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  • 1 year ago
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Transcript
00:00ये तो अब्दुल्बारी है, ये तो अच्छा बच्चा है, ये दुआए सिखता है, अच्छी बाते वतादा है
00:13आज सीठे अब्दुल्बारी के संग
00:30अकील बस एक ही दिन की तो बात है, मैं तुम्हें फॉरन कंप्लीट करके लोड़ा दूँँगा तुम्हारी नोट बुक
00:37नहीं तैयब, तुम मुझे कल ले जाना नोट क्यूंकि अभी तो मेरा भी कंप्लीट करना बाकी है
00:42ठीक है अकील, लेकिन प्लीज कल तुम मुझे बुक देना हाँ
00:46हाँ हाँ जरूर सीब
00:47कल मिलेंगे, अलविदा
00:48ठीक है
00:49अकील, कैसे हो तुम, मैं ठीक हूँ सरफराज
00:57मुझे दर असल नोट कंप्लीट करना था
01:00और मुझे तुम्हारी मदद चाहिए
01:02क्या तुम मुझे अपनी बुक दोगे प्लीज
01:04लेकिन सरफराज, मुझे भी लिखना है
01:07थोड़ा लिखना बाकी है
01:09वो तुम कल लिख लेना
01:10आज मैं उतना कर लेता हूँ
01:12जितना तुमने कर चुके हो
01:13आ, ठीक है
01:16तुम पहली बार मुझे मांग रहे हो
01:18तो मैं तुम्हे देता हूँ वुक
01:20लेकिन याद से कल लोटा देना
01:22वरना मेरा वर्क इंकंप्लीट रह जाएगा
01:25हमें परसू सब्मिट करना है
01:27कल पक्का
01:28बहुत शुक्रिया तुम्हारा
01:30अब्दुलबारी
01:37नवेद, रुको
01:39तुम कहा रह गए ती सरफराज
01:44हमने तुम्हें धूंडे भी
01:45लेकिन तुम नहीं मिले
01:47मुझे दरसल किताबे चाहिए थे
01:49मैंने नोट्स नहीं लिखा अब तक
01:51हाँ मुझे याद है
01:52तुम और नवेद उस दिन एप्सिन थे स्कूल में
01:55हाँ मैंने बड़ी मुश्किल से ये बुक अकिल से लिया हूँ
01:57तुमने अपनी बुक जो पहले ही सब्मिट कर दिये
02:00वर्ना दूसरों से लेने की ज़रुद नहीं होती मुझे
02:03तुम दोनों ने मुझे बोली ही नहीं
02:04वर्ना मैं पर्� Soul ही सब्मिट करता
02:06ठीक है दोस्तो मेरा घर आ गया
02:09अस्सलाम वलैकुम
02:10वलैकुम अस्सलाम
02:12सरफरास तुम ये बुक मुझे दे दो प्लीज
02:15मैं जल्दी ही شाम तक कम्प्लीट करके तुम्हें दे दूँगा
02:19फिर तुम भी कम्प्लीट कर लेना
02:21प्लीज
02:22लेकिन नवेध वो मैंने भी दूसरे से लिया हूं
02:25दे दो ना प्लीज
02:26ठीक है ये ले लो
02:28लेकिन नवेध याच से मुझे दूपैर बात दे देना
02:32वरना मैं भी लिख नहीं पाऊंगा
02:34तुम बेफिकर रहो सरफराज
02:35लोग आजकर अपनी जबान के कच्छे होते है
02:39लेकिन मैं बहुत पक्का हूँ
02:41मैं दूसरों की तरह थोड़ी ना करूंगा
02:44ठीक है, असलाम उलेकुम
02:45वालेकुम, असलाम
02:47आपा, मैं कुछ देर सरफराज के साथ खेलने जा रहा हूँ
02:52ठीक है, अबडलबारी, क्या मी से इजासत लिए
02:55जी आपा, असलाम उलेकुम
02:58वालेकुम, असलाम
02:59सरफराज, मैं तुम्हारे ही पास आ रहा था
03:07चलो कुछ देर खेलते है, नवेद नहीं आए
03:11कैसे खेलो अबडलबारी, मैं तो बहुत परिशान हो
03:14परिशान हो, वो क्यों सरफराज?
03:17तुम्हें तो पता है न, मैंने अकील से बड़े मुश्किल से बुग लिया था
03:20तो क्या तुमने कम्प्लीट नहीं किये?
03:22मैंने नवेद को पहले दे दिया
03:24क्या? तुमने नवेद को दे दिये?
03:27अकील से बगेर पूछे?
03:29हाँ, मुझे पता है मैंने गलती कर दिया
03:31किसी का सामान जो उसने मुझे दिया था
03:33वो मैंने दूसरे को दे दिया
03:35ये बहुत बुरी आदत है
03:37हैर, तो अब क्यो परिशान हो?
03:39नवेद अब तक मुझे बुक लोटाने नहीं आए
03:42तो नवेद की घर जाकर ले लेते है बुक
03:44मैं पहले ही गया नवेद की घर
03:46लेकिन वो वहाँ नहीं है
03:48अब पता नहीं क्या होगा
03:50मैं कैसे लिखूंगा
03:51सब गरबढ़ हो गया
03:52यह हमेशा की आदत हो गई है
03:54हर वक्त गैर जिम्मेदार बने रहना
03:57अपनी जबान की पालजारी ना करना
03:59दूसरों की चीज तीसरे को दे देना
04:01तुम दोनों ही नहीं गलती किये हो
04:03इससे हमारे मामलाद बिगरते है
04:06सही कहते हो तुम अब्दुलबारी
04:08लेकिन अभी मैं क्या करूँ
04:10जाओ दूबारे नवेद की घर जाकर देखो
04:13और कुछ देर इंतिजार करो
04:15या फिर उनके वालिदेन को फोन करके पूछो
04:17नवेद आ चुके होंगे
04:19ठीक है मैं ऐसा ही करता हूँ
04:21अब मैं पहले घर जाता हूँ
04:23हम भी इंतिजार में होंगे
04:24अच्छा सरफराज
04:25असलाम अलेकुम
04:27अलेकुम असलाम
04:28क्या बात है अब्दुलबारी
04:40इस कदर परिशानी में क्या ढून रहे हो
04:42वो कुछ रफ पेजिस थे आपा
04:44जिन में मैंने रफली अपने नोट्स के कुछ हिस्से लिखे थे
04:53हो उन्हें रफ थे ना
04:54फैर और फाइनल वाले स्कूल में सब्मिट तो कर दिये हो ना
04:57जी आपा
04:58दरअसल नवेद और सरफरास का लिखना बागी है
05:01वो दोनों एपसेंट थे
05:03और अब उन्होंने सब गड़बड करके रखे है
05:06सो मैंने सोचा
05:07देखो अगर कुछ मदद कर सकू तो
05:09लेकिन रफ पे जिस तो डश्मिन में थे
05:11और वो कच्छे के साथ जा शुके
05:13अब काफी रेर हो चुकी है
05:15मगर्बी होने को है
05:16चलो जल्दी आओ
05:18अम्मी अबबा इंतिजार कर रहे है
05:19हमें आज कुछ नई बाते सिखाने वाले है अबबा
05:22जी आपा अभी आया
05:25तो बच्चो आप मेंसे जिनों ने भी अपना नाम दर्च किये
05:32उन सब पर गोर किया जाएगा
05:34और आप मेंसे कुछ लोगों को इस काम के लिए चुना जाएगा
05:37आप अपने नोट्स को जल्द से जल्द सब्मिट कर दे
05:40सिर्फ एक दिन बचा है आप लोगों के हाथ में
05:43नोट्स सब्मिशन के बाद चेक किया जाएगा
05:45और उसके बिना पर आप लोगों का इंतिखाब होगा
05:47आप लोगों को ये बहुत ही अच्छा मौका मिलेगा
05:50कि आप मैनेजमेंट और टीचर्स के साथ मिलकर काम करे
05:53इससे आप बहुत कुछ सीखेंगे
05:54ठीक है सबी तयार रहे हैं
05:56विश विश वाल अल दे बेस्ट
05:57ये तुमने बहुत बुरा किये नवेद
06:01तुमने ना खुद लिखना मुकमल किये
06:03ना मुझे कुछ कुछ करने दिये
06:05और अब कहते हो किताब घर में टेबल पर ही रह गया
06:08मैं तुम्हें लाकर दे दूँगा घर पहुच कर
06:11उससे क्या होगा
06:12मैं कैसे कम्प्रीट कर पाऊंगा
06:13और अब मैं अकील को क्या जवाब दूँगा
06:16उन्हें भी अपनी नोट्स लिखने बाकी थे
06:18वो कैसे कर पाएंगे
06:20हो जाएगा सर फराज
06:22तुम्हें जरा भी ख्याल नहीं कि तुमने क्या किये हो
06:24कैसे होगा सब कुछ
06:26मैं कब लिख पाऊंगा
06:27और कब बुख लोटाने अकील के पास जाऊंगा
06:30उन्हें लिखने के लिए कब वक्त मिलेगा
06:32क्या बात है सर फराज
06:34क्यों आपस मैंसे बात कर रहे हो
06:36अकील तुम
06:38अब वो मैं
06:40कैसे कहूँ
06:41मैंने कल तुम्हारी बुख नवेद को दे दिया था
06:44क्या
06:44मुझसे बगएर पूछे
06:46तुमने तो अपने लिए लेकर गए थे ना
06:48वो
06:50मैंने डरसल
06:51अच्छा सब छोड़ो
06:53अब बुख कहा है
06:55जल्दी से दो
06:56मुझे जल्द कमपीट करना है
06:58क्योंकि आज टाइम ही नहीं मिलेगा
07:00दरसल हम दादी को देखने जा रहे है
07:03वो बिमार है
07:04क्या
07:05अकील
07:06वो मैं तुम्हें दोफेर बाद लाकर दे देता हूँ
07:09दरसल नवेद ने अपने घर ही छोड़ कर आ गए
07:13क्या
07:13ऐसा कैसे कर सकते हो तुम लोग
07:16मेरी सारी महनद
07:18अपने कल कैसे समिट कर पाऊंगा
07:20तुम लोगों की गैस दिवमेदारी
07:22और मामलात में हेरा फेरी की वज़ा से मेरा नुकसान हो गया
07:26अकील
07:27कहा थे तुम
07:28मैं तुम्हें ही डूण रहा था
07:30तुम आज मुझे नोटबुक देने वारे थे ना
07:32हाँ
07:33क्या हुआ तुम लोगों को दोस्तों
07:38क्या हुआ सरफराज
07:40वो नवेद ने बुग घड़ी में छोड़ा है
07:42और किसी ने भी कुछ नहीं लिख सके
07:44अब अकील को भी दादी के वहा जाना है
07:46मैं कब ले जाकर उने दोंगा
07:48और वो कब लिखेंगे
07:50यही सब परिशानी है
07:52परिशानीय तो बढ़नी ही थी
07:54तोकि तुम लोगों ने अपने मामला दुरुस्त नहीं रखे
07:57जिम्मेदारी के साथ लेंडें नहीं किये
07:59किसी ने किसी का बुग लिया
08:01तो किसी ने तीसरे को दे दिया
08:03अमानत का खयाल नहीं रखे
08:05अपनी जबान की पासदारी नहीं किये
08:08अब देखो तो हाँ हम में से किसी को फाइदा नहीं हुआ
08:11और अगर हो भी जाता और अगर हम लिख भी लेते
08:14तब भी जिनकी असल महनत है और जिनकी बुक है
08:17उन्हें तो बड़े नुकसाँ में डाल दिये हमने
08:20अपने गयर जिम्मेदाराना रोवये से
08:22यह बहुत ही गलत हुआ है
08:24पता है हमारे ऐसे किरदार की वजह से
08:27हम कई अच्छे मवाके अपौशन लिटीज से महरूम रह जाते हैं
08:32वो कैसे अबदुल बार्दी
08:34कई अच्छे मवाके अपॉर्चनिटी आने से पहले ही रोग दी जाती है
08:39सिर्फ और सिर्फ हमारे बुरे रवये और मामलात में बुरे होने की वजह से
08:44जो हमें पता ही नहीं चल पाता कि हमने कुछ अच्छी चीजे या अपॉर्चनिटी आने से पहले ही खो दिये
08:51लेकिन अपना क्या करूँ, मेरी मुश्किले तो बढ़ गई
08:55अब सब अपने घर जाते हैं
08:57और नवेर, सरफरास, तुम फॉरन बुकलाकर अकील को लोटाओ
09:01हाला कि तुम सभी ने पहले ही अकील को परिशानी में डाल दिये हो
09:06ठीक है अब्दिलबारी, सरफरास चलो जल्दी से
09:09और हम सभी हमेशा इस बात का बिलकुल ख्याल रखे
09:12कि किसी की दी हुई चीज यानि अमानत में किसी भी तरह की ख्यानत ना करे
09:17कुरान में और कई हदीसों में इससे सखती से रुकने को कहा गया है
09:21अमानत थी नोट बुक जो तुमने बगैर पुछे तीसरे को दे दिये
09:50फिर तुमने आज डोटाने का कमिटमेंट किये थे वो भी पूरा नहीं किये
09:54इससे कितना नुकसान हो जाता है
09:57किसी एक के कमिटमेंट पूरा ना करने से बाज वक्त कई लोगों को नुकसान और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है
10:04कई लोगों को?
10:05हाँ, क्योंकि जब कई लोग एक दुसरे से लेंदेन करते है
10:09तो सभी एक दुसरे के भरों से रहते है
10:11और किसी एक के commitment तोड़ने से सभी तकलीफ में आ जाते है
10:15सच में, हमने बहुत बड़ी गलती किये
10:18हमने नहीं, तुमने किये बड़ी गलती
10:21हाँ हाँ मैंने ही किया गलती अब चलो
10:24अब मेरा क्या होगा मैं कैसे कंप्लीट करूंगा
10:29मैं भी इसी भरोसे रुका हुआ था
10:31अब सब ही जाओ और जो हो सकता है जितना हो सकता है उतना कंप्लीट करो
10:36पीछे जो गरती किये हो उस पर उने से बहतर है आइंदा के लिए नसीहत लो
10:42और अब क्या बहतर हो सकता है उस पर गौर और काम शुरू कर दो
10:46तुम ठीक कहते हो अब दिलबारी
10:47हाँ, अब मैं भी जाता हूँ और इंतिजार करता हूँ
10:51देखें आप सबीने कि किसी को जब कोई कमिट्मेंट करते है
10:56और अपने दिये हुए वक्त पर उसे पूरा नहीं करते है
10:59तो कई लोगों का नुकसान होता है
11:02कुरान में मौमिनों की सिफ़त बताते हुए
11:04अल्ला सुभानावताला फर्माते है
11:06कि वो मतलब मौमिनों अपनी अमानतों और अपने एहद का लिहास रखते है
11:12यानि कहीं हुई बात को पूरा करते है
11:15भरोसा नहीं तोड़ते
11:16तो जब कभी हम किसी को कुछ लोटाने का वक्त बताए
11:20तो बताए हुए वक्त पर लोटा दे
11:22और जब कोई अमानत हमें दिया जाए
11:24यानि हम पर भरोसा किया जाए
11:26तो बगएर असल मालिकी इजादत से
11:29हम उस सामान को किसी तीसरे को ना दे दे
11:32और ना ही खुल सिमाल करे
11:33भले ही अच्छी नियत हो हमारी
11:36परना ये तो अमानत में खयानत सा होगा
11:38आँ सीखे अबदिलबारी के संग
11:40लाओ चल्दी से नवेद
11:48तुम बहुत देर करते हो
11:49तुम क्यों इस सरहा बात कर रहे हो अबदिलबारी
11:52मैं तो खेल रहा हूँ
11:54ठीक है ठीक है अब खेलो
11:55तुम्हारा खेल देखकर गुसा आ रहा है
11:57अब रहने भी तो अबदिलबारी
11:59तुम ही तो हमें समझाते होना
12:01गुसा करना ठीक नहीं
12:02सरफरास अब तुम भी मुझे बोल रहे हो
12:04देख नहीं रहे कैसे अजीब अंदास में खेल रही है नवेद
12:08अगर तुम इस तरह कहोगे
12:10तुम मुझे नहीं खेलना
12:11रे ऐसे कैसे नहीं खेलना
12:13जब तुम्हारी बैटिंग हो गई तो नहीं खेलोगे
12:16चलो पी बॉलिंग करो पहले
12:17नहीं करना मुझे
12:18अब मेरा दिल नहीं खेलने का
12:20ऐसे कैसे
12:21तुम्हें खेलना होगा
12:23अपनी डाय पूरी करो
12:24मैंने कहा मैं नहीं खेलूंगा
12:41तुम किस तरह खेल रहे हो, अब मैं नहीं खेलूँगा तुम्हारे साथ, मुझे बुलाने भी नहीं आना
12:47ठीक है जाओ, मैं भी नहीं आ रहा, मैं भी जा रहा हूँ
12:51एं, ये क्या हो गया इन दोनों को
12:54मैं जा रहा हूँ, तुम चल रहे हो, सर्फराज, हम दोनों वहाँ खेलेंगे
13:01मैं, मैं, वो मैं भी
13:03मैं सबज गया, अब कुछ कहने की जरूरत नहीं, जा रहा हूँ मैं अकेले
13:07क्या हुआ नवेद, क्यों तुम भी ऐसा कर रहे हो
13:13कुछ नहीं हुआ, जो हुआ सब कुछ तुमने भी देखे, अब मैं भी जा रहा हूँ
13:18रुको नमेद, देखो अब भी वक्त है, हम अब्दलबारी को बुला कर साथ खेलते हैं
13:24नहीं, मुझे नहीं खेलना, और आइंदा अब्दलबारी से नहीं मिलूँगा, वो घर भी आये तो आने नहीं दूँगा
13:31क्या हुआ अब्दलबारी, मैं दोर से देखते हुए आ रही हूँ, कुछ ठीक नहीं दिख रहा, कहो, सिफरास तुम बताओ, क्या हुआ
13:46आपा अब्दलबारी ने पहले शुरू किये, और फिर नवेद ने भी, और आखिर कार नवेद चले गए
13:52अब्दलबारी, हमें दूसरों का दिल नहीं दुखाना है, अगर गलती हो जाए, कोई बात हो जाए तो माफी मांग लेते, मामला खतम हो जाता और दोबारा खेल शुरू कर देते
14:02नहीं आपा, मैं क्यो मांग दा माफी
14:05देखो, अगर रास्ते में कोई चीज बता और रुकावट आ जाए, और जुक कर आगे बढ़ना रहे, तो जुकते हुए आगे बढ़ जाना चाहिए, वरना वही खड़े रह जाएंगे हम, कभी आगे नहीं जा पाएंगे
14:16हम उस रुकावट वाली चीज के उपर से चलांग लगा कर भी तो जा सकते हैं आगे
14:19बिला वजा उपर चड़कर चलांग लगाने से हम और बुरी तरह नीचे गिर सकते हैं, जिससे शायद हम खड़े भी न रह सके, बलके और नीचे हो जाएंगे, और शायद खुद को तकलीब भी पहुचा दे हम
14:31ठीक है आपा, मैं कोशिश करूँगा, लेकिन इसमें नवेत की भी गलती है
14:35अपने गलती का एतिराफ ना करते हुए बस कोई सुरत मामले को खतम करना, ये तकब्बर की निशानी है
14:42गलती का एतिराफ करो और सिंप्ली माफी माँग दो, सब ठीक हो जाएगा
14:46ठीक है आपा, मैं कोशिश करके देखता हूँ
14:49चलो फिर हम नवेत को ले आते हैं
14:51ये हुई ना बात, जल्दी लोटना, हमें घर जाना है फॉरण
14:55ठीक है आपा, अस्सलाम ओलेकूं
14:57अस्सलाम ओलेकूं आपा
14:58वालेकूं अस्सलाम
15:16ये तो अच्छा बच्चा है ये दुवाएं सिखता है
15:46ये तो अब्दुल्बारी है, ये तो अच्छा बच्चा है, ये दुआए सिखता है, अच्छी बाते बताता है।
16:07आओ सिखे अब्दुल्बारी के संग।
16:16अब्दुल्बारी कितनी गर्मी हो रही है।
16:19हाँ सरफरास, गर्मी का मौसम आ गया है, हमें ज्यादा से ज्यादा हाइडरेट रहना चाहिए।
16:26यानि ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए ना।
16:28हाँ, लेकिन एक साथ बहुत ज्यादा नहीं पीना है, हमें कुछ देर में, जैसे एक दो घंटे में पीना चाहिए, और जब ठके हुए हो, खेल खुद किये हो, तो थोड़ा रुक कर पीना चाहिए
16:41ऐसा क्यों अब्दुलबारी?
16:42जब हम खेलते हैं, या कोई activity, काम, exercise वगेरा करते हैं, तब हमारा बदन गरम होता है, blood circulation level high होता है, और ऐसे में अचानक ज्यादा पानी पीने से, बॉड़ी को नुकसान हो सकता है, इसी लिए बहुत प्यास लगी हो, तो बिलकुँ थोड़ा सा, एक दू सिप पिए, फिर र�
17:12नवेद, नवेद, नवेद, हाँ सरफराज, आ रहा हूँ, ठीक है, हमारी लिए पानी भी लेते आना, प्यास लगी है, मैं तो यहाँ बैट रहा हूँ, गर्मी के वज़ा से बहुत ठक गया हूँ, मैं भी बैट जाता हूँ, गर्मी तो मुझे भी लग रही है, ये लो अ�
17:42ये लो, अब्दलबावी, अल्हम्दुल्ल्ला, अल्ल्ला आपका शुकर है, वाकई में, कितना अच्छा लगता है ना पानी पीकर, प्यास मिट जाती है, तो सुकून होता है, हम्, इसलिए हमें अल्ल्ला का शुकर और उसकी तारीफ करना चाहिए, कि अल्ला ने हमें ये स�
18:12देखो, परिंदे भी प्यासे है, और शायद पानी की तलाश में है, हाँ, यहां अकसर आकर बैठते हैं ये चड़िये, और कबूतर भी, कव्वे भी तो आते है, वो इसलिए, क्योंकि यहां ज्यादा लोगों की चहल पहल नहीं है, और उन्हें च्छाओ के लिए पेड़ �
18:42लेकिन ये चरिंद परिंद तो बेजबान है, तो वो कैसे बोल पाएंगे, हाँ, लेकिन तुम क्या कहना चाते हो, अब्दिलबारी, क्यों ना हम इनके लिए एक जगा पानी फराम करें, ताकि इस गर्मी में ये चरिंद परिंद आकर पानी पिये, हाँ, ये तो अच्छा ह
19:12रखा हूँ पानी, जिसमें परिंदे आकर पानी पीते है, ठीक है, मैं अभी अम्मी से पूछ कर ले आता हूँ, आओ सर्फराज, हम जगा देखते है, वाओ, कितना मज़ा आता है ना, हमें को अच्छा काम करने में, ये देखो, ये जगा ठीक होगा ना, नहीं सर्फराज,
19:42वो सायदार जगा है, पानी थंडा रहेगा, ये देखो, मैंने ले आया पानी, और ये बर्तन भी, अम्मी ने दिये है, चलो हम जल्दी से इसे यहां रखते हैं, और देखते हैं कि परिंदे इसे कैसे पीते है, लाओ नवेद, बर्तन दो, ये लो, इसे हम यहां रख देते
20:12ये बर्तन तेड़ा होकर पानी गिर सकता है, हम इसके आजू-बाजू कुछ पत्थर रख देते हैं, जिससे ये बर्तन ही लेगा नहीं, अरे वाह, ये बात तो हमने सोचे ही नहीं, आइडिया भी अच्छा है, आओ वहां से कुछ पत्थर ले आते हैं, यही से ले लेते हैं �
20:42भाई, सही तरह से लग जाओ, अब यह अच्छा होगा, इंशाल्ला, लाओ अब पानी डालो इसमें, और ये भर गया, देखो तो उस चिडिया को, जैसे कि वो इंतिजार में है पानी पीने के लिए, हम, अब आओ हम यहां से हट जाते हैं, वरना वो डर के नहीं आएंगे,
21:12करमी के मौसम में रोज पानी डाल दिया करूंगा, आओ, थोड़ा पीछे हो जाओ, अब हिलना बन करो सेफरास, लो, अब मैं श्टैचू बन जाता हूँ, देखो, ये कित अच्छे लग रहे है पानी पीते हुए, चलो, अब हमें यहां नहीं रुकना है, ताकि दूसरे प
21:42क्या पढ़े तुमने, क्या ये किसी को पानी पिलाने की दूआ है, नहीं, ये दूआ उस वक्त पढ़ना चाहिए, जब भी हम कोई अच्छा अमल, नेकी वाला काम करे, अबादत करे, अच्छा, क्या पढ़ते हैं हम इस दूआ में, ए हमारे रब, हमारी इस खिदमत को कु�
22:12नेकी के काम, हर अल्ला की बताय तरीके पर किये हुए काम, ये सब इबादतों में शुमार होते हैं, तब तो ये दूआ हमें भी पढ़ाओ, मैं भी हर अच्छे काम के बाद इस दूआ को पढ़ा करूंगा, हम, पढ़ते रहना चाहिए, ये कुरान की आयत है, कुरान की आय
22:42आयत में पढ़ा होईए, और अक्षी की ना, इनका अनता समियू अल्लीम
23:12अब्दिल्बारी के संग
23:14देखते हैं आज आते हैं या नहीं अब्दिल्बारी?
23:26आएंगे! हो सकता है वाकई में कुछ जरूरी काम रहा होगा
23:30तभी तो अब्दिल्बारी नमाज के लिए हमारे साथ नहीं आरहे
23:33पता नहीं लेकिन वो एक हफ़ते से ऐसा ही कर रहे है
23:36कभी एक बात तो कभी दूसरी बात कहकर हमें भेज देते है
23:40और बाद में मस्जिद में भी नजर नहीं आए
23:42आ भी रहे है तो देर से आ रहे है
23:45वही तो ताजब की बात है
23:47अब्दिल्बारी ही तो हमें हमेशा अच्छे काम दूआ नमाज की तरफ बुलाते है
23:52और अब वो खुद दूर हो गया ऐसा लगता है
23:54असलाम वालेकुम अब्दिल्बारी, नमाज नहीं आ रहे
24:02वालेकुम असलाम
24:03वक्त तो देखो, तुम तो हमेशा वक्त से पहले नमाज के लिए आ जाया करते हो
24:08वो मैं बस तैयार ही हो रहा था
24:10तो अब चलो हमारे साथ
24:11तुम दोने जाओ, मैं बस अभी आता हूँ
24:14ठीक है, चलो सरफराज, हम नीचे इंतिसार करते है
24:18हाँ, ठीक है आता हूँ
24:20ये अब तक नहीं आए, पंद्रा मिनट बचे है
24:28हमें सुन्नत नमाजे भी पढ़ना है
24:30इसी तरह वो देर करते है आजकल
24:33पता नहीं क्या हो गया है अब्दुलबारी को
24:35अब्दुलबारी को क्या हुआ हुआ है, क्या कह रहे हो तुम सरफराज
24:39अब्दुलबारी कुछ दिनों से ठीक से टाइम पर नमाज नहीं आ रहे है
24:47हमें तो लगा जैसे वो बहाना करके हमें टाल रहे है
24:51अच्छा, ऐसी बात है, वो आगए अब्दुलबारी
24:54चलो नवेद, सरफराज, आपा हम नमाज पढ़कर आते है
24:57ठीक है, लेकिन अब्दुलबारी क्या बात है जो तुम आचकर नमाजों में कुताई कर रहे हो, देर से जा रहे हो
25:04आपा, मैं खुद भी परिशान हूँ इस बात को लेकर
25:07आचकर मुझे बहुत सुस्ती सा लग रहा है
25:10मैं चाहकर भी नमाजों और अबादतों में दिल नहीं लगा पा रहा
25:14अच्छा, इसमें परिशान नहीं होना चाहिए
25:17बलके तुम्हें कोशिश जारी रखना चाहिए
25:20कि तुम वख पर पाबंदी के साथ नमाज वदीगर अबादत करो
25:23मैं कोशिश भी करता हूँ
25:25लेकिन कुछ न कुछ होता है
25:27और मैं या तो देर हो जाता हूँ
25:29या मिस हो जाती है नमाज
25:31हम्हम, देखो
25:33ये उस वक्त होता है
25:34जब हमारा इमान का लेवल कम होता है
25:37और इमान कभी कभी उपर नीचे होता रहता है
25:40ऐसे में अगर हम सुसता है
25:42तो शेतान और जादा वस्वसा देता है
25:45ताकि हमारी गफलत आदत में तबदील हो जाए
25:48और हम आल्ला से दूर हो जाए
25:50शेतान ऐसे भी वस्वसा देता है आप़ा
25:52हम यह तो अच्छा है
25:54कि अब kidding बार को एशसाइस है इस बात का
25:56लेकिन इस इहसास के रहते रहते ही हमें जबरन खुद को अलला की तरफ रूजू करना है
26:02वरना धीरे धीरे यह इहसास भी खतम हो जाता है और फिर हमें फर्रुकश ही नहीं पड़ता
26:07ये तो बहुत ही बुरा होगा कि हम अल्ला से अपनी फराइज अबादतों से दूर हो जाए
26:13बिल्कुल हमें शैतान से उसके वस्वसों से लड़ना होगा
26:18और जब कभी ऐसा लगे कि हमारा इमान का लेवल नीचे जाते नजर आए
26:23तो कोशिशों के साथ साथ फॉरन अल्ला से खोब दूआ करना चाहिए
26:27ऐसे मैं भी दूआ करना चाहिए
26:30हाँ, मैं तुम्हें एक दूआ सिखाती हूँ
26:33इसे हर वक्त हर नमाज के बाद भी पढ़ा करो
26:36तब तो आप मुझे पढ़ाईए आपा
26:37कहीं मैं और ज्यादे सुस्ताने ना लग जाओं
26:40ये दूआ कुरान के आयतों में से है
26:42ये दूआ तो अम्मी ने मुझे याद कराए थे
26:52मुझे नहीं मालूम था इसे पढ़ना चाहिए
26:55इसके माइने क्या है आपा
26:57इस दूआ में हम कहते हैं
26:59कि ऐ हमारे रब हमें हिदायत देने के बाद
27:03यानि हमें सीधा रास्ता दिखाने के बाद
27:06हमारे दिलों को हिदायत से ना मोर दे
27:08मतलब सीधे और सच्चे रास्ते से दिलों को ना फेर दे
27:13और अपनी बारगा से हमें रहमत अता फर्बा
27:16बेशक्त तू बड़ा देने वाला है
27:18अच्छा तो हम इस जुआ में अल्ला से ये मांगते है
27:22कि वो हमें सीधे और सचे रासे पर ही रखे
27:25हमसे हिदायत चीन ना जाए
27:27तो क्या अल्ला खुद दी वी हिदायत हमसे वापस ले लेते है
27:30अल्ला सिर्फ उन्हें ही गुमराही पर छोड़ देता है
27:33जो अपनी सरकशी मतलब अपने गलत तरीकों पर कायम रहना चाहते है
27:38ऐसे लोग हकीकत में अपने से ही खुद को हिदायत से दूर कर लेते है
27:43तब तो मुझे इस जुआ को बार बार पढ़ना है
27:45ताकि अल्ला की मदद और रहम से मेरा दिल हिदायत पर कायम रह सके
27:49जज़ा कर लग है रापा
27:51अब हमें जल्दी जाना होगा
27:53जमाज शुरू होने को बहुत कम मुख्त बचे है
27:56ठीक है जाओ और पढ़ते रहो इस दूर को
27:58आओ नवेट सर्फरास
28:00तुमने बोले थे तुम्हें ये दूआ आती है
28:04मस्जिद पहुशने तक तुम हमें ये दूआ पढ़ा दो
28:07हम भी याद कर लेंगे
28:09ठीक है मेरे साथ पढ़ो
28:11रब्बना ला तुजिकुलूबना
28:17बाद इदहदैतना
28:21वहब लना मिल लदुनका रहमा
28:25इनका अनता वहब इनका अनता वहब