00:00होटल 99 का कमरा, वासना और बदला, एक डरावनी और रोमान चक कहानी, शहर से दूर एक पुरानी पहाड़ियों के बीच छिपा हुआ था एक भव्य लेकिन सुनसान होटल, होटल 99, वर्षों से यह होटल वीरान पड़ा था, लोग कहते थे कि उसके कमरे नंबर 306 में कभी कि
00:30नेहा बहद होट और आकर शक्ती, छरहरी कमर, कसा हुआ शरीर, गहराई लिये हुए आँखें और होंग जो किसी की भी राते बेचैन कर दें
00:37राहुल उसका बॉइफ्रेंड था, लंबा, गठीला और जुनून से भरा हुआ लड़का, जिसकी नजरे हमेशा नेहा के बदन पर थहरी रहती थी
00:45सुनो, हमें इसी होटल में रहना है, नेहा ने मुस्कुरा कर पुछा, हाँ, रोमांच चाहिए था न, तो लो अब, राहुल ने आँख दबाते हुए कहा
00:54रूम नंबर 305 उन्हें दिया गया, उनके ठीक बगल में था, कमरा 306, जो सालों से बंद था
01:00रात का समय, बारिश धीरे धीरे शुरू हो चुकी थी, नेहा ने बातरूम से निकल कर टौवल में खुद को लपेट रखा था
01:07उसके गीले बाल और त्वचा की भीगी चमक से राहुल का शरीर कांप उठा
01:11वो पास आया, नेहा को बाहों में लिया और उसकी गर्दन पर होंट रख दिये
01:16नेहा सिहर उठी, रुको न राहुल, कोई देख लेगा, कौन देखेगा, ये होटल तो खाली है
01:22उनकी सांसे तेज हो रही थी, नेहा के होटों से आहे फूट रही थी, कमरा का मुकता और प्रेम से भर चुका था
01:29लेकिन तभी, एक थंडी हवा का जोका कमरे में घुसा, नेहा के टौवल के सिरों ने खुद बखुद खुलना शुरू कर दिया
01:36राहुल पीछे हट गया, ये क्या था, उसने कहा, नेहा ने दर्वाजे की और देखा, और देखा की कमरा 306 का दर्वाजा खुला हुआ था
01:45अंधेरे में कोई चाया थी, एक औरत की पर चाय, उसके लंबे बाल और लाल आँखे डर पैदा कर रही थी
01:51उसके होंठों पर हसी थी, पर मोहक नहीं, भयानक, तुम्हें मजा आ रहा है न, एक रहस्यमई आवाज गूंजी, मानो कमरे की दिवारे बोल उठी हो
01:59नहा चिल्लाई, पर राहुल पल के जपक भी नहीं पाया, उसकी आँखों के सामने नहा का शरीर धीरे धीरे बिस्तर से उपर उठने लगा, मानो कोई अद्रिश्य ताकत उसे हवा में उठा रही हो
02:09नहा के शरीर पर अद्रिश्य हाथ चलने लगे, उसकी जांगों पर, उसकी गर्दन पर, उसकी चाती पर
02:15वो काम प्रही थी, डर और किसी अंचाही अनुभूती के बीच
02:19राहुल, बचाओ, उसकी आँखों में आंसु थे, लेकिन राहुल जड़ हो गया, वो हिल भी नहीं पाया
02:26मैंने भी प्यार किया था, मेरे साथ भी वादा किया था, और फिर, मुझे इस कमरे में जला कर मार डाला गया, वो आवास फिर गुंजी
02:34वो आत्मा, एक पुरानी रिसेप्शनिस्ट की थी, मीरा, जो एक बार इसी होटल में काम करती थी
02:39एक अमीर आदमी ने उससे प्यार का वादा किया, फिर उसके शरीर का इस्तेमाल कर उसे जला दिया, और वो कमरा 306 उसकी कबर बन गया
02:47अब मीरा हर उस लड़की से बदला लेती थी, जो अपने प्रेमी के साथ वहाँ आती थी, उसके शरीर का उप्योग करती, और उसकी आत्मा को अपने साथ बांध लेती
02:55नेहा की चीखे धीरे-धीरे सिस्कियों में बदल गई, तू भी अब मेरी है, हमेशा के लिए, आत्मा ने कहा
03:01और उसके बाद एक जोरदार चीख पूरे होटल में गुंजी, और फिर सननाटा
03:06सुबह रिसेप्शन पर राहुल अकेला देखा गया, बेहाल, आखों में डर और होटों पर पसीना
03:11उसने पुलिस को बुलाया, सब बताया, लेकिन कमरे में न कोई नहा मिली, न कोई सबूत
03:16कमरा 306 फिर बंद कर दिया गया
03:19आज भी अगर कोई कपल होटल 99 के पास से गुजरता है, तो एक लड़की की आवाज सुनाई देती है, राहुल
03:25मुझे वापस ले चलो
03:27होटल 99 का कमरा, भाग दो अंतिम भाग, वासना, आत्मा और अंतिम मोक्ष, एक लंबी, दरावनी और सेंसूल हिंडी होरर कहानी, थर्ड पसंड नेरेशन में
03:37पिछली बार, होटल 99 के कमरे नंबर 306 में निहा की आत्मा एक वासना से भरी आत्मा मीरा के कबजे में चली गई थी
03:44राहुल बेबस था, उसकी आँखों के सामने उसकी प्रेमिका की आत्मा को एक भूतिया ताक्त ने निगल लिया, और वा खुद पागलपन की कगार पर पहुँच गया
03:52अब कहानी आगे, तीन महीने बीच चुके थे, राहुल अब भी जीवित था, पर शरीर से ज्यादा उसकी आत्मा मरी हुई थी
04:00ना खाने में स्वाद था, ना नीन में सुकून, राते उसके लिए केवल चीखे लेकर आती थी
04:05वो हर रात नेहा के सपने देखता, वो चीक रही होती, और कोई अद्रिश शक्ती उसके शरीर को भोग रही होती
04:11कभी उसकी जांगों पर किसी की उंगलिया होती, कभी उसकी गर्दन पर लाल होटों के निशान
04:16और नेहा कहती, राहुल मुझे इस नरक से निकालो
04:20एक रात राहुल ने फैसला किया, वो एक बार फिर होटल 99 में जाएगा
04:24इस बार सिर्फ डर को खत्म करने नहीं, नेहा को आजाद करने के लिए
04:28एक काली रात होटल का रास्ता फिर से खुला
04:31भारी बारिश, कड़क्ती बिजली और वीरान सरकें, मानो खुद प्रकृती भी राहुल को रोगना चाहती हो
04:37होटल के अंदर सब वैसा ही था, सन्नाटा, पुराने फनीचक और दिवारों पर धूल जमी हुई
04:42लेकिन कमरे नंबर 306 की कुंडी अभी तूटी हुई थी, वो खुला पड़ा था
04:48जैसे ही राहुल अंदर गया, एक जोरदार जोका उसे कमरे के बीच फेक गया
04:52दर्वाजा अपने आप बंध हो गया, आवाज आई, तू फिर से आया है, नेहा को लेने
04:58कमरे में चारों तरफ धोआ पैलने लगा, बिस्तर पर फिर से वही नगना आकरिते उभरने लगी, नेहा की आत्मा, जो अब भी मोहक और भयावे दोनों लग रही थी
05:07उसकी आँखे लाल थी, शरीर जुका हुआ, और उसकी आवाज में पीडा की जंकार थी
05:12राहुल, अब बहुत देर हो चुकी है, नहीं नेहा, मैं तुझे इस नर्क से निकालने आया हूँ, तुझे इस चुडैल मीरा से आजाद करवाने आया हूँ
05:20नेहा की आत्मा कापी, मानो कोई भीतर से खीच रहा हो, और तभी दीवार से एक परच्छाई निकली, मीरा
05:27लाल साड़ी, बिना पलक जपकती आँखें और जहरीली हसी, उसकी चाल में कामुकता थी, पर उसके इरादों में मौत
05:34राहुल, तु क्या समझता है, ये शरीर अब मेरा है, और इस आत्मा से मैं हर रात खेलने वाली हूँ
05:40तरपाऊंगी इसे, जैसे मुझे तड़ा पाया गया था, राहुल ने एक पुरानी पूजा की माला निकाली, जो वो किसी तांत्रिक से लेकर आया था
05:48मीरा, तुझे वासना की आग में जलाया गया था, लेकिन अब मैं तुझे मुक्ती दूंगा, अगनी से नहीं, सत्य से
05:54और उसने जोर से चिलाया, ओम क्लीम कालिका नमा है, कमरा थर-थराने लगा
06:00मीरा चीकने लगी, उसकी तवचा जलने लगी, उसके बाल राक में बदलने लगे
06:04नहीं, ये शरी, ये आत्मा, मेरी है, मुझे भोगने दो
06:09नहा की आत्मा तड़पने लगी, पर अब मीरा की पकड़ कमजोर हो चुकी थी
06:13राहुल बिस्तर पर गया, नहा का चेहरा अपने हाथों में लिया
06:17नहा, मैं यहाँ हूँ, वापस चलो मेरे साथ
06:20नहा की आँखों से एक आशु गिरा, वो मौम की तरह पिगल रही थी
06:24मीरा अब भस्म बन चुकी थी, एक चीक के साथ वो आग की लपट में बदल गई
06:28और फिर धुए में मिल गई, कमरा 306 में अब सिर्फ दो आत्माए थी
06:33एक इनसानी राहुल और एक भूतिया, लेकिन अब शुध नहा
06:36नहा ने मुस्कुरा कर कहा, मुझे मुक्त कर दिया राहुल, अब मैं जा सकती हूँ
06:42नहीं, तुम यही रहो मेरे साथ, मेरा समय अब नहीं है, लेकिन एक दिन, जब तू फिर आएगा, हम फिर मिलेंगे
06:49और उसकी आत्मा एक सफेद रोशनी में बदल कर हवा में घुल गई, राहुल को बेहोशी की हालत में होटल के मालिक ने धून निकाला, कमरे नमबर 306 की रात में पड़ा हुआ, उसने देखा, दीवार पर कोई नाम लिखा गया था, खून से, नहा मुक्त है, होटल 99 को उस
07:19झाल