00:00आओ बेटी वो दोनों खाना कम बना रही है और लड़ जदा रही है मैं तुम्हें कह रही हूं मेरे काम में मदाख़त मत करो
00:16याल्ला ये नमक कहा चला गया
00:30वालिदा हाँ बाबा कर जिर्गा क्यों बुला रहे हैं कि आप जानती है हर कोई जानना चाहता है
00:36पता नहीं मेरी बेटी लेकिन उस्मान साब काफी दुनों से फिकर मन नजर आ रहे है तीवान में सब को पता चल जाएगा इंशाला इंशाला
00:48असलाम ऑलेकूम
01:00चोटे सिपाही तुम यहां क्या कर रहे हो हम लोहा काट रहे हैं ये दोनों जंगजू एस उमर में ही बहुत माहिर है
01:14वाह माशाला हर वक मुझसे घोडों के बारे में ही पूछते रहते हैं
01:19और आज आपको यहां जहमत देने का यही मकसद है कि आपसे सीख सके
01:23माशाला तो फिर तुरकों के हमसफर यानी घोडों के बारे में जानना चाहते हो
01:29तो फिर आजाओ मेरे साथ, मैं तुम दोनों को सब कुछ बताऊंगा, आजाओ, आजाओ जवानो
01:38हाँ, वाँ, माशालला, माशालला, घोड़ा जहाद का साथ ही है, और हवा की तेजी से फताह की तरफ दोड़ता है
01:51तो सेपाही इसके बगार मुकमल हो, हर्गिस नहीं
01:55तो क्या, इन में से आपका कोई दोस्त है?
01:58हाँ, जिसे तुम देख रहे हो
01:59सारे घोड़े हिने आ रहे हैं, ये क्यों खामोश है?
02:07ये भी हिने आता है, मगर दिल से, इसकी आँखे देखो ज़रा
02:12बहुत कुछ चानता है लेकिन, इतराता या शोर नहीं मचाता
02:17लेकिन, अगर तुम बोलोगे तो, जुरूर सुनेगा
02:21कैसे सुनेगे ये मेरी बात?
02:23तुम्हारा नाम क्या है, बताओ जरा
02:25मलिक शाह अल्प
02:26माशालला मलिक शाह अल्प, घोड़ से सुनो
02:29हम घोड़े का दिल पढ़ लिया करते हैं, आँखों से समझ लेते हैं
02:34कान खड़े हुए, या तुम उठी हुई तो नहीं
02:37अगर ये देखना सीख जाओगे, तो ये जवाब जरूर देगा
02:41फिर तुम इससे बातें कर सकोगे
02:43इससे गोर से देखो मलिक शाह
02:47अभी ये घोड़ा ठका हुआ लग रहा है, इसकी सफाई करेंगे
02:52हाँ, अच्छा सवाल है अलपरसलान, अगर सफाई ना की तो इसके बाल उलच जाएंगे
03:01जल्द खराब हो जाएंगी और सफर नहीं कर पाएगा
03:04और अगर घोड़े की पुष्ट पर जरब लगाओगे, तो ना ये तुम्हें देखेगा और ना सुनेगा
03:10चलो अब गर्दन से शुरू करेंगे और फिर पीट फिर दाएं और बाएं और सबसे आहम चीज़ इसकी ये मस्बूट टांगे हैं इन्हें भी साफ करना होगा
03:29और हाँ, अगर पीछे से पकड़ोगे तो पेट पर लाब पड़ेगी
03:35गंदुमी जावास का सुफैद घोड़ा, जावास का वफदार साथी होता है
03:56वो उसका हमराज भी बनेगा और चंग से मूँ नहीं मोडेगा
04:01हम जहाद के लिए रवाना होते हैं तो अपने दिल एक दूसरे से बांट लेते हैं
04:07सर जुका कर पार्प मानेगा अगर उसकी लगाम नहीं केंचुके
04:11अपनी नालों से पत्थर तोड़ देगा और अपने बाल अपने चहरे पर डाल लेगा
04:18प्यार करोगे तो सितारा बन जाएगा
04:20इसकी खानदानी आँख में हिलाल उतर आएगा
04:23हिलाल चमकेगा इसकी खानदानी आँख में
04:48तुमने तो मेरा असली बाजनतीनी की तरह इस्तक्बाल का इतमाम किया है कलाडियोस
05:04मैं अपने दोस्तों को हमेशे सराखों पर बिठाता हूँ
05:07खास तोर पे खुफिया मालूमात लाने वालों को
05:10बैटो
05:18हम तुम्हारे साथ अपनी तक्दीर चोड़ रहे है
05:29मैं तेजधार दल्वार हूँ
05:33और तुम बेमिसाल निजा
05:36हम दोनों का एक ही रास्ता है
05:39पूरा यखीन है मुझे
05:41ये बताओ हमारे लिए क्या मालूमात लेकर आए हो
05:46उस्मान ने दीवान का कहा है
05:48खिते के सब सरदारान को
05:53कबीले मदू किया है
05:55तुम अच्छे से जानते हो
05:59उस्मान के इस दीवान के बाद
06:02उस दुफान का रुख तुम्हारी तरफ होगा
06:06तुर तुम एक काम करो
06:09दिवान में होने वाले फैसलों का पता लगाओ
06:12हाँ जरूर
06:13जरूर करूँगा मैं ऐसा
06:16हम दोनों का मकसद एक ही है क्लाडियोस
06:19कि उस उस्मान को मिलकर तहस नहस कर दें
06:24लेकिन बदले में तुम्हें मुझे सोना चांदी
06:28और ग्यूरिक का एलाका देना होगा ग्लाडियोस
06:32अपना कबीला में वही ठैराओंगा
06:35तुम्हारा कबीला
06:37यखीन है ना आप अपने भाई की कबीले की बात कर रहे हैं
06:41या अपने भाई से कबीला चीनने वाले है
06:48बेतरीन
06:52तो तै हो गया ग्लाडियोस
06:57बिलकुल हो गया
06:59उस्मान की सरदारी खतम होने पर
07:01हम आपको हर चीज़ से नमास देंगे
07:04इन्शालला
07:05तो लीजिए
07:27आप कुछ परिशान लग रहे हैं मुझे
07:29कोई बड़ा मसला है क्या उस्मान
07:31क्या दीवान इसी वज़े से बुलवाया है
07:34जिमंदार ही भारी है
07:36बहुत भारी है
07:38सफर तवील है बाला
07:41मगर
07:42जब तुम्हारे पास आता हूँ
07:45तुम्हें जब देखता हूँ मैं
07:47तो भूल जाता हूँ सबी
07:48खुद को बेहतर महसूस करता हूँ
07:50काश मैं इससे ज़ादा आपके काम आ सकती
07:54जानते हैं आज
07:56हमारा एक और खौप पुरा हो गया उस्मान
07:59क्या बताओ
08:00आपकी बेटियां सुबा से बावची खाने में हैं
08:03आपके लिए खाना तयार कर रही है
08:05क्या वाकई में?
08:07मेरे लिए बाला
08:08और किसके लिए बनाएंगी?
08:10अपने बाबा के लिए तो बनाएंगी खाना
08:11मुकाबला हो रहा है दोनों का
08:13सच में बहुत खुश हूँ आज
08:16इमकान नहीं था जन चीज़ों का वो सब बारी बारी पूरा हो रहा है
08:23ये तुम ही कहा करती थी कि सबर का फल मीठा होता है
08:29तुम्हें याद है ये सब क्या?
08:32हाँ बिल्कुल
08:33कहा था मैंने
08:36अगर आप वहां होते उस्मान
08:39देखते कि मैंने आज कितना शुकर अदा किया
08:41वो दोनों एक साथ हैं
08:43हाँ जो खाब था सच हो गया वो
08:46तुमने मेरी मुखालिफत की थी
08:48तुम्हें जखम की वज़ा से मुझसे मूँ मोड गई थी
08:51याद है तुम्हें
08:52मैंने तुमसे कहा था
08:54तुम्हें याद होगा कि हमारी उलाद होगी
08:56और नसल आगे बढ़े की अमाला
08:58अब देखो जरा
08:59हमारे लिए खाना त्यार कर रही है
09:01शुकर है अल्ला का
09:04नसीब में था उस्मान
09:06ऐसा ही है
09:09सिपाहियों
09:18आज के बाद हर शक्त सोच समच कर कदम उठाए
09:21सिपाहियों
09:27मैं तुम सब को बता रहा हूँ
09:29तुर्गुद गाजी तुम लोगों की हड़ी पसली एक कर देंगे
09:32और अपने अपने बिस्तर भूल जाओ
09:35अब वो तुम लोगों को सुबा शाम मश कर आएंगे
09:37सुबा शाम मश कर आएंगे
09:39अससलाम ओलेकुम
09:45तुर्गुद गाजी
09:49बहुत शुक्रिया
09:50तुर्गुद रखिये सब
09:53या लाँ
09:58सिपाहियों
10:03क्या आप सब जानते हैं कि आप लोगों को शिकस्त क्यूं ही
10:07क्यूंकि आप लोगों के दर्मियान भायचारे का रिष्टा कमजोर था
10:11किसी भाई की वज़े से शिकस्त होती है
10:14और किसी भाई की वज़े से हम वतायाब होते हैं
10:20अब मैं आप सब को दो भाईयों का किस्सा सुनाऊंगा
10:25जो बहदर और आजीम तरीन सिपाहियों में से एक थे
10:29उस वक्त मैंने ये कहानी
10:32सुलिमान शाह से सुनी थी अल्ला उनकी मख़ुरत करे
10:36ये किस्सा कोई आम किस्सा नहीं है
10:42और नहीं जूटे किसी किस्सम का
10:44अगर जैसे किस्सा कहते हैं मगर
10:46ये बिलकुल सच है
10:48सालों पहले
10:52दुनिया की इंतहाई दाकतवर
10:54और अजीम रियास्त की बुनियाद रखने वाले
10:57सल्जू की सल्तनत काइन करने वाले
10:59दो भाई कुजरे है
11:00एक सियास्त के इल्म में माहिर थे
11:04सल्तानों के सल्तान जनाब अर्तुल गासी
11:07और दूसरे उनके बड़े भाई
11:09सरदारों के सरदार
11:11जो जन्ग के मैदान में दुश्मनों को
11:13पचाड कर रख दिया करते थे
11:16चायर सरदार
11:17जानते हो उस वक्त
11:20मट्टी खून अलूद हुआ करती थी
11:23और समीम धर्रा उठती थी
11:27हर कोई एक दूसरे की
11:29जान का दुश्मन हुआ करता था
11:30जब हर कोई
11:33अपनी बगा के लिए जंग लड़ा था
11:36तब इन भाईों का मकसद
11:38सल्जू की रियासत की बगा और तरक्की थी
11:40जो इन दोनों भाईों की
11:43जिंदगी से वापस्ता होकर रह गए थी
11:44सुलिमान शाह की वफाद के बाद
11:47चायर सरदार ने
11:49एक बहुत ही आहम फैसला लिया
11:52एक ऐसा फैसला जिसकी मिसाल आज तक काहिम है
11:55कैसा फैसला तुरक्त घाजी
11:58सल्टनत के तख्त पर चायर सरदार का हक था
12:04लेकिन उनोंने तख्त की सिम्धारी
12:07अर्थरुल सरदार को सौपती
12:10वो तो ठीक है
12:13लेकिन उनोंने अपने नफस पर कैसे काबू पाया
12:15यानि अपनी अक्तिदार की हवाज को कैसे संबाला
12:18चायर सरदार
12:19इंतहाई अकलमंद शक्स थे
12:22बैदान जंग में किसी की हिम्मत नहीं थी
12:25कि उनके सामने को तलवार उठाए
12:28मुकाबले में आने वाला कोई शक्स टिक नहीं पाता था
12:32अर्थरुल सरदार
12:33माहिर थे रियासती उमूर के
12:36साहिब शजाद
12:38और इल्म रियासत के माहिर सुल्तान थे
12:40अर्थरुल सरदार और चायर सरदार
12:43उनमें कभी अना नहीं देखी गई
12:46अर्तुरुल सर्दार की अकल
12:48और चायर सर्दार की तलवार की बतुलत फतायाब होते चले गए
12:52घुड़े दोड़ाते चले गए
12:55जब जंग शुरू होती तो तूफान उट खड़ा होता
13:00सलजूग सल्तनत के तीर जब आस्मान का रोख करते
13:05तो सूरज भी छुट जाया करता
13:08चारो तरफ अंधेरा ही अंधेरा चाजाता
13:13तुरकिस्तान से निकल कर शाहीनों की तरह आगे ही आगे बढ़ते चले गए
13:17दुश्मनों के सीनों पर वार करते चले गए
13:22ऐह माशा अलाः
13:25उन दोनों भाईयों का भाई चारा बेमिसाल था
13:29दोनों ने एक दूसरे से लड़ने के बजाए इत्धाद का फैसला किया
13:33और इत्धाद भी ऐसा जो कई सदीयों तक आने वाली नसलों तक बरकरार रहा
13:40एक भाई रियास्त की अकल बना और दूसरा रियास्त के लिए इनसाफ की तलवार
13:46दोनों ने साथ मिलकर आलम इसलाम के पर्चम को बुलंद किया
13:51और एक अजीम उशान रियास्त काइम की उन्होंने
13:55वो अपने मकसद और रियासत की वका के लिए
14:00खुद को कुर्बान कर देने से पीसे नहीं अटे
14:03अर्थुरल सरदार जब अपने रियासत में एक आली शान माशरा तश्कील दे रहे थे
14:08तब चाइड सरदार खुरासान में
14:11लशकर की सरबराही कर रहे थे
14:14इस तरह एक दूसरे के शाना बशाना खड़े होकर
14:18इस अजीम रियासत को काईम किया उन्होंने
14:22माशाला
14:24माशाला
14:25माशाला
14:26इस किस्से से आपको ये सबक मिलता है
14:30कि हमेशा मुद्ध होकर एक दूसरे का साथ दो
14:35जिहाद सर्फ और सर्फ मैदान जंग में नहीं किया जाता
14:39वताह की वज़ा यक जान और दो कालिब बनने वाले
14:43कभी भी अना का शिकार ना होने वाले
14:46जावास हुआ करते है
14:51बहुत शुक्रिया तुर्गुद खाजी
15:02ए अलावदीन गोंजा
15:04तरदार
15:05तुम्हारी बहने कहा है
15:06मत पूछे बाबा दोनों अभी आ जाएंगी
15:11जी वो बस अभी आती ही होंगी
15:17चलो ठीक है बैठते है
15:21बिस्मिल्लाहरामानराहीम
15:26देखो मैंने कहा था ना कहा हमें देर हो गई
15:32बाबा दस्तरखान पर बैठ चुके हैं
15:34मेरी बचा से देर नहीं होई
15:35इस देर की बचा तुम हो फात्मा
15:38बाबा देखे मैंने अब के लिए क्या बनाया है
15:42है खुश्बू तो अच्छी नहीं आ रही
15:46बाबा भी ये खा कर देखे जो मैंने बनाया है
15:49अच्छा लग रहा है ना
15:53खा कर पता चलेगा बाला देख रही हो हमारी बेठियां मेरे लिए खाना बना कर लाई हैं
15:59खा कर पता चलेगा बाला देख रही हो हमारी बेठियां मेरे लिए खाना बना कर लाई है जी हां माशाला मेरी बेठियों माशाल्दा
16:17खा कर देखता हूं खामगा तो फैसला कर पाऊंगा मैं छोड़ो से छोड़ों
16:28मैं और आलकन देखते हैं से
16:30अरे रुख जा रुख जा बैठ जाओ
16:33कहीं नहीं जाओगी तुम दोनों मेरे पास बैठी रहोगी बैठ जाओ
16:36तो चलिए मिलकर खाएंगे मिलकर खाएंगे
16:41देख रही हैं ना आप गोंजा खादू
16:44ये हमें पहले ही भूल चुके हैं
16:48सबर करो अलाओदीन जलो मत अपनी बेहनों से
16:50मेरी बेटियों ने बहुत मेहनत की है
16:53आप पीश में कुछ नहीं बोलेंगे अलाओदीन
16:55वालिदा क्या आप भी अब मुझसे ऐसा कहेंगे
16:58कोई कुछ मत कहें मेरी बेटियों के बार में
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