00:00एक अनसुलजी दास्तान और एक आखरी चीख उस लड़की की, जो धीरे धीरे उस हवेली में लुप्त हो गई।
00:07उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में एक गाव है, सरावली।
00:12वहां के लोग बेहत शांत लेकिन एक रहस्य से डरते हैं।
00:16गाव के बाहर एक टूटी-फूटी हवेली है, जिसे लोग आज भी चाया मई हवेली कहते हैं।
00:22वहां न कोई जाता है, न कोई उसकी बात करता है।
00:26कहते हैं, वहां कोई है, जो आज भी अपनी अधूरी कहानी पूरी करने के इंतजार में है।
00:32दिल्ली की रहने वाली नैना त्रिपाथी, एक महत्वा कांक्शी रिसर्च स्कॉलर थी।
00:38उसे पुराने रहस्य मई स्थानों पर रिसर्च करना पसंद था।
00:43जब उसने च्छाया मई हवेली के बारे में सुना, तो वो तुरंत वहां जाने का निर्णय ले बैठी।
00:49इसी ने उसे रोका नहीं, क्योंकि उसे रोकने की कोशिश पहले भी कई बार हुई थी, और वो कभी रुकी नहीं थी।
00:56गाउं में पहुंचते ही, लोग उसकी तरफ देखने लगे, जैसे कोई परच्छाई उनके बीच आखडी हो।
01:02एक बुजर्ग दादी ने उसे देखकर कहा, बिटिया, कुछ चीजें जानने की नहीं होती, वो हवेली सांसें खा जाती है।
01:10नैना मुसकरा दी, सच का सामना करने के लिए डर जरूरी नहीं होता, उसने जवाब दिया।
01:16हवेली एक सूखी नदी के किनारे स्थित थी, चारों और उग आए बेर के पेड़, तूटी हुई महराबे और अंदर जाते ही गंद, जैसे सड़ी हुई आत्माओं की हो।
01:28दर्वाजा खुद बखुद चर्र की आवाज करता खुल गया। नैना ने कैमरा आउन किया, नोटबुक निकाली और अंदर चली गई। अंदर हर दीवार जैसे अतीद की चीखें समेटे बैठी थी, हर कोने में सननाटा इतना गहरा था कि उसकी अपनी सांसें भी गूंज
01:58असी ने बाहर से पकड़ रखा हो। अचानक कमरे के अंदर से धीनी धीनी सी कोई स्त्री स्वर में बड़बड़ा हट आई। तुम आई हो, फिर कोई आई है, शांति भंक करने। नैना पीछे अटी। डर के साय पहली बार उसकी आँखों में जलके। नैना ने जिद में �
02:28हवेली की दीवारों से थप-थप, थप-थप की आवाजें आने लगी। जैसे कोई दीवार पर हथेली मार रहा हो। कैमरे में धुंद सी छा गई। नैना को लगा, शायद बैटरी कम हो रही है। तभी अचानक उसके पीछे से एक तेज फुफकारती आवाज आई। मत छ
02:58से किसी अद्रिश्य शक्ती ने उसे जकड लिया हो। वो जमीन पर गिर गई। उसका कैमरा दूर जा गिरा और लाइट बंद हो गई। गाउंवाले जो हवेली के पास जाने से डरते थे, नैना की दीसरे दिन वापसी न देख डर गए। सरपंच के कहने पर दो आदमी हव
03:28जवाजा फिर से बंद था। नैना के कैमरे से रिकवर की गई आखिरी वीडियो में दिखता है। नैना नीचे जुकी है, कुछ ढूंड रही है और अचानक उसके पीछे एक स्त्री उभरती है। लंबा घूंगट, लाल साट और आखों में जलती आग, वो फुस-फुस आ
03:58गाम के बुजर्ग कहते हैं, 1857 की क्रांती के समय एक अंग्रेज अफसर की पत्नी एलिजाबेट इसी हवेली में रहती थी। जब अफसर मारा गया, तो वो पागल हो गई और खुद को कमरे नंबर साथ में जिन्दा चला लिया। मरते वक्त उसने शपत ही थी। जो मेरी श
04:28गया और फिर कभी नहीं लोटा। आज भी रात को हवेली के पास से गुजरते वककत एक लड़की की आखरी चीख कूंचती है। रुको, मुझे बचाओ। और हवेली के कोने में खड़ा एक साया मुस्कराता है। अब तू भी मेरी कहानी का हिस्सा है। प्रस्तावना, एक
04:58को इंडिया's real haunted disappearance कहने लगे। लेकिन सबसे चौकाने वाली बात तब हुई जब एक YouTube चैनल डार्क वाइब्स इंडिया ने नैना की लास्ट फुटेज को एनालाइज किया और उसमें एक छवी दिखी जिसे लोगों ने कभी नहीं देखा था। एक सफेद चेहरा, बिना आ
05:28सरावली की राहली, उसके मन में सिर्फ एक ही सवाल था, क्या नैना अभी भी जीवित है। राघव के पास नैना की डायरी की फोटोकॉपी थी। उसने पढ़ा कि नैना को कमरा नंबर साथ में कोई एलिजाबेथ बुला रही थी। राघव ने ठान लिया, वो वहाँ जा�
05:58से अजीब सी सरसराहट आती थी, जैसे किसी ने पत्थर की परतों में सांसे छिपा रखी हो। कमरा नंबर साथ के पास जाते ही उसकी रील फटी, कमरे के दर्वाजे पर अब सिर्फ एक नाम नहीं था, नाइना के नीचे लिखा था, योर नेक्स्ट। राघव ने उसी रा
06:28राघव ने टॉर्च उठाई, टॉर्च की रोशनी में दीवारों से खून टपकता दिखाई दिया, और तभी कमरे से चीख निकली, नैना की, राघव, रुख जा, वापस जा, मैं अब वो नहीं हूँ, राघव ने दर्वाजा दखेला, इस बार दर्वाजा अपने आप
06:58पर उसकी आँखें अब इंसानी नहीं थी, उसकी आँखों में आग थी, और आवाज, वो दो आवाजों में बोल रही थी, तू आया है, अब एक और कहानी लिखी जाएगी, पर इस बार लेखक भी मरेगा, राघव चीखा, नैना, मैं तुझे लेने आया हूँ, उसने दे
07:28रोश निकलने लगा, राघव की रिकॉर्डिंग में दिखा, एलिजाबेत का नाम एक छूट था, असल में वो आत्मा एक भारतिय युवती की थी, जिसे उननीस सौचपन में हवेली में जिन्दा दफना दिया गया था, उसका नाम था, संध्या, जिसे अंग्रेजों ने �
07:58ठेली काटी, खून से नैना का नाम जमीन पर लिखा और कहा, अगर तू अब भी कहीं जिन्दा है, तो मेरी आवाज सुन, कमरे में एक जोरदार विस्फोट हुआ, और साए वापस दिवारों में समा गए, सुबह गाम वाले पहुँचे, हवेली में अब कोई नहीं था, न
08:28और लड़की की, तू आया है, अब तेरी बारी है, अगली बार अगर कोई तुम्हें बुलाए, सुनना मत, क्योंकि अब हवेली अकेली नहीं, जोडी में निकलती है, प्रस्तावना, छह महीने बाद सराबली गाउं अब लगभग वीरान हो चुका था, छाया मई हवेली के
08:58की, एक लड़की की, जैसे कोई नाम पुकार रहा हो, आयान, आयान, तू हमारा है, आयान, एक 25 वर्षिय अस्थि विशलेशक, फोरेंजिक एंथ्रोपॉलोजिस्ट, जो भारत के पुराने केसों पर काम करता था, उसे राघव और नैना के गायब होने का केस मिला, उसके प
09:28गए हैं, जो मानव और किसी अग्यात तत्व के मेल से बने हैं, आयान ने फैसला किया, वो वहाँ जाएगा, सबूतों को देखने, न कि डरने, आयान ने दिन में हवेली की जान शुरू की, हर कमरा, हर दीवार स्कैन की, और जैसे ही सूरज डूबा, हवेली का माहौल बदल
09:58उसके पहचान लिया था, उसकी रगों में वही खून था, जो संध्या की पीड़ी से जोड़ा था, जैसे ही आयान कमरे में दाखिल हुआ, उसका कैमरा बंद हो गया, अंधेरे में उसके पीछे कोई सांस ले रहा था, फिर अचानक एक जोरदार जटका, और कमरे की दीवा
10:28थी, मैं वापस आउंगी, तुम्हारी नसल को खत्म करूंगी, अयान समझ चुका था, वो सिर्फ एक शोध करता नहीं, संध्या की रगों का वारिस था, अब आत्मा को चाहिए था, पूरा शरीर संध्या की आत्मा, जो नैना और राघव को निगल चुकी थी, अब अयान क
10:58सिर्फ मांस, तू आएगा तो नहीं, लाया जाएगा, तभी कमरे की जमीन फटी, और खून से बनी एक हाथ ने अयान को खींच लिया, गाओं वालों ने अगली सुबह देखा, हवेली के छट पर एक आदमी खड़ा था, उसका चहरा संध्या जैसा था, शरीर अयान जैसा,
11:28और तुम्हें कोई पुकारे, तू ही है, तू ही वो खून है, तो पलट कर मत देखना, क्योंकि अब हवेली सिर्फ डराती नहीं, खुद में शामिल कर लेती हैं.
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