00:00नौसो चार फ्लाट में रहते थे उनके साथ में उनके पिता जी रहते थे पिता जी अभी भी है पिता जी का उमर शायर 95 और 96 हो सकता है और सबरवाल साब का 48-49 लेकिन सुमित सबरवाल साब बहुत silent किसम के आदमी थे सबसे अच्छी तरह से बात करते हैं बहुत विनम्र थे
00:30वो सब दुख के सदमे में है, हम ज्यादा तो कुछ नहीं बोल सकते, उनका एक लड़का ऐसा मने सुना कि बैंगलोर से रात को देड़ दो बज़े उनको मिलने आया, रात में हमारे यहां साड़े गारा बज़े तक पुलिस वाली गाड़ी वगरे थी, बाखी तो अभी तो क
01:00अभी सामने कैसा करना क्या करना अभी उसका कुछ भी पता नहीं है, तो ऐसा बता है न मैंने कि एक लड़का जो है, शायद वो बैंगलोर से रात को देड़ बज़े आया, और लड़की जो आने वाली थी, वो दो बज़े रात को आएंगी, लड़की नहीं, उनकी नहीं, �