00:00मुरली अम्रित की धारा है धारा जो देती दुखों से किनारा
00:11ओम शान्ती
00:26आए सुनते हैं चार मई दोहजार पच्चीस दिन रविवार की अव्यक्त मुरली रिवाइस्ट डेड बीस फरवरी दोहजार पाँच
00:36मुरली का सार दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो
00:46अब सुनते हैं मुरली को विस्तार से
00:49आज भग्य विधाता, बाब दादा अपने सर्व बच्चों के मस्तक पीच भग्य की रेखाएं देख रहे है
00:58हर एक बच्चे के मस्तक में चमकते हुए दिव्य सितारे की रेखा दिखाई दे रही है
01:04हर एक के नैनों में स्नेह और शक्ति की रेखा देख रहे है
01:09मुक में श्रेष्ठ मधुरवानी की रेखा देख रहे है
01:13होटों पर मीठे मुस्कान की रेखा चमक रही है
01:16दिल में दिलाराम के स्नेह में लवलीन की रेखा देख रहे है
01:20हाथों में सदा सर्व खजानों के संपन्नता की रेखा देख रहे है
01:25पाउं में हर कदम में पदम की रेखा देख रहे है
01:29ऐसा श्रेष्ठ भाग्य सारे कल्प में किसी का नहीं होता
01:33जो आप बच्चों को इस संगम युग में भाग्य प्राप्थ हुआ है
01:37ऐसा अपना भाग्य अनुभव करते हो, इतनी शृष्ट भाग्य का रूहानी नशा अनुभव करते हो, दिल में स्वतह गीद बचता है.
01:46वा, मेरा भाग्य! यह संगम यूक का भाग्य अविनाशी भाग्य हो जाता.
01:52क्यों?
01:54अविनाशी बाप द्वारा अविनाशी भाग्य प्राप्त हुआ है
01:57लेकिन प्राप्त इस संगम पर ही होता है
02:00इस संगम युक पर ही अनुभूती करते हो
02:02यह विशेश संगम युक की प्राप्ती अतिश्रिष्ठ है
02:06तो ऐसे श्रिष्ट भाग्य का अनुबह सदा इमर्ज रहता है
02:10या कभी मर्ज कभी اिमर्ज रहता है
02:12और पुरुशार्ट क्या किया
02:14इतने बड़े भाग्य की प्राप्ती के लिए
02:17पुरुशार्ट कितना सहज हुआ
02:19सिर्फ दिल से जाना
02:20माना और अपना बनाया
02:22मेरा बाबा
02:23दिल से पहचाना
02:25मैं बाबा का
02:26बाबा मेरा
02:28मेरा मानना और अधिकारी बन जाना
02:31अधिकार भी कितना बड़ा है
02:33सोचो
02:34कोई पूछे क्या-क्या मिला है
02:36तो क्या कहेंगे
02:38जो पाना था वह पा लिया
02:41अप्राप्ट नहीं कोई वस्तु परमात्म खजाने में
02:44ऐसे प्राप्ती सोरूप का अनुभव कर लिया
02:47वा कर रहे हैं
02:49भविश्य की बात अलग है
02:51इस संगम युक का ही प्राप्ती सोरूप का अनुभव है
02:54अगर संगम युक पर अनुभव नहीं किया
02:57तो भविश्य में भी नहीं हो सकता
02:59क्यों?
03:01भविश्य प्रालब्ध है
03:02लेकिन प्रालब्ध इस पूरुशार्थ के श्रेष्ट कर्म से बनती है
03:07ऐसे नहीं कि लास्ट में अनुभव स्वरूप बनेंगे
03:10संगम्युक के बहुत काल का यह अनुभव है
03:13जीवन मुक्त का विशेश अनुभव अब का है
03:15बेफिक्र बाद्शाह बनने का अनुभव अब है
03:18तो सभी बेफिक्र बाद्शाह हो कि फिकर है?
03:23जो बेफिक्र बाद्शाह बने हैं वहां हाथ उठाओ
03:26बन गए हैं कि बन रहे हैं?
03:29बन गए हैं ना? क्या फिकर है?
03:43बोज है क्या?
03:45है?
03:47प्रकृती का खेल भी देखते हो, माया का खेल भी देखते हो, लेकिन बेफिक्र बादशा होकर, साक्षी होकर खेल देखते हो.
03:55दुनिया वाले तो डरते हैं, पतानी क्या होगा?
03:59आपको डर है?
04:02डरते हो?
04:03निश्चे और निश्चित है जो होगा वह अच्छे ते अच्छा होगा
04:07क्यों?
04:09त्रिकाल दर्शी बन हर द्रिश्य को देखते हो
04:12आज क्या है?
04:14कल क्या होने वाला है?
04:16इसको अच्छी तरह से जान गए हो
04:17नौलेज़फुल होना
04:19संगम के बाद क्या होना है?
04:21आप सबके आगे स्पष्ठ है ना
04:23नवयुग आना ही है
04:25नियावाले कहेंगे
04:27आएगा?
04:29क्वेश्चन है
04:30आएगा?
04:32और आप क्या कहते है?
04:35आया ही पड़ा है
04:36इसलिए क्या होगा क्वेश्चन नहीं?
04:39पता है
04:40स्वर्ण युग आना ही है
04:42रात के बाद अब संगम प्रभात है
04:44अमरितवेला है
04:46अमरितवेले के बाद दिन आना ही है
04:49निश्चे जिसको भी होगा वह निश्चिंत
04:51कोई चिंता नहीं होगी
04:53बेफिकर
04:54विश्वर रच्ता द्वारा रच्चना की
04:57सपष्ट नौलेज मिल गई है
04:58बाद दादा देख रहे है
05:00सभी बच्चे सनेहे के
05:02सहयोग के और संपर्क के प्यार में
05:04बंदे हुए अपने घर में पहुँच गए है
05:06बाद दादा सभी सनेही बच्चों को
05:09सहयोगी बच्चों को
05:11संपर्क वाले बच्चों को
05:13अपने अधिकार लेने के लिए
05:28आपका या बाप का, बाप कहते बच्चों का ज्यादा है, देखो बच्चों का प्यार है तब तो कहा कहा से पहुँच गए हैं ना, कितने देशों से आये हैं, पचास देशों से, पचास देशों से आये हैं, लेकिन सबसे दूर से दूर कौन आया है, अमेरिका वाले दूर से
05:58या परमधाम दूर है
05:59सबसे दूरदेशी बाप दादा है
06:03बच्चे याद करते
06:04और बाप हाजिर हो जाते है
06:06अभी बाप बच्चों से
06:08क्या चाहते है
06:09पूछते हैं ना
06:11बाप क्या चाहते है
06:13तो बाप दादा यही मीठे-मीठे
06:16बच्चों से चाहते है
06:17कि एक एक बच्चा स्वराज्य अधिकारी राजा हो
06:21सभी राजा हो
06:23स्वराज्य है
06:24स्वापर
06:26राज्य तो है ना
06:28जो समझते हैं स्वराज्य अधिकारी राजा बना हूँ
06:31वह हाथ उठाओ
06:32बहुत अच्छा
06:34बाप दादा को बच्चों को देख कर प्यार आता
06:37कि 63 जन्म बहुत मेहनत की है,
06:40दुख अशान्ती से दूर होने की,
06:42तो बाप यही चाहते हैं
06:44कि हर बच्चा अभी स्वराज्य अधिकारी बने,
06:47मन बुद्धी संसकार का मालिक बने,
06:49राजा बने,
06:51जब चाहे, जहां चाहे,
06:53जैसे चाहे, वैसे
06:55मन बुद्धी संसकार को परिवर्टन कर सकी,
06:58टेंशन फ्री लाइफ का अनुभव सदा इमर्ज हो,
07:02बाप दादा देखते हैं कभी मर्ज भी हो जाता है,
07:06सोचते हैं यह नहीं करना है,
07:08यह राइट है, यह रॉंग है,
07:10लेकिन सोचते हैं स्वरूप में नहीं लाते हैं,
07:14सोचना, माना, मर्ज रहना,
07:17स्वरूप में लाना, अर्थात इमर्ज होना,
07:20समय के लिए तो नहीं इंतजार कर रहे हो ना,
07:23कभी-कभी करते हैं,
07:25रूहरिहान करते हैं ना,
07:26तो कई बच्चे कहते हैं,
07:27समय आने पर ठीक हो जाएंगे
07:29समय तो आपकी रचना है
07:31आप तो मास्टर रचता हो ना
07:33तो मास्टर रचता
07:35रचना के आधार पर नहीं चलते
07:37समय को समाप्ति के नजदीक
07:39आप मास्टर रचता को लाना है
07:41एक सेकंड में मन के मालिक बन
07:44मन को ओर्डर कर सकते हो
07:45कर सकते हो
07:46मन को एकागर कर सकते हो
07:48फुल स्टॉप लगा सकते हो
07:51कि लगाएंगे फुल स्टॉप और लग जाएगा
07:53question mark
07:54क्यों, क्या, कैसे
07:58यह क्या, वह क्या
08:01अश्यर्य की मात्रा भी नहीं
08:03फुल स्टॉप
08:05second में point बन जाओ
08:07और कोई मेहनत नहीं है
08:09एक शब्द सिर्फ अभ्यास में लाओ
08:11पॉइंट
08:12पॉइंट स्वरूप बनना है
08:14वेस्ट को पॉइंट लगानी है
08:15और महावाक्य जो सुनते हो उस पॉइंट पर मनन करना है
08:19और कोई भी तकलीफ नहीं है
08:20पॉइंट याद रखो
08:22पॉइंट लगाओ पॉइंट बन जाओ
08:24ये अभ्यास सारे दिन में बीच पीच में करो
08:27कितने भी बिजी हो
08:29लेकिन ये ट्रायल करो
08:31एक सेकेंड में पॉइंट बन सकते हो
08:32एक सेकेंड में पॉइंट लगा सकते हो
08:35जब ये अभ्यास बार बार का होगा
08:38तभी आने वाले अंतिम समय में फुल पॉइंट्स ले सकेंगे
08:42पास्वित उनर बन जाएंगे
08:44यही परमात्म पड़ाई है
08:46यही परमात्म पालना है
08:48तो जो भी आये हैं
08:51चाहे पहली बारी आने वाले हैं
08:53जो पहली बारी मिलन मनाने के लिए आये हैं
08:56वहाँ हाथ उठाओ, बहुत आए है, वेलकम, जैसे अभी पहले बारी आए होना, तो पहला नमबर भी लेना, चांस है, आप सोचेंगे हम तो अभी अभी पहले बारी आए है, हमारे से पहले वाले तो बहुत है, लेकिन ड्रामा में ये चांस रखा हुआ है, कि लास्ट सो फा
09:26बनना है चांसलर, चांसलर बनना है, जो समझते हैं चांसलर बनेंगे, वह हाथ उठाओ, चांसलर बनेंगे, वाह, मुबारक हो, बाप दादा ने देखा, यहां तो जो भी आए है, वह सब हाथ उठा रहे है, मैजोरिटी उठा रहे है, मुबारक हो, मुबारक हो, बाप दा
09:56सभा में देश विदेश के बहुत से वियाईपीज बैठे है
09:58क्यों निमंतरन दिया?
10:02पता है?
10:04देखो, निमंतरन तो बहुतों को मिला
10:06लेकिन आने वाले आप पहुँच गए हो
10:08क्यों बाप दादा ने याद किया?
10:11क्योंकि बाप दादा जानते हैं
10:12कर जो भी आये हैं, वह स्ने ही
10:15सहयोगी से सहजयोगी
10:17बनने वाली क्योलिटी है
10:18अगर हिम्मत रखेंगे तो आप सहजयोगी बन
10:21औरों को भी सहजयोग का मैसेंजर बन
10:26मैसेज देना अर्थाथ
10:28गॉडली मैसेंजर बनना
10:30आत्माओं को दुख अशान्ती से छुडाना
10:33फिर भी आपके ही भाई बहने हैना
10:36तो अपने भाई वा बहनों को गौडली मेसेज देना
10:39अर्थत मुक्त करना
10:41इसकी दुआएं बहुत मिलती है
10:43किसी भी आत्मा को दुख अशान्ति से छुडाने की दुआएं बहुत मिलती है
10:48और दुआएं मिलने से अतींद्रिय सुख आंतरिक खुशी की फीलिंग बहुत आती है
10:54क्यों? क्योंकि खुशी बांटी न तो खुशी बांटने से खुशी बढ़ती है
10:59सभी खुश हो
11:01विशेश बाप दादा मेहमानों से नहीं
11:05अधिकारियों से पूछते हैं
11:07अपने को मेहमान नहीं समझना
11:09अधिकारी है
11:11तो सभी खुश है
11:13हाँ
11:15आप आने वालों से पुछते है
11:18कहने में आता है मेहमान लेकिन मेहमान नहीं हो
11:21महान बन महान बनाने वाले हो
11:23तो पूछो खुश है
11:25खुश है तो हाथ हिलाओ
11:28सभी खुश है
11:29अभी जाकर के क्या करेंगे
11:32खुशी बांटेंगे न
11:34सब को खुब खुशी बांटना
11:36जितनी बांटेंगे उतनी बढ़ेगी
11:39ठीक है
11:40अच्छा
11:41खुब ताली बजाओ
11:43सभी ने खूब तालियां बजाई
11:46जैसे अभी ताली बजाई
11:48ऐसे सदा खुशी की तालियां
11:50आटोमेटिक बचती रहे
11:51अच्छा
11:53बाप दादा सदा टीचर्स को कहते है
11:56टीचर्स अर्थाद जिसके
11:58फीचर्स से फ्यूचर दिखाई दे
11:59ऐसी टीचर्स हो न
12:01आपको देखकर
12:03स्वर्ग के सुख की फीलिंग आए
12:05शान्ती की अनुभूती हो
12:08चलते फिरते फरिष्टे दिखाई दे
12:10ऐसी टीचर्स हो न
12:12अच्छा है
12:14चाहे प्रवृत्ती में रहने वाले हैं
12:16चाहे सेवा के निमित बने हुए हैं
12:19लेकिन सभी बाप दादा समान बनने वाले
12:22निश्चे बुद्धी विजई हैं
12:23अच्छा
12:24चारों और के चाहे साकार रूप में सामने हैं
12:29चाहे दूर बैठे भी दिल के नस्दीक है
12:31ऐसे सदा श्रेष्ट भाग्यवान आत्माओं को
12:34सदा निमित बन निर्माड का कार्य सफल करने वाले विशेश आत्माओं को
12:39सदा बाप के समान बनने के उमंग उत्साह में आगे बढ़ने वाले हिम्मत वान बच्चों को
12:46सदा हर कदम में पदमों की कमाई जमा करने वाले बहुत बहुत वर्ल्ड में
12:51पदम गुणा धनवान भरपूर आत्माओं को बाप दादा का याद प्यार और नमस दे
12:59डबल विदेशी निमित बड़ी बहनों से अच्छा सर्विस का सबूत दे रहे है
13:05इससे ही आवाज पहलेगा अनुभव सुनाने से औरों का भी अनुभव बढ़ता है
13:12तो बाप दादा खुश है फॉरेन की सेवा में निमित बनने वाले अच्छे उमंग उत्साह से सेवा में बिजी रहते हैं
13:21गए देश से हैं लेकिन विदेश वालों की सेवा ऐसे ही निमित बनके कर रहे हैं जैसे वहां के ही है
13:27अपनेपन की भासना देते हो
13:30और सब तरफ के है
13:31एक तरफ के नहीं है
13:33लंडन के या अमेरिका के नहीं
13:36बेहत सेवाधारी है
13:37जिम्मेवारी तो विश्व की है न
13:40तो बाप दादा मुबारक दे रहे है
13:42कर रहे हो
13:44आगे और अच्छे ते अच्छे उड़ते और उड़ाते रहेंगे
13:47अच्छा
13:49पर्सनल मुलाकत
13:52सभी होली और हैपी हंस हो
13:56हंस का काम क्या होता है
13:59हंस में निर्णे शक्ती बहुत होती है
14:02तो आप भी होली हैपी हंस व्यर्थ को समाप्त करने वाले
14:06और समर्थ बन समर्थ बनाने वाले हो
14:08सभी ever happy
14:11ever ever happy
14:13अभी कभी दुख को आने नहीं देना
14:16दुख को divorce दे दिया
14:18तभी तो दूसरों का दुख निवारन करेंगे न
14:21तो सुखी रहना है और सुख देना है
14:25ये काम करेंगे न
14:26यहां से जो सुख मिला है वह जमा रखना
14:30कभी भी कुछ भी हो ना
14:32बाबा, मीठा बाबा
14:35दुख ले लो, अपने पास नहीं रखना
14:38खराब चीज रखी जाती है क्या
14:40तो दुख खराब है ना
14:42तो दुख निकाल दो, सुखी रहो
14:45तो यह है सुखी ग्रुप और सुखदाई ग्रुप
14:49चलते फिरते सुख देते रहो
14:51कितना आपको दुआएं मिलेंगी
14:53तो यह ग्रुप ब्लेसिंग के पातर है
14:56तो सभी खुश है ना
14:57अभी मुस्कराओ
14:59बस मुस्कराते रहना
15:01खुशी में नाचो
15:03अच्छा
15:05वर्दान
15:06याद और सेवा के बैलन्स द्वारा
15:10चड़ती कला का अनुभव करने वाले
15:12राज्य अधिकारी भव
15:14याद और सेवा का बैलन्स है
15:17तो हर कदम में
15:19चड़ती कला का अनुभव करते रहेंगे
15:21हर संकल्प में सेवा हो
15:23तो व्यर्थ से छूट जाएंगे
15:25सेवा जीवन का एक अंग बन जाए
15:28जैसे शरीर में सब अंग जरूरी है
15:30वैसे ब्राह्मन जीवन का विशेश अंग सेवा है
15:34बहुत सेवा का चांस मिलना
15:36स्थान मिलना
15:38संग मिलना
15:39यह भी भागी की निशानी है
15:41ऐसे सेवा का गोल्डन चांस लेने वाले ही राज्य अधिकारी बनते है
15:45स्लोगन
15:48परमात्मा प्यार की पालना का सोरूप है
15:51सहज योगी जीवन
15:53अव्यक्त इशारे
15:55रुहानी रोयल्टी और प्योरिटी की परसनेल्टी धारन करो
15:59पवित्रता
16:01आप ब्रामनों का सबसे बड़े से बड़ा शरंगार है
16:05संपूर्ण पवित्रता आपके जीवन की सबसे बड़े से बड़ी प्रॉपर्टी है
16:09रोयल्टी और परसनेल्टी है
16:12इसे धारन कर एवर रेडी बनो
16:14तो प्रकृती अपना काम शुरू करे
16:17प्रॉपर्टी की परसनेलिटी से संपन रोयल आत्माओं को सभिता की देवी कहा जाता है
16:23ओम शान्ती
16:47झाल