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  • 1 year ago

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00:00:00योग जो है वो भारत का सबसे बड़ा योगदान है पूरे विश्व के लिए
00:00:03इंडियास बिगेस्ट कॉन्ट्रिबूशन तो दे वर्ल्ड इस योग
00:00:05अब ये पढ़ते ही मेरे मंद में सबसे बहला सवाल ये आ रहा था कि ठीक है योगदान से लोग भावनामा भैकर बड़ी बड़ी बात कर रहे हैं
00:00:11पर मैं आप से पूछना चाहता हूँ क्या सच में ऐसा है नहीं ऐसा नहीं है
00:00:14लेकिन साथ ही साथ ये बात पूरे तरह से गलत भी नहीं है अगर हम योग का सही अर्थ समझ ले एक बैठ जाएगा और उसके पीछे दस बीज या पचास और बैठ जाएंगे और वो सब के सब क्या कर रहे हैं योगा कर रहे हैं और कहा जाएगा कि सेलिबरेटिंग योगा
00:00:44अचार जी नमस्ते आज योग दिवस है तो देश दुनिया की जितने वे समझार है हर जगा पर योग को लेकर ही चडचा हो रही है तो मैं काफी चीज़े पढ़ रहा था तो वहाँ पर एक चीज मुझे बार-बार पढ़ने को मुल रही थी जहां पर लोग कह रहे थे कि य
00:01:14आपनवा में भैकर बड़ी बाद कर रहे हैं पर मैं आपसे पूचना चाहता हूं क्या सच में ऐसा है नहीं है योक विश्व को भारत का ना सबसे बढ़ा योगदान है ना सबसे बढ़ा निर्यात है लेकिन साथ ही साथ ये बात पूरे तरह से गलत भी नहीं है अगर हम यो
00:01:44जो भारत का सबसे बड़ा योगदान है विश्व को योग नहीं है
00:01:47तो मैं उस योग की बात कर रहा हूँ जिसे आज कल योग माना जाता है
00:01:52और जिसके लिए योग दिवस कल मनाया जाएगा
00:02:00कल योग दिवस किस योग के उत्सव में उपलक्षे में मनाया जाएगा
00:02:09अब आएंगे कि लोग शारीरिक मुद्राओं में अपनी तस्वीरें डाल रहे हैं
00:02:20गुरु लोग और बड़े-बड़े पदाधिकारी, राष्पती, प्रधानमंत्री लोग भारत में भी दुनिया भर से
00:02:29योग दिवस को अपना समर्थन दर्शा रहे हैं किस तरह से कि बैठ गए हैं पालती मार कर कोई आसन कोई मुद्रा तो ये जो शारीरिक क्रियाएं इनको योग माना गया है
00:02:52और जो आप योग दिवस मनाते हो वो वास्तव में इन शारीरिक क्रियाओं का उत्सव है आप इन शारीरिक क्रियाओं को महिमा मंदित करने के लिए गौरवानवित करने के लिए योग दिवस मनाते हो ठीक है ना बिलकुल जमीनी बात वो बात इसी से प्रमानित हो जाती है
00:03:22तो अगर यह योगा है तो योग भारत का न तो बड़ा योगदान है और न बड़ा निर्यात निर्यात व्यापार के अर्थ में नहीं जब कहा जाता है
00:03:49अगर योग का असली अर्थ समझो तो है भी अब बात यहां से थोड़ी गूड होगी लेकिन साथ ही साथ मज़दार होगी
00:04:13यहां समझ ना है वहां पूछ लेना मुझे रोग देना नहीं तो मैं दाराप्रवा पूलते ही जाओंगा
00:04:21देखो वेदों से उठते छह दर्शन है और चूंकि वह सब वेदों को मानते हैं इसलिए उनको आस्तिक दर्शन कहते हैं
00:04:36उनमें वेदान्त प्रमुख है वेदान्त क्यों प्रमुख है जो बाकी के पाज दर्शन वह वेदों के प्रते बस आस्ता रखते हैं और वेदान्त वेदों का अंग ही है
00:04:52तो वेदों का जो केंद्रिय दर्शन है वो सबसे ज्यादा अस्पष्टता से और सबसे ज्यादा निकटता से
00:05:03सबसे ज्यादा केंद्रियता से मार्मिकता से वो वेदान्त में परिलक्षित होता है
00:05:09वेदान्त जैसे वेदों का हृदय है ठीक है अब आपका कपड़ा हो सकता है और आपका हृदय हो सकता है इन दोनों में आपके लिए ज्यादा आवश्यक क्या है और आपके ज्यादा निकट क्या है आपका हृदय है ना तो वेदों के जो सबसे निकट है वो वेदान्त है बा
00:05:39तो योग का भी वास्तविक अर्थ क्या है? इसको आपको वेदान्त के प्रकाश में ही समझना पड़ेगा.
00:05:50योग का वास्तविक अर्थ है मन का आत्मा से मिलन. ठीक है? आत्मा क्या है? मन की शुद्धतम अवस्था को आत्मा कहते हैं.
00:06:06और उसी शुद्धतम अवस्था को उच्चतम भी माना गया है. जो उच्चतम है वो तुम्हारे भीतर है. तुम्हारा ही मानने दे साफ हो जाए तो उससे उची कोई चीज हो नहीं सकते है.
00:06:19तो पूछ रहते हैं भारत का सबसे बड़ा योगदान क्या है विश्व को? वो आत्मा है. वो आत्मा है. और चुकि आत्मा भारत का सबसे बड़ा योगदान है विश्व को, इसलिए मन का आत्मा से मिलन जिसको योग कहते हैं. और जब वो मिलन जब नहीं हो पाता तो उसी
00:06:49पर योग बड़ी बात इसलिए हो गया क्योंकि सरुप्रत्थम आत्मा बड़ी चीज है, आत्मा बड़ी नहीं सबसे बड़ी है, सर्वोच है, तो भारत से विश्व को क्या मिला, बहुत कुछ मिला होगा, लेकिन जो एक केंद्रिये चीज मिली है, उसको कहते हैं आत्मा, आत
00:07:19बहुत विचार के बाहर की बात है, दिमाग में नाने वाली बात है, भारत ने, विदान्त ने, कह दिया आत्मा ही सत्य है, और सबसे उपर की चीज है, और जो सबसे उपर की चीज है, वो तुम्हारे भीतर है, उसको पाने के लिए तुम्हें कहीं भागने की जरूरत नहीं
00:07:49मन की शुचिता का इनाम आत्मा है चितना जब इतनी निर्मल हो जाए कि वो सब गुण दोशों के अतीद चली जाए उसको आत्मा कहते है तो आपको इस दुनिया को बहुत महत्व देने की ज़रूरत ही नहीं है क्योंकि जो उची से उची चीज़ सकती है वो तो आपके मन के �
00:08:19यह बात ऐसी है कि अगर आपको कोई बजाने वाला ना हो तो आप 10,000 साल में भी स्वेम नहीं सोच पाएंगे क्योंकि आपका यह जो पूरा तंत्र है जो पूरा अपरेटस है वो बाहर की और देखने के लिए रचित है देखिए हर इनसान चाहता है कि वो कोई उची चीज
00:08:49प्यासा ही पैदा होता है इच्छाएं होती है तमान तरह कामनाएं होती है और हम उनको बाहर खोज रहे होते हैं बाहर ही इच्छाओं कामनाओं को खोजने की प्रक्रिया में हम बाहर एक ईश्वर का भी निर्मान कर देते हैं हम कहते हैं जैसे बाहर सब आप बड़ी बड�
00:09:19जो खोज रहा है, अगर वही बेहोश है तो वह क्या खोजेगा?
00:09:24तो इसी रहे सबसे बड़ी चीज है खोजने वाले की सफाई
00:09:26आप कुछ खोजने निकले हो, और आप बेहोश हो, आपको पता भी नहीं है
00:09:30कि कि आप कौनında और आपको पाना किया, क्या खोजनाइ़, तो आप क्या खोज़ोगे।
00:09:33तो विदान कहता है। सबसे बड़ी चीज है।
00:09:35खोजने वाले की सफाई,
00:09:38और वो सफाई हो गई,
00:09:40मन आतमा हो गया,
00:09:42मन आत्मस्त हो गया, उसी को ब्रहामी इस्थिती भी कहते हैं, उसी को ब्रहमलींता भी कहते हैं, तो उसके बाद आपको बाहर की बहुत परवा करने की ज़रूरत नहीं है, बाहर की बहुत परवा करने की ज़रूरत नहीं है, न तो दुनियादारी की, दुनिया के नियमों की,
00:10:12या डिमी गॉड या देवी देवता बैठा दी है
00:10:15इनकी किसी की परभा करने की ज़रूरत नहीं है
00:10:17इसी लिए आत्मा के प्रकाश में
00:10:21आस्तिकता शब्द का एक विशेश अर्थ हो जाता है
00:10:24अंग्रेजी में थीज्म या बिलीफ का जो अर्थ होता है
00:10:33वो आस्तिक से बहुत भिन्न है
00:10:35आस्तिक का अर्थ होता है वो जो वेद में आस्ता रखता हो
00:10:38वो नहीं जो किसी प्रकार के गौड में आस्ता रखता हो
00:10:41ना ना ना
00:10:42हम जानते नहीं है तो हम कहते हैं जो भगवान को मानता है वो आस्तिक है
00:10:46बिल्कुल गलत बात आस्तिक का यह अर्थ है ही नहीं
00:10:48आस्तिक का अर्थ होता है जो वेद को मानता है
00:10:53और हमने का वेदों का हिर्द है क्या है वेदान्त
00:10:55तो जो वेदान्त को समझ गया सिर्फ वो आस्तिक है बाकी सब नास्तिक है
00:11:00आप बैठ करके
00:11:02जिसको आप योग कहते हो
00:11:05उसकी एक के बाद एक
00:11:06मुद्रा
00:11:07साधे रहिए
00:11:10टांग उठाईए हाथ ऐसे करिए
00:11:12नाक ऐसे करिए
00:11:13उससे आप ये तो छोड़ दीजिए
00:11:16कि योगार उड़ हो जाएंगे
00:11:18उससे आप आस्तिक तक नहीं हो पाएंगे
00:11:20और ये सब जो आप करते हैं
00:11:25जिसको आप योग बोलते हैं
00:11:27हाथ खीचना, टांग खीचना, सांस खीचना
00:11:29इसके निश्चत रूप से फाइदे हैं
00:11:31मैं उससे बिलकुल इनकार महीं कर रहा है
00:11:33निश्चत रूप से फाइदे हैं
00:11:34फाइदे सब शारीरिक हैं
00:11:36तो एक शारीरिग गत्विधी के तोर पर bye-yam के तोर पर exercise के तोर पर,
00:11:42बहुत अछी चीज है बहुत उसका कोई अध्यात्मिक लाव नहीं है।
00:11:47उसका कोई अध्यात्मिक नहीं है।
00:11:48गेقول शा हाला है.
00:11:50जो उसका अध्यात्मिक प्रक्ष हो सकता है, वो और पीछे छूड जाता है, जब आप योग को यही समझ लेते हो, कि हात पाउं खीजना इत्यादी, आत्मा अध्यात्म के केंदर में है, और योग भी बहुत उंची और बहुत सुन्दर बात हो जाता है, जब योग की परिभ
00:12:20जडीर के संदर्व में, तो योग बड़ी शुद्र चीज हो जाएगा, बहुत छोटा कर दिया आपने योग को, क्योंकि योग को आपने क्या बना दिया, कि ये शरीर सौस्थ है, और ये वो है, बहुत छोटा कर दिया योग को, ये क्या है, और उसी योग की परिभाशा, �
00:12:50गुलामी से मुक्त कराना है, जब ये आपने योग की परिभाशा कर दिया, तब योग बहुत बड़ी बात हो जाती है, तब योग आत्मा जितनी उची चीज हो जाती है, पर आत्मा के अभाव में, योग का कोई अर्थ नहीं, अगर आपका योग ऐसा है, जिसमें आत्मा क
00:13:20थान न सम्मान, तो बिलकुल वेर्थ है योग दिवस, लेकिन उसी योग की अगर आप सही परिभाशा कर लो, कि योग माने मन, मन, इस मन को गौर से देखना है, और इसके सब बंधनों को काटना है, तो फिर योग बहुत उची चीज हो जाती है, योग को उचाई मिलती है �
00:13:50जो सबसे उचा है, उसी के सानिध्य संपर्क में आके तो तुम भी उचे होगी न, तो कौन सी चीज कितनी उची है, जिन्दगी में भी, वो अगर नापना हो, तो एक ही मान दंड है, वो चीज आत्मा के संदर्भ में कहां बैठती है, कोई व्यक्ति तुम्हें आत्मा की त
00:14:20खर्ज करके अगर तुम आत्मा के निकट आ सकते हो, तो ये उचा खर्च हो गया, बढ़िया खर्च हो गया, उच्च शेनी का खर्च हो गया, तुम कहीं को यात्रा कर रहे हो, या तुम कुछ पढ़ने जा रहे हो, तुम जो कुछ भी करने जा रहे हो, तुम किसी से बाच्
00:14:50उसकी उच्चता प्रमानित ही सिर्फ एक बात से होती है यह जो कुछ भी है इस से क्या मैं आत्मा की तरफ बढ़ रहा हूं तो योग बहुत अच्छा है अगर आपको आत्मा की तरफ बढ़ा रहा है योग बहुत भरष्ट है अगर वो आपको और ज्यादा शारीरिक बनाए �
00:15:20अपने शरीर को लेकर के आप में और ज्यादा ताधात में आ गया है देवाव बढ़ गया है तो क्या है कौन से योग है योग शब्द सुनते ही अगर आपके दिमाग में देह नाचने लग जाती है तो यह तो अनर्थ हो गया आपके साथ
00:15:36पर अभी एक सवाल मेरे मन में उठ रहा है जिस तरह आपने योग को भी परिभाश्यत किया आत्मा से सम्मन्द बनाकर तो हर साल कुछ ट्वीट्स चलते हैं जो योग दिवस पे शेयर किया जाते हैं उसमें एक फ्रेज यूज होता है कि योग इस दा यूनियन ऑफ माइं �
00:16:06पढ़े ही नहीं है कि सोल क्या होता है मन होता है जो कि प्रकृति के तीन गुळों से आच्छादित है
00:16:22और आत्मा है, यह सोल क्या होता है, या तो यह कहतो हो कि माइंड ही सोल है, तब ठीक है, किसी ने उससे पूछा था, हम जब रिशिकेश में थे तो किसी विदेशी ने पूछा था,
00:16:34सोल, मैंने गहाँ था था, अचिंदा माइंड, फिर पूछा, वादि स्पिरिट, बैएनादर कॉछा, तो यह सोल, स्पिरिट वगेरा, मन के विचार है, मन के सिद्धानत है, इनकी अपनी कीमत नहीं, इनका अपना कोई अथार्थ नहीं है, मन है, बस मन, जो कुछ भी तुम स
00:17:04तो बस दो हैं, मन और आत्मा, जो कुछ भी चिंतन के दाइरे में आ जाता है, वो मन है, जो अचिंत है, वो आत्मा है, आत्मा को और चिंतन होई नहीं सकता, तो इसलिए आत्मा के बारे हम बहुत बोलना नहीं चाहिए, तो कुल मिला जुला करके विदान्त कहता है, कि तुम �
00:17:34लोगों के लिए आत्मा का मतलब होता है कुछ भूत प्रेट जैसी चीज, कि इसके अंदर इसकी आत्मा आ गई और जैसा हो गया?
00:17:40यह बाहरी प्रभाव हैं, यह सब बाहरी प्रभाव हैं, अगर भारती दर्शन को देखोगे तो उसमें भूत प्रेट जैसा भी कुछ नहीं होता, यह सब भी जो बाहरी संस्कृतियां और बाहरी विचारधार आएं थी, जब वो भारत पर चड़ वैठी, तो भारतीयों के त
00:18:10खिते हैं, यह सब यहाँ पर आगये", उसही में, घेके-, विदानत में आपको इन सब बहतों का कोई उल्लेख नहीं मिलेगा,
00:18:20पुरानों में इस तरह की बातों का काफी उल्लेख आपको मिलता है
00:18:26पुरान बहुत बाद में रचे गए
00:18:372000 वर्ष से भी ज्यादा काँ तराल है
00:18:43आत्माकारत भूत कैसे हो गया
00:18:44बड़े ये रहसी की बात है
00:18:49आत्मा का अर्थ है आपकी सच्चाई, जो आप है, आत्मा वो जो अचल है, आत्मा वो जो कहीं आ जा नहीं सकती, आत्मा वो जिसके बारे में उपनिशद कहते हैं कि आँख उसको देख नहीं सकती, कान उसको सुन नहीं सकते, वाणी उसका वर्णन नहीं कर सकती, मन उसको सो�
00:19:19हस्ति से बाहर की कोई बात, आपकी पूरी मुक्ति का नाम है आत्मा, जहां आप में आप जैसा कुछ न बचे, आप से पूरे बाहर की कोई बात, उसको आत्मा कहते हैं, जैसे आपकी पूरी हस्ति ही एक करागार जैसे हुआ, आप एक जेल में हैं, तो मुक्ति कहां हैं, जेल
00:19:49किया कुछ भी वैसा होगा जो इन चार दिवारों के भीतर है जो हुआ हो जो
00:20:06अंतर आत्मा पिकुछ नहीं होता है। जैसे आंतर आत्म मन
00:20:15तुम मन को हजार तरीके के नाम ले लो
00:20:18मन तो मायावी है, मन के भहुतक रंग है
00:20:19छिंचिन बदले सोए
00:20:20तो मन को ही तुमें एक नाम
00:20:24ये देना शुरू कर देते हो
00:20:25मेरी अंतरात्मा या मेरा हृदय
00:20:27मेरे जिगर की आवास, जो भी बोल लो
00:20:29ये सब खुद को धोगा देने वाली बाते है
00:20:31फिर्फ मन है
00:20:33भावनाए मन है, विचार मन है, सिधान्त मन है
00:20:37उहापोह मन है, किंकर्तवी मूडता मन है
00:20:41अशान्ति मन है
00:20:45अनिरणे मन है, निरणे वो भी मन है
00:20:49कुछ चढ़रा है मन है, कुछ गिर राए मन है
00:20:52कुछ याद आ गया मन है, कुछ भूल गया वो भी मन है, कुछ यहाँ है मन है, कुछ वहाँ है मन है, पीछे मन है, आगे मन है, मन के अतरिक्त कहीं कुछ और नहीं है, तो तुम जितनी भी बाते बोलोगे, यह है तो वो होता है, संतरात्मा होती है, और पचास तरह की आत्मा है
00:21:22बात ने की जा सकती दो अचल है और बिलकुल अलग है और फिर जब मैं योग की बात करते हूं तो आपने कहा कि मन का आत्मा में ले हो जाना यह योग है तो अब ठीक है योग दिवसका जो भी प्रारूपाज लोग मना रहे हैं वो अपनी एक गरफ है पर यह जो वास्तविक �
00:21:52अगर आपने यह हाथ-पाओं वाली कसरत को ही योग मान लिया तो असली योग की और आप जाओ गई क्यों आपको तो यह लग जाएगा कि मैं कर तो रहा हूं योग योगा आप सुबह सुबह अपनी योगा मैट बांदो के जाकर कि यह खींचर वो खींचर वो कुछ कर दि
00:22:22लिया तो फिर आप जो वास्ताव में असली है उसकी और जाओ गई क्यों तो जो खरा योग है असली योग है उसके रास्ते में बाधा बन जाते हैं यह योग दिवस जैसे आयोजन क्योंकि कल करोणों लोगों के मन में यह धारणा और गहरे बैठा दी जाएगी कि इस शार
00:22:52क्या हुआ वो और पीछे चूट गया अब उस पर और कोई नहीं ध्यान देगा तो कहने को तो यह योग दिवस है लेकिन वास्ताव में इस जैसे दिवसों के माध्यम से योग को क्षटी ही होती है
00:23:04पर मैं एक चीज और समझना चाहता हूँ कि योग की जो परिभाशा आपने बताई और योग की जो परिभाशा कल दुनिया एक तरह से उत्सव की तरह मनाने वाली है यह पूरी जो यात्रा है यह पॉइंट ए से पॉइंट बी तक ही यह कैसे हुई यह ऐसा क्यों हुआ
00:23:26क्योंकि शरीर वाले काम करना हमेशा ज्यादा आसान और ज्यादा आकरशक होता है मैं तुमको कहूँ मन साफ करना है मैं तुमको कहूँ शरीर साफ करना है बोलो क्या करना चाहोगे शरीर साफ करना चाहोगे पहली बात आसान है दूसरी बात प्रमानित हो सकता है तीसरी बा
00:23:56वो तुरन जाकर कि योगा क्लासेस जॉइन करते हैं
00:24:00विशेश कर लड़कियां
00:24:02और ये मैं नहीं कहरा
00:24:04आप जाके योगा इंस्ट्रक्टर से पूछ लीजिए
00:24:06कितने फायदे हैं ऐसे योगा के
00:24:11जिसको करने के बाद
00:24:12शरीर और आकरशक हो जाएगा
00:24:14और दूसरों को
00:24:17एक यौन स्तर पर
00:24:23एक सेक्शूल डाइमेंशन में
00:24:25आकरशित करने में सोईधा होने लग जाएगी
00:24:27आप देखतें नहीं ये लोगों की तस्वीरें
00:24:31छपते हों कहते हैं दा सेक्सी योगिनी
00:24:33और उसने अपनी टांग बिलकुल ऐसे
00:24:37आकाश की और कर रखी होगी
00:24:38टांग आकाश की और करने को योग नहीं कहते
00:24:41मन को आकाश तक ले जाना होता है
00:24:43तो इस तरह से हम सब कुछ भरष्ट कर डालते हैं
00:24:52योग जिसका अर्थ मन को साफ करना है
00:24:58मन को हलका करना है
00:25:00उसका हमने अर्थ बना दिया
00:25:04शरीर को हलका करना
00:25:07और मैं फिर कह रहा हूँ
00:25:09शरीर को हलका करने को ले करके
00:25:12मुझे किसी तरह की आपत्य बिल्कुल नहीं है
00:25:15मैं तो चाहता हूँ लोगे शरीर हलके हो
00:25:17मेरा भी हलका हो
00:25:19सबका शरीर हलका हो बहुत अच्छी बात है
00:25:22लेकिन भाई
00:25:24योग शरीर को हल्का करने का नाम
00:25:27नहीं होता है
00:25:28तुमने कितनी उची चीज को
00:25:30कितना छोटा बना डाला
00:25:32और छोटा ही नही बना दिया
00:25:34तुमने असली चीज
00:25:36के विरोध में खड़ी
00:25:38कर दिये छोटी चीज
00:25:39अब हर आत्मी शरीर पकड़के बैट जाएगा
00:25:42और असली चीज को भूल जाएगा
00:25:44एक चीज में और देखिए है कि इस योग का महिमा बंदन करने के लिए
00:25:52लोग क्या बोलते हैं कि ये हजारो साल पुरानी चीज है
00:25:55और उसको सीधे महर्शी पतंजली से जोडते हैं
00:25:58तो ये जितनी भी योग के मुद्रा हैं आजकल चलती है
00:26:00क्या ये सच में उनका पतंजली जी से कोई संबंध है
00:26:03पढलो भाई योग सूत्र इतना भी गोपनिय ग्रंथ नहीं है कि तुम्हें अनुपलब्धो
00:26:09गूगल कर लो पतंजली योग सूत्रास
00:26:14और मुझे बता दो कि उसमें ये सब कहां है
00:26:17अलिवाद तुमको तो पता है तुम पहले भी बात कर चूके हो तुम जानते हो ये सब कहां से आ रहा है
00:26:23ये जो हठी होग का पूरा कारिक्रम है ये तो बहुत बहुत अहालिया है
00:26:28मुश्किल तो 500-600 साल पुरा ना है इसको पतंजली से कहां जोड़के बैठा दिया तुमने
00:26:33महरशी पतंजली जो कहा गए है वो तो लोगों ने पढ़ा ही नहीं है
00:26:40तो लोगों को लगता है ये ही सब योग है
00:26:42अभी मैं कह दूँ कि यम नियम ही बता दो
00:26:48पालन करना दूर की बात है
00:26:51मैं कहूँ अचावर रहे है हिंसा अस्ते इनका पालन करना है
00:26:56उतने में तो धराशाई हो जाएंगे लोग मैं कहूँ नाम ही बता दो
00:27:00यम नियम के लोगों को नाम नहीं पता और अपने आपको योगी बताते है
00:27:04यह जो योगी घूम रहे हैं इतने
00:27:07इनसे कह दो कि
00:27:08अश्टांग योग के आठ में से
00:27:10तुम चार-पांच अंग बता दो
00:27:12नहीं पता होंगे इनको
00:27:14और पता हों भी तो उसका पालन करना तो बहुत दूर की बात है
00:27:17मैं जो एक चीज पता होती है
00:27:20कि
00:27:21फिट दिख रहे हैं
00:27:23तो यह जो फिटनेस कल्ट है
00:27:25बड़ी यह
00:27:28दुख की बात है
00:27:30कि इसने योग को भी लील लिया
00:27:32आप देखते हो किसी का वजन बढ़ा हुआ है
00:27:37तो आपको तुरन सला करते हो
00:27:39एक काम करो या तो जिम जोईन कर लो
00:27:41या एरोबिक्स या योगा
00:27:43आप देख रहे हो आपने योगा का नाम
00:27:45किन दो चीजों के साथ जोड़ दिया
00:27:47जिम और अरोबिक्स
00:27:48जो कल्ट और फिजिकल फिटनेस है
00:27:54इसने योग को एकदम भग चलिया
00:27:56खा लिया
00:27:57योग का अर्थी यही बन गया
00:28:00कि जैसे अरोबिक्स करते हो
00:28:01वैसे योग कर लो क्या मिलेगा
00:28:03देखो पेट अंदर चला जाएगा
00:28:06और ज्यादा बढ़िया
00:28:07और जो फाइदे होंगे तो होंगे
00:28:09सक्सी भी तो दिखोगे
00:28:10मैंने असी विशे में थोड़ा और प्रने कुशिश करी
00:28:18समझने कुशिश करी
00:28:19तो मुझे पता चला कि जो पतंजली जी का योग सूत्र है
00:28:22उससे भी पहले योग के बारे में भगवद गीता में पढ़ने को मिलता है
00:28:25और इसलिए मिलता है क्योंकि योग वास्तव में आत्मा से जुड़ी हुई बात है
00:28:33और आत्मा का बहुत स्पष्ट निरूपन कहां पर है विदान्त में है
00:28:39भगवद गीता क्या है विदान्त की प्रस्थान्त रही का एक बड़ा मोटा मजबूत स्तंभ
00:28:45तो योग वास्तव में क्या है ये जानना है तो भगवद गीता की और ही जानना बढ़ेगा
00:28:51पतंजली योग सूत्र पढ़ने से भी पहले आप बढ़ी पढ़िए अगर आपको योग क्या है जानना हो भगवद गीता में बहुत स्पष्ट श्लोक हैं
00:29:01जो बताते हैं कि योग कौन योग कहते किसको है यो किसको कहते हैं
00:29:07तो आपको योग को जानना है तो पहले थोड़ा आत्मा के प्रतिरुचि दिखाईए आत्मा के प्रति आप रुचि तब दिखाएंगे जब पहले ये समझ में आए कि मन अभी मन भी जीवन भी हजारत रहे के बंधनों में चल रहा है इतने बंधन है उनसे मुक्ति चाहिए उ
00:29:37पर इसमें एक चीज और पूशन चाहिए जिसे आतना कि किसी भी व्यक्ति का वजन बढ़ता हो दिखता है तो इसको सलाय दी जाते है कि जिन कर लो योग कर लो तो अचली जो लोग के मन में सवाल उटता है जग्यासा उटते ही योग क्या होता है वो उटती नहीं सब कारण
00:30:07और यही वज़य है कि योग को इतनी प्रसिद्ध मिली है क्योंकि हम सब कौन है हम देहा भिमानी लोग है बॉड़ी आइटेंटिफाइड पिपल जिनके लिए जिन्दगी में बॉड़ी ही सब कुछ है तो इसी लिए चारो तरफ भारत में भारत से बाहर भी योग योग य
00:30:37रूप होट योगा कोल्ड योगा अभी मैं कहीं पढ़ रहा था था में सॉस योगा वो केचप मल करके धूप में बैठ करके योगा करते हैं और निकाले ही जा रहे है और यह काम पश्चम में खूब हो रहा है क्योंकि सबसे यादा बॉड़ी आइटिफिकेशन का है पश्
00:31:07मैं जिस योगा इंस्ट्रक्टर कि सभसे ओदा फॉलोवर हैं वो भारती है ही नहीं वो क具व विदेशी है और करोडो में शायद यूट्यूब न भी फॉलोवर है क्यों कि विदेश के पास आत्मा जैसा कोई सिधान्त भी नहीं था आत्मा की समझ की नहीं भात कर रहा हू�
00:31:37उनको योगा बहुत पसंद आया, इसी लिए भारत में भी जो ये तथाकथित योगा गुरु हैं, ये दुनिया भर में खूब फेले, और ही कराते क्या ये वही हैं, बस कसरत, उमझे समझ में नहीं आता कि ये फिर बैठ के प्रोचन क्यों देते हैं, किसी ये जो तुम्हें क
00:32:07तुम अपने जिम इंस्ट्रक्टर को बोलो, गुरुदे महराज, महागुरु, वहां उंची कुरसी पर बैठ जाए और ग्यान दीजिए, तो तुम कहोगी क्या फिजूल बात है, ये जिम इंस्ट्रक्टर से ग्यान लिया जाता है, तो ये लोग जो तुमको बता रहे हैं,
00:32:37खूब खेल चलेगा, क्योंकि हर बंदा मरा जा रहा है एक अच्छे शरीर के लिए, और उस बात में कोई बुराई भी नहीं है, शरीर अच्छा होना चाहिए, लेकिन शरीर अपनी जगह है, मन अपनी जगह है, जब मन रोता है, तो उसमें फिर शरीर नहीं काम आता है, इस
00:33:07स recurrence एक hijaं कर रहा होता है, ये आपध की जो भी समस्या है, गौर से दीगहेगा कि भ्यादा मन से सम्भंद है ये शरीर से,
00:33:14किसी ने आज तक कहा है
00:33:18तन चंगा तो कठोती में गंगा
00:33:20कहा है
00:33:21मन चंगा तो कठोती में गंगा
00:33:24क्योंकि दुख भी
00:33:26तन में नहीं मन में होता है
00:33:27मन रोता है आपका
00:33:29इसलिए आप कितने भी दुखी हों आप सो जाते हैं तो दुख चला जाता है
00:33:32क्योंकि दुख मन में था, मन सो गया, दुख चला गया उतनी देर के लिए
00:33:35तो योग का अपहरण हो गया है
00:33:42योग जो है किड्नैप कर लिया गया है
00:33:47जैसे कोहिनूर गया भारत से, वैसे ही योग को भी पश्च्चम ने हर लिया
00:33:54और भारत में कभी भी ऐसों की कमी नहीं रही है
00:34:01जैचंद जैसों की, जिन्होंने विदेशियों को मदद दी हो भारत को जीतने में
00:34:09आज के जैचंद कौन है, जिन्होंने योग का अपहरण करवा दिया
00:34:12सब यह सब जो योगा गुरु भूम रहे हैं
00:34:14या आधियर जैचंद है
00:34:15कुछ अपवाद होंगे, कुछ अच्छे होंगे
00:34:18उनका सम्मान करता हूँ
00:34:19लेकिन अधिकांश तो वही है
00:34:20जिन्होंने
00:34:23एक आख है
00:34:26जो योग को पूरे तरीके से
00:34:28शारेविक द्रिष्टे से देखना चाहती है
00:34:31और आप एक भारती है
00:34:34योग गुरु हो
00:34:36आपका क्या धर्म है
00:34:38आपका धर्म होना चाहिए उसको समझाना
00:34:40कि
00:34:42ऐसे नहीं
00:34:44योग को ऐसे नहीं देखना
00:34:46योग का असली अर्थ समझो
00:34:47आओ पहले आत्मा की बात करेंगे
00:34:49शरीर की बात भी करेंगे
00:34:51शरीर की अभ्यास भी करेंगे
00:34:53पर भूद बात में आएगा
00:34:54पहले आत्मा की बात करेंगे
00:34:55यह आपका धर्म होना चाहिए ना
00:34:56माननो तुम कोई विदेशी हो
00:34:58तुम आते हो मेरे पास
00:34:58और तुम कहते हो, oh, I'm mesmerized by yoga, तो मुझे टीच करिये, क्यों टीच करिये yoga?
00:35:07मतलब मेरे को बहुत अट्राक्टिव लगता है जब मैं देखता हूँ, the kind of flexibility that people have and this that and I have also heard that yoga helps increase average age by five years.
00:35:19I have also heard that hypertension and so many other things, PTSD, यह सब जो है, इसे ठीक हो जाता है.
00:35:27और आप यह सब आये हो बताने मेरे पास, और आप कहा रहे हो कि यह सब मुझे आकरशित करता है, इसलिए मुझे योग सिखाओ, तो मेरा धर्म क्या है?
00:35:34मेरा धर्म है क्या आपको बता हूँ, बिटा इसको योग नहीं कहते है, योग कुछ और बात है.
00:35:39उसकी जगह मेरी नजर जा रही है आपके डॉलर पे, और मैं कहा रहा हूँ, कौन इसको बताए योग का असली मतलब, यह जो चाहता है उसको वही दे दो और इसके डॉलर निकलवा लो, और डॉलर यहां ही नहीं निकलवा लो, बाहर जा जाके डॉलर बटो रो.
00:35:53पिछले सौ सालों में भारत से बहुत सारे योग गुरू बाहर गए हैं, और उन्हें खूब कमाया है, वास्तों में जितने भी गुरू बाहर गए हैं, उन्हें बड़ी तादाद इन्ही योगा गुरूओं की है, जो कि कुछ नहीं बस कसरत सिखाते हैं, लेकिन अपने आ�
00:36:23वेदों का, वेदान से तुम्हें कोई मतलब नहीं, तो तुम्हारे पास ग्यान आया कहां से, हो तो तुम योगा इंस्ट्रक्टर, वेदान तुम खुद कहते हो, तुमने कभी पढ़ा नहीं, और भारतिय दर्शन साफ कहता है, कि वेदों का ग्यान खंड है, वो तुमने �
00:36:53मैं असम्मान नहीं दर्शा रहा हूँ योग के प्रति, बस मुझमें एक रोश है उनके लिए, जिन्होंने योग के अर्थ को भी विक्रत कर दिया है, मैं योग के प्रति सम्मान के कारण ही इसब कह रहा हूँ.
00:37:06आपके बात को सुनकर मुझा एक चीज स्टेटमेंट बड़ी याद आ रही है, कि लोग आज कले कहने लग गए हैं, कि देखे, योग का किसी धर्म वगरा से कोई संबंध नहीं है, और योग तो एक ऐसी चीज़ है, जो इसाई भी कर सकता है, और ये भी कर सकता है, और ये �
00:37:36वेधों के चीज़ आस्तिक तर्शनों में से एक है योग, हम दोहरा के कह रहे हैं, तो योग का सीधा सीधा संबंध वेधों से है, योग वेदों की संतत्य है योग,
00:38:02वेदों से ही सीधे सीधे प्रवाहित हो रहा है योग
00:38:08तो जबरदस्ति योग को सेकुलराइज करने की कोशिश मत करो
00:38:13तुम तो ऐसे कह रहे हो तुम नहीं मतलब जोभी लोग कहते हैं
00:38:19तो ऐसे कह रहे हैं जैसे की योग अच्छी चीज है
00:38:23लेकिन वेद तो गंदी घटिया चीज है, तो योग को सुईकार करने के लिए उसका वेदों से जो रिष्टा उसको काटना जरूरी है
00:38:31कोई चीज उठाई जमीन सो उसको धूल जाड़ दी
00:38:35भाई वो धूल नहीं है, योग के केंद्र में वेद बैठे हुए है
00:38:41तुम योग से वेदों को हटा कैसे दोगे
00:38:45और वेद भी जब मैं कहूँ तो मेरा आश़य हमेशा वेदान्त होगा
00:38:48कर्म कांड से कोई लेना देना नहीं हमको
00:38:50कर्म कांड से तो योग को भी कोई लेना देना नहीं है
00:38:56भगवत गीता का पूरा जोर ही है निश्काम कर्म पर
00:39:06और कर्म कांड होता है हमेशा सकाम कर्म कांड
00:39:10वहाँ है निश्काम कर्म और कर्म कांड का मतलब होता है सकाम कर्म
00:39:15तो जब मैं वेद कहूं, तो मेरा आशह है निश्काम कर्म, बाने जो विदान्त का दर्शन है.
00:39:21पर कहीं ना कहीं जो पूरी चाल थी है, तो सफल सी होई गई है, क्योंकि उन्होंने जैसे ही योग को योगा वनाया, इसको इंटरनाशनल बना दिया है, तो जैसे ही मैं आपको जिनके बारें बता रहा था, कि दुनिया के जो सबसे वड़ी योगा इंस्ट्रक्टर है, वो ए
00:39:51योग कोई अपरण करके ले गए हैं और आप वही चीज प्रचलन में आगे लिए, आप जो फिजिकल एक्सराइस बता रहे हो आप बताओ, अच्छी बात है, उसको योग नाम मत दो बस, उसको और सही नाम क्या होगा फिर? एक्सराइस, कुछ भी और नाम दे दो, इतनी सा
00:40:21बार उचलो, उसके फायदे तो होते ही हैं, वो योग थोड़ी हो गया लेकिन, योग नहीं हो गया, लेकिन फायदे बंद फिर भी है, तो कौन कह रहा है कि आप अपना काम बंद कर दीजिए, उससे अगर लोगों कुछ फायदा हो रहा तो आप करते रहे हैं, बस उसको यो
00:40:51अध्यात्मिक फायदों के लिए योग की तरफ अना चाहते हैं, तो मैं देखा है कि लोगों के मन में जो एक छवी बनी हुई है, कुछ ऐसी बनी हुई है कि जो वेक्ति अध्यात्मिक होगा, उसके चहरे पर एक तेज होगा, और उसका शरीर, एक योगी का शरीर अगर आ�
00:41:21जो योग से बहुत मेल खाती है, देखो, सुडॉल शरीर बहुत अच्छी बात, कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन दुनिया में एक से एक अपराधी पढ़े हुए हैं, और मूर्ख भरे हुए हैं, एक से एक घिनोना काम करने वाले भरे हुए हैं, जिनके बहुत सुडॉल सु
00:41:51जेलों की इतनी उची दीवारे क्यों रखनी पढ़ती हैं, मोटा आदमी तो कूत के भागेगा नहीं वहां से, वहां बड़े सुडॉल शरीर वाले बैठे हैं, वही सब हत्या और बलातकार और चोरी और भरष्टाचार करके आएं तो इसलिए जेल में बंद हैं, उनहीं के
00:42:21अब सुडॉल शरीर रखने भर से क्या होगा? सुडॉल शरीर रखके तो दुनिया भर के तुम उल्टे-पॉल्टे कांड कर सकते हो, लेकिन अगर मन सुडॉल है तो फिर जीवन धन्न्य हो गया, मन पहले तन बाद में, तन पहले आ गया तो अब जीवन नर्क हो गया
00:42:43अभी उस पूरी चडचा से एक शब्जो थोड़ा भाहर रहा है चडचा से कि प्रणायाम जिसे बोलते हैं
00:42:54सांस किस तरह लीनी है और उसके उपुरा उसको लोग थोड़ा बहुत इसोटरिक मानते हैं कि अज इफ उसमें कुछ
00:43:00स्प्रिचुल फाइदा हो सकता है तो ऐसा कुछ है कि प्रणायाम सांस अंदर बाहर किसी पर्टिकुलर तरह से करने से मन को तुम जब भी किसी भी गतिविधी पर केंद्रित करोगे तो उससे एक तरह की एक आगरता तो आही जाती है तो प्रणायाम के लाव निश्चित रू
00:43:30इसा कुछ नहीं होने वाला लेकिन फिर भी प्रणायाम अच्छी क्रिया है लोगों करनी चाहिए तो अब मैं इसको बहतर समझना चाहूंगा कि हमने बात करी शुरुवात में जो योगा है तता कर्टिता भी उस से लोगों को शारीडिक लाब होता रो ठीक है उसकी जितना
00:44:00भोता है जानना कि मैं कौन हूं और मेरे भीतर क्या-kया बैठा हुआ है अध्यात्म का मतलब ही बस यह होता है जिटना तुम अपने आपको आश तक जानते हो उससे अधिक जानना अपने आपको
00:44:12अध्ध, अध्ध माने, अध्ध वही है जहां से आ रहा है अधिक, आत्म माने मैं, जितना आज तक तक तुमने अपने आपको जाना, उससे अधिक जानो, वो है अध्यात्म, अध्यात्म, जो तुम अपने आपको आज तक जानते आए, उससे ज्यादा जानने को अध्यात्म क
00:44:42और आत्मा की ओर वो जो अधिक वेग से अधिक प्रेम से गते करनी है वो गते नहीं तो कोई अध्यात्मा नहीं आत्मा भी चाहिए और ऐसा मन चाहिए जो कह रहा हो और अधिक और अधिक और अधिक और अधिक जानना है और अधिक निकट जानना है तो यह अधिक यह मन का स�
00:45:12मैं इसको अगर थोड़ा इसे देखता हूं जैसे मैं अपनी जर्नी को पी देखता हूं तो युजुली कोई भी वेक्ति इस इंटेंशन के साथ अध्यात्न की और नहीं बता फर एक्जामपल मैं स्वामी वेकरन जी की तरफ थोड़ा ट्राक वाता तो मुझे कुछ कहानिया स
00:45:42हो भी सकती है नहीं भी हो सकती है आप अध्यात्म के और इसलिए नहीं जाते कि आपकी मेमोरी शार्प हो जाएगी यह ऐसी इसी बात है कि आप टैंक का इस्तेमाल मच्छर मारने के लिए कर रहे हो
00:45:51तो समझ में आ रही है
00:45:55टैंक का इस्तेमाल मच्छर मारने के लिए नहीं करते
00:45:58तो इस स्मृति को बहतर बनाने के लिए अध्यात्म का प्रयोग नहीं किया जाता
00:46:04हो सकता इस स्मृति बहतर हो जाओ, सकता नहीं भी हो
00:46:06संतों ने यहां तक का है
00:46:08कि जब से राम के साथ लौ लगी है, तब से कुछ भी याद रहना बंद हो गया, उल्टा भी होता है, इस्मृति की एक आगरता तो छोड़ दो, इस्मृति का लोप होना शुरू हो जाता है,
00:46:23किसी ने पूछा था कि ये सुमिरन सुरति ये सब क्या है, संतों ने कहा है ना सुमिरन सुरति लगाए के, तो मैंने का विस्मरन को ही सुमिरन कहते हैं, भूले विस्मरन, सुमिरन माने तो सुमरन होता है, ना विस्मरन, जो कुछ तुमें याद है, वही तो तुमारा बोज है
00:46:53पाईनी को पीछे रख देने का नाम तो अध्यात्म है,
00:46:56तो ऐसा नहीं है कि इसमृत्य आपकी बहुत अच्छी हो जाए,
00:47:00इसमें कोई अध्यात्मिक पक्छ है, ना?
00:47:02इसमृत्य हो जाए, अच्छी बात है, जो ढंकी बात हो याद रखो,
00:47:05फालतु बात क्यों आद रखनी है
00:47:08और जो बात याद रखने लायक नहीं है
00:47:10उसको ततकाल भुलाना भी तो जरूरी है न
00:47:13ये विवेक
00:47:14ये विवेक है अध्यात्म
00:47:17ये थोड़े ही कि कोई भी
00:47:19कुड़ा कचड़ा किताब उठा ले ही
00:47:20उसे चारसो पन्ने पढ़ लिए और चारसो पन्ने अग्दम याद कर लिए
00:47:24पागल हो जाओगे काई को याद कर लिए
00:47:27भूलो तुरंद भूलो डिलीट करो
00:47:29तो ये मैं तो बात समझना जारा हूँ भी
00:47:35जैसे जो प्रणायाम और योग है उनके प्रपर
00:47:39भूतिक फाइदे हैं जो लोगो को साफ साफ दिखते हैं और जो अध्यात्म जिसके आब बात में अध्यात्मे कलाब की उसका कोई भूतिक फाइदा उसके लिए है जो सब भूतों का द्रिश्टा है
00:47:50बहुत एक फाइदे से मारा क्या मतलब है शरीर का फाइदा फिर पूछ रहा हूँ दुख का अन्भव शरीर करता है सुख का अन्भव शरीर करता है योग की और भी क्या शरीर गया था योग की और भी मन गया था ना मन ने शरीर को आदेश दिया था टांगों से का था चलो च
00:48:20या उसकी परेशानी अधिक से अधिक 5-10% के कारण है, बाकि उसकी पूरी परेशानी है अपने अज्ञान के कारण है, मन को ज्ञान चाहिए, मन को कसरत नहीं चाहिए,
00:48:35मैं ये चौती-पांच यार बोल रहा हूँ, मुझे कसरत से कोई आपत्ती नहीं है, कसरत मैं भी करता हूँ, लेकिन तुम कसरत कोई, अगर जीवने बहुत उचा स्थान दे दोगे, तो फिर तो हो चोगा तुम्हारा योग.
00:48:47तो इसका मतलब है कि जो लोग जीवन में आनन्द और शान्ती और इन सब की बात करते हो रहन के एक्चुली चाहते हैं कि इसकी तरफ बढ़े हैं, उनके लिए योग और प्राणायाम जो है वो एक आखरी सॉल्यूशन नहीं है, आखरी तो बिल्कुल ही नहीं है, एकदम ही
00:49:17मदद मिली, पर इनक्यानवे साल जीना भी तभी अच्छा है ना, जब इनक्यानवे साल में करने लायक तुम्हारे पास कुछ हो, उसके लिए मन के पास इतनी सफाई और इतनी दृष्टी होनी चाहिए कि उसको पता हो कि जिन्दगी में करना क्या है, नहीं तो इनक्यानव
00:49:47के पास कुछ गीता के श्लोक हैं, मैं चाहता हूं कि मैं आप से इनके जो असली अर्थ हैं, जो मीभी शायद हम सब लोग समझ सकें, उन पर थोड़ा प्रकाश दलीगा, गीता के दूसरे अध्याए में, मैंने देखा कि 45 वा श्लोक है, 48 वा श्लोक है, 49 वा श्लोक है, 50 वा
00:50:17संदोजा, निरिद्दर, नित्य वस्तु परमात्मा में स्थित हो जा, योग शेम की चाहना भी मतरक और परमात्मा परायन हो जा, आगे वो कहते हैं कि, हे धननजे, तु आसकती का त्याग करके, सिद्धी असिद्धी में सम होकर, योग में स्थित हुआ कर्मों को कर, क्यों
00:50:47का जो मिमांसा वाला भाग है पूरा, पूर मिमांसा, जिसमें अधिकतर कर्मकांड है।
00:50:53तो देखो, जितनी बाते हो रहे हैं, उसब प्रक्रति के अंतरगत ही आती हैं, जो त्रिवनात्मख है सारी बाते हैं।
00:50:59यह कौन सा अशलोक है?
00:51:01यह पतालिस वाशलोक है।
00:51:02दूसरे अधिया सांख्योक, पैतालिस वाशलोक है।
00:51:05तो अर्जुन को समझा रहे हैं कि उन सब बातों के परे जाने को योग कहते हैं।
00:51:13प्रक्रति के तीनों गुणों से आगे की जो बात है उसको योग कहते हैं।
00:51:20अब शरीर तो प्रक्रति है पूरा।
00:51:34तो तुम इन तीन गुणों से आगे कहां बढ़ पाए।
00:51:39और क्रिश्न साफ साफ बता रहे हैं कि योग का अर्थ क्या है।
00:51:43इतनी बार उन्होंने इतने शलोकों में साफ साफ योग का अर्थ बताया है।
00:51:47बड़े हैरत की बात है।
00:51:49जो अपने आपको योगी बोलते हैं उन्होंने भी इसको पढ़ा नहीं।
00:51:54अब ये मुझे बड़ा अजीव लग रहा है कि एक तरफ मैं देखता हूं कि गीता पर बहुत जोड चलता है विस्ट में खूब बात करते हैं गीता की।
00:52:03और योगी भी खूब बात करते हैं। पर कहां ये दोनों एक साथ मिल जाते हैं।
00:52:08जाते हैं।
00:52:09वह जो यूनिटी है ना समरस हो जाना एकत तो वह पश्यम में पाया ही नहीं जाता उनकी समस्या ये है।
00:52:16भारत के लिए इसलत में कि भारत का सबसे बड़ा योगदान विश्व को आत्मा है।
00:52:20आत्मा वह बिंदु है जहां सब कुछ आ करके एक हो जाता है शून्य हो जाता है।
00:52:26पश्यम में तो बलकि इस वात को सम्मान दिया जाता है यदि विचार खंड खंड हों।
00:52:32कई धाराएं हों। कई धाराएं है ऐसी वात है वैसी वात है।
00:52:36स्कूल अफ थॉट है। यहां पर यह विचारा हो। आइडियलोजी है वैसा है।
00:52:40भारत ने यह जो अतुलनीय अमूलय योगदान दिया है वो यह है बताने का कि इन सब विविधताओं में तुम्हें दुखही मिलेगा।
00:52:50विविधताओं के पार जो एक है बस वहीं मुक्ति है वहीं आनन्द है।
00:52:56और वहीं पहुंचने का नाम योग है। और वहां तुम तभी पहुंच सकते हो जब तुम मन का अवलोकन करना सीखो।
00:53:03मन की जग अगर तुम तन में उलज के रह गए तो वहां कभी नहीं पहुंच पाओगे।
00:53:09तन में उलज जाना भी माया की एक चाल है। जो तुम्हें योग से दूर ले जाती है। असली योग से। और बताईए।
00:53:21इसमें, जो 48 वाशलोक है, इसमें वो कहते हैं कि हे धनिंजे, तु आसकती का त्याग करके सिध्धी-असिधी में सम होकर योग में श्थित हुआ कर्मो को कर। क्योंकि समत्व ही योग कहा जाता है।
00:53:33समत तो योग कहा जाता है,
00:53:36यह सब कुछ तुम्हारे लिए एक जैसा हो जाए,
00:53:38यह सब कुछ एक जैसा दिखाई दे,
00:53:40इसमें कोई विविधता नहीं रह गई तुम्हारे लिए,
00:53:42कि यह कम है यह ज्यादा है,
00:53:44जो ज्यादा लगा फिर उसकी और भागोगे,
00:53:46भागना तुम्हें किधर को है?
00:53:48वास्तों में तुम्हें किधर को भागना चाहिए?
00:53:50आत्मा की तरफ
00:53:50लेकिन अगर तुम्हें विविद्धता दिखाई देने लग गई
00:53:53तो यहाँ जो चीज तुम्हें उची आकरशा के मुलिवान दिख रही
00:53:55तुम्हें उसकी और भाग लोगे? लुफस गए? गड़बड हो गई?
00:53:58तो योग में इसलिए सम्ता का बड़ा महत्तो है
00:54:02मंता मिटी उठी और सम्ता
00:54:08विद्धय में सम्ता उठनी चाहिए
00:54:11सम्ता कारथिये नहीं है कि सब कुछ बराबर है
00:54:13सम्ता कारथिये किसी ऐसी ऊची चीज से प्रेम लग गया है
00:54:18जिसके आगे अभी ये सब कुछ एक सा दिख रहा है
00:54:21कैसा एक सा दिख रहा है? नगण्य
00:54:23उपेक्ष
00:54:25निकलिजिबिल
00:54:30वर्थ इग्नूरिंग
00:54:32कुछ ऐसा मिल गया है
00:54:36कि उसके आगे
00:54:37ये हो कि ये हो
00:54:40सब बराबर हो गया है
00:54:41ठंडा खाना मिल रहा है, गरम खाना मिल रहा है, सुध किसको है
00:54:44हमें प्यार हो गया है
00:54:44ये सम्ता कहलाता है
00:54:46योग के केंदर में सम्ता बैठी
00:54:49तो योग के केंदर में आत्मा से
00:54:51प्रेम बैठा है
00:54:52जहां प्रेम नहीं है वहां योग कैसे हो सकता है अधिक अधिक क्या अधिक क्या प्रेम अधिक से अधिक प्रेम हो आत्मा के लिए आत्मा माने अपनी ही उच्चतम अवस्था अपनी ही उच्चतम हालत से बहुत प्रेम है बहुत ललक है वहां पहुचने की इसको अध्यात्म
00:55:22जिस काल में शास्त्रिये मद भेदों से विचलित होई तेरी गुद्धी निश्चल हो जाएगी और प्रमात्मा शास्त्रिये नहीं है वहां पे शुरुति शब्द होगा देखना हां शुरुति शुति वो उसका आमतार पे जब यह करते हैं अनुवाद तो छुपा देते हैं
00:55:52कि सकाम श्लोक हैं वेदों के शुरुति के उनको सुनकर के तुम विक्षिप्त हो गए हो अब जब सकाम बोल रहे हैं सकाम का मतलब होता है कि मैं किसी देवता को कुछ आहुति दूंगा वियग्य वगयरा करूंगा तो उससे मुझे कुछ लाग हो जाएगा पूरा जो करमक
00:56:22और कृष्ण का जो पूरा दर्शन है वो है निश्कामता का तो वह है यहां पर समझा रहे हैं कि यह तुमने सब वेदों में कर्मकार्ण पढ़ लिया है और जो निसी से तुमारी बुद्धी खराब हो गई है विक्षिप्त हो गई हो तुम और इन सब से हट करके जब तु
00:56:52इंया और हो कि यहाँ हील गया है कांठ में बांध लिया है बाकी चीज़े हुमारे लिए ये बहुत पीछे की होग है यह निश्कामता होती है निश्कामता के केंद्र में प्रपंच बैठा हुआ है
00:57:05हम सोचते निश्कामता के अर्थ में त्याग है, त्याग तो अपने आप हो जाता है, अगर हो ना होता है, प्रेम, प्रेम साधना पड़ता है, प्रेम, तो यह सब जो तुम दुनिया भर के प्रपंच करते रहते हो, यह छोटी चीज को पा लूँ, इस से लड़ लूँ, यह �
00:57:35इसकी इच्छा रुजुन, मेरी इच्छा, मामेकम शरणम प्रज, जब तुम इतने गहरे प्रेम में पड़ जाओगे, जो एक के सिवा किसी दूसरे से संतुष्ट नहीं, तब योगी हो जाओगे, यह योग है, अब मुझे समझ मारा है कि कृष्ण को बार-बार गीता में
00:58:05इक्षे हैं, कृष्ण व्यक्ति नहीं, कृष्ण का व्यक्ति तो नहीं, कृष्ण माने कृष्ण का मर्म, वही मर्म ब्रहम और आत्मा कहलाता है वेदान्त में, और इसलिए गीता का वेदान्त में इतना प्रमुकिस्थान है, क्योंकि आत्मा और ब्रहम जो वेदान्त के प
00:58:35बस यह है कि आत्मा बोलती है नहीं क्रिश्ण बोल रहे हैं इसलिए गीता इतनी ज्यादा फिर सशक्त हो करके उभरी है
00:58:43उपनिशदों से कहीं ज्यादा रसीली है गीता रस और माधुर रहे है गीता में ज्यादा अधिक्ता में उपनिशदों की अपेक्छा
00:58:56क्योंकि उपनिशिद आत्मा को सिधान्त के रूप में बताते हैं
00:59:02और गीता में आत्मा सजीव साकार होकर के सगुण होकर के सामने खड़ी हो जाती है
00:59:07तो इसलिए बात एकदम नई हो जाती है नूठी हो जाती है
00:59:26योग क्या है और क्या नहीं इसके ऊपर पूरी चड़्चा हुई यह तो मतलब मेरे लिए काफी नहीं थी कुछ चीज हो में अब मुझे दिख रहा है कि कल जब मैं ट्विटर पे लोग के योगा दिवसके ट्वीट्स पढ़ूँगा तो मुझे अंदर यंदर कही नगई हसी
00:59:56डर लागे और हसी आवे कि हसी तो आती है लेकिन साथी साथ लोगों के लिए बड़ा दुख भी होता है कि योग जैसे उची चीज को तुमने क्या बना दिया और ये बनाने में मक्षमा नहीं कर सकता जो काम इन कमर्शियल योगा गुरूओं ने किया है और जो काम अब तम
01:00:26इछले योग दिवसवर भी पूछा था मैंने कहा था धुरंदरों महानुभावों इतना बता दो कि अगर योग का इतना संबंध इस व्यायाम से है कसरत से है और शारिरिक स्वास्त और बल से है तो हाँ जितने लोग खड़े हुए थे हदारों कुरुक्षेत्र में उनमें
01:00:56कि अर्जुन ने अब स्यायन और दिए आ निक्ता इसला यूझत से भी ज्यादा मस्बूट हो अर्जुन तो बहुत मजबूत है तो अरजुन को 18 प्रकार जहें योग कियो बताए क्रिशन को कि सिलीएouver कि योग सीधे-सीधे मन की बात है
01:01:15मन का पा जा रहा है उसको ठीक करने के लिए योग है तुम क्या बना रहे हो योग को लेखिन अब मन की सफाई का फोटोशूट हो नहीं सकता न क्या करें हमारे विचारे
01:01:27क्योई करेंगे कि आज मैंने अपना मन साफ कर आ क्या बताएंगे कि ॆज मैंने Gita का पाठद करा आज मैं योग fullest के निकट बैठा तनी डिखाते हैं अग्य देखो कि आज मैं भी योगा मैध लेकर workers लगा हुआ
01:01:46हुआ पूरा यह है कि योग के प्रपंच में जितनी गीता ने बिक्तियोंगों स्यादा योगा माट विकरें दुनिया माट
01:01:56और एक से एक अंदर से बिलकुल खाली लोग योग के प्रैक्टिशनर और इंस्ट्रक्टर दोनों बने बैठे हैं
01:02:09एक दम खाली लोग जिनके भीतर ना करुणा है ना आत्मग्यान है ना किसी तरह की कोई समझ है यहां से पूरे तरह से खाली
01:02:19और वो कहते हैं साहब हम तो दस साल से योग कर रहे हैं कोई अपने आपको योग गुरू कोई योगारूर कोई कुछ बोल रहा है
01:02:29और बहुत गर्ष भी है लोगों कोई ओलेका मैं दस साल से चवीक रहा हूँ
01:02:34मैं 5000 साल से कर रहा हूं मैं इतने लोग करा रहा हूँ
01:02:36यहां से तिल्कुल खाली
01:02:38खाली यही नहीं यह मन ऐसा जो की आत्मा से घ्रणा करता है
01:02:44आत्मा से अरुचि और द्वेश रखता है
01:02:47ऐसा मन रखने वाले लोग भी अपने आपको योग से संबंधित बता रहे हैं
01:02:53क्योंकि जब दिमाग पूरे समय हड़ चीज को देह की तरह देखा तो देह तो उनकी बहुत अच्छी है
01:03:02उसी देह के दम पर वो अपने आपको योगी सिद्ध करे रहते हैं
01:03:17लेकिन अच्छी देह माने क्या यदि जीवन का लक्ष है मुक्ते
01:03:36चेतना को उचे से उचे ले जाना तो अच्छी देह की परिभाशा भी तो उसी परिपेक्षम करनी होगी ना
01:03:46हमने कहा था कि कोई भी चीज कितनी सही इ, कितनी गलत, कितनी उची, कितनी नीची इसका निर्णे आत्मा को ही केंदर में रखकर किया जा सकता है
01:03:55तो अच्छी देह माने क्या है, एक ऐसी देह है, जिसको बनाने के लिए आप रोज चार घंटे लगाते हो, दो घंटे भी लगाते हो, दो घंटे लाने के बाद दिन भर आप यही सोचते रहते हो, कि इस पर अब मैं किस तरह के कपड़े पहन लूँ, कि और जादा अकरशक ल
01:04:25अगया है, आप हर समय देह के बारे में ही सोच रहे हो, तो देह हो सकता है आपकी बहुत स्वस्त हो, लेकिन ये देह भी आपके मन का नर्क है, तो अच्छी देह माने क्या, देह तो एक संसाधन है, एक रिसोर्स है, जिसका आपको इस्तेमाल करना है किसी उची जगह पहु�
01:04:55मन्जिल तक जाने के लिए गाड़ी चाहिए, ठीक है, आप मन है, ड्राइवर, मन्जिल मुक्ति है, और गाड़ी क्या है, शरीर, ठीक है, मन को तन में बैठ करके अपनी मन्जिल तक पहुँचना है, अब दो तरह की गाड़ियां है, जो बिलकुल बेकार होती है, एक तो ख
01:05:25और आप मन्जिल को भूल करके बस गाड़ी का ध्यान रख रहे हो कि कैसे खरीदू, कैसे इसकी किष्ट भरूँ, तो उस पर स्क्राइश न लग जाए, अब ऐसी गाड़ी दिखेगी तो बहुत अच्छी, बहुत संदर, ठीक वैसे जैसे बहुत लोगों का स्वस्थ शरीर
01:05:55अब ये गाड़ी बहुत आकरशक दिखेगी दूसरों को, लेकिन इस गाड़ी को खरीदने में तुमने अपनी जिंदगी तबाह कर ली कि नहीं कर ली, वैसे ही शरीर है, तो बहुत बुरा शरीर भी बुरा है, और ऐसा शरीर भी बहुत बुरा है, जिसको स्वस्थ और सु
01:06:25ये लोको को कही ना कही से इनपुट मिल गया है, Гारी होना चाहिए और महँंगी होनी चाहिए, मनुझा को बात fucking आूती
01:06:32तो फिर ऐसा योगा चलता है, ठीक, वही आदमी जो कहता है कि गाड़ी बहुत बड़ी होनी चाहिए, किस मनजिल जाना है यह पता नहीं, यह बिलकुल वही आदमी है, जो जबरदस्त रूप से योगा करेगा, एक दम अपना छाती होती फुला लेगा और मजबूत हो जाए�
01:07:02करना क्या है, तो क्यों उस पर इतना पैसा लगा रहा है, इतना समय है, इतनी उर्जा, मैं इसी एक्जाम्पल को थोड़ा और और खीचूं, तो बेसिकली बात यह है कि वो जो अध्यात्म के हम जो बात कर रहे थे, वो जो मनजिल है, वो चुनना, वो अध्यात्म सिखाता ह
01:07:32लोग को लेकर के सम्मान है मुझ में, बिलकुल है, ठीक है, आप यह सब जब अध्याय करते हो आसन करते हो, आप भले उसको व्यायाम बोल लो, लेकिन लाब तो उसका होता ही है, बात यह है कि छोटा लाब कहीं बड़ा नुकसान तो नहीं कर रहा है, मैं लोगों का ध्यान
01:08:02रहे हो, मनजिल को भूल गए, और इतने ही नहीं, सर्विसिंग करा के तुम खुश बहुत हो कि मनजिल मिल गई, जैसे सर्विसिंग ही मनजिल हो, अब लोग कहते हैं कि अगर मैं योग करूँगा, तो मैं जो कुछ भी करना चाहता हूँ, मैं बहतर कर पाऊंगा ना, यह कि
01:08:32अगर आप योग करते हो, तो फिर आप जो कुछ भी करते हो, उसको आप और बहतर, जादा सफूर्ती से कर पाऊंगे। गीता का श्लोक के अदर है, योगा करमसु कौशलम जिसकी है। उस श्लोक को भी विकृत करके करत रख दिया है, योगा करमसु कौशलम बिलकुल, उस
01:09:02योग इसलिए कि आप और ज्यादा निपुणता से कुशलता से जानवरों को काटना शुरू करतो। अगर करम में कुशलता को ही योग कहते हैं, तो एक कसाई का तो यही करम है कि वो काट रहा है। तो वो और कुशलता से काटेगा तो योगी कहलाएगा। योग इसलिए न
01:09:32इसलिए होता है कि आप जान पाओ कि करने लायक क्या है। जब योग आएगा आपके जीवन में, असली योग, तो आप वो सारे काम करी नहीं पाओगे जो आवज करते हो। आपको नौकरी बदलनी पड़ जाएगी, आपको व्यापार अपना बदलना पड़ जाएगा, आ�
01:10:02नकली योग में ये सब हो जाता है, कि आप हो सकता है बहुत एक भरष्ट कहीं पे कर्मचारी हो। घूस के बेना आपका काम ही नहीं चलता, तो आपको देखो, अगर मैं योगा करता हूँ, तो मैं और ज्यादा तबियत के साथ घूस खापाऊँगा, मैं काला बाजारी करत
01:10:32योग का उद्धेश? योग आपके मन को पूरी तरह बदल देने के लिए, योग इसलिए नहीं है, कि आप अपने पुराने रास्तों पर ही और तेजी से चल सको, योग इसलिए है कि आपका रास्ता भी बदल जाए, रास्ते पर चलने वाला ही बदल जाए, रास्ता तो ब�
01:11:02कि देखने वाले हैं, उनके मंद में असली योग क्या है, इसकी थोड़ी जलक मुली होगी.

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