00:00रावण ने देखे धोका, जब सीता को राम से छुडाया, सहरा में चहार जानिब भयान कर अध्यारा सचाया। लक्षमण के साथ राम जब नौटे तो कुटिया को खाली पाया, जंगल को छान डाला लेकिन कोई पता न पाया।
00:15सीता जी अपने ख्यालों में गुम थी, रोरो के ताब उताकत सारी उख हो चुकी थी, और मिलने से राम के मायूस हो चुकी थी, तभी पवन पुत्र ने पहले इस चीज़ न आया, फिर चुपकर अदब से पाओं पर बजरंग में कुछ यूँ करमाया।
00:30माता ना हो निधाल, बुरा वक्त डल गया।
00:33पुलबद रहा है कुछ का सामान हो चुका।
00:36अब आये राम, खाप में लंकेश अब मिला।
00:39दुन्या के फिक्र छोड़ के भगवत का नाम ले।
00:42अंगूठी ये उठाए मेरी, राम राम ले।
00:46आखों से जान की थी, अंगूठी अभी लगाए।
00:49पिछ पिछ के दोनों हाथ, हनुमान ने उठाए।
00:53हनुमान ने वापसा कर सबहा लंका का रगूबर को सुनाया।
00:57ये भी कि कैसे सतिसाब का मादा तक पहुँचाया।
00:59बोले, पहले मैंने अगूठी भी आखी निशाई।
01:02फिर हाल कह सुनाया जो कुछ के था जबानी।
01:05माता ने भी कह दिया सबसोज गमे निहानी।
01:08अश्वों से कह सुनाई सबसोज की कहानी।
01:12अलतिस सर गूबर ने जिस्दम खबर ये पाई।
01:15फॉरण ही तैकी लंका पे तुरंच चढ़ाई।
01:18दिल में ख़दी हुई थी किसी तकोदे रिहाई।
01:21फॉजे हुई रवाना बदी सी एक च्छाई।
01:24बिठरे हुए थे बहादुर शेमे चेरे जमा की सूरत।
01:28लशकर हुए रवाना अबरे रमा की सूरत।
01:31रावण भिले के निकला सपाय को हुपे कर।
01:34उड़कर जमी से पहुची फलक पे गर्दे रशकर।
01:37है बत से उसकी कापे आदम के बहरु बर।
01:40तेगे खिची हुई थी निकले हुए थी खंजर।
01:43लगने पे राक्षत सब बेधर तुले हुए थे।
01:46नकारे बच रहे थे पर्चम खुडे हुए थे।
01:49लंका पती को दूर से देखा जो राम में
01:53उड़ती हुई सी गर्द नजराई सामने
01:56उड़े तरफ के सूरते अबरा अबरे रवा चले।
02:01लंका के साथ जानी में नंगे जमा चले।
02:04और अब आखिरकार दोनों का आमना साथ ना हुआ।
02:07महरी नजरी के अलफाज में राम से यू रावण मुखातिब हुआ।
02:12बादिल का शहर यार हूँ, जुलमत का ताज़दार।
02:16दस सर्हें भी सहाक हैं, देखो मेरा वकार।
02:19मेरा मिजाज बर्त हैं, मेरा वजूद आख।
02:23जब खीशता हूँ सांस, तो खुंकारते हैं नाख।
02:27इस शम में हप्ती लोगों को जहां में पुझा न दू।
02:30रावण नहीं, जो राम की हस्ती मिटा न दू।
02:34दस में से एक सर्न घटा तीलो आल से।
02:37कटने लगी थी तेवर भी टकरा के ढाल से।
02:47कहते थे राम राम जो गिरते थे कट किसर।
02:54अमरित भरा हुआ था सितमगर की नाफ में।
03:01नागा एक तीर लगा जाके नाफ उपर।
03:04दोरी हुई थी तूटके तूटी हुई कमर।
03:07नुड़का जमी पे मौत ने थी दावते सकर।
03:11हाथों से बढ़के रोक लिया राम ने मगर।
03:14आगोश में सुलाके उसे राम कर लिया।
03:18दिवो जजा के बंदय बेदाम कर लिया।
03:27आंके विचाय सभी मुन्तजित थे कि शाही निशान आ पहुँचा।
03:31पलक छमकते ही पुश्पक विबान आ पहुँचा।
03:35रगुबर जती सती को लेके उत्रे फिर अपने घर।
03:38थंडा था उनको देखके माताओं का जिगर।
03:41माते को चूमती थी कभी बलाएं देती थी।
03:45सत्का उतारती थी कभी दुआएं देती थी।
03:48दिल खुशी से कभी पहलू में उचल पड़ता था।
03:51वो मुबारत कभी मू से निकल पड़ता था।
03:55वही शक्ती तजद्दी की वही शक्ती चरागों की वही पहली दिवाली थी।
04:01बदी पर जीत की रिवायत जिसने डाली थी।
04:10दास्ताने राम हमने करी है उर्दू में पूरी शायरी की जबान हमने पूरी रामायन सुनाई है।
04:16और श्रिवात हमने इसकी चार सल पहले करी थी।
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