00:00सफेद साडी वाली औरत
00:01एक सची आत्मा की कहानी
00:04रात के करीब ढहाई बज रहे
00:07नाइट शिफ्ट करने के बाद मैं पैदल आफिस से घर की ओर लोट रहा था
00:12वाहन ना होने के कारण बीते एक टेड़ साल से
00:16महानगर की सूनी, बियावान और लंबी सडकें हमसाया बनकर मेरे साथ चलती रही है
00:22बापरे, इतनी लंबी-लंबी और भूतिया सडकें खत्म होने का नाम ही नहीं लेती
00:30कहीं घंगोर अंधेरा, तो कहीं जिलमिलाती स्ट्रीट लाइट की जूटी सुरक्षा
00:35मई की बेरहम गर्मी, माथे से बहता पसीना और तब ही अचानक चलने लगी एक ठंडी हवा
00:45उसके जोंकों ने जैसे मेरे अंदर कुछ जगा दिया
00:49मैं गुन-गुनाता हुआ आगे बढ़ी रहा था कि आँखें एक जगा ठिठक गई
00:54वो थी, एक अधेड महिला, कंधे पर बैग, पैरों के पास ब्रीफ केस, सफेद साडी में लिप्टी, सिर को बड़े सलीके से ढंके हुए
01:08उसकी आँखें बड़ी-बड़ी और शांत पर उन में कुछ था, कुछ ऐसा जिसे देखकर मेरी रीड में सिहरन दोड़ गई
01:19वो मुझे लगातार देखती रही, बिना पलक जपकाए, बिना डरे, उसके होटों पर हल्की सी मुसकान थी
01:30मगर वो मुसकान आम नहीं थी, उसमें एक रहस्यमई गरमाहट और एक ठंडी सिहरन दोनों थी
01:38मैं खुद जहेब गया, नजरें चुराईं और तेज कदमों से उसे पार कर गया, लेकिन जाने क्यों, दिल में एक अजीब सी हल चल हुई, जैसे उसने मेरी आत्मा को छू लिया हो, कुछ दूर चल कर मैं दूसरी सरक पर पहुँचा,
02:08मैं काप गया, शरीर पसीने से भीग गया, आँखे चौड़ी और दिल धरकन से भी तेज, ये कैसे आवे, एक ही रास्ता था, कोई गाड़ी नहीं गई, वो मुझे पार करके आगे कैसे पहुच गई, अब उसकी मुसकान थोड़ी और चौड़ी थी, और उसके चेहरे की स�
02:38पड़ा, तेज, बहुत तेज, जैसे जिन्दगी और मौत के बीच की दोड़ हो, सीधे घर पहुचा, और दर्वाजा बंद करके, देर तक कापता रहा, अगले दिन, नूर चचा ने सुना, तो बोले, बेटा, तु बूचर खाने वाली सड़क की बात कर रहा है न, वो और
03:08खड़ी थी, एक ट्रक ने कुचल दिया, सिर शरीर से अलग हो गया था, लेकिन कहते हैं, उसकी आत्मा अब भी बस का इंतजार करती है, उसी पोजिशन में, वही बैग, वही ब्रीफ केस, लेकिन डर मत बेटा, वो भली रू है, किसी को कुछ नहीं कहती, बस देखती है, ज
03:38नहीं पाया, हर बार आखे बंद करता, तो वही चहरा सामने आ जाता, वही सफेद सारी, वही बड़ी बड़ी आँखे, वही मुसकान, एक रात घर में नींद टूटी, प्यास लगी थी, किचन में गया तो देखा, गैस के पास वही महिला खड़ी थी, सफेद सारी, बाल ख
04:08मगर आवाज में एक तर्द, एक याचना, मैं चीख पड़ा, उस रात के बाद मैं बिमार हो गया, आज भी कभी कभी रात को उस रास्ते से निकलता हूँ, तो लगता है, कोई मेरे कंधे पर हाथ रख रहा है, एक ठंडी सांस, और वो मुसकान, वो औरत, बस एक सवाल लेक
04:38लेकिन उस रात की परचाई अब भी उसके जहन में तारी थी, आफिस का हर कोना, हर आवाज अब उसे डराने लगी थी, कभी खिरकी से बाहर देखता, तो लगता कहीं वो महिला अब भी खड़ी है, कभी दफ्तर की लिफ्ट में अकेले उतरता, तो लगता कोई साथ आ गया
05:08नहीं चोड़ रहा था, एक रात वो बहुत ठक गया था, कैब भी नहीं मिल रही थी, बारिश की वजह से हर और सन्नाटा था, मन में हलचल थी, अब क्या करूं, दोबारा उस सडक से, लेकिन अब डर से लड़ने का वक्त था, उसने खुद को समझाया, कितना भागूंगा,
05:38पुछ सडी हुई मास किसी, बूचर खाने की तरफ से आती थी ये गंद, राहुल ने धीमे धीने कदम बढ़ाए, लेकिन फिर वही एहसास, पीछे किसी की मौजूद की, उसने धीरे से पलट कर देखा, कोई नहीं था, सडक खाली थी, पर तभी उसके कंधे पर किसी ने हा
06:08हिला, पर अब कुछ बदल गया था, सफेद साडी अब गीली और शरीर से चिक्की हुई थी, उसके कपड़े उसके शरीर के हर कव को उभार रहे थे, उसके होट अब और भी लाल थे, उसकी सासे गर्म थी, लेकिन उसकी छोण बर्व जैसी ठंडी, उसने धीरे से कहा, इतन
06:38सुसकी, उसके नाखूनों से पानी तपक रहा था, पर छूते ही तवचा जैसे सुन न हो गए, तुम्हें मेरी कहानी नहीं जाननी, क्या, क्या चाहती हूँ मुझसे, बस मेरे साथ चलो, उस महिला ने हाथ पकर लिया, और अचानक ही माहौल बदल गया, चारो और धुंद,
07:08मेरे बस पकड़नी थी, मेरा बेटा मेरा इंतजार कर रहा था, लेकिन ट्रक, ट्रक रुबदा नहीं, राहूल जैसे ट्रांस में चला गया, उसने देखा, वो महिला सडक के किनारे बैठी है, पास में ब्रीफ केस और एक दूद की बोतर, और फिर एक ट्रक पूरे वेग से
07:38आखो से आसू बहने लेवी, मैं, मैं तुम्हारी मदद कैसे करूँ, मेरे बेटे को मेरा इंतजार अब भी है, बस जाकर उसे बता दो, कि मैं अब नहीं आओगी, उसे माफ कर देना, राहूल कापते हाथों से उसका ब्रीफ केस उठाता है, लेकिन ब्रीफ केस के अंदर क�
08:0817 माई 2007, राहूल समझ चुका था, ये आत्मा फसी हुई थी, उसे मुक्त करने के लिए उस बेटे तक ये चीज़ें पहुचानी होंगी, राहूल अगले दिन उस पते पर पहुँचा जो टिकेट पर लिखा था, दर्वाजा खुला, एक अदेर आदमी बाहर आया, उसकी आ
08:38कि शहर ना आये, लेकिन वो आई, और लोट कर कभी नहीं आई, राहूल ने ब्रीफ केस थमाया, गुडिया और खट उसके हाथ में दिये, वो आदमी जमीन पर बैट गया, और तब ही, एक जोंका आया, बहुत तेज हवा चली, और ऐसा लगा, मानो किसी ने धन्यवाद कहा
09:08पर अब उसमें डर नहीं, एक मुक्ता आत्मा की शान्ती होती है,