00:00गांव बसेरा नाम का था। उत्तर भारत के किसी गुमनाम कोने में बसा एक सुनसान गांव जो मानचित्रों से गायब था।
00:08कहते हैं कभी यहां सौंदर्य की देवी का वास था लेकिन अब वहां सिर्फ सन्नाटा था।
00:14और एक पुराना काला रहस्य। तीन दोस्त, विवेक, रघु और सम्यक शहरी जीवन से बोर हो चुके थे।
00:22एडवेंचर और मिस्ट्री की तलाश उन्हें इस खोए हुए गांव तक ले आई।
00:27उनका प्लान था पुरानी हवेली को एक्स्प्लोर करना, वीडियोज बनाना और यूट्यूब पर डालना।
00:33जैसे ही वे गांव पहुँचे, सब कुछ अजीब था।
00:37सडकें तूटी हुई थी, पेड़ों से अजीब सी फुसफुसा हट आती थी, और सबसे रहस्यमई चीज थी वो हवेली, जिसकी खिड़कियां कभी बंद नहीं होती थी।
00:47रात को जब वे हवेली पहुचे, वहाँ एक लड़की मिली, चंदा, सावली, बड़ी-बड़ी आँखें, लंबे-खुले बाल और ऐसा शरीर जो अंधेरे में भी चमकता हुआ सा लगे, वो वहाँ अकेली रह रही थी।
01:17सब कुछ किसी रहस्य मई नशे की तरह था। उस रात चंदा ने उनके लिए खाना बनाया और फिर हवेली के एक कमरे में उन्हें ठहराया।
01:25कमरा ठंडा था, मगर हवा में कुछ ऐसा था जो उनके शरीर में गर्मी भरने लगा।
01:31रगु सबसे पहले सो नहीं पाया।
01:33बाहर से आती धीमी धीमी सरसराहट और मध्धम गुनगुनाहट उसे बेचैन कर रही थी।
01:40उसने दरवाजा खोला और देखा। चंदा एक बड़े शीशे के सामने नाच रही थी। बिना कपड़ों के।
01:46उसके बदन पर अजीब सी लाल रिखाएं थी। जैसे किसी तांतरिक पूजा के निशान।
01:51अचानक चंदा ने पलटकर रगु को देखा। उसकी आँखें अब काली थी। मगर होटों पर वही मोहक मुसकान। तुम भी नाचोगे मेरे साथ। उसकी आवाज में आग थी और बर्फ भी। रगु सम्मोहित हो गया। वो उसके पास गया। चंदा ने उसके गालों को �
02:21गिर गया और रगु की चीख सुनाई दी। विवेक और सम्म्यक भाग कर बाहर आये। मगर वहां रगु नहीं था। सिर्फ जमीन पर खून की एक लकीर थी। चंदा वहीं खड़ी थी। नगन। मगर उसकी मुसकान अब और भी रहसिमाई थी। वो मुझ में समा गया। �
02:51दीवारों पर तांत्रिक चेहन थे। बीच में एक बड़ा बिस्तर था जिस पर काले फूलों की चादर बिची थी। चंदा ने धीरे धीरे अपना शरीर उसके सामने खोला। हर कपड़ा गिरते ही हवेली की दीवारें कांपने लगी। उनका मिलन धीमा था मगर रूह तक
03:21लगा। मगर वो खुद को रोक न सका। सुबह विवेक भी गायब था। अब अकेला बचा था सम्यक। वो भागना चाहता था। मगर हवेली का हर दर्वाजा अब बंद था। चंदा ने उससे कहा। तुम लोग इंसान नहीं मेरी पुकार के पात्र थे। सौ वर्षों से
03:51मैं उस देवी की चाया हूँ जिसे गाव वालों ने जिन्दा जला दिया था। क्योंकि मैं उनकी औरतों को मुक्त कर रही थी। मैं प्रेम थी, काम थी, शक्ती थी। और अब मैं फिर से जन्म लूँगी। तुम्हारे शरीर से। वो उसकी ओर बढ़ी। उसके होठों से �
04:21कई महीने बाद एक यूट्यूबर नई जगहों को एक्स्प्लोर करते हुए बसेरा पहुँचा। हवेली अब और भी पुरानी हो चुकी थी, मगर वहां से मधुर गुनगुनाहट आती थी। शीशे के सामने एक लड़की नाच रही थी और उसके पीछे तीन पुरुशो
04:51की खिड़की से बाहर जांकती आँखों को कुछ अंजाना डर सता रहा था। और उसी सन्नाटे में सफेद साड़ी में एक औरत धीरे धीरे चल रही थी। चंदा। वो अब इंसान नहीं थी। वो एक पुरातन तांत्रिक शक्ति बन चुकी थी। ऐसी शक्ति जो काम और का
05:21आदित्य एक युवा इंटीरियर डिजाइनर हाल ही में उस अपार्टमेंट में शिफ्ट हुआ था। स्मार्ट, आकरशक और अकेला वो जिस फ्लैट में रहने आया वो कुछ महीनों से खाली पड़ा था। कहते हैं पिछला किरायदार गायब हो गया था। रात के वक्त आ
05:51से वो मुस्कुरा रही हो। सीधे उसकी ओर। चौथी रात दर्वाजे पर दस्तक हुई। आदित्य ने दर्वाजा खोला, सामने चंदा खड़ी थी। मैं इसी बिल्डिंग में शिफ्ट हुई हूँ, क्या पानी मिलेगा। उसकी आवाज में ऐसा कमपन था कि आदित्य �
06:21उस रात चंदा ने धीरे धीरे उसके करीब आकर उसके होटों को छुआ। उसका चुम्बन एक नशा था, एक जहर था, एक ऐसी दवा जो शरीर को गहराई तक हिला दे। आदित्य उसके साथ बिस्तर पर गिर पड़ा। लेकिन जैसे जैसे उनका मिलन गहराता गया, कमरे क
06:51शक्ति बन जाएगा। सुबह फ्लैट में सिर्फ एक राक की परत थी और दीवारों पर खून से लिखा था, एक और समरपन पूरा हुआ। एक पत्रकार की जिग्यासा अन्वेशा, एक युवा पत्रकार आदित्य की गुमशुदगी की खबर पर काम कर रही थी। वो फ्ल
07:21चंदा, अनिडिटेड। वो फोल्डर खोलते ही स्क्रीन पर वीडियो चल पड़ा। आदित्य और चंदा के मिलन का वीडियो। लिकिन जैसे जैसे वीडियो आगे बढ़ा, चंदा का चेहरा डरावना होता गया। और आखिरी फ्रेम में कैमरे ने उसे देखा, सीधे दे�
07:51देवी बनेगी। आखिरी बलिदान, पूर्ण जागरिती चंदा अब तीन आत्माओं को निगल चुकी थी, रघू, विवेक, आदित्य, अब चौथा और अंतिम बलिदान बचा था, एक महिला का, जो तांत्रिक ग्रंथों के अनुसार उसकी पूर्ण जागरिती को संभ�
08:21पर लाल सिंदूरी रेखाएं खीच दी थी, और उसके आसपास चार तांत्रिक मंत्र गूंज रहे थे, चंदा ने उसके माथे पर अपनी जीब फिराई, और बोली, अब मेरी देवी बनेगी, शक्ति की सहचरी, लेकिन तभी कुछ तूट गया, अन्वेशा की आँखों मे
08:51चंदा चिलाई, नहीं, मुझे रोक मत, मैं पुनरजन्म हूँ, मगर अब देर हो चुकी थी, पूरी हवेली की तरह, चंदा की आत्मा भी जलने लगी, मगर उसकी चीख में दर्द नहीं था, उसमें एक त्रिप्ति थी, एक अंतहीन मिलन की त्रिप्ति, अब उसकी आँख
09:21और हर रात, एक नई बली के इंतजार में, विरासत की चाया, भाग तीन, शक्ति की पुनरावृत्ति, प्रारंभ, शक्ति जागरत होती है, रात के तीसरे पहर, शहर के उस पुराने मंदिर में घंटियों की आवाज बिना किसी पुजारी के गूंज रही थी, एक युवती
09:51रक्त देवी चंडिका, चंदा की आत्मा ने अब उसका पूर्ण नियंत्रण ले लिया था, रहस्य, पांचवी शक्ति की खोज, देवियों के पांच रूपों को पूर्ण रूप से जागरत करने के लिए, पांच अलग-अलग विकृत प्रेमी चाहिए थे, ऐसे पुरु
10:21जो गांव की कई मासूम लड़कियों का शोशन कर चुका था, उसका नाम था विधुर ठाकुर, चंदा ने योजना बना ली, अनवेशा की शकल में वह शहर से गांव लोटी, लोटाव, वही पुराना गांव गांव वही था, लेकिन अब हर कोने में डर का साया था, जिस क
10:51की गवाह थी, चंदा अब अनवेशा के शरीर में वहां पहुंची, सफेद साड़ी में उसके बाल खुले हुए थे, और उसकी चाल में नारी की लज्जा नहीं, बल्कि एक देवी की शक्ती थी, भोग, अन्तिम बलिदान की रात्री ठाकुर ने उसे देखा, और वही पु
11:21ठाकुर ने उसे बिस्तर पर बांधा, उसकी साड़ी धीरे-धीरे खुलने लगी, उसकी नर्म तवचा पर लिपटी तंत्र मंत्र की रेखाएं जलने लगी, ठाकुर ने जैसे ही उसे चूने की कोशिश की, कमरे में लाल धुआ भर गया, और फिर चंदा ने अपनी आँख
11:51चलने लगे, हर चीख एक और स्त्री की आत्मा को मुक्ति दे रही थी, पूर्ण जाग्रती, देवी या दानवी ठाकुर की मौत के बाद पांच बलिदान पूर्ण हुए, अब अनवेशा के शरीर में नारी की चेतना और चंदा की आत्मा ने मिलकर एक नई शक्ति को जन्म
12:21अन्तिम द्रिश्य, शहर की ओर वापसी, कुछ हफ्तों बाद, शहर के एक कलब में एक नई डानसर आई, नाम था चंदिका, लोग कहते थे, उसकी नजरें जैसे अंदर तक झांकती हैं, और जो भी उसके साथ एक रात बिताता है, सुभह तक या तो उसकी याददाश्ट �
12:51शक्ति कभी मरती नहीं, वो बस रूप पदलती है, समाप्द, या शायद नहीं, या शायद नहीं