलाएं करती हैं।
01:11कार्तिक मास की अश्टमी तिथी को कृष्ण पक्ष में यह वरत रखा जाता है। इसलिए इसे अहोई अश्टमी के नाम से भी जाना जाता है।
01:18विधी उत्तर भारत के विभिन अंचलों में अहोई माता का स्वरूप वहां की स्थानिय परंपरा के अनुसार बनता है।
01:24संपन्न घर की महिलाएं चादी की होई बनवाती हैं। धरातल पर गोबर से लीप कर कलश की स्थापना होती है।
01:30अहोई अश्टमी की दो लोग कथाएं प्रचलित हैं। अहोई अश्टमी व्रत कथा एक नगर में एक साहुकार रहा करता था। उसके साथ बेड़ा जाता है।
01:37धरातल पर गोबर से लीप कर कलश की स्थापना होती है। अहोई माता की पूजा करके उन्हें दूध चावल का भोग लगाया जाता है। तत पश्चात एक पाठे पर जल से भरा लोटा रखकर कथा सुनी जाती है।
01:51अहोई अश्टमी की दो लोग कथाएं प्रचलित हैं। अहोई अश्टमी व्रत कथा एक नगर में एक साहुकार रहा करता था। उसके साथ बेटे थे, साथ बहुए तथा एक पुत्री थी। दीपावली से पहले कार्तिक बदी अश्टमी को सातों बहुए अपनी इकलोती
02:21की अब मैं तेरी कोक बांधुगी।
02:24तब ननन्द अपनी सातों भावियों से बोली की तुम मेंसे कोई मेरे बदले अपनी कोक बंधा लो।
02:29सभी भावियों ने अपनी कोक बंधवाने से इंकार कर दिया।
02:32परंतु छोटी भावियों सोचने लगी यदी मैं कोक न बंधाओंगी तो सासुजी नाराज होंगी।
02:39ऐसा विचार कर ननन्द के बदले छोटी भावियों ने अपने को बंधा ली।
02:43उसके बाद जब उसे जो बच्चा होता वह साथ दिन बाद मर जाता।
02:47एक दिन साहुकार की इस्तिरी ने पंडित जी को बुला कर पूछा की,
02:52क्या बात है मेरी इस बहु की संतान साथ्वें दिन क्यों मर जाती है।
02:56तब पंडित जी ने बहु से कहा कि तुम काली गाई की पूजा किया करो।
03:00काली गाई स्याऊ माता की भाईली है, वह तेरी कोक छोड़े तो तेरा बच्चा जीएगा।
03:05इसके बाद से वह बहु प्राथः काल उठ कर चुपचाब काली गाई के नीचे सफाई आधी कर जाती।
03:12एक दिन गौ माता बोली कि आज कल कौन मेरी सेवा कर रहा है, सो आज देखुंगी।
03:17गौ माता खूब तड़के जागी, तो क्या देखती है कि साहुकार की के बेटे की बहु उसके नीचे सफाई आधी कर रही है।
03:26गौ माता उससे बोली कि तुझे किस चीज की इच्छा है, जो तु मेरी इतनी सेवा कर रही है, मांग क्या चीज मांगती है।
03:34तब साहुकार की बहु बोली कि स्याऊ माता तुम्हारी भाईली है और उन्होंने मेरी कोख बांध रखी है, उनसे मेरी कोख को खुलवा दो।
03:42गौ माता ने कहा, अच्छा तब गौ माता साथ समुद्र पार अपनी भाईली के पास उसको लेकर चली, रास्ते में कड़ी धूप थी, इसलिए दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ गई।
03:54थोड़ी देर में एक साप आया और उसी पेड़ पर गरुडः पंखनी के बच्चे थे, उनको मारने लगा।
04:00तब साहुकार की बहूने साप को मार कर ढाल के नीचे दबा दिया और बच्चों को बचा लिया।
04:06थोड़ी देर में गरुडः पंखनी आयी तो वहाँ खून पड़ा देख कर साहुकार की बहून को चोंच मारने लगी।
04:13तब साहुकार नी बोली कि मैंने तेरे बच्चे को मारा नहीं है बलकि साप तेरे बच्चे को डसने आया था, मैंने तो तेरे बच्चों की रक्षा की है।
04:22यह सुनकर गरुडः पंखनी खुश होकर बोली कि मांग, तू क्या मांगती है।
04:27वह बोली, साथ समुद्र पार स्याऊ माता रहती है, मुझे तू उसके पास पहुचा दे।
04:33तब गरुडः पंखनी ने दोनों को अपनी पीट पर बैठा कर स्याऊ माता के पास पहुचा दिया।
04:38स्याऊ माता उन्हें देख कर बोली कि आ बहन, बहुत दिनों बाद आई। फिर कहने लगी कि बहन मेरे सिर में जूं पड़ गई है।
04:46तब सुरही के कहने पर साहुकार की बहुने सिलाई से उसकी जूएं निकाल दी।
04:52इस पर स्याऊ माता प्रसन होकर बोली कि तेरे साथ बेटे और साथ बहुएं हो। सहुकार नी बोली कि मेरा तो एक भी बेटा नहीं। साथ कहां से होंगे।
05:02स्याऊ माता बोली वचन दिया। वचन से फिरूं तो धोबी के कुंड पर कंकरी हूं। तब साहुकार की बहु बोली माता बोली कि मेरी कोख तो तुम्हारे पास बंद पड़ी है। यह सुनकर स्याऊ माता बोली तुने तो मुझे ठग लिया। मैं तेरी कोख खोलती तो न
05:32वह घर लोटकर आई तो देखा साथ बेटे और साथ बहुएं बैठी हैं।
05:37वह खुश हो गई। उसने साथ अहोई बनाई। साथ उज्मान किये। साथ कड़ाई की।
05:45दिवाली के दिन जेथानिया आपस में कहने लगी कि जल्दी जल्दी पूजा कर लो।
05:49कहीं छोटी बहु बच्चों को याद करके रोने न लगे। थोड़ी देर में उन्होंने अपने बच्चों से कहा अपनी चाची के घर जाकर देखाओ कि वह अभी तक रोई क्यों नहीं।
06:00बच्चों ने देखा और वापस जाकर कहा कि चाची तो कुछ मांड रही है, खूब उजमान हो रहा है।
06:06ये सुनते ही जेथानिया दोड़ी-दोड़ी उसके घर गई और जाकर पूछने लगी कि तुमने कोक कैसे चुड़ाई।
06:12वह बोली, तुमने तो कोक बंधाई नहीं। मैंने बंधा ली। अब स्याऊ माता ने कृपा करके मेरी को खोल दी है।
06:20स्याऊ माता ने जिस प्रकार उस साहुकार की बहु की कोक खोली, उसी प्रकार हमारी भी खोलियों।
06:26सबकी खोलियों, कहने वाले की तथा हुंकार भरने वाले तथा परिवार की कोक खोलिये।
06:32विधी वरत के दिन प्रात। उठ कर स्नान करें और पूजा पाठ करके संकल्प करें कि संतान की लंबी आयू एवं सुखमे जीवन हेतु मैं अहोई माता का वरत कर रही हूं।
06:45अहोई माता मेरे पुत्रों को दीरघायू, स्वस्थ एवं सुखी रखें।
06:49अनहोनी को होनी बनाने वाली माता देवी पारवती हैं। इसलिए माता पारवती की पूजा करें।
06:56अहोई माता की पूजा के लिए गेरू से दीवाल पर अहोई माता का चित्र बनाएं।
07:01और साथ ही स्याहू और उसके साथ संतानों का चित्र बनाएं।
07:05उनके सामने अनाज मुख्य रूप से चावल धीरी, कटोरी, मूली, सिंघाडे रखते हैं।
07:11और सुबह दिया रखकर कहानी कही जाती है।
07:13कहानी कहते समय जो चावल हाथ में लिये जाते हैं, उन्हें साड़ी, सूट के दुपटे में बांध लेते हैं।
07:20सुबह पूजा करते समय जिगर, लोटे में पानी और उसके उपर करवे में पानी रखते हैं।
07:26यह करवा करवा चोथ में इस्तेमाल हुआ होना चाहिए।
07:30इस करवे का पानी दिवाली के दिन पूरे घर में छिड़का जाता है।
07:34संध्या काल में इन चित्रों की पूजा करें।
07:37पके खाने में 14 पूरी और 8 पूयों का भोग अहोई माता को लगाया जाता है।
07:43उस दिन बयाना निकाला जाता है बायने में 14 पूरी या मठरी या काजू होते हैं।
07:49लोटे का पानी शाम को चावल के साथ तारों को आर्ध किया जाता है।
07:54शाम को माता के सामने दिया जलाते हैं और पूजा का सारा सामान पूरी, मूली, सिंघारे, पूए, चावल और पका खाना पंडित जी या घर के बडों को दिया जाता है।
08:05अहोई माता का कैलंडर दिवाली तक लगा रहना चाहिए।
08:09अहोई पूजा में एक अन्य विधान यह भी है कि चांदी की अहोई बनाई जाती है जिसे स्याहू कहते हैं। इस स्याहू की पूजा रोली, अक्षत, दूद वभात से की जाती है। पूजा चाहे आप जिस विधी से करें लेकिन दोनों में ही पूजा के लिए एक कलश में
08:40नोट अगर घर में कोई नया मेंबर आता है तो उसके नाम का अहोई माता का कैलेंडर उस साल लगाना चाहिए।
08:47यह कैलेंडर जहां हमेशा का अहोई माता का कैलेंडर लगाया जाता है उसके लेफ्ट में लगते हैं।
08:53जब बच्चा होता है उसी साल कुंडवारा भरा जाता है।
08:57कुंडवारे में 14 कटोरियाँ, सर्रिया, एक लोटा, एक जोडी कपड़े, एक रुमाल रखते हैं।
09:04हर कटोरी में 4 बादाम और एक छुवारा टोटल 5 रखते हैं।
09:08और लोटे में 5 बादाम, 2 छुवारे और रुमाल रखकर पूजा करते हैं।
09:13यह सारा सामान ननद को जाता है।
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