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Qabar Ka Pehla Raat Aur Munkar Nakir Ka Aakhri Saw
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00:00हम उसी की तारीफ बैयान करते हैं, उसी से मदद के तलबगार हैं।
00:04मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सहा कोई भी माअबूदे बरहक नहीं !
00:09नाजरीन मौत एक ऐसी हकीकत है कि जिससे हर एक इंसान ने हम किनार होना थे
00:16और हर एक इंसान ने मौत का जायका चकना है
00:19और मरने के बाद हर एक इंसान ने कबर में जाना है
00:22कबर आखरत की मंजिलों में से सबसे पहली मंजिल है
00:26अगर किसी शक्स ने इस मंजिल में कामियाँ भी हासिल की
00:29तो आगे का मौमला इससे आसान है
00:32और अगर कोई शक्स कबर की मंजिल में नाकाम हुआ
00:34तो आगे का मौमला इससे कहीं जादा सक्त है
00:37नाजिन आज की वीडियो में हम आपको बताएंगे
00:40कि जब इंसान मर जाता है और उसको कबर में दफन कर दिया जाता है
00:44तो अल्ला तबारक और ताला की तरफ से दो फरिष्टे कबर में दाखिल होते हैं
00:47जिनको मुनकिर नकीर कहा जाता है
00:50ये दो फरिष्टे कौन हैं और ये कबर में दाखिल होने के बाद
00:53क्या सवालात करते हैं और इनकी शक्ल और सूरत कैसी है
00:57ये इनसान से किस किसम के सवालात पूछते हैं
00:59आहादी से मुबारका में इनका तज़किरा किन अलफाज में आया है
01:03कबर में सवालात क्या इनसान की रूह से पूछे जाएंगे या जिसम से
01:07क्या कबर में रूह दुबारा जिसम में लौटा दी जाती है
01:10इसके सासाथ आपको कबर के अजाब और सख्तियों के मुतालिग भी बताएंगे
01:14वीडियो में आगे चलने से पहले आप लोगों से गुजारिश है कि वीडियो को इसकिप नहीं करना और आखर तक लाजमी देखना है
01:20और अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो सबसे पहले हमारे चैनल को सबस्क्राइब करने
01:25नाजिन जब मय्यत को कबर में दफनाए जाता है और लोग वापस होते हैं तो उनके कदमों की आहट मय्यत को सुनाई देती है
01:32और फिर उसकी रूह को लोटा दिया जाता है और उसे बर्जखी जिन्दगी अता की जाती है फिर उसके पास दो फरिष्टे मुन्किर नकीर तश्रीफ लाते हैं उसे बिठाते हैं और सवालात करते हैं
01:44कि तुम्हारा रभ कौन है तुम्हारा दीन क्या है तुम्हारा नबी कौन है अगर मुसल्मान है तो सारे सवालों का जवाब बासानी देता है लेकिन अगर खुदा नखासता काफिर है तो हर सवाल के जवाब में यही कहता है कि मुझे नहीं मालूम है फिर उनसे सवाल और �
02:14चार हाथ लंबी और दो हाथ चौड़ी जमीन यानि कबर में होगे और तुम मुन्किर नकीर को देखोगे मैंने अरस किया या रसूल
02:21वालिवसलम मुनकिर नकीर कौन है हजूर सललाह वालिवसलम ने फर्माया यह कबर में इंतहान लेने वाले दो फरिश्ते हैं जो कबर को अपने दान्तों से कुरे देंगे और उनके बाल इतने लंबी होंगे वो अपने बालों को रोनते हुए आएंगे और उनकी आवास जो
02:51करेंगे हजूर अलेइस सलात और सलाम के हाथ में एक चड़ी थी जिसे आप सललाह वालिवसलम
02:58हिला रहे थे आप सललाह वालिवसलम ने उसकी तरफ इशारा करते हुए फर्माया लेकिन उन दोनों
03:04के लिए उसे उठाना मेरी चड़ी से भी जादा आसान होगा वो दोनों तुम्हारा इंतहान लेंगे अगर तुम जवाब ना दे सके या तुम लडखड़ा गए तो फिर वो तुम्हे हतोड़ा इस जोड़ से मारेंगे के तुम राख बन जाओगे मैंने कहा या रसूल
03:34उस जाद के कसम है जिसने मुझे हक दे कर भेजा है मुझे हजर जीब्रील अले सलाम ने बताया है कि वो दोनों तुम्हारे पास आएंगे और तुमसे सबाल करेंगे
03:43तो तुम जवाब में कहोगे कि मेरा रब अल्ला है तुम बताओ तुम दोनों का रब कौन है और हजर मुहम्म सललाः वलिवालिवसल्लम मेरे नभी सललाः वलिवसल्लम है तुम दोनों के नभी कौन है और इसलाम मेरा दीन है तुम दोनों का दीन क्या है इस प
04:13बात है कि रसूलुलाः सललाः वलिवालिवसल्लम ने फर्माया
04:16जब मय्यत को दफन कर दिया जाता है तो उसके पास सिहा रंग के
04:20और नील गों आँकों वाले दो फरिश्टे आते हैं एक को मुन्किर
04:24और दूसरे को नकीर कहा जाता है वो उससे सवाल करते हैं तु उस
04:28शक्सियत मुहम्मद सललाः वलिवालिवसल्लम के बारे में क्या कहता है
04:32वो जवाब देता है जैसे वो दुनिया में कहता था कि वो अल्लाह
04:36के बंदे और रसूल हैं मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाही माबूद और बरहक
04:40हैं और मुहम्मद सललाः वलिवालिवसल्लम उसके बंदे और रसूल हैं
04:44यह जवाब सुनकर फरिश्टे कहते हैं हमें इल्म था कि तू यही जवाब
04:48देगा फिर उसी कबर सत्तर मुरबबा हाथ तक वसी और मुनमबर कर दी
04:52जाती है और उसे कहा जाता है कि सो जा वो आगे से कहता है अगर
04:56तुम मुझे जाने दो तो मैं अपने कुन्बे के तरफ लौट कर उन्हें
05:00हकीकत हाल और अंजाम खैर से आगा करना चाहता हूँ लेकिन
05:04वो कहते हैं तू उस दुलन की नीन सो जा जिसे जगाने वाला
05:08उसका मेहबूब तरीन फर्ध होता है अल्लाथाला ही ऐसे शब्स को
05:13अगर ये दफन होने वाला मुनाफिक हो तो फरिश्टों के सवाल के
05:17जवाब में कहता है मैं लोगों की तरह कुछ कहे तो देता था लेकिन
05:20अब मुझे इल्म ने फरिश्टे कहते हैं हमें तेरे इस जवाब का इल्म था
05:24तो जमीन को हुकुम दिया जाता है कि इस पर तंग हो जा पस वो इतनी तंग हो जाती है
05:28कि उसकी पसलियां एक दूसरे में पेवस्थ हो जाती है ऐसा शक्स इसी अजाब में
05:33मुप्तिला रहेगा हता कि अल्लाथाला उसे इसी मकाम से उठाएगा
05:37हजद बर्रा बिन आजिब रजी अल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है वो फर्माते है
05:41हम लोग रसुलुला सललाहू अलिवाली वसल्लम के साथ किसी अनसारी आदमी के जनाजे में निकले
05:46पस हम कबर पर जा पहुँचे जबी लहद नहीं बनाई गई थी
05:51रसुलुला सललाहू अलिवाली वसल्लम वहाँ बैट गए और आपके एदगेद हम भी अदब के साथ
05:56खामोशी से बैट गए गुया कि हमारे सरों पर परिंदे बैठे हैं आपके हाथ में की लक्री थी जिस से
06:03आप सललाहू अलिवाली वसल्लम ने अपना सरे मुबारक उठाया और दो तीन मरतबा फर्माया कि अल्लाह की पना मांगो अजाब कबर से
06:11आगे रिबायत में है कि फिर मरने वाले के पास दो फरिष्टे आते हैं उससे बिठाते हैं उससे पूछते हैं कि तेरा रब कौन है वो कहता है मेरा रब अल्लाह है
06:19वो कहते हैं तेरा दीन क्या है वो कहता है मेरा दीन इसलाम है वो दोनों कहते हैं कि ये कौन साहब हैं जो तुम्हारे दर्मियान भेजे गए थे वो कहता है कि ये रसुलुलाः सललाः वलेही वालेवसलम है वो दोनों कहते हैं कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि
06:49तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कै
07:19कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम ह
07:49हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहत
08:19है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्ह
08:49हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहत
09:19कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें
09:49कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम ह
10:19हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहत
10:49है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्ह
11:19हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहत
11:49है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्हें कैसे मालुम हुआ वो कहता है कि तुम्ह
12:19हुआ रूज.
12:49फैसला होता है लेकिन अफसोसनाक अमर ये है कि माजी में
12:52भी बाज लोग और हाल में भी बाज गुरो चन्द खुदसाखता वुजूः
12:57की बुनियाद पर उसके मुनकिर हैं सयेदना बर्रा बिन आजिब रजी
13:02करते हैं कि हम नभी सलला हो अलेही वाली वसलम की माईयत में
13:06एक अनसारी सहाबी के जनाजे में गए फिर हम कबरिश्तान पहुंचे
13:10जबकि अभी लाहत तैयार नहीं हुई थी रसुलुला सलला हो अलेही
13:14वाली वसलम तश्रीप फर्मा हुए तो हम भी आप सलला हो अलेही
13:17वाली वसलम के इरद गिर इस तरह बैठ गए जैसे हमारे सरों
13:21पर परिंदा बैठा हो आप अलेही सलात और सलाम की हात में
13:25एक लकडी थी जिसके साथ आप जमीन कुरेद रहे थे आप
13:29ने सरे मुबारेक बुलंद करके दो या तीन मरतब रिशात फर्माया
13:33कि अल्लाह के साथ अजाब कबर से पना मांगो इसके बाद आप सलला
13:39हो अलेही वाली वसलम ने फर्माया मौमिन शँक्स का जब दुनिया
13:42से जाने और आखरत में दाखिल होने का वक्त होता है तो उसकी जानब आसमान
13:47से सफे चहरे वाले फरिश्टे आते हैं उनके चहरे सूरच की मानिंद होते हैं
13:52उनके पास जन्नत का कफन और जन्नत की खुश्बू होती है वो शब्स हद नजर की
13:58पर बैठ जाते हैं फिर मलक उल मौत अलेहिस सलाम आते हैं और उनके सर के पास
14:02बैठ जाते हैं वो कहते हैं एपा की जरू तु अल्लाह की मकफिरत और उसकी रजा की जानब आप
14:09पास जन्नत का कफन और जन्नत की खुश्बू होती है और उसकी जरू तु अल्लाह की जरू तु अल्लाह की जरू तु अल्लाह की जरू तु अल्लाह की जरू तु अल्लाह की जरू तु अल्लाह की जरू तु अल्लाह की जरू तु अल्लाह की जरू तु अल्लाह की जरू त
14:39आप सललाहू अलेही वाली वसल्लम ने फर्माया फरिश्टे उसको लेकर आस्मानों की जाने बुलंध होने लगते हैं
14:45वो फरिश्टों की जिस जमात के पास से भी गुजरती है वो पूछते है ये कौन सी पाकी जरू है वो कहते है ये फलां का बेटा है फलां इसका नहायत उंदा नाम बताते हैं जिस नाम के साथ इसे दुनिया में पुकारा जाता था
14:59यहां तक कि उसको लेकर आस्मान तक चले जाते हैं फरिश्टे उसके लिए आस्मान के दर्वाजे खोलने का मुतालबा करते हैं चुनाचे उनके लिए दर्वाजे खोल दी जाते हैं बाद अजहर आस्मान के मुकरब फरिश्टे उससे अगले आस्मान तक उसके साथ चलते
15:29हैं और इसी में उन्हें दुबारा ले जाओंगा और इसी से दूसरी बार उन्हें पैदा करुंगा
15:34आप सललाहू अलेही वालेवसलम ने फर्माया पस उसकी रूँ उसके जिसम में लौटा दी जाती है उसके पास दू फरिश्टे आते हैं उसे बिठाते हैं उससे स्तफसार करते हैं कि तेरा रभ कौन है वो जवाब देता है कि मेरा रभ अल्ला है वो उससे दर्यात
16:04करते हैं उसके लिए जननत का बिश्टर बिचा दो इसको जननत का लिबास पहना दो और उसके लिए जननत की जानब दर्वाजा खोल दो आप सललाहू अलेही वालेवसलम ने फर्माया चुनाचे उसके पास जननत के बादे नसीं और खुश्बू पहुँशती है उसकी
16:35खुशी का पैगाम है यही वो दिन है जिसका तुझसे वादा किया
16:38गया था वो शक्स उसे दर्याफ करता है कि तू कौन है तिरा
16:41चेहरा तो ऐसा चेहरा है जो खैरो बरकत का मज़हर है वो
16:44जवाब देता है मैं तिरा नेक अमल हूँ इस पर वो शक्स कहता है
16:48मेरे परवरदिगार कयामत काएम फरमा ता के मैं अपने
16:51एहलो आयाल और अपने माबाब की जानिब जाओं आप सललाह
16:55उलिवालिवसल्लम ने फरमाया काफिर शब्स का जब दुनिया
16:59से अलग होने और आखरत में दाखिल होने का वक्त होता है तू
17:02उसकी जानिब आस्मान की तरफ से सियाँ चेहरे वाले फरिश्टे
17:05नाजिल होते हैं जिनके पास टाट होते हैं और वो उससे
17:08हद नजर की मुसाफत पर बैठ जाते हैं बाद अजा मलक
17:12उल मौत आते हैं और उसके सर के पास बैठ जाते हैं और
17:15वो कहते हैं ऐ खबीस रूह तू अल्लाः की नाराज़गी
17:19की जाने बहारा आप सललाहू अलेही वाले वसलम ने
17:22फर्माया रूह उसकी जिसम में फैल जाती है वो उसको
17:25इस तरह खेंच कर निकालते हैं जैसे लोहे की सीक
17:29है वो रूह को हासल करते हैं जब वो रूह को हासल
17:34कर लेते हैं तो फरिश्टे आंक जपकने के बराबर वक्त
17:37भी उसको अपने हात में रहने नहीं देते रूह को उन
17:40टाटों में लिपेट लेते हैं रूह से दुनिया में पाए
17:43जाने वाले बद्बुदार मुर्दार की सी बद्बु आती
17:46है फरिश्टे उसको हासल करके आस्मान की जाने
17:49में ले जाना चाहते हैं फरिश्टों की जिस जमात
17:51के करीब से वो गुजरते हैं तो वो कहते हैं ये
17:53कौन सी नापाक रूह है वो कहते हैं ये फलाँ
17:57शब्स का बेटा है उसका वो नहाईत कभी नाम लेते
17:59हैं जिसके साथ वो दुनिया में मारूफ था यहां
18:03तक के उसे पहले आस्मान की जाने बले जाये जाता है उसके
18:07लिए दर्वाजा खोलने का मुतालबा किया जाता है लेकिन दर्वाजा
18:11नहीं खुलता इस पर रसुलुलाः सललाः वलिवाली वसल्लम ने
18:13ये आयत तिलावत फरमाई जिसका तरजुमा है उनके
18:17लिए आस्मान के दर्वाजे नहीं खोले जाते और वो उस वक्त
18:21में दाखिल नहीं होंगे जब तक कि ऊटनी सुई के
18:25नाके से ना गुजर जाए चुनाचे अल्लाः फरमाता है कि
18:29इसके आमाल नामे को सिज्जीन में सब्द कर दो जो सबसे
18:33निचली जमीन में है चुनाचे उसकी रूँ को वहाँ से
18:37इसकी तज़्दीक के लिए आप सललाह उलिवाली वसल्लम
18:40ने ये आयत तिलावत की जिसका तरजुमा है और जिस शक्स
18:43ने अल्लाः के साथ शिर्क किया गोया कि वो आस्मान से
18:46गिर पड़ा उसको परिंदों ने उचक लिया ये तेज़ हवा
18:49ने उसको दूर फेंग दिया उसके बाद उसकी रूह को उसके
18:52जिसम में लटा दिया जाता है उसके पास दो फरिष्टे
18:55आते हैं वो उसको बिठाते हैं और दर्याफ करते हैं
18:58तेरा रभ कौन है वो जवाब देता है हाई हाई मुझे
19:01कुछ हिल्म नहीं वो उसके सवाल करते हैं ये शक्स कौन था जो तुम
19:04में मबूस किया गया था वो जवाब देता है हाई हाई मुझे
19:07कुछ हिल्म नहीं चुनाचे आस्मान से फरिष्टा मनादी
19:10करता है कि ये शक्स जूटा है इसके लिए आग का फर्ष बिचाओ
19:13दोज़क की जानेब से उसका दर्वाजा खोलो चुनाचे उसके
19:16पास उसकी गर्मी और तेज बू आती है इस पर उसकी
19:19कबर तंग हो जाती है यहां तक कि कबर में उसकी पसलिया
19:22आबस में यगजा हो जाती है और उसके पास एक शक्स
19:25आता जिसका चहरा नहाएद बदसूरत होता है और लिबास
19:28नहाएद खौफना उससे बदबू आ रही होती वो कहता है
19:31कि तुझे ऐसी चीज की बशारत हो जो तुझे घंब नाग
19:34करगी जो तुझे घंब नाग करेगी यह वो दिन है जिसका
19:37तुझे घंब नाग करेगी यह वो दिन है जिसका तुझे घंब नाग करेगी यह वो दिन है जिसका तुझे घंब नाग करेगी यह वो दिन है जिसका तुझे घंब नाग करेगी यह वो दिन है जिसका तुझे घंब नाग करेगी यह वो दिन है जिसका तुझे घंब ना�
20:07जिसका तुझे घंब नाग करेगी यह वो दिन है जिसका तुझे घंब नाग करेगी यह वो दिन है जिसका तुझे घंब नाग करेगी यह वो दिन है जिसका तुझे घंब नाग करेगी यह वो दिन है जिसका तुझे घंब नाग करेगी यह वो दिन है जिसका तुझे घं
20:37नाराज ना होने वाले परवर्दिगार से खुश हो जा
20:41मुसलसल उसको ये कलिमात कहे जाते हैं
20:44यहां तक के रूँ जिसम से बाहर आ जाती है
20:46बाद अजान रूँ को आस्मान के जानब ले जाये जाता है
20:49उसके लिए आस्मान का दर्वाजा खोल दिया जाता है
20:53दर्यात किया जाता है कि ये कौन रूँ है
20:56फरिश्टे बताते हैं कि फला है
20:58कहा जाता है कि पाकीजा रूँ के लिए खुशान दे दो
21:01जो पाक जिसम में रही जननत में दाखिल हो जा
21:03तु तारीफ के लाइख है
21:05और तु अल्लाह की रह्मत, उसके अतियात
21:08और ऐसे परवर्दिगार से मुलगात के लिए खुश हो जा
21:10जो तुझ पर नाराज नहीं
21:12उसे मुसलसल यही कलेमात कहे जाते हैं
21:14यहां तक कि रूँ उस आसमान तक पहुंच जाती है
21:17जिसमें अल्लाह है
21:19लेकिन जब बुरा शह्स फौत होता है
21:22यहां तक कि रूँ बाहर निकलाती है
21:24फिर उसको आसमान की जाने चठाया जाता है
21:26उसके लिए दर्वाजे खोलने का मुतालबा होता है
21:28दर्याफत होता है यह कौन है
21:30जवाब में बताया जाता है कि यह फला है
21:32तो उसके हकमें पेगाम मिलता है
21:34तो उसके लिए दर्वाजे खोलने का मुतालबा होता है
21:36तो उसके लिए दर्वाजे खोलने का मुतालबा होता है
21:38तो उसके लिए दर्वाजे खोलने का मुतालबा होता है
21:40तो उसके लिए दर्वाजे खोलने का मुतालबा होता है
21:42जवाब में बताये जाता कि ये फला है
21:44तो उसके हकमें पेगाम मिलता है
21:46कभी इस रूह को खुशांदे इदना हो
21:48जो नापाक जिसम में थी
21:50तु वापिस चली जा तु काबले मजम्मत है
21:52तेरे लिए आस्मान के दर्वाजे नहीं खुल सकते
21:54जो नाचे उस रूह को आस्मान से फेंग दिया जाता है
21:56फिर वो कबर में लौट आती है
21:58सयेदना जाविर बिन अब्दुला
22:00रजी अल्लाहू अनु बयान फरमाते है
22:02कि मैंने रसूलुला सललाहू
22:04अलेवालेवसलम को ये फरमाते सुना
22:06इबने आदम जिस काम के वास्ते
22:08पैदा किया गया है
22:10उससे बहुत गाफल है
22:12अल्लाथाला ने जब उसको पैदा करने के रादा किया
22:14तो फरिष्टे को हुकुम दिया
22:16किसकी रोजी और इसका आना जाना लिखो
22:18इसकी उमर लिखो इसके बदबख्त
22:20होने को लिखो फरिष्ट उन सब को
22:22लिखकर चला जाता है फिर अल्लाथाला
22:24दूसरा फरिष्ट उसके पास भेज़ता है ताके
22:26बालिग होने तक उसकी हिफाज़त करे
22:28जब वो बालिग होता है तो वो फरिष्ट
22:30चला जाता है और दो फरिष्ट
22:32अल्लाथाला उस पर मुकरर कर देता है
22:34कि इसकी नेकी और बदी लिखो
22:36पस जब मौत का वक्त आता है तो ये दोनों
22:38चले जाते हैं और मलक उल मौत
22:40आते हैं और रूँ कब्स करते हैं
22:42जब दफन किया जाता है
22:44जब दफन किया जाता है तो रूँ को उसके
22:46बदन में डालते हैं और कबर के दो फरिष्ट
22:48मुनकिर नकीर आते हैं और उसका
22:50इंतहान लेकर चले जाते हैं फिर जब
22:52कायामत का दिन आएगा तो नेकी और बदी
22:54लिखने वाले फरिष्टे आएंगे और उसकी
22:56गर्दन में जो नामा आमा
22:58काया है उसको खोलेंगे और एक फरिष्टा
23:00आगे से खेंशता है और दूसरा फरिष्टा
23:02पीछे से हंकाता हुआ
23:04मैदान हशर की तरफ ले जाएगा
23:06उसके बाद रसुलूल्ला सललाः
23:08वलिवालिवसलम ने फर्माया तुम्हारे आगे
23:10इतना भारी काम आने वाला है कि तुम लोग
23:12उसका अंदादा नहीं कर सकते लिहाज़ा
23:14लह से मदद तलब किया करो
23:16नाजिन इन आहडीस मुबारका से आप अंदादा
23:18लगा लिजे के सही और मुतवातिर
23:20आहडीस इस बात की वजाहत करती
23:22कि सवलात के वक्त रू बदन में लोटा दी जाती है
23:24रू के बगएर सिर्फ बदन से ही
23:26सवाल के भी बाज लोग काईल है
23:28मगर जमूर ने इसका अंकार किया है
23:30इस तरह बाज के नज़दीक
23:32महज रू से ही सवाल होता है
23:34बदन से नहीं
23:36जैसे के इबने मर्रा और इबने हजम की राए है
23:38मगर ये दोनों बाते गलत है
23:40और सही आधीस की रौशनी में
23:42बातिल है अगर सवाल
23:44महज रू से ही होता तो रू के लिए
23:46कबर की खुसूसियत ना होती
23:48नाज़िन याद रखे अजाब कबर से मुराद
23:50अजाब बरजख है
23:52जो भी इसका मुश्टहिक होगा
23:54उसे यादाब चकना पड़ेगा
23:56खा उसे कबर में दफन किया जाए
23:58या आग में जला दिया जाए
24:00या दर्यां में डाल दिया जाए
24:02या किसी दरिंदे ने उसे खा लिया हो
24:04उसे यादाब पहुँचकर रहेगा
24:06अल्लाताला हर चीज पर कादिर है
24:08उसे कोई चीज आजिज नहीं कर सकती
24:10लिहाजा हमें कबर के अजाब से
24:12बचने के फिकर करनी चाहिए
24:14हजद बर्रा बिन आजिब रजिय लाहू अन्हा
24:16से रिबायत है वो कहते है
24:18हम रसुलुला सललाहू वलिवालि वसलम के साथ
24:20एक जनाजे में थे आप कबर के
24:22किनारे बैठे रो रहे थे
24:24यहां तक के आपके आँसों से
24:26सामने की मट्टी तर हो गई फिर आप
24:28ने फर्माया ऐ मेरे भाईयो
24:30इस तरह के दिन के लिए तुम भी तैयारी कर लो
24:32लिहाजा नाजरीन
24:34कबर की जिन्दगी के लिए तैयारी करनी
24:36चाहिए और उस दिन की तैयारी
24:38ईमान और अमल सालह के जरिये ही हो सकती है
24:40कबर में इनसान के साथ उसका
24:42अमल जाएगा और जैसा उसका अमल होगा
25:00कबर में पूछे जाने वाले सवालात के मुतालिक
25:02हज़द बर्रा बिनाज़िब रजियल्लाहू अनुमा
25:04से रिवायत है
25:06वो फर्माते है कि हम लोग
25:08रसुलुला सललाहू अलेही वाले वसलम के साथ
25:10किसी अनसारी आदमी के जनाज़े में निकले
25:12कबर में पूछे जाने वाले सवालात के मुतालिक
25:14हज़द बर्रा बिनाज़िब रजियल्लाहू अनुमा
25:16से रिवायत है
25:18वो फर्माते है कि हम लोग
25:20रसुलुला सललाहू अलेही वाले वसलम के साथ
25:22किसी अनसारी आदमी के जनाज़े में निकले
25:24पस हम कबर पर जा पहुंशे अभी लहद नहीं बनाए गई थी
25:26रसुलुला सललाहू अलेही वाले वसलम वहाँ बैट गए
25:28और आपके गिर्द हम अदब के साथ
25:30बैट गए गए हमारे सरों पर परिंद बैठे हैं
25:32आपके हाथ में एक लकडी थी
25:34जब दफन करने वाले मुँ फेर कर चले जाते हैं
25:36तो मुर्दा उनकी जूतों की धमक सुनता है
25:38उस वक्त उससे कहा जाता है कि
25:40ऐ शक्स तेरा रभ कौन है तेरा मजभ क्या है
25:42और तेरे नभी कौन है
25:44तो मुर्दा उनकी जूतों की धमक सुनता है
25:46तो मुर्दा उनकी जूतों की धमक सुनता है
25:48उस वक्त उससे कहा जाता है कि
25:50ऐ शक्स तेरा रभ कौन है तेरा मजभ क्या है
25:52और तेरे नभी कौन है
25:54नाजीन खबर में दफनाय जाने के बाद
25:56उससे उठाय जाने का मरहला पेशाएगा
25:58जिसने हमें पहली बार बे जान नुत्वे से पैदा किया है
26:00अल्ला ताला का इरशाद है
26:02कि इंसान को इतना भी नहीं मालूम
26:04कि हमने उससे नुत्वे से पैदा किया है
26:06तो याद रखें वो जात
26:08हमें दुबारा जिन्दा करने पर पूरी तरह कादर है
26:10तो याद रखें वो जात
26:12हमें दुबारा जिन्दा करने पर पूरी तरह कादर है
26:14जिसने हमें पहली बार बे जान नुत्वे से पैदा किया है
26:16अल्ला ताला का इरशाद है
26:18कि इंसान को इतना भी नहीं मालूम
26:20कि हमने उससे नुत्वे से पैदा किया है
26:22पिर यका यक वो सरी जगडालू बन बैठा
26:24और वो हमारे लिए मिसाल बयान करने लगा
26:26और अपनी असल पैदाईश को भूल गया
26:28कहने लगा इन गली सरी हड्डियों को
26:30कौन जिन्दा कर सकता है
26:32आप कहदीजिये
26:34कि इन्हें वो जिन्दा करेगा
26:37कबरों से उठाए जाने के बाद
26:39सारे लोग मैदान हशर में जमा किये जाएंगे
26:41और अल्ला के सामने हिसाब और किताब के लिए
26:43पेश किये जाएंगे
26:45मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
26:47और घैर मख्तून जमा किये जाएंगे
26:49मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
26:51और घैर मख्तून जमा किये जाएंगे
26:53मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
26:55और घैर मख्तून जमा किये जाएंगे
26:57मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
26:59मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:01और घैर मख्तून जमा किये जाएंगे
27:03मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:05और घैर मख्तून जमा किये जाएंगे
27:07मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:09मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:11मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:13मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:15मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:17मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:19मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:21मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:23मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:25मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:27मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:29मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:31मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:33मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:35मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:37मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:39मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:41मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:43मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:45मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:47मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:49मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:51मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:53मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:55मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:57मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
27:59मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
28:01मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
28:03मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
28:05मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
28:07मैदान हशर में लोग नंगे बदन नंगे पाउँ
28:09रजिय लाहू अनू की रिवायत में है कि अल्ला ताला
28:11कयामत के दिन आस्मान को लपेट कर
28:13अपने दाए हाथ में ले लेगा
28:15और फर्माएगा मैं बाद्शा हूँ
28:17कहां हैं जालिम और सरकिशी करने वाले
28:19और कहां हैं तकबूर करने वाले
28:21उस दिन आगे फटी की फटी रह जाएंगी
28:23फिर अल्ला ताला हिसाब लेना
28:25शुरू करेगा
28:27अब्दुल्ला बिन मसूद रजिय लाहू अनू का बयान है
28:29कि अल्ला की रसूल सललाहू वली वाली
28:31वसल्लम का इरशाद है कयामत के दिन
28:33पाँच चीज़ों के बारे में सवाल से पहले
28:35किसी बंदे के कदम अपने रब के
28:37पासे तल नहीं सकेंगे उसकी उमर
28:39के बारे में कि उसने
28:41इसे कहां खपाया उसकी
28:43जमानी के बारे में कि उसने इसे कहां
28:45गुजारा उसके माल के बारे में
28:47कि उसने इसे कहां कमाया और कहां
28:49खर्ष किया और उसके इल्म के
28:51बारे में कि उसने इसपर कहां तक
28:53अमल किया अल्ला के रसूल सललाह
28:55हूँ अलेही वाली वसलम फर्माते है
28:57अल्ला के रसूल सललाह हूँ
28:59अलेही वाली वसलम फर्माते है काफिर
29:02उससे पूछा जाएगा कि अगर तुझे
29:04जमीन भर के सोना मिल जाए
29:06तो क्या फिदिये में देकर
29:08अपनी जान छुडाना चाहेगा
29:10वो जवाब देगा हाँ
29:12तो उससे कहा जाएगा
29:14तुससे तो इससे कहीं
29:16जादा असान चीज का मुतालबा किया गया था
29:18एक रवायत में कि अल्ला ताला उससे कहेगा
29:20मैंने तो तुझसे इससे जादा
29:22असान चीज का मुतालबा किया था
29:24जब तु आदम की पुछ्ट में था
29:26मेरे साथ किसी को शरीक मत करना
29:28लेकिन तु नहीं माना
29:30शिर्क करता रहा
29:32अगर नमाज ठीक निकली तो वो कामियाब और कामरान होगा
29:34अगर खराब निकली तो वो खाइब और खासिर होगा
29:36अगर फर्ज नमाजों में कोई कमी पाए गई
29:38तो अल्ला ताला कहेगा
29:40देखो क्या मेरे बंदे ने कुछ नफिल पढ़ी है
29:42तो नफिल के जरिये फर्ज नमाजों की कमी पूरी की जाएगी
29:44हिसाब और किताब के बाद
29:46लोगों के नामाए आमाल को उनके हातों में दी जाने का मरहला आएगा
29:48ये मरहला मुझ्रिमों के लिए कितना सक्त होगा
29:50कुछ नफिल पढ़ी है तो नफिल के जरिये फर्ज नमाजों की कमी पूरी की जाएगी
29:52हिसाब और किताब के बाद
29:54लोगों के नामाए आमाल को उनके हातों में दी जाने का मरहला आएगा
29:56कुछ नफिल पढ़ी है तो नफिल के बाद
29:58लोगों के नामाए आमाल को उनके हातों में दी जाने का मरहला आएगा
30:00कुछ नफिल पढ़ी है तो नफिल के बाद
30:02लोगों के नामाए आमाल को उनके हातों में दी जाने का मरहला आएगा
30:04कुछ नफिल पढ़ी है तो नफिल के बाद
30:06लोगों के नामाए आमाल को उनके हातों में दी जाने का
30:08मरहला आएगा
30:10कुछ नफिल पढ़ी है तो नफिल के बाद
30:12लोगों के नामाए आमाल को उनके हातों में दी जाने का
30:14मरहला आएगा
30:16कुछ नफिल पढ़ी है तो नफिल के बाद
30:18लोगों के नामाए आमाल को उनके हातों में दी जाने का
30:20मरहला आएगा
30:22कुछ नफिल पढ़ी है तो नफिल के बाद
30:24लोगों के नामाए आमाल को उनके हातों में दी जाने का
30:26मरहला आएगा
30:28कुछ नफिल पढ़ी है तो नफिल के बाद
30:30लोगों के नामाए आमाल को उनके हातों में दी जाने का
30:32मरहला आएगा
30:34कुछ नफिल पढ़ी है तो नफिल के बाद
30:36लोगों के नामाए आमाल को उनके हातों में दी जाने का
30:38मरहला आएगा
30:40कुछ लोग वो होंगे
30:42जिनका नामाए आमाल उनके बाए हात में दी जाएगा
30:44वो मारे अफसोस के कहेंगे
30:46काश के मुझे मेरी किताब दी ही ना जाती
30:48और मैं जानता ही ना
30:50के हिसाब क्या है
30:52काश के मौत मेरा काम तमाम कर देती
30:54मेरे माल ने भी मुझे कुछ नफा ना दिया
30:56मेरा गल्बा भी मुझे से जाता रहा
30:58नामाए आमाल पा लेने के बाद
31:00सारे लोगों को पुले सिराद पर से गुजरना होगा
31:02अल्लाह के रसूल सललाः
31:04वलेहिबा अलेवसलम फर्माते है
31:06फिर पुल को लाए जाएगा
31:08हमने पुछा अल्लाह के रसूल
31:10पुल क्या चीज है
31:12आपने फर्माया वो गिरने और फिसलने की जगा होगी
31:14जिसमें आंक्स
31:16और आंकरे होंगे
31:18चोड़े चोड़े कांटे होंगे
31:20उनके सर साधान के खमदार
31:22कांटों की तरह होंगे
31:24वो नजद में होते हैं
31:26जो नजद में होते हैं
31:28मौमिन उस पर से पलक जपकने की मानिन बिजली की तरह
31:30हवा की तरह
31:32तेज रफतार घोरे की तरह गुजर जाएंगे
31:34उन में से बास तो सही सलामत निजाद
31:36पाने वाले होंगे
31:38बाल से बारीक और तलवार से तेज होगा
31:40उस पल पर से सब को गुजरना होगा
31:42काफिर और मुश्रिक उस पल को पार नहीं कर सकेंगे
31:44वो जहन्नम में गिर जाएंगे
31:46जो लोग उस पल को पार कर जाएंगे
31:48वो मौमिन होंगे
31:50उस पल से गुजरने के बाद
31:52मौमिन जो पल से रात पार कर लेंगे
31:54और जहन्नम से बचा लिए जाएंगे
31:56उन्हें जन्नत और जहन्नम के दिर्म्यान
31:58एक पल के पास रोख लिए जाएगा
32:00और उनके हुकूँग का फिर्ण
32:02का फिर्ण का फिर्ण का फिर्ण
32:04उन्हें जन्नत और जहन्नम के दिर्म्यान
32:06एक पल के पास रोख लिए जाएगा
32:08उन्हें जन्नत और जहन्नम के दिर्म्यान
32:10एक पल के पास रोख लिए जाएगा
32:12उन्हें जन्नत और जहन्नम के दिर्म्यान
32:14एक पल के पास रोख लिए जाएगा
32:16उन्हें जन्नत और जहन्नम के दिर्म्यान
32:18एक पल के पास रोख लिए जाएगा
32:20उन्हें जन्नत और जहन्नम के दिर्म्यान
32:22एक पल के पास रोख लिए जाएगा
32:24उन्हें जन्नत और जहन्नम के दिर्म्यान
32:26एक पल के पास रोख लिए जाएगा
32:28साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:30साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:32साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:34साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:36साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:38साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:40साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:42साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:44साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:46साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:48साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:50साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:52साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:54साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:56साफ और बरी कर दिया जाएगा
32:58साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:00साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:02साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:04साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:06साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:08साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:10साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:12साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:14साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:16साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:18साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:20साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:22साफ और बरी कर दिया जाएगा
33:25आखर में प्यारे दोस्तो हर बीडियो के अख्तिताम में
33:28हमने एक दूआ का सलसला शुरू किया हुआ है
33:30जो भी इस दूआ में शामिल होगा
33:32मेरा दावा है कि अल्लाह पाक
33:34उसके तमाम जाएज हाजात को पूरा करेंगे
33:38अपनी दूआ का अगाज दुरूद इबराहिमी से करते हैं
33:41आप सब दोस्त और बहने
33:43पहले मेरे साथ मिलकर दुरूद पाक पढ़ लें
33:46और कमिट्स में आमीन लाजमी लिखेगा
33:49अल्लाह पाक उस आमीन को लिखने की बरकत से
33:52आपकी और मेरी तमाम जाएज हाजात को पूरा करेंगे
33:55दूआ का अगाज करते हैं
34:22तमाम हम्द उसना रब्बे जुलजलाल के लिए हैं
34:25जिसकी रह्मत से ना उमिदी नहीं
34:28जिसकी नेमतों से दामन खाली नहीं
34:31जिसकी मघफिरत से मायूसी नहीं
34:34और जिसकी रह्मतों का पैजान कभी नहीं रुकता
34:38तू सबसे बड़ा है
34:41तेरा कोई शरीक नहीं
34:44और ना ही कोई हम्द उसना रब्बे जुलजलाल के लिए हैं
34:47जिसकी रह्मत से ना उमिदी नहीं
34:50जिसकी नेमतों से दामन खाली नहीं
34:53जिसकी मघफिरत से मायूसी नहीं
34:57इस एकरार के साथ
34:59कि तेरे सिवा कोई माभूद नहीं
35:02तू सबसे बड़ा है
35:04तेरा कोई शरीक नहीं
35:06और ना ही कोई हम्सर है
35:08जमीन और आस्मान पर जितने भी मकलूकात हैं
35:11तू सबका मालिक है
35:14और तू ही सबका पालने पाला है
35:17ऐह अल्लाह पाक
35:18बिला शुबा तू हमसे मौभबत करता है
35:21यही वजह है कि तूने हमें
35:23इमान की दौलत से नवाजा
35:25और हमें अपने महभूब
35:28सललाहू अलेही वालेही वसल्लम का
35:30उम्मती बनाया
35:32या अल्लाह अपने प्यारे हभीब पाक
35:35सललाहू अलेही वालेही वसल्लम के सदके
35:38हमारी जिंदिगियों को पुर सुकून और आसान बनाते
35:41या अल्लाह हम सबके गुना मौफ़ फरमाते
35:45हम सबको आबिद और सहर खेस बनाते
35:48हम पर राज शौकाश कार करते
35:51हमें गुलामिये मुस्तुफा सललाहू अलेही वालेही वसल्लम से सरफरास फरमाते
35:57हमारे दिलों की वीरान बस्ती को अपनी रह्मत से आपात करते
36:02और हमें उस रास्ते पर हमेशा काएं रख
36:06जो नभीय पाक सललाहू अलेही वालेही वसल्लम ने बतलाया है
36:11या अल्लाः पाक हम सबको सच्चे दिल से तौबा करने की तौफिक अताफरमा दे
36:17ऐ रभि रहीम हम गुनाहों की दलडल में डूब गए हैं
36:22हम बदकारियों की मस्तियों में गिर पड़े हैं
36:25हम मायूसियों की अंधेरों में भटक रहे हैं
36:28रह्मते इलाही से खुद ही रूट गए हैं
36:31ऐ अल्लाः हम निदामत के आसूं से ना अश्णा हैं
36:34हम एक सच्ची तौबा के तलबकार हैं
36:37ऐ अल्लाः पाक अपनी रह्मत से हमें वो सच्ची तौबा अताफरमा
36:43ऐ परवर्दिकार हमें हमारे बालिदें को
36:47हमारे एहलो आयाल को
36:49हमारे आबाव अज़दाद
36:51और हमारी आनेवाली नसलों को
36:53अपनी आफियत अताफरमा
36:55हम सबको बेहिसाब रिस्क अताफरमा
36:58हम सबको हासिदों की हसत से बचा
37:01दोनों जहानों के मालिक
37:03जब हम ठक चाएं तो हमें आराम पोँचाना
37:05जब मुश्किलें भर जायें तो आसानी बन जाना
37:08जब हम कमजोर पर जायें तो हमारी ताकत बन जाना
37:11जब हम दुख और तकलीफ में हों
37:14तो हमारा मरहम बन जाना
37:16जब हम मायूस हो जायें तो हमारा भरोसा और यकीन बन जाना
37:20जब हम भूक से निधाल हो जायें
37:22तो तेरी याद ही हमारी घिजा बन जायें
37:25जब हर तरफ बेचैनियां भर जायें
37:27तो आई पाक परवर्तिकार हमारा सुकून बन जाना
37:31जब हमारे अंदर मायूसी का अंधेरा बढ़ने लगे
37:35तो उमीद की रौषनी बन जाना
37:38जब हर चीज हमारे लिए ना मुम्किन हो जाये
37:41तो हर चीज को अपने खास फजल और करम से मुम्किन बना देना
37:45ऐ अर्जो समा के मालिक तू घफूर है तू रहीम है
37:50हम सब की तौबा कबूल करना
37:52हमारे सघीरा कबीरा गुनाहों को धो दे
37:55हमारे दिलों को हिदायत अताफरमा
37:57हमारी जुबान को दुरस्तगी और नर्मी अताफरमा
38:00हम सब को गुनाहों से बचा और नेक आमाल करने की तौफीक अताफरमा
38:05ऐ अल्लाह जिस तरह तू बारिश बरसा कर सूखी जमीन की प्यास बुचाता है
38:11उसी तरह अपनी रह्मत से हमारे दिलों को भी सेराब करते
38:16बेशक तू बड़ा महरबान और निहायत रह्म करने पाला है
38:21ऐ परवर्दिगार हम सब को और उस नेमत से सरफरास फरमा
38:26जिसमें हमारे लिए खैर और बरकत हो
38:29इजदत और बकार हो राहत और सुकून हो
38:32सेहत और तंद्रुस्ति हो तरक्की हो खुशाली हो और दुनिया और आखरत की भलाई हो
38:39ऐ हमारे अल्लाह हमारी जिंदिगियों को महब्बत का उन्मान बना दे
38:44कि हम सब से ज्यादा तुझ से महब्बत करें तुझ को फौकियत दे
38:49तेरी इबादत करें तेरा हुक्म मानें तेरे बताए हुए रस्ते पर चलते रहें
38:55यहां तक कि हमारी जिंदिगी तमाम हो चाए और तु हमें अपने नूर से धांप ले
39:01वो नूर जो हमारे सीने को मुनवर करते वो नूर जो कबर को रॉशन करते
39:07वो नूर जो पुले सिराथ पर रॉशनी बन चाए ऐ हमारे रब हम को भी उन खुश नसीवों में शामिल फरमां
39:15जिनकी तौबा तू कुबूल करता है जिनके गुनाहों को तू अपने फजलों करम और रहमत से नेकियों में तबदील करता है
39:23या अल्लाह हमारे पास कोई अमल नहीं है हमें सिर्फ तेरी रहमत का आसरा है
39:29ऐ परवर्दिगार हमें अपनी रहमत में ढांप ले ऐ बुलंदियों के बादशाह ऐ रब काइनात हमारे दिल और हमारे कदम अपनी रजा की तरफ फेर दे
39:41आमीन या रब लालमीन
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