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  • 1 year ago

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00:00अचेर जी बात ऐसी हो रही है कि इर्षा तो मुझे होती है पर इर्षा मुझे आपसे ही होती है
00:05मैं दौर लगा रहा हूं तुम मुझे देखते रहो तुम और पीछे होते जाओगे
00:10कुछ समय बाद मैं दिखना भी बंदो जाओगा
00:13मैं एक उचाई पर पहुँच गया तुम उससे आगे पूछ रहे हो बताओ बताओ तुमने वो छलांग कैसे मारी
00:20नीचे से अचानक उड़ करके तुम यहां कैसे आगे
00:23तो जो भी काम कर रहे है उसने और बहतर होके दिखाओ न रोज रोज रोज रोज रोज थोड़ा थोड़ा इंक्रिमेंटली कोई चमतकार नहीं होता फिर क्या रहा हूं कोई नाट की यह घटना नहीं होती
00:36अर्जुन कौन थे
00:38सरुषेष्ट धनोज़दर थे ना तब उन्हें गीता मिली आप कुछ तो सरुषेष्ट हो जाओ
00:45एक्सेलेंस उतकृष्टता माने रोज क्रमशह बहतर होना
00:52अग्सक्राइब नमस्कार आचर जी इर्शा तो मुझे होती है पर इर्शा मुझे आपसे ही होती है आपसे माने अभी जो आचारे प्रशान थे उनसे नहीं जो आप बहुत बार गीता सत्रों में कहते हूँ कि मैं
01:08मैं 27 की उमर में सब छोड़ के मैंने अपना अध्वेत प्रशान फांडेशन की स्तापना कर लीती है सब कुछ तो मैं खुद को देखता हूँ तो मैं किसी भी बात में उतकृष्ट नहीं हूँ ना मैं ठीक से हिंदी बोल पाता हूँ कभी ना ठीक से इंग्रजी अंग्लि�
01:38मैं थोड़ी तुम्हें देख रहा हूँ मैं दौड लगा रहा हूँ तुम्हें देखते रहो तुम और पीछे होते जाओगे
01:50कुछ समय बाद में दिखना भी बंदो जाओंगा
01:52और बात यह आवस्था कि आज की नहीं है यह अपना चुनाव होता है कि और बहतर होते जाना है कि नहीं होते जाना है तो आपको तै करना है ना
02:09मुझे क्या देख रहो मेरा पूरा दिन अपने आपको चुनावती देने में बीचता है और बहतर होने में बीचता है
02:14मैं अतीद की और देखता हूं मुझे सौथ पांच सौ हजार बातें दिखाई देती हैं जिन में नजाने अभी कितना
02:25दोश है उनको और ठीक करके शुद्ध करके बहतर बनाया जा सकता है
02:32और वो रोज हो रहा है कोई ऐसा थोड़ी है कि वो 27 साल पहले ही हो रहा था और
02:39या 27 के उमर में ही हो रहा था और 27 मैंने क्या छोड़ चाड़ दिया था क्या छोड़ चाड़ चाड़ दिया था
02:45मैं और बहतर दिशा में चल पड़ा था कॉर्पोरेट से बहतर कुछ दिखाई दिया था मैंने वो लिक करा छोड़ा क्या है
02:56आज भी मुझे जो हो रहा है उससे बहतर जो हो सकता है
03:01उसको करता हूँ उसकी बढ़ता हूँ वही तब भी करा था जो तब करा था वही आज भी कर रहा हूँ
03:07पर हमारी आदत होती है चीजों को जीवनों को नाटकी ये बना कर देखने की
03:16हम नौटंकी पसंद लोग है न
03:18तो कुछ ड्रामिटिक न भी हो तो भी उसको हम
03:23ड्रामिटिक बना देना चाहते हैं कुछ नहीं था
03:26लगातार एक आदमी कदम दर कदम चल रहा है
03:32और चलते चलते चलते चलते वो पहाड में एक उचाई पर पहुँच गया
03:38तो मुझसे आगे पूछ रहे हो बताओ बताओ तुमने वो चलांग कैसे मारी
03:41नीचे से अचानक उड़ करके तुम यहां कैसे आ गए
03:45और वो अभी भी सीड़ी धर सीड़ी ही उपर चढ़ रहा है
03:48पर आप बार-बार यह बोलते हो नहीं सब को छोड़ चाड़ करके
03:55अचानक चीज़ को ऐसा बना दो कि लगे फिल्मी है विल्कुल
03:59क्या फिल्मी है एक सीड़ी चढ़ना फिल्मी बात है बहुत नाटकिये बात है
04:04बहुत बड़ी बात है और वो सीड़ी जो तब चढ़ रहा था वही आज भी चढ़ रहा हूँ
04:11उसमें क्या ऐसा है कि कहते हो कि बहुत बड़ा हो गया कुछ
04:18कुछ नहीं बहुत बड़ा हो गया
04:19ये तो अपना दिली प्यार होता है श्रिष्ठता के प्रते
04:24अगर जो आप हो उससे बहतर कुछ संभव है तो क्यों ना हुआ जाए
04:32क्यों ना हुआ जाए
04:41मैंने 40 की उमर में टेनिस खेलना शुरू करा
04:45जिस कोच के साथ मैं आमतोर पर खेलता हूँ
04:49मुझे अभी बीच में लगा कि उसके साथ ठहराव आ गया
04:52एक स्तर से उपर बात नहीं बढ़ रही है
04:54तो आज अभी आपके पास आने से पहले
04:58एक दूसरे कोच के साथ बैक हेंड कर रहा था
05:01वही तो खुद को चनौती देने की बात है
05:06आप देखते रहोगे देखते रहोगे
05:09दो साल बाद आपको पता चलेगा कि मैं टूर्नमेंट खेल रहा हूँ
05:12वेटरेंस टूर्नमेंट फिर बोलना मैं देख रहा हूँ
05:15आप देख क्यों रहो आप भी आगे बढ़ो मुझे क्यों देख रहे हो
05:18देख लिया ना कि क्या है अपना काम करो ना
05:22मुझे पकड़ कर क्या करोगे वैसे ही बना दोगे कि ये हैं
05:27अच्छे आदमी है या महान आदमी है गुरुदेव है इनकी पूजा करो
05:30तुम्हें अपनी जिन्दगी जीनिये न?
05:34होगा कोई बहुत उचा
05:35उसको बोलो अपनी उचाईए अपने जेब में रखे
05:37तुम्हें तो अपनी जिन्दगी से और अपने दुख से मतलब होना चाहिए न?
05:43कोई आकर के बोले कि मैं हमाले पे गया था
05:45और वहाँ पर मुझे भगवान का वरदान मिल गया
05:48और अब मैं ऐसा हूँ, मैं वैसा हूँ
05:49मैंने इतनी उमर में घर छोड़ दिया
05:51मैंने ये कर दिया, मेरे पास चमतकारिक सिद्धियां है
05:54जो कुछ है
05:56अपनी जेब में रखो
05:58हमारे पास हमारी जिन्देगी है, हमारा दुख है
06:02और हमें बहतर होना है
06:05हमें बहतर होने
06:08के लिए अगर तुम रोशनी दिखा सकते हो
06:12होसला दिखा सकते हो
06:14तो तो ठीक है
06:15नहीं तो हमारे उपर चड़ो मत अपनी महानता दिखा दिखा के
06:19पर ये
06:25चमतकार की नहीं बात होती है
06:27बहुत छोटी छोटी चीज़ों की बात होती है
06:29बहुत छोटी चीज़े
06:30ये एक जीने का तरीका है
06:34कि जहां कहीं भी मैं जो कुछ भी कर रहा हूं
06:36या तो करूंगा नहीं या करूंगा तो उसमें
06:38लगातार और बहतर और बहतर होता रहूँगा
06:40या तो छोड़ी दो
06:44और किसी चीज में दिल लगाया है तो उसमें बहतर हो जाओ
06:50अहंकार क्या है?
06:55इकसीमा
06:56है ना?
06:58इकसीमा, बार बार हम बोलते हैं
07:01अपूर्णता का नाम है अहंकार
07:03अपूर्णता, अपूर्णता माने समझ रहे हो
07:04वो जहां कहीं भी होता है
07:07पूरा कभी कुछ नहीं होता
07:09वो पेपर देने जाएगा
07:11पूरा नहीं कर पाएगा
07:13उसे कोई काम दो वो पूरा नहीं कर पाएगा
07:16वैवहारिक अर्थ पर
07:17ये आशे है
07:19अहंकार की अपूर्णता से
07:21उसका सब कुछ अपूर्ण ही अपूर्ण होता है
07:23उसको बोलो अपनी to do list दिखाओ
07:24कितना काम कर दी अपूर्ण है यह अपूर्ण है
07:26अपूर्ण
07:28एक incompleteness
07:30अच्छा आपने रिष्टे दिखाओ कैसे हैं
07:33सब रिष्टे अपूर्ण है किसी भी रिष्टे में
07:35पूर्णता कुछ नहीं है
07:36यह है हंकार
07:38अच्छा क्या करते हो अच्छा पेंटिंग करते हो
07:42कैसी है तुमारी पेंटिंग
07:43आधी अधूरी जिन्दगी
07:45आधी अधूरी यह हंकार है
07:47हंकार की अपूर्णता कोई बस concept नहीं है
07:50वो जिन्दगी में हर चीज में दिखाई देता है जो हंकार का विशे है
07:54उसके हर विशे से उसके संबंद में तुम्हें
07:57incompleteness ही दिखाई देगी
07:59complete करो न अब जिन्दगी में आपके एक विशे अगर आ गया है
08:06कोई भी विशे आ गया है टेनिस विशे आ गया है
08:08तो अपनी वहाँ पर जो अपूर्णता है और जो सीमा है
08:14मैं उसको क्यों रोज चुनोती दूँ
08:16मैं टेनिस के माध्यम से अहंकार को चुनोती दे रहा हूँ
08:20क्योंकि अहंकार वो जो किसी छिछोरी सतह पर भी
08:30खुद को संतुष्ट देना जानता है
08:33कि दस मेंसे चार नंबर भी आ रहे हैं तो खुद को बोल देगा ठीक तो है अब इतनी उमर हो गई इससे बहतर क्या खेरोगे नहीं
08:43और बहतर करना है और बहतर करना है बात टेनिस की या गिटार की या नौकरी की या जो भी आप काम करते हैं उसकी नहीं है बात उसकी नहीं है बात उसकाम के मापध्यम से हंकार को चनौती देने की है
09:01क्योंकि हंकार वो जो अधूरेपन में भी
09:04अपने को सांतों ना दे लेता है कि ठीक है अधूरे हैं तो भी रहां रुख जाओ
09:10अधूरेपन में सुरक्षा तो है नहीं
09:14आग जलनी चाहिए न कल क्या बोल रहे थे श्री कृष्ण
09:20कि असलिए आदमी वो है जो निरगनी नहीं है आग होनी चाहिए
09:26आग किसके खिलाफ क्या जला दोगे रैकेट जला दोगे क्या जलाना है
09:33अपनी कमजोरी को जलाना है और रोज का काम होता है
09:38बैठे हो अपनी कमजूरियां जानते हो जिस भी क्षेत्र में हो पहले तो क्षेत्र सही चुनो फालतू चुनना नहीं चाहिए
09:48किसी भी काम में फालतू हाँ डालना क्यों है बेकार में दुनिया में दस अरब तरह है के काम हो सकते मैं होना छूँ हूँ ही क्यों
09:56पर जिस काम को छुआ है उसमें उत्कृष्टता चाहिए
10:00गीता को आप अध्यात्म की तरह देखते हो
10:08कोई ये भी कह सकता है
10:10एक्सिलेंट लिट्रेचर है
10:12तो कृष्ण माने एक्सिलेंस
10:15उनके लिए हैं नहीं कृष्ण जिनको
10:19दसमें से दो नंबर पर भी चैन मिल जाता है
10:23दसमें से दो नंबर पर आग लग जानी चाहिए
10:25निठले हैं
10:31पुछले हैं
10:33फिसड़ी हैं
10:35दोःड़ी हैं
10:38रोका है, टोका है, हवा का जोका है
10:45सब ठीक ही है
10:49क्या करने जा रहे हैं, गीता पढ़ने जा रहे हैं
10:53भक
10:53वेवेका नन्ने ऐसों के लिए ही कहा था
10:59वो एक आया था उनके पास ऐसा ही, हवा का जोका
11:01गिरता पढ़ता कहीं से आ गया वो
11:05गिरता पढ़ता नहीं, उड़ता
11:06बोला, गीता पढ़ेंगे
11:09कुछ हो रहा होगा शाम का समय होगा
11:12ये जितने सब थे
11:15मॉंक्स होते थे फुटबॉल वोगेरा अपना शाम को
11:17तो बोलते जाब पहले तुम
11:19फुटबॉल खेलो
11:21खुड़ा तकड़े हो जाओ, खाओ पीओ, शरीर बनाओ
11:24उसके बाद तुम्हें गीता बताएंगे
11:25लोग भैरत में बोल रहे हैं ये क्या कर रहे हो
11:30तुम फुटबॉल को गीता से उपर रख रहे हो
11:32उन्हों को बात नहीं समझ में आई
11:34हर खेतर में आदमी जो फिसड़ी हो
11:42पिछड़ा हो
11:44और अपने पिछड़े पन को चुनौती भी न दे रहा हो
11:49अर्जुन कौन थे?
11:55सरोशेष्ट धनुज़दर थे ना
11:56तब उन्हें गीता मिली
11:57आप कुछ तो सरोशेष्ट हो जाओ
11:59कुछ नहीं साधारन दुकान करते हैं
12:06कलर्क हैं या कहीं मैनेजर हैं
12:08क्या करते हो?
12:12कुछ बदल रहे हो?
12:15बताओ आज के दिन
12:16तुमने कौन सी चीज सीखी?
12:18कौन से पुराने काम में बहतर हुए?
12:21बताओ?
12:21नहीं कुछ नहीं जैसे चलता था
12:23दस साल पहले वैसे आज भी चला रहे हो
12:24बहुत से लोग तो ऐसे होते हैं कि
12:36वो जो काम कर रहे हैं उस काम से सम्मंधित
12:38नई टेक्नोलिजी भी आजाए बाजार में
12:40तो वो पुराने ही तरीके से चलना चाहते हैं
12:44वेते नई वाली चीज हमें पसंद नहीं है
12:50ग्रणियां होती है
12:51उन्हें पता भी चल जाए कि अब
12:54रिसर्च हो चुकी है कि भारत में
12:56जो खाना बनता रहा है पारंपर एक तौर से
12:59वो रिदय रोगों का
13:01और मदुमेह का बड़ा कारण है
13:02तो रसोई में तुम्हारी मा जो बनाती थी
13:05वो बनाना तुम बंद करो
13:06वो वही बनाएंगी
13:08मैं यह नहीं कहा रहा कि
13:12रसोई में exotic recipes होनी चाहिए
13:14पर भाई आप अगर
13:16खाना ही बनाती हो
13:18और आपको पता चल रहा है
13:20कि आप जो बनाती हो वो सेहत के लिए
13:22गड़बड है तो कम से कम उसको बहतर बनाओ
13:24ना
13:24वो भी नहीं बदलना होता
13:27किसी भी काम में
13:30शेष्ठता लानी ही नहीं है
13:32तो क्या होगा बस
13:33मजीरा बजाओगे क्या करोगे
13:35कृष्ण मिल जाएंगे
13:37पर लोकधर्म माने यही
13:41लोकधर्म तुमसे पूछते ही नहीं
13:42कि तुम किस आखात के आदमी हो
13:44बैठ जाओ तुम मजीरा बजाओ
13:46अब बाबा जी का
13:49चर्णामरित पियो
13:51तो मोक्ष पा जाओगे
13:53अच्छा बताओ
13:58अब वही युद्धस्थल है
14:00और एक वो
14:03धाई रुपय वाला प्यादा
14:05वो जो उल्टे कटोरे
14:08यहाँ पे हेलमेट की तरह लगा के लड़ते थे स्यानिक
14:10बी आर चोपड़ा की महा भारत में
14:13ऐसा एक आता
14:14और श्री कृष्ण बैठे हुए है
14:18पार्थ सार्थी
14:19और उनसे कहता एक्स्क्यूस मी
14:21मुझे एक एक एक्जिस्टेंशियल डाउट आ गया है
14:24मेरा फूफा और जीजा
14:29और सौतेला भाई उस तरफ है
14:32मैं उससे क्यों लड़ू
14:34वही स्थित जो अरजुन
14:36तो श्री कृष्ण क्या उसे गीता सुनाते
14:39यह भग यहां से
14:43कटो रहा
14:56कटो रहे हैं हम कोई बात नहीं
14:59हम सभी किसी ने किसी अर्थ में कटो रहे हैं
15:01पर कम से कम तरक्की तो करो
15:03रोजाना
15:04चलो ठीक है बेहोशी थी
15:07परिस्थितियां थी सैयोग थे
15:09परवरिश थी जो भी था
15:11प्यादे ही रहे गए कटोरे ही रहे गए
15:15पर अब गीता आ रही है
15:17कम से कम अब कटोरे मत रहो
15:19रोज थोड़ा थोड़ा थोड़ा
15:21थोड़ा और बहतर होते चलो
15:22और काम बड़ी
15:28खास बात होती है भाई
15:29काम दिन में बहुत
15:3210 घंटे 15 पंदरा घंटे करते हो
15:34काम में अपने जो
15:36बहतर नहीं हो रहा
15:37उसको तो गीता एकदम ही नहीं मिलने की
15:40काम में लपडगंजू
15:45और चहिए भगवत गीता
15:51ऐसे नहीं होता और सबके लिए नहीं है
15:53यही तो साहब भी बता गए थे क्या
15:55हाथ सुमरनी पेट कतरनी पढ़त भगवत गीता
15:58तो कौलिफिकेशन पातरता
16:02की शर्त तो लगी हुई है और आज से नहीं पहले से ही लगी हुई है
16:05मैं आपके सामने
16:15आकर के इसलिए अपना दिल खोल कर रख पाता हूँ
16:20क्योंकि पूरे दिन मैंने संघर्ष करा होता है
16:22मैं कुरुक्षेत्र में ही हूँ
16:25मैं दिन भर जाकर के कहीं अयाशियां काटूँ
16:29तो मैं यहां आकर के कुछ नहीं बोल पाऊंगा
16:33मैं दिन भर जाकर के इधर उधर सर पटकता हूँ
16:38और जिन युद्धों में हूँ उन सब का तो मैं आपसे खुलासा भी नहीं कर सकता
16:44क्योंकि धीरे धीरे करके आप उस स्थिति में आ रहे हो
16:47जहां आप समझ पाऊगे कि जीवन संघर्ष का अर्थ क्या होता है
16:50धीरे धीरे आ रहे हो धीरे धीरे समझोगे
16:52पर अभी के लिए इतना ही जान लो कि अभी यहां से निकलूँगा
16:58तब से लेकर के अगले सत्र में आपके सामने आऊँगा तब तक
17:02मैं लड़ूँगा ही और चूकि मैं खुद लड़ता हूँ
17:08इसी लिए लड़ाई के मैदान में जो गीता कही गई उसे मैं आप तक ला पाता हूँ
17:18मैं यहां से जाकर लड़ जाता हूँ आप यहां से जाकर पड़ जाते हो
17:22तेरा मेरा मनवा कैसे एक होई रहे
17:26कैसे एक होई रहे
17:31गीता क्या है कोई स्कूल का सिल्बस है क्या है ऐसे ही बस एक किताब भर है वो जीने का एक प्रज्युलित तरीका है वो जीने का एक नया सुन्दर केंद्र है जीने का तो जिन्दगी में कुछ बहतर करना पड़ेगा न जिन्दगी ऐसे ही पकड़े रहोगे जासी है वैसे ही
18:01डाक के तीन पाथ
18:06बहुत सारे मुहावर है
18:08मुल्ला की दोड़ मस्जिद तक
18:09कि जैसा चल रहा था
18:11फ्रॉम पोस्ट टु पिलर
18:12वैसे ही चल रहा है
18:13सब वैसे ही चल रहा है और एक के बाद एक अध्याय पूरे हो गया
18:17छटा भी शुरू हो गया इधर रूमी भी आ गए है
18:19यह सब अपना बीतता जा रहा है
18:21सब बीतता जा रहा है
18:23हम वैसे के वैसे ही खड़े हुए है
18:24तुम कब बीतोगे
18:27हमें तुमारे गुजरने
18:29कब बड़ी बेसबरी से इंतजार है
18:32खुश खबरी सुनाओ
18:33क्या
18:34जुन्नूलाल
18:37गुजर गए
18:39अरे गुजर मत जाना
18:43बड़ा खटका लगा रहता है
18:47गुजरने से मतलब है नया हो जाना
18:52कुछ कर्मत लेना
19:03बहतर होने के लिए क्या करोगे
19:13तुम बहतर होने के लिए
19:15अब
19:17अटलांटिक समुदर तो तैर के पार करोगे नहीं
19:21या करोगे
19:21उसी में तो बहतर होगे ना
19:26जो अभी तुमने चुन रखा है
19:27उसमें दो तरह की बहतरी होती है
19:29कि जो चुन रखा है वो चुनाऊ ही बहतर कर लो
19:32कि काम ही धंका चुना
19:33और दूसरा अगर धंका काम चुन रखा है
19:36तो उसमें और शेष्टता दिख रहा हो
19:38योगह करमसु कौशलम
19:40यही तो दो बाते होती है
19:43बहतर काम चुनूंगा
19:45और उस बहतर काम को बहतर तरीके से करूँगा
19:48बस यही दो बाते होती है
19:49तो जो भी काम कर रहे है उसमें और बहतर होके दिखाओ
19:53न रोज रोज रोज रोज रोज रोज थोड़ा थोड़ा थोड़ा इंक्रिमेंटली
19:56कोई चमतकार नहीं होता फिर कहा रहा हूँ
19:57कोई नाट की ये घटना नहीं होती
19:59ये भी जो हम सुनते हैं
20:02कि बुद्ध जा रहे थे और वो वहाँ पे
20:03युवा महुत्सव था
20:06और उनको एक बुढ़ा आदमी, बीमार आदमी, मरा आदमी
20:10ये सब दिख गए
20:11और अचानक उन्होंने कहा
20:13कि क्या मैं भी मरूँगा
20:15उनका सार्थी बोलता है, हां महराज मरूगा
20:17ओ अचानक वहाँ चलेगा, ऐसा नहीं हुआता है तेहासिक रूप से
20:20वो भी एक क्रमबध घटना थी
20:25बुद्ध ने भी एक प्रक्रिया के तहत
20:29वानप्रस्थ लिया था
20:32अचानक से नहीं, जो हमें बताते हैं न, रातो रातो वहाँ पत्नी बच्चे को छोड़के ऐसा नहीं था
20:41काव्य में ऐसा कहना ठीक है, और कविता में ऐसा ही कहा गया है, और बड़ा नाट किये लगता है, बड़ा प्रभावी लगता है
20:47पर एतिहासिक रूप से, जो हुआ था, वो इससे भिन्न था, वो कम नाट किये था
20:52उसमें एक प्रॉसेस था, ग्राजूल, प्रॉसेस ओफ डिसेंगेजमेंट
20:56रोज रोज रोज वो भी और बहतर होते जा रहे थे
21:06और बहतर होने की ही प्रक्रिया में एक दिन उनने कहा
21:08कि मुझे अपने आपको अपनी बहतरी के लिए एक और बहतर जगह देनी है
21:13और बहतर जगह उन्होंने क्या पाई?
21:15बोले ये जो इनसानों की पूरी बस्ती है इससे बाहर जो है
21:20वो मेरी बहतरी के लिए बहतर जगह है तो ये धीरे धीरे धीरे धीरे रोज रोज
21:25तो आप अगर विदान्त के साथ है इस्टावकर के उपनिशत के साथ गीता के साथ
21:34तो ये थोड़ी है कि बस आपको भजन कीरतन करना है और श्लोक रट लिये हैं
21:43मुझे आपकी जिंदगी देखनी है भाई
21:44जिंदगी दिखाओ
21:50मजबूत
21:57सख्त आदमी चाहिए
21:59नहीं हमने कल क्या गाता
22:02सख्त आदमी चाहिए
22:05ये थोड़ी की कमसिन कली बनके पहले की तरह घूम रही हो
22:09जितनी कलीया होती है सब बूटो तले रौण दी जाती है यही तो होता है
22:13और कली का क्या होता है
22:14कली को यहाँ भी लगा लो
22:16तो चार घंटे बाद उसका क्या होना है
22:18अब एक एक बहतर होने के लिए एक जगह बता देता हूं कम्यूनिटी
22:29कम्यूनिटी बहतरी कर लो कि वहाँ पर वर्तनी गलत मत लिखा करो
22:34हूं होता है हूं नहीं होता
22:38मैं होता है में नहीं होता
22:42और देवनागरी में लिख रहे हो
22:46वहाँ पांच अच्छर देवनागरी में होंगे और फिर
22:51लिखना होगा कि इस तरह तो आई एस तरह
22:56अरे यार, कितनी जल्दी में हो
23:00कौन सी तुम्हारी फ्लाइट छूट रही है
23:04कि तुम देख भी नहीं पा रहे है
23:06कि तुमने क्या पोस्ट कर दिया
23:07नजाने कितनों की तो एडिटिंग बात में मैं करता हूँ
23:09क्योंकि मेरी आखों खटकता है
23:11और कुछ नहीं है
23:13संदेर की बात है कि यार
23:15लिख रहे हो तो तमीज से लिखो
23:16कई होगे लिखेंगे इतना बड़ा लिख देंगे
23:20उस में paragraph का break नहीं देंगे
23:23यह सब भेतर होने की चीज़े इतना सारा लिख दिया है
23:25paragraph छोड़ दो
23:27उसमें बीच में कहीं पर भी पूर्ण विराम भी नहीं है
23:30फुल स्टाप भी नहीं है, कौमा भी नहीं है
23:32और जो उन्होंने ऐसा पोस्ट करा नोंने बीजी बीजी में देखा होगा
23:36कि वो फिर दो घंटे बाद चमतकारिक रूप से
23:39एकदम सुन्दर हो जाता है, सुवेवस्थित हो जाता है
23:41वो कौन कर रहा है?
23:46आपका सेवक
23:47जब नजर पड़ गई, जब समय हुआ तो कर दिया
23:50क्योंकि नहीं अच्छा लगता, कुछ भी गलत क्यों पड़ा हुआ है
23:53जो चीज जैसी उसको वैसा होना चाहिए न
23:56इसी को नियाय कहते है, इसी को सम्यक्ता कहते है
24:00जिस चीज की जो जगह है, जो रूप है, जो स्थान है, उसको दो
24:06ये बहुत हो गया
24:11अधजगा जीवन
24:14मीडियोक्रिटी
24:17हर बात में औसत पना, हर जगह है पिछड़े हुए, बहुत हो गया, खत्म करो
24:26उठो, खुद को चुनौती दो, कुछ नहीं रखा है तुम्हारे अतीत में और पुराने धर्रों में कि उनसे चिपके बैठे हो
24:33सब पीछे छोड़ो
24:36समझदारी और मजबूती को गले लगाओ
24:42अलग इंसान बनो
24:45आरी बात समझ में
24:56और उल्टे पुल्टे टुच्चों की संगति बिलकुल छोड़ दो
25:02ये इतने महापुरुष्कियों जी करके गए है
25:05हमारे लिए
25:07ताकि हम उनकी जिन्दगी से सीखें
25:13ताकि हमें भी
25:16ये भरोसा रहे कि अगर एक आदमी वैसे जी सकता है तो
25:21हम भी वैसे जी सकते हैं
25:26और रातो रात किसी चमतकार की उमीद मत करो
25:30एक्सिलेंस उतकृष्टता माने
25:34रोज क्रमशह बहतर होना
25:37ऐसे ऐसे ऐसे ठीक है

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