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  • 1 year ago

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00:00Could you hear me?
00:30अरे बात ही कुछ ऐसी है, मुझे काम मिल गया
00:34हाँ तो उसमें क्या हुआ, 10-15 दिन काम मिलता है
00:38और फिर एक महिने तक खाली बैठे रहते हो
00:40घर तो मेरी ही वजह से चलता है
00:43वरना रोज खाना तक नसीब नहीं होता
00:46हाँ, पर जो मुझे अब काम मिला है
00:49वो 10-15 दिन का काम नहीं है
00:51पूरे तीन महिने का काम है
00:53और इस बार मुद्राएं भी थोड़ी ज़्यादा मिलेंगी
00:55ऐसा कौन सा काम मिल गया जी
00:58जो तीन महिने तक काम करना है
01:01हमारे गाउं में एक राम मंदिर है
01:04पर बजरंग बली का मंदिर नहीं है
01:06तो एक बहुत बड़ा मंदिर बनाया जा रहा है
01:08बजरंग बली का
01:09अरे वा ये तो बहुत ही खुशी की बात है जी
01:13इसी खुशी में आज मैं खीर बनाती हूँ
01:16खीर?
01:18यहाँ दो वक्त का खाना नसीब नहीं होता
01:20और तुम खीर बनाने की बात कर रही हूँ
01:23आप उसकी चिंता मत करो
01:26मेरे पास अभी भी थोड़ी मुद्राय है
01:28जिससे हम दोनों खीर तो खा ही सकते है
01:31और तीन महिने तक का काम मिला है
01:34तब तक आप इतना तो कमा ही लोगे
01:36कि हम छपपन भोग तर खा सके
01:39क्यों?
01:40छपपन भोग का तो पता नहीं
01:42पर इतना तो कमा ही लोगा
01:43कि थोड़ी गरीबी कम हो सके
01:45अच्छा तो मैं काम पे चलता हूँ
01:47तुम राद को खीर बना के रखना
01:49साथ में खाएंगे, ठीक है?
01:52ऐसा कहते ही माधव काम के लिए
01:54निकल जाता है
01:55वहाँ पहुँचकर ठेकेदार कहता है
01:58अरे माधव, पहले दिन ही इतनी देर
02:01तुम्हें यहाँ टिकना तो है ना
02:03कि मैं किसी और को रख लूँ
02:05अरे, नहीं नहीं ठेकेदार जी
02:08आप बस आज माफ कर दो
02:10कल से मैं समय से पहले ही पहुँच जाऊंगा
02:13पक्का
02:13ठीक है ठीक है
02:16अब काम पर लगो
02:17काम पर तो देर से आये हो
02:19पर काम ठीक से करना
02:21जी, मैं मन लगा कर काम करूंगा
02:24माधव ऐसा कहते ही
02:26काम पर लग जाता है
02:27वहीं दूसरी तरफ
02:29राधा खीर खरीदने बाजार जाती है
02:31आज तुम इतने दिन बाद
02:34यहाँ पर माफ करना
02:36आज तुम्हारे लिए
02:37कीडे लगे सस्ते चावल नहीं है
02:39लेने हैं
02:41तो यह अच्छे चावल ही लेने पड़ेंगे
02:43अरे नहीं नहीं
02:46आज मैं खीर के चावल लेने आई हूँ
02:48खीर के चावल?
02:50कहीं डाका डाला है क्या?
02:52तुम्हें पता है ना
02:53जी मुझे पता है
02:59और इसलिए मैंने इतने दिनों से
03:01सिक्के खटा भी किये है
03:03आज मेरे पती को
03:04तीन महिने के लिए काम मिला है
03:06इसी खुशी में आप मुझे
03:08पचास ग्राम खीर के चावल दे दो
03:10और ये रहे बीस तावल के सिक्के
03:13अच्छा तो ये बात है
03:23दूसरी तरफ बजरंग बली की मूर्ती आ जाती है
03:27माधव उस मूर्ती को ले जा ही रहा था
03:48कि बीच में एक केले के छिलके पर फिसल जाता है
03:51और माधव मूर्ती के साथ गिर जाता है
03:54और मूर्ती भी तोड़ जाती है
03:56ए भगवान ये क्या किया
03:59गधे इतनी कीमती मूर्ती तुने तोड़ दी
04:03तुझे अंदाजा भी है तुने क्या किया है
04:06माफ कर दीजिए ठेकेदार जी
04:08किसी ने बीच में ही केला खाकर
04:22QAYMTI MRTI HAY, ISA KUCHAWNA NAIN CHACHIYA, PER, TERE JASA MUNDBUDDHII INSANA, YER BASTA SEMUJHI NASAKTA, TERE JASA FATICARE INSANA KYAH JAINAY KİS MRTI KIKI KYEMOT KYAH HYAKH.
04:35Huh, MUJH HERE, MAARP KER DIAJAY THEKEDAR GYI, AH GAYS EASI GILTI KABHI Not HONGI.
04:40आगे से तुझे काम दूंगा तो ना होगी, तुझे आज ही मैं काम से निकालता हूँ, और हाँ, यह जो मूर्ती तुने तोड़ी है, उसके पैसे भी देगा, और अगर नहीं दे पाया, तो तुझे और तेरी पत्नी दोनों को इस गाउं से धक्के मार कर निकाल देंगे, और
05:10मूर्ती के पैसे कैसे दे सकता हूँ, वो सब मैं नहीं जानता, मैं तुझे एक महिने की महलत देता हूँ, अगर मेरे पैसे नहीं दे पाया, तो समझ लेना, अब उठ और यहां से निकल जा, और जब तक पैसे ना आ जाएं, तब तक अपनी ये मनुश शकल मत दिखाना, सम
05:40कि मैं घर पैसे लेकर आऊंगा, और हम दोनों साथ में खीर खाएंगे, पर अब सब बरबाद हो गया, भगवान ये आपने क्या किया, मेरे ही साथ ऐसा क्यों किया, भगवान आखिर मैंने अपने जीवन में ऐसे कौन से पाप किये हैं, जो आपने मुझे आज ये सिलहा दि
06:10खुशी से दो पल जीना चाहता था, उसके साथ बैठ कर खीर खाना चाहता था, पर अब तो वो खीर मेरे गले से ही नहीं उतरेगी, बेचारी कितनी खुश होगी, और मेरी रहा देख रही होगी, पर अब मैं क्या मुह लेकर जाओंगा, भगवान अब मैं क्या करूँ, भ�
06:40और पटकते पटकते वो बेहोश हो जाता है, दूसरी तरफ बहुत देर हो जाती है, पर माधव घर नहीं लोटता, कितनी देर हो गई है, पर ये है कि अब तक नहीं आए, खीर ठंडी भी हो चुकी है, इतना भी क्या काम करना, कहीं ऐसा तो नहीं, कि वो मेरे लिए कोई उ�
07:10पर माधव नहीं आता है, वहां से दो औरते गुजर रही थी, और राधा को देख कर कहती है, राधा किस की रहा देख रही है, कहीं अपने पती की तो नहीं, जिसे धकके मार कर काम से निकाल दिया गया
07:26काम से निकाल दिया गया ये क्या कह रही हो बहन
07:30अरे तुम ही नहीं पता क्या अब तक तो पूरे गाव को पता चल गया है
07:37कि तुम्हारे पती ने बजरंग बली की कीमती मूर्थी को तोड़ दिया था
07:42और इसलिए उसे काम से निकाल दिया गया है
07:45और कीमत भी चुकाने के लिए बोला है
07:48तुम्हारे तो भागे ही फूटे हुए हैं बहन
07:51जो तुमने ऐसे आदमी से बेहा किया है
07:54शांत हो जाओ, अब एक शब्द और नहीं
07:57कुछ भी कहलो पर मेरे पती के बारे में एक शब्द नहीं सुन सकती मैं
08:02तुम्हारा धन्यवाद जो तुमने ये बात मुझे बताई
08:05अब तुम दोनों यहां से जा सकती हो
08:07हाँ ठीक है ठीक है, हमें भी कोई शौक नहीं है यहां रुकने का
08:12हम तो बस तुम्हारी भलाई के बारे में ही बोल रहे थे
08:15ऐसा कहते ही वे दोनों वहां से चली जाती है
08:19और राधा माधव का रात भर इंतिजार करती रहती है
08:23और सुभा हो जाती है पर माधव नहीं आता है
08:26तभी माधव को एक सपना आता है
08:29सपना था बहुत बुरा सपना था
08:41माना कि ठेकेदार जी ने मुझसे बतमीजी से बात की
08:44लेकिन मुझे उनके बारे में ये सब नहीं सोचना चाहिए था
08:47मैं ऐसा घटिया सपना देख भी कैसे सकता हूँ
08:50अरे बेटा तुम यहां पर क्या कर रहे हो
08:57रात भर यहीं पर सोए थे क्या
09:00हाँ पंडिजी वो थोड़ी आँख लग गई थी
09:03लेकिन बेटा तुम्हें यहां नहीं होना चाहिए
09:08तुम्हारी पतनी रास्त ही परिशान है
09:10तुम्हारी प्रतिक्षा कर रही होगी
09:12पर पंडिजी घर जाके भी मैं क्या करता
09:17कैसे मू दिखाता
09:18हाँ मैंने सुना तुम्हारे बारे में
09:21कल तुम्हारे साथ बहुत बुरा हुआ
09:23किन्तु तुम चिंता मत करो
09:25क्योंकि पता चला है
09:27कि कल जिस केले के छिलके पर
09:30तुम्हारा पैर फिसला था
09:32वो केले का छिलका
09:33ठेकेदार ने ही खा कर फेका था
09:36और इस विशय में मुखिया जी
09:37और बाकी सब बात चीत कर रहे हैं
09:40देखना बात तुम्हारे ही पक्ष में आएगी
09:43आप सच कह रहे हैं पंडिजी
09:47अगर ऐसा है तो भगवान ने मेरी सच में सुन ली
09:50ए भगवान तेरा लाख लाख शुक्र है
09:53अच्छा पंडिजी आपने कहीं आग लगी हुई देखी क्या किसी के घर पर
09:58नहीं बेटा आग तो कहीं नहीं लगी है
10:02मैं अभी ठेकेदार के घर के रास्ते से आ रहा था
10:05पर मुझे तो ऐसा कुछ नहीं दिखा
10:07पर तुम ये क्यों पूछ रहे हो बेटा
10:10नहीं पंडिजी वो मुझे एक सपना आया था
10:13कि ठेकेदार के घर पर आग लगी है
10:16इसलिए मैंने पूछा
10:17अरे जल्ली चलो रे जल्ली चलो
10:20ठेकेदार के घर पर आग लग गई है
10:23ये देखो गावालों
10:26ये मन्हूस माधोई है
10:28जिसने मुझे से बदला लेने के लिए
10:30मेरे घर पर आग लगाई है
10:31तू तो नहीं बचेगा
10:33तूने मेरे घर पर आग लगाई है ना
10:35अब देख मैं तेरे साथ क्या करता हूं
10:39नहीं ठेकेदार जी
10:40मैंने यह सब नहीं किया
10:41What the hell was wrong
10:55मुखिया जी आप आप नहीं जानते ये माधो कितना बड़ा दुष्ट है इसने कल मूर्ती तोड़ दी और जब मैंने इसे काम से निकाल दिया तो इसने इसने बदला लेने के लिए मेरे घर पर आग लगा दी
11:09मुझे पता है कि किसने किया है तुम ही हो जो कल केले को खाकर कच्रे में फेंकने के बजाए बीच रास्ते में फेंक दिया और ये बेचारा मूर्ती लेकर जा रहा था तुम्हारे फेंके हुए केले के छिलके पर फिसल गया और तुम खुद की गलती मानने की जगहा इस बेच
11:39
12:09उसके बाद माधव घर चला जाता है
12:18और जाकर अपनी पत्नी को सारी घटनाई बताता है
12:21चलो, अच्छा हुआ कि मुख्या जी ने सब संभाल लिया
12:28नहीं तो पता नहीं, हमारा क्या होता
12:31हम तो पहले से ही इतने गरीब है
12:33उपर से कर्जे में पढ़ जाते, तो
12:36अब ये सब छोड़ो भाग्यवान, और जल्दी इसे कुछ खाने को दे दो
12:40बड़ी भूख लगी है
12:42हाँ, मैं अभी आपके लिए खीर गरम करके लाती हूँ
12:46तुमने खीर नहीं खाई क्या?
12:51आपके होते हुए, पहले मैं कैसे खा सकती हूँ जी?
12:54मैं अभी लेकर आती हूँ
12:56वे दोनों खीर खा लेते हैं, और देखते ही देखते रात भी हो जाती है
13:02और माधव को एक सपना आता है, जिसे देखकर वो छटपटाने लगता है
13:07ए जी, उठो जी, आप इतना छटपटा क्यों रहे हो?
13:12उठो, क्या हुआ जी?
13:14ए जी, सुनते हो
13:15क्या हुआ, कोई बुरा सपना देखा क्या?
13:20बुरा तो देखा ही, पर असली सपना भी देखा
13:24असली सपना, ये आप क्या कह रहे हो जी?
13:29हाँ, पता है, जब मैंने मंदिर में जाकर अपना माथा पीटा, तो मैं बेहोश हो गया था
13:34और मैंने सुभा एक सपना देखा था कि ठेके दार के घर पर आग लग गई थी और हुआ भी ऐसा ही था अगर मुझे दिखने वाले सपने सच होते हैं तो ये भी जरूर सच होगा हमें कुछ न कुछ तो करना होगा राधा जल्दी चलो यहां से पर कहा वो सब बाद में पू�
14:04थेके दार के आग लगाने से पहले ही
14:34गाउवाले और मुख्या जी राधा और माधव के साथ वहाँ पर आ जाते हैं
14:40मुख्या जी आप यहां पर पर आप सब को कैसे पता चला कि मैं यहां आग लगाने आया हूँ
14:49हमें माधव यहां लेकर आया है जब तुमने यह योजना बनाई थी तो माधव ने सब सुन लिया था
14:55अच्छा हुआ माधव जो तुम हमें यहां लेकर आ गए
14:59वरना हमें तो इसकी असलियत के बारे में पता ही नहीं चलता
15:03गाउव वालों इसे पकड़ लो और कल सुभा होते ही इसे महराज के सामने लेकर जाना अब वही इसका निर्णय करेंगे
15:11उसके बाद गाउव वालों ने ठेकेदार को पकड़ लिया और उसे लेकर चले गए
15:19लगता तो ऐसा ही है राधा कल का सपना तो पूरा हुआ ही लेकिन आज भी मैंने देखा कि ठेकेदार यहां आग लगाने आएगा और वो भी सच हो गया
15:29मुझे तो लगता है ये भगवान ने मुझे आशिरवास सुवरूप भेट में दी है
15:34भगवान का लाख लाख शुक्र है कि आग लगने से पहले ही आपको सपना आ गया और आपने सब सुलजा लिया नहीं तो क्या से क्या हो जाता
15:45अब उसकी चिंता मत करो अब सब ठीक है अब चलो चल कर सो जाते हैं क्या पता फिर कोई सपना आ जाए अब तो मैं भविष्य देख सकता हूँ तो अब मेरा तो सोना अत्यांत महत्पून है
15:59उसके बाद दोनों जाकर सो जाते हैं
16:03ए जी सुभा हो गई अब तो उठ जाओ कि दिन भर सपने ही देखते रहोगे
16:15कितना अच्छा सपना देख रहा था और तुम हो कि देखने ही नहीं देती
16:21ऐसा क्या देख रहे थे
16:23यही कि हम दोनों अमीर हो गए हैं और हमारे हाथ खजाना लग गया है
16:28और हमारा जीवन ऐसा नहीं रहा जैसा की है
16:32पर अफसोस ये तो बस एक सपना था और सपने कहां सच होते हैं
16:37तो क्या अब हम सच में अमीर हो जाएंगे
16:41अमीर, ये कैसी बात कर रही हो रहा था, मैंने कहा न, ये बस एक सपना था
16:47लेकिन आपको तो सच के सपने आते हैं न
16:51सच के सपने? अरे हाँ, दो दिनों से मैंने जो भी सपने देखे, वो सब सच हो गए, इसका मतलब है की
16:59ये सपना भी जरूर सच हो सकता है, जल्दी बताईए, कि वो खजाना आपने कहा देखा है, हम अभी वहाँ जाएंगे और खजाने को बाहा निकाल लाएंगे
17:10मुझे ठीक से तो याद नहीं, लेकिन एक खेत में मैंने देखा, जो पूरी तरहां से बंजर था, और उसके बीच में एक अलग तरहां का पौधा लगा हुआ था, ठीक उसी के नीचे वो खजाना चुपा हुआ था
17:24बंजर जमीन? इस गाउं में तो कम से कम छे से जादा ही बंजर जमीन है, और अगर दूसरे गाउं की जमीन पर छुपा होगा, तो खोजना बहुत ही मुश्किल है, पर जो भी हो, खजाना चाहिए, तो खोज तो करनी ही पड़ेगी
17:39उसके बाद राधा और माधव दोनों ही गाउं की बंजर जमीन को खोजने निकल गए, पर बहुत देर तक भी खोजने पर वो जमीन नहीं मिल रही थी
17:58पक्का आपने यही सपना देखा था ना जी?
18:02अरे हाँ, मैंने देखा तो यही सपना था
18:05तो फिर वो जमीन मिल क्यों नहीं रही है? कहीं वो दूसरे गाउं में तो नहीं, आब हम कौन से गाउं में खोजें?
18:13यह तो बड़ी समस्या की बात है, लेकिन अभी भी एक जमीन बची हुई है, जो पूरी तरह से बंजर है, एक बार उसे भी चल कर देख लेते हैं, क्या पता मिल जाए?
18:24उसकी बाद माधव और राधा दोनों उस जमीन को देखने के लिए चले जाते हैं, जब वो दोनों उस जमीन पर पहुँच जाते हैं, तो देखते हैं कि उस बंजर जमीन पर सच में एक अलग तरह का पौधा लगा हुआ था
18:39फिर वे दोनों पौधे को हटा कर वहाँ पर खोदना शुरू कर देते हैं, कुछ देर तक खोदने के बाद वहाँ सच में एक संदूक रखा था, जब वे उस संदूक को गड़े से बाहर निकालते हैं और खोलते हैं, तो उसमें सच में खजाना निकलता है, जिसमें कई स्�
19:09अगवान, इतने सारे स्वर्ण मुद्राएं, इतने तो मैंने अपने पूरे जीवन में भी कभी नहीं देखे, ये सच है, ये कोई सपना
19:19राधा, ये सपना ही तो है, जो अब पूरा हो गया है, अब हमें गरीवी से भरी हुई जिन्दगी, जिसमें दो वक्त का खाना तक नसीब नहीं होता था, वो जिन्दगी अब नहीं जीना पड़ेगा
19:30हाँ, वो तो है, मुझे तो अभी भी विश्वास ही नहीं हो रहा, किन्तो अगर हम इतने सारे स्वर्ण मुद्राए लेकर जाएंगे, तो गाउवालों को शक नहीं होगा
19:42जो कल तक इतने गरीब थे, वे रातो रात इतने अमीर कैसे हो गए, कहीं वो हमारे स्वर्ण मुद्राओं को हडप लिये तो
19:50बात तो तुमने सही कही रहा था, एक काम करते हैं, इस गाउव से ही चले जाते हैं
19:57गाउव से चले जाते हैं, ये आप क्या बोल रहे हैं जी
20:01और नहीं तो क्या, अगर हम यहां रहेंगे, तो गाउवाले हमें इतनी सारी स्वर्ण मुद्राओं के साथ रहने नहीं देंगे
20:08और अगर हम दूसरे गाउव चले गए, तो किसी को भी नहीं पता चलेगा, क्योंकि हमें कोई पहचानता ही नहीं होगा
20:14सारे लोग हमें शुरू से ही अमीर समझेंगे, और वहां हम शान्ती से अपना पूरा जीवन बिता सकते हैं, बिना किसी दिक्कत के
20:22ऐसा कहते ही वे दोनों उस खजाने को लेकर दूसरे गाउव जाने लगते हैं, ये सोच कर कि अब वो अपना जीवन खुशी से अमीरो वाली तरह से बिताएंगे, पर उन्हीं क्या पता था कि उनके दर्वाजे पर कौन सी मुसीबत दस तक दे कर बैठी थी
20:40महराज, हमने ओछ चोर को पकड़ लिया है, जो हमारे राज़कोर्च से धन चुरा कर भाग गया था
20:48हम, बहुत बढ़िया मंतरी जी, आपने अच्छा काम किया, तो बताओ चोर, कहां रखा है मेरा धन, अगर सीधी तरह से बता देते हो, तो मैं तुम्हें ज़्यादा कश्ट नहीं दूँगा, परंतु अगर तुमने नहीं बताया, तो तुम्हारे शरीर के टुकड़े टु
21:18मुझे छोड़ दीजिए, मुझे छोड़ दीजिए, तुमसे किसने कराया ये, या किसलिए किया, ये मैं नहीं पूछ रहा हूँ, मेरा धन कहां है, ये बताओ, जी महराज, वो धन मैंने पास के ही गाउं में एक बंजर जमीन पर गार रखा है, और उसके उपर मैंने एक ज
21:48उसके बाद इस चोर का फैसला किया जाएगा, जी महराज, जैसा आप कहें
21:54ऐसा कहते ही मंत्री उस चोर के साथ उस स्थान पर जाता है, जहां पर चोर ने खजाने को गारा था
22:02ए भगवान, ये क्या हो गया, मैंने तो यहीं पर रखा था
22:07ऐसा कहते ही सैनिक चोर को ले गए, और मंत्री जी उस चोर को खोजने में लग गए, उन्होंने उस गाव का चपपा चपपा देखा, पर वो चोर नहीं मिला, तो मंत्री जी पास के ही एक गाव में चले गए
22:26अरे मित्र सुना क्या, हमारे गाव में एक बहुत धनी लोग आए हैं, और उन्होंने वो घर खरीद लिया है, जिसे सिर्फ बहुत धनी लोग ही खरी सकते हैं
22:36मुझे तो लगता है कि कोई वैपारी होगा, जिसके महराज के साथ अच्छे संबंध हो सकते हैं
22:43तो हमें उसके साथ नर्मी से पेश आना चाहिए, और हमें उसके साथ दोस्ती भी करनी चाहिए, पाइदे में रहेंगे
22:50सही कहा मित्र
22:52मंत्री उनकी ये बाते सुन लेता है, और उस व्यपारी से मिलने उसके घर चला जाता है
22:59जी कहिए महाशे, आप कौन है और हमसे क्या काम है
23:05मैं, मैं तो बस महराज का सेवक हूँ
23:08मुझे पता चला है कि आपके पास बहुत सारा धन है
23:12और आप एक वैपारी भी है
23:14तो हमारे महराज ने बस अपने समझोते के लिए आपको बुलाया है
23:19अरे नहीं नहीं मंत्री जी, मैं कोई वैपारी नहीं हूँ
23:23ये तो मेरा पुस्पैनी खजाना है
23:25जो मेरे दादा परदादा के हैं
23:27उन्होंने इतनी महनत की और इतना सारा धन बचा के रखा
23:31आने वाले भविश्य के लिए बस और कुछ नहीं
23:35तो क्या आप यहाँ वैपार नहीं करने वाले
23:37अगर आप यहाँ वैपार करेंगे
23:39तो और भी पैसे कमा सकते हैं
23:42आपने सुझाओ तो अच्छा दिया है मंत्री जी
23:45पर अभी नहीं
23:46इस बारे में मैं किसी और दिन सोचूंगा
23:48अच्छा तो क्या मैं आपके
23:51पुस्तैनी खजाने को देख सकता हूँ क्या
23:53वो क्या है न कि महराज
23:55सामने वाले की हैसियस से कर लगाते हैं
23:58आपके पास जादा पैसे होते हैं
24:00तो आपको जादा कर्ज देना पड़ता है
24:02परन्तु वो सुविधाएं भी आपको दी जाएंगी
24:05जो अन्ने वैक्तियों को नहीं दी जाती है
24:07बस इसलिए मुझे आपका खजाना देखना है
24:10जी अगर ऐसी बात है
24:13तो आप मेरा खजाना देख सकते हैं
24:15तो मेरा शक बिलकुल सही निकला
24:19ये वही संदूप है जिसे चोर ने चोरी किया था
24:22और जरूर ये उस चोर का ही साथी होगा
24:25माफ कीजिया महाशे
24:28परन्तु आपको मेरे साथ महराज के पास जाना होगा
24:32महराज के पास?
24:35परन्तु क्यों? कुछ गड़वड है क्या?
24:39अरे नहीं नहीं कोई गड़वड नहीं है
24:41असल में आपके पास कुछ जादा ही अधिक धन है
24:44तो आप पर कितने कर लगाए जाएंगे
24:46और कितनी सारी सुविधाएं दी जाएंगी
24:49इसी विशे पर बात चीत करने के लिए
24:51आपको मेरे साथ जाना पड़ेगा
24:54महाशय आपको कोई दिक्कत तो नहीं
24:57अरे नहीं नहीं कोई दिक्कत नहीं है
24:59बस आप मेरी पतनी को आने दीजिए
25:01वो सबजी लेने बाजार गई हुई है
25:03अगर मैं उसे बिना बताय चला गया
25:05तो वो बेचारी चिंता करती रहेगी
25:08उसकी कुछ ही देर बाद
25:10उसकी पतनी बाजार से आ जाती है
25:12ये कौन है जी
25:14आपकी कोई मित्र है क्या
25:16अरे नहीं नहीं
25:18ये तो महराज के सेवक हैं
25:19करके सिलसले में बात करने आये थे
25:21तो मुझे भीन के साथ महल जाना पड़ेगा
25:24तुम घर का अच्छे से ध्यान रखना
25:26ठीक है राधा
25:27तो क्या आप ही मंत्री जी है
25:29जो चोर की तलाश कर रहे हैं
25:32मैं जब बाजार गई थी
25:33तो सब इसी बारे में बात कर रहे थे
25:36एक चोर ने राजकोश से
25:38धन चुरा कर एक बंजर
25:39जमीन में गार दिया था
25:41अब वो खजाना गायब है
25:43मंत्री जी उसी चोर को खोज रहे हैं जी
25:45मंत्री चोर की तलाश
25:47ये क्या बोल रही हो राधा
25:49तो क्या हमें जो खजाना मिला था
25:52वो चोरी का था
25:53तो तुम दोनों को पता ही चल गया
25:56देखो अब भागने का कोई फायदा नहीं है
25:59अब तुम नहीं बस सकते
26:01इसलिए अच्छा यही होगा
26:03कि चुप चाप मेरे साथ महल चलो
26:05देखिये मंत्री जी
26:07इसमें मेरे पती की कोई गलती नहीं है
26:10उन्होंने खजाने को नहीं चुराया
26:12हमें तो खजाना गड़ा हुआ मिला है
26:14तो हमने ले लिया
26:16हमसे बहुत बड़ी भूल हो गई
26:18मंत्री जी
26:18हमें माफ कर दीजिए
26:20मैं तुम्हें मूर्ख दिखता हूँ क्या
26:23वो जमीन तुम्हारी थी ही नहीं
26:25तो फिर तुम उस जमीन में क्यों जाओगे
26:27और खोत के देखोगे
26:28जिसे पता ना हो कि खजाना कहा है
26:31वो नहीं ढून सकता
26:32ऐसा हो ही नहीं सकता
26:34कि तुम्हें पता ना हो
26:35और तुम्हें पता तभी हो सकता है
26:37जब तुम चोर के साथ मिले हुए हो
26:40मंत्री जी
26:41ये सा मेरा करा धरा है
26:43इसमें मेरी भोली पतनी को कुछ नहीं पता
26:46आप किरप्या करके
26:47इसे जाने दें और मुझे लेकर जाएं
26:50अगर ऐसा है तो ठीक है
26:53तुम ही चलो मेरे साथ
26:54महराज ये रहा वो चोर
26:57जिसके साथ मिलकर उस चोर ने
26:59स्तंदूग चुराया था
27:00तो तुम हो वो
27:02सैनिको उस चोर को यहाँ लेकर आओ
27:05क्या यही है वो
27:07Jis ke saat tum nne mil kar chori ki tii
27:10Jee maharaj, yehi hai
27:12Yehi hai wu meera mitra
27:14Is ki lembai aar kud kathi
27:16Usi ke jaisi hai
27:18Aur wu ankhjien bhi
27:19Wiesi eme maharaj
27:21Hmm, tum hai is bara mei kuch kehena hai kya
27:24Nahi maharaj
27:26Mwen bas itna hi kohun ga
27:28Kis me meri patesni ka
27:30Koji hant na hai tha
27:31Woh to biechani mazum hai
27:33Usse in sub maamulou me
27:35Mat ghasiti yeega maharaj
27:37ठीक है सैनेकों इन दोनों को ले जाओ और डाल दो हमेशा हमेशा के लिए कारागार में
27:44एक बात बताओ चोर भाई तुमने मुझे अपना साथ ही क्यों बताया
27:49ये क्या कह रहे हो मित्र तुमने मेरे साथ मिलकर चोरी की तो मैं तुम्हारा ही नाम लूँगा
27:55पर मैं तो तुम्हें जानता ही नहीं
27:58तो मैं कौन सा तुम्हें जानता हूं मित्र
28:00ये लोग अपने आपको बहुत ही होशियार समझते हैं
28:07पर एकदम मूर्ख हैं मैंने जो कहा उसे ही सचमान बैठे
28:11I've never had to mention it
28:14and then get upset for making it
28:16and about this happened
28:17because I've made a joke
28:18so this has been my heart
28:19so I've never told that
28:20So this means you've made a joke
28:22so that you've got to get out
28:24so that they get out of the race
28:25so how do you get out of the race
28:26and then get upset?
28:28Or not?
28:29No, I've done that
28:30but I don't know how to get out of it
28:32and then we have to get out of it
28:34but I have to get out of it
28:36that I have where I am going
28:39मैं कहूंगा तब भी तुम विश्वास नहीं करोगे इसलिए जाने दो
28:44अरे क्यों नहीं करूंगा ये लोग बेवखूप हैं मैं नहीं तुम कहो तो सही
28:49मुझे सपने आते हैं जिसमें मैं भविश्य देख सकता हूँ
28:54Then he told us a whole story.
28:58He said this story to us.
29:03Bhavishwaalese, this is what can happen?
29:06It can be possible that this could happen?
29:09It's really difficult to do with you.
29:13But you have a lot of confidence in your own partner.
29:16You have a lot of confidence in your own partner.
29:18You have a lot of confidence in your own partner.
29:21So I have a confidence in your partner.
29:24Oh
29:54Pran to maharaj ke sankat meh hai na, tumhare to nahi.
29:58Maharaj ke pran meere pran hai, agar maharaj ko kuch ho gaya,
30:02toh ye raajjib bahut sankat meh a sakta hai, tum nahi samjho ghe.
30:06Sainikon, sainikon, utho.
30:09Auré kya ho gaya, kyao chilla raha hai etni rath ko, pani khatm ho gaya kya?
30:14Pani nahi khatm hua hai, maharaj ke pran khatrye mein hai.
30:18Kya kaha? Maharaj ke pran khatrye mein hai,
30:20aur tujhe kaise pata chal gaya, koii sapan na dhekha kya?
30:24Woh, woh meh bazar meh kishi ko kahte huay suna tha,
30:27ki maharaj ko zahir dhenne wale hai, unke shربat mein.
30:31Tujhe hum koi murk lagtate hai, agar bazar meh tu ne aisa suna,
30:35toh tabhi kio nahi kaha, abhi kio kaya raha hai?
30:38Chhodde bhai, yeh teeri baat nahi samjhenge,
30:41bol kar koji fayda nahi hai, soja.
30:44Pır, maharaj?
30:46Dek bhai, tu joh kar saktata tha, tu ne woh kia,
30:49isse zahadha, tu kuch nahi kar saktata, ab soja.
30:54Aisasa kehani ke baad, chor soja ta hai,
30:57aur maharaj toh rata bhar parishan raha ta hai,
31:00aur so nahi paata,
31:01subha honi ke baad, maharaj ko maharaj ke paas bulaaya jata hai.
31:06Maharaj, aap zindah hai?
31:09Toh kya tum chahate ho, mai mar jau?
31:12Nahi maharaj, woh toh bhas mujhe eek bura sapna aya tha,
31:15isi liye.
31:16Yehi na, ki hume kisi ne zahir dhe kar maar ڈala?
31:20Haa maharaj, par, aapko kaise pata?
31:24Jab kal hamne tumhye karagar mee ڈala,
31:26toh tumhari patnini aayi thi,
31:28aur keha rahi thi,
31:29ki tumhye sapnye aate hai,
31:31joh bhavish me hone wali ghatnaye dikhatte hai,
31:34hume pehle toh laga,
31:35ki woh tumhye bachane ke liye jhut bol raha hi thi,
31:38aur jab tumhne sainik se maharaj ko zahir dhene wali baat kahi,
31:42toh sainik meere paas aya tha,
31:44aur usne mujhe ye baat batai,
31:46jab maine eski chhanbine ki,
31:48toh mujhe pata chala,
31:50ki sevi ka,
31:50dúsare raja ki dushman ke ke kehenne pere,
31:53shurwet mee zahir mila kar rai thi,
31:55jab maine usse shurwet pine ko kaha,
31:57toh woh ڈar gai,
31:58aur dar ke karan,
31:59usne apna sara saj bita diya,
32:02aur isi liye,
32:03hum tumhare sapani wali baat ko inkar nahi kar sakti,
32:07tumhari patnini ne kaha,
32:08ki woh khazana tumhne apne sapani mee dhekha tha,
32:11tumhne chori nahi ki hai,
32:13isi liye hum tumhne azad karte hai,
32:16kiya ap satch kehen raya hai,
32:18maharaj,
32:19aapka dhannye waad,
32:20kiya apne meeri patnini ka vishwaas kiya,
32:23aur mujhe chhod diya,
32:25sirep tumhne hi nahi chhoda hai,
32:27tumhne hemari jahan bachai hai,
32:29isi liye woh ghar,
32:30jishe tumhne hemari rajkoz se khariida,
32:33woh ghar hem tumhne naam ke tawar par dheteteya hai,
32:36aur tumhne hem eek pad bhi dheteteya hai,
32:38jahha tumhne manntiri ji ke saath kama karna hooga,
32:41tumhane sapano ke karan,
32:43humhari bahuat madd hooggi,
32:45toh batau,
32:46kya tum meere yahan kama karna chahoghe,
32:49ji maharaj,
32:50aapka koti koti dhannye waad,
32:52maharaj,
32:53kiya apne mujhe ees yoggyi samjha,
32:55मै kal se hi kama par lak jauunga maharaj,
32:57am mujhe jane ki aagyaya dhe,
32:59mujhe ghar ja kar,
33:01radha ko ye ee khushkabri dheni hai,
33:03woh biečari chintah kar rahi hooggi,
33:05aisa kehteteyi maadhav ghar chala jata hai,
33:08aur radha ko sari baat bata dhetta hai,
33:11ab unhye gariibhi se chhutkara mil jata hai,
33:14aur isi khushi me,
33:15woh dhonoh mandir ja kar bhaagwaan ko shukriya kerteteya hai,
33:19aapka koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti koti
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