- 2 years ago
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Short filmTranscript
00:00शंकर जब पहली बार अपने गाव से शहर आया था तो एक मासूम सीधा साधा युवक था
00:05गाव के प्रतिष्टित गिरिजा पंडित जी का बड़ा बेटा जिसकी आखों में सपनों का संसार था और दिल में माता पिता की उम्मीदें
00:11गिरिजा पंडित ने उसे बड़े प्यार से पाल पोस कर पढ़ाई के लिए शहर भेजा था
00:16सोचते थे कि उनका बेटा एक दिन नाम कमाएगा परिवार का नाम रोशन करेगा
00:20लेकिन शहर की चकाचोंद, आजादी और नए माहौल ने शंकर को धीरे धीरे बदलना शुरू कर दिया
00:26कुछ ही महीनों में शंकर का पहनावा, चाल धाल और यहां तक की उसका बोलने का तरीका भी बदल गया
00:32उसने खुद को अब शेंकी कहलाना शुरू कर दिया था, उस नाम में शायद उसे कोई ठाट, कोई रुदबा महसूस होता था
00:39कॉलेज के कुछ शरारती और बिगड़े हुए लड़कों के गिरोह का नेता बन चुका था शेंकी
00:44चाहे कॉलेज में मारपीट करनी हो, किसी लड़की के पीछे लगना हो या गाली गलोज, शेंकी सबसे आगे रहता
00:50लड़कियों के सामने वो मासूमियत का नकाब ओर लेता और उन्हें अपने जाल में पसा लेता
00:55लेकिन फिर एक दिन सब बदल गया
00:57उनके बॉइज होस्टल के ठीक सामने एक नई लड़की का दाखिला हुआ, नाम था पिया
01:02उसके दोस्तों ने शेंकी को चुनौती दी, अगर इस लड़की को पटा कर दिखाओ, तो माने
01:07शेंकी ने पहले इस बात पर ध्यान नहीं दिया
01:10पर एक दिन जब उसने पिया की तस्वीर देखी, उसकी आँखे ठहर गई
01:14पिया अपसरासी खूबसूरत थी, दूद जैसी गोरी तवचा, कमर तक लहराते रेशमी बाल, बड़ी-बड़ी काजल लगी, आँखें और चेहरे पर एक अंकही मासूमियद
01:23पहली ही नजर में शेंकी को उससे लगाव हो गया, अब ये सिर्फ चुनौती नहीं, बलकि दिल की चाहत बन चुकी थी
01:29वो रोज सुबह शाम गल्स हॉस्टल के बाहर मंडराने लगा, लेकिन पिया से उसकी मुलाकात ना हो पाए
01:34फिर एक दिन किसी दोस्त ने बताया कि पिया सुबह प्रियदर्शिनी पाक में जौगं के लिए जाती है
01:40अगली ही सुबह शेंकी वहाँ पहुँच गया, दूर से जब उसने पिया को देखा, तो उसकी सुन्दरता फोटो से कहीं जादा थी
01:46वो उसके आसपास मंदराता रहा, कई बार जान बूच कर तकराने की कोशिश की, लेकिन पिया ने उसकी तरफ एक नजर तक नहीं डाली
01:53ये पहली लड़की थी जो उसके जाल में नहीं फसी थी
01:56शेंकी के अहम को गहरा आगात लगा, उसे गुस्सा आने लगा, बाद बाद पर चिर्चिरा हो जाता
02:02उसने पिया को भुलाने की कोशिश की, लेकिन वो उसके दिलो दिमाग में और भी ज्यादा चाने लगी
02:07और फिर एक शाम, शाम का हलका धुंधलका था जब शेंकी पार्क में टहल रहा था
02:12तभी पीछे से किसी मीठी, सुरीली आवाज ने उसके कदम रोग दिये
02:16हेलो, शेंकी, वो चौका, पीछे मुरने ही वाला था कि फिर वही आवाज आई, पीछे मत देखना
02:23मैं वही हूँ, जिसे पाने की तुम्हारी दिली ख्वाहिश थी
02:26शेंकी के होंट स्वता हिल गए, पिया
02:29तुम, वो हासी, क्या बात है, पैचानने में एकदम सही निकले
02:33पर ध्यान रखना, मुझे कभी पीछे मुर कर मत देखना
02:37तो आप मेरे पास आजाए, शेंकी ने कापती आवाज में कहा
02:40नहीं, ये मुम्किन नहीं, वो बोली
02:43मैं जान सकता हूँ क्यों, उसने आगरा किया
02:46जो ज्यादा सवाल करता है, उसे जवाब कभी नहीं मिलते
02:49आवाज का मीठापन अब धीमा हो चला था
02:51और तब ही, अचानक एक थंडी हथेली उसकी गर्दन पर आ पड़ी
02:55छोड़ो, प्लीज छोड़ो, वो गिरगिरा उठा
02:58हाथ की पकड़ धीली हुई और आवाज गायब हो गई
03:01शेंकी बुरी तरह डर गया था
03:03किसी तरह वो अपने कमरे तक पहुँचा और सीधे बिस्तर पर ओंधा गिर गया
03:07वो कई दिन पाक नहीं गया
03:09ना उसे भूक लगती, ना नीन दाती
03:11उसके चहरे पर खौफ साफ दिखाई देने लगा
03:14पर वो जिग्यासु था, कुछ दिनों बाद फिर उसी पाक में पहुच गया
03:18इस बार जैसे ही वो पहुचा, पीछे से वही आवाज आई
03:21आज बहुत दिन बाद आए
03:23तबियत ठीक है
03:24शेंकी काम पुठा
03:26शाबाश, पीछे नहीं मुड़े
03:28अब समझदार हो गए हो, वो बोली
03:30बीमार था, वो बमुश्किल बोला
03:33डरो मत, मैं इतनी बुरी नहीं हूँ
03:35चलो, आज तुम्हें अपनी शकल दिखाती हूँ
03:38सीधे चलते रहो, जब मैं कहूँ, तब रुख जाना
03:41शेंकी यंत्रवत चलता रहा
03:43कुछ ही देर में वो एक जील के पास पहुचा
03:45पानी में एक छवी उभी, पिया की, वही चहरा, वही मुस्कान
03:49वो मंत्र मुगध होकर देखता रहा
03:52लेकिन जब उसकी निगाह उस लड़की के पैरों पर गई, तो उसके होश उड़ गए
03:56उसके पैर उलते थे
03:57शेंकी कापने लगा, वो तो किसी इंसान के पीछे नहीं, एक आत्मा, शायद चुड़ैल के जाल में फंस चुका था
04:04क्या हुआ शेंकी, वो हसी
04:06का कुछ नहीं, उसने घबराते हुए कहा
04:09तुम्हें मेरी शकल पसंद नहीं आई?
04:11नहीं, बहुत सुंदर हो, वो बोला
04:14वो जोर से थाका मार कर हस पड़ी
04:16अब शेंकी पूरी तरह उस रहस्यमई शक्ती के जाल में था
04:20वो रातों को डर के मारे सो नहीं पाता
04:22खाने पीने से उसका मन उचाथ हो गया था
04:24उसके दोस्त परेशान थे कि शेंकी को क्या हो गया है
04:27एक रात जब वो बिस्तर पर बड़ड़ा रहा था
04:30पिया, छोड़ दो मुझे, प्लीज
04:33तो उसके रूमेट ने सुन लिया
04:34और अगले ही दिन शंकर के पिता को फोन कर बुला लिया
04:37अगले सप्ता, जब गिरिजा पंडित अचानक शहर आए
04:40और बेटे को देखा, तो उनका दिल काम उठा
04:42शेंकी उनसे लिप्ट कर फूट फूट कर रो पड़ा
04:45पिता जी, मुझे बचा लीजिए
04:47अब कोई गलत काम नहीं करूंगा
04:49बस आप मुझे इस पिया से छुड़ा दीजिए
04:51गिरिजा पंडित ने अपने कुछ पुराने
04:53जांकारों और पुलिस अधिकारियों से
04:55सलाह ली और एक योजना बनाए
04:57अगले दिन योजना के अनुसार
04:59शेंग की फिर पाक पहुँचा
05:00जल्द ही वही आवाज आय और उसे निर्देश देने लगी
05:03वो चलता रहा चुप चाप
05:05इस बार वो किसी वीरान खंडहर की ओर बढ़ रहा था
05:08हवाएं संग कर रही थी
05:09सूके पत्तों की चिर्चिराहट थी
05:11चमगादर कानों के पास से गुजर रहे थे
05:13दर का माहौल गहराता जा रहा था
05:16जैसे ही वो खंडहर में पहुचा
05:18वो रहस्यमई लड़की प्रकट हुई
05:20उसने शेंकी को जमीन पर गिराने की कोशिश की
05:23तभी शेंकी फुर्ती से पल्टा
05:25उस पल उसे पीछे मुड़ना ही था
05:27वो चुड़ेल चीखी
05:28तू पीछे कैसे मुड़ा
05:30मैं तेरा खून पी जाऊंगी
05:31लेकिन तभी आसपास से पुलिस और गिरिजा पंडित प्रकट हुए
05:35उन्होंने उस लड़की को गेर लिया
05:37लड़की चौक गई थी
05:38ये हमला अप्रत्याशित था
05:40उसे पकड़ लिया गया
05:41पूछ ताच में उसने बताया कि उसका नाम कभी पिया नहीं था
05:45उसके पिता एक ठेले वाले थे
05:47जिन्हें कुछ अमीर और रसूपदार लोगों ने पीट कर मार डाला और ठेला चीन लिया
05:51भूख, अपमान और तिरसकार से तूट कर उसने इस रूप में समाज से बदला लेना शुरू किया
05:56वो आत्मा नहीं थी पर एक अपरादी थी जिसने डर और ब्रम का ऐसा खेल रचा था कि कोई उसकी पहचान तक न कर सके
06:02उसके गिरोह में कई लोग थे
06:04मानव अंगों की तसक्री, लूट और हत्या के पीछे वो एक चालाक मास्ट माइन थी
06:09पुलिस को उसके जरिये कई नामी लोगों के नाम मिले जो समाज में प्रतिष्ठा की नकाब ओड़े घूम रहे थे
06:14शेंकी को इस पूरे घटनाकरम से गहरा धक्का लगा
06:18उसे अपनी गलती का एहसास हुआ
06:20उसने अपने पिता से वादा किया
06:22अब कोई फने खान बनने की कोशिश नहीं करूंगा पिता जी
06:25पढ़ने आया हूँ, अब पढ़ाई ही करूंगा
06:28गिरिजा पंडित ने बेटे को गले लगाया
06:31शेहर ने शंकर को बहुत कुछ सिखा दिया था
06:33खासकर यह की जूटी चमक के पीछे अंधेरा कितना गहरा हो सकता है
06:37चुडैल की सजा, भाग दो, शेहर के उस खंडहर में जो कुछ भी हुआ था
06:42वो केवल शेंकी के लिए ही नहीं, पूरे कॉलेज और शेहर के लिए एक संसनी बन गया था
06:46खबरें उड़ने लगी थी, गल्थ हॉस्टल के पास भूतनी पकड़ी गई
06:50कॉलेज स्टुडेंट को फसाने वाली आत्मा इंसान निकली
06:53मानवंगों की तसक्री में कॉलेज के रसूखदारों का नाम
06:56हर तरफ हलचल मच गई थी
06:58शेंकी अब शंकर बन चुका था
07:00जैसे उस रात उसके भीतर से एक भयन कर रहंकार और पाप का साया निकल गया हो
07:04पिता की गोद में सिर रखकर फूट फूट कर रोया था वो
07:08उसने अब कसम खाली थी
07:10न जूटा दिखावा न गुंड़ई और न किसी मासूम की भावनाओं से खेलना
07:14पर कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी
07:16असली डर तो अब शुरू होना था
07:18पुलिस ने जिस लड़की को पकड़ा था
07:21उसका नाम नीलिमा था
07:22मानसिक रूप से विक्षिप्थ लेकिन चालाक और खुनखार
07:25उसने कोर्ट में अपने गुना कबूल किये
07:28लूट, धोखा, मानव अंगों की तसक्री
07:30और कई मासूम लड़कों की हत्या
07:32पर जब उसे जेल भेजा गया
07:34तभी कुछ अजीब घटनाए शुरू होने लगी
07:36जेल में बंध होते ही वो चीखने लगी
07:38तुम लोग सोचते हो मैं अकेली थी
07:40मैंने जिन आत्माओं की मदद ली थी
07:42अब वो तुम्हारे पीछे आएंगी
07:44पहले तो सबने इसे पागलपन समझा
07:46पर अगले ही हफ़ते जेल के
07:48दो वॉर्डन रहस्यमई परिस्थितियों में मारे गए
07:50उनकी आँखे बाहर निकली हुई थी
07:53और चेहरों पर मौत से पहले की घोर पीडा
07:55जमी हुई थी
07:56उधर शंकर अब शेंकी नहीं अपने गाम लोट आया था
07:58लेकिन उसका मन बेचैन रहता
08:00रातों को अजीब सपने आते
08:02किसी जील के किनारे वही नीलिमा जैसी दिखने वाली आकृते उसे पुकार रही होती
08:06एक दिन उसने हिम्मत कर
08:08पंडित गिरिजा प्रसाद जी से सब कुछ कह दिया
08:10पंडित जी गहरे सोच में डूब गए
08:12बेटा तुमने एक इंसानी रूप में छिपे राक्षसी स्वरूप को रोका जरूर
08:16लेकिन उसका वास्ता अब सिर्फ इंसानी दुनिया से नहीं रहा
08:19तुम्हारे पाप तुम्हारी गलतियों ने भी किसी आत्मा को खीच लाया है
08:23किस आत्मा को शंकर काम उठा
08:26जिस जील के पानी में तुने उसका प्रतिबिम देखा था
08:29वो जील प्राचीन है
08:30कभी वहां एक साधवी तप करती थी
08:33उसे गाँ के कुछ लड़कों ने चल से मार डाला
08:36उसी दिन से वहां पर स्त्री आत्माओं की पुकार सुनाई देती है
08:39शायद नीलिमा ने उसी की आत्मा को बुलाया हो
08:41और अब वो तुझ से जुड़ गई है
08:43उस राच शंकर को फिर वही सपना आया
08:45पर इस बार वो सपना नहीं था
08:47जील के पास वो खुद को खड़ा देखता है
08:49नीलिमा नहीं अब कोई और थी
08:51सफेद साड़ी, बिखरे बाल, जील से निकली और उसके पास आखड़ी हुई
08:56तुने मेरे प्रतिबिम को देखा था
08:58पर मेरी सच्चाए अब देखेगा
09:00शंकर की आँखें खुली की खुली रह गई
09:02उसके सामने खड़ी स्थ्री के चेहरे का आदा हिस्सा जला हुआ था
09:05और आँखें गर्दों की तरह काली
09:07वो बोलती रही, नीलिमा तो मेरी प्यास बुझाने का जर्या थी
09:11अब तू खुद मेरी अगली आत्मा बनेगा
09:13शंकर उट बैठा, पसीने से भीगा हुआ
09:16लेकिन वो सपना नहीं था
09:18उसके गले पर नीले निशान थे
09:20जैसे किसी ने गला घुटने की कोशिश की हो
09:22अब वो समझ गया, कहानी नीलिमा पर खत्म नहीं हुई थी
09:25उसने जिस आत्मा को अपनी काली ताकत के लिए इस्तिमाल किया था
09:29अब वो आत्मा आजाद हो चुकी थी
09:31वो किसी को नहीं छोड़ती
09:32जिसने कभी भी स्त्रियों को अपमानित किया हो
09:35शंकर अब मदद मांगने पहुचा
09:37एक पुराने साधू के पास
09:38जो तंत्र मंत्र और प्रेद बाधा के विशेश अगय थे
09:41उन्होंने उसकी बात सुनी और कहा
09:43एक बार जो जील की आत्मा से जुड़ गया
09:45उसका पीछा वो जीवन भर नहीं छोड़ती
09:47जब तक कि वो आत्मा स्वयम न माने कि
09:50तुझे मुक्ती मिलनी चाहिए
09:51मैं क्या करूं?
09:53शंकर गिर-गिर आया
09:54तुझे वहीं जाना होगा
09:55जील के किनारे
09:56उस आत्मा से माफी मांगनी होगी
09:59अपनी हर गलती स्वीकारनी होगी
10:01लेकिन ध्यान रहे
10:02अगर तेरी आत्मा एक भी जूट बोलेगी
10:04तो तेरी मुक्ती नहीं होगी
10:06तेरा अंत्वही होगा
10:07अगली सुबह अंधेरा छटते ही
10:09शंकर अकेला उस जील की ओर निकला
10:11हाथ में गंगा जल
10:13माथे पर भस्म
10:14और मन में डर और पश्चाताब
10:15वो जील के किनारे बैठा
10:17हे देवी आत्मा
10:18जिसने यहां तब किया
10:19मैं तुम्हारी शरण में हूँ
10:21मैंने पाप किये
10:22स्त्रियों का अपमान किया
10:24और अपने एहम में लोगों का दिल दुखाया
10:26मैं एक शमा चाहता हूँ
10:27मुझे माफ कर दो
10:29अचानक जील का पानी लहराने लगा
10:31एक काली पर च्छाई पानी से निकली
10:33तेरा पश्चाताब सच्चा है
10:35पर तेरे जैसे और भी हैं
10:36जो मेरी पीडा के जिम्मेदार हैं
10:38क्या तु मेरी मदद करेगा उन्हें सजा दिलाने में
10:41शंकर ने सिर जुका कर कहा
10:43अगर मेरे प्रायश्चित का यही मार्ग है
10:45तो मैं तयार हूँ
10:46अब शंकर फिर शहर लोट आया
10:48लेकिन इस बार एक मिशन के साथ
10:49कॉलेज के उन लड़कों और शिक्षकों की पोल खोलने
10:52जो नीलिमा जैसे केसों के असली गुनगार थे
10:54उसने पुलिस, पत्रकारों और सोशल मीडिया की मदद ली
10:58धीरे धीरे सबके नाम उजागर होने लगे
11:00कॉलेज का चहरा बदल गया
11:02और कहते हैं जिस दिन आखरी दोशी को सजा मिली
11:05उसी राद जील का पानी एक बार फिर शांत हो गया
11:08उसके बाद शंकर के सपने भी शांत हो गए
11:10अब वो एक साधारन इंसान था
11:12लेकिन जिसने एक चुरेल एक आत्मा और अपने पापों से खुद को आजाद कर लिया था
11:16अंतिम भाग मुक्ती
11:18शंकर पहले शेंकी ने अपने पाप स्वीकार लिये थे
11:21जील किनारे आत्मा के सामने उसने रोते हुए कहा
11:25मैंने नीलिमा जैसे लोगों को बढ़ावा दिया
11:27पिया जैसी मासूम के साथ खेला
11:29अब मैं नहीं चाहता कि कोई और तुम्हारे जैसी पीरा से गुजरे
11:32जील की काली लहरे शान्त हुई
11:34उस भयावे आत्मा ने उसका चेहरा देखा और कहा
11:38तेरा पश्चात आप सच्चा है जा मुक्थ हुआ तू
11:41शंकर बेहोश होकर गिर गया
11:43जब आँख खुली तो सुबह हो चुकी थी
11:45जील के पानी में पहली बार सूरच की रोशनी जिल मिला रही थी
11:49शंकर उठकर मुस्कुराया पहली बार सच्चे मन से
11:52उस दिन के बाद वो फिर कभी डरावने सपनों में नहीं लोटा
11:55और जील अब वहाँ ना तो किसी स्थी की चीक सुनाई देती थी
11:59ना किसी चुडैल की परचाई