00:00जगत की पालनहार भगवान जगनात की यात्रा इस बार 27 जून को धूमधाम से निकाली जाएगी। ये यात्रा हर साल निकाली जाती है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसा माना जाता है किस रत्यात्रा में शामिल होने भर से 100 यग्यों के समान पुर
00:30किया जाता है जिसमें भगवान जगनात के साथ उनकी बहन सुभद्रा और भाई बल्भद्र अलग अलग रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यात्रा के समापन के बाद रथ की लकड़ी का इस्तिमाल कैसे होता है। आई आ�
01:00इसके रथ में 12 वहीए होते हैं, यानि की टोटल 52 वहीए होते हैं। यात्रा से पहले लकड़ी से सुन्दर रथ को बनाया जाता है जिसकी भवयता देखती ही बनती है। इन्हें बनाने की प्रक्रिया थृतियातिसर होती है। वहीं इसे बनाने के लिए नीम के पेड़ की �
01:30भगवान जगनाथ मंदिर की रसोई में प्रसाद बनाने के लिए किया जाता है।
02:00हमारे साथ तब तक के लिए नमस्कार।
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