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Transcript
00:00सही उद्देश के लिए जूज जाओ, जिन्दगी में और कुछ रहने ही मत दो
00:03कोई पुछे सुबह क्या किया जूज रहते
00:07दो पहर क्या किया जूज रहते
00:09फिशाम क्या किया जूज रहते
00:12रात क्या किया जूज रहते
00:15सपनों में भी क्या किया जूज रहते
00:18जग ही नहीं बची कुछ और करने के लिए
00:21साधु रण में जूझ कर तूटन दे हंकार
00:26जग की मरनी क्यों मरें दिन में सौ सौ बार
00:30और जो सही लक्ष के लिए जूझ नहीं रहा है
00:33मर तो वो भी रहा है और दिन में सौ बार मर रहा है
00:35मिट जाओ ना रण में जूज के मिट जाओ और मिट नहीं भी रहे हो तो भी जग की मरनी तो मरी रहे हो ना और दिन में सौ बार मरते हो
00:42इससे अच्छा सही रण में जूज करके एहनकार को मिट जाने
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