00:00नवस्कार में हुश्रमस ताहर्खान और आप देख रहे हैं वारदात
00:19क्यामत सिर्फ चंड सिकन की थी
00:22पर उस क्यामत से उबरने में उत्तरकाशी को सालों लग जाएंगे
00:27एक एक बस्ती को बसाने और समारने में सदियां लग जाती है
00:31पर उजड़ने में फक्त चंड सिकन क्यामत की जलक तो आपने उत्तरकाशी में देख ली
00:38पर यकीन मानी क्यामत की बात की तस्वीरे भी किसी क्यामत से कम नहीं है
00:43गुसा बादल में लिप्टी महुत के बाद आस्वों की सुना में जब थमी
00:49तो लरस्ती जमीन और खामोश नदी की लहरे अपने पीछे वो कहानिया छोड़ गए जो बरसों सुनी और सुनाई जाती रहेंगे
01:13बादलों के दर में कुछ ऐसी साजिश होई
01:27मेरा घर मिट्टी का था मेरे घर बारिश होई
01:40उसको भी जिद है बादलों को गिराने की
01:43और हमें इससे थे वही घर बसाने की
01:47मेरा आपको अच्चाने की
01:56मेरा आपको जाको जाको जाको की
02:01जिह साजश आसमानी थी आफ़त जमीन ने झेली
02:17बादलूं के भी जगणा था तबाही जमीन को झेली पुरी
02:25गुस्सा उपर आसमान में भूटा सैलाब नीचे जमीन पर आए
02:35पुद्रत का कहर तो अपना काम कर चुका था बस्की की बस्की बरबाद हो चुकी अब कुछ बचा है तो बस बरबादी का मन्ज़
02:50वो मन्ज़ जिस्वे इंसान और भगवान सब एक से दिख रहे
02:58देखते ही देखते सब पानी पानी हो गया
03:19अबे बाई अरे राम अरे राम अरे राम पांचे वाले पिचाए अरे राम
03:23खर उटेल रिजॉर्ट सराए लोज तुकाने सडकें टावर सेना के गैम फेली पैंट
03:33यानी चिन के सहारे जिन्दगी कुद्रत को करीब से देखने का होसला कर पाती है
03:48वो सारे सहारे पानी पानी हो गए
03:51एक आशियाना बनाने में पूरी जिन्दगी बीच जाती है
04:11तो जरा सोची कि पूरी बस्ती बसाने में कितना वक्त लगा होगा
04:16बस्ती कैसे और कितनी मुद्दब में बस्ती है
04:25ये तो हम आपको नहीं दिखा सकते
04:27अलबत्ता एक पूरी की पूरी बस्ती कैसे सिर्फ 34 सिकंड में बरबाद हो सकती है
04:34कैसे उस बस्ती का नाम और निशान 34 सिकंड में मिट सकता है
04:39यह हम आपको जरूर दिखा सकते हैं
05:09यह देखें जी नहीं पहाड़ों से उतरती नदी की ये खौफनाक लहरे अपने साथ कोई कच्रा नहीं बलके पूरी की पूरी बस्ती को उखार कर ले जा रही है
05:29सद्धियों से खुद्रत ने जब जब अपने तेवर बन ले तो तवाही के ऐसे ऐसे निशान छोड़े जो एक पल में इनसान और इनसानी बस्तियों को मिटा गए
05:47खुद्रत के कहर ने कई कई बार अंगिनत जिंदगियों को हमेशा हमेशा के लिए खामोश कर दिया
05:54मासूम और बेगुनाह कुद्रती कहर के आगे बेबस और लाचार नज़र आए
06:03कुद्रत हर बार बेधड़क कहर बरपाती रही और इनसानी बस्तियों उजड़ती रही
06:12क्योंकि कुद्रत की ताकत पर इनसानी गानून का बस नहीं चलता
06:17माफ कीजिएगा लेकिन अगर कुद्रत भी कहीं इनसानी गानून की जड़ में आता
06:25और इनसानों के लिए कुद्रत को सजा देबाना मुम्किन होता
06:29तो नमालूम उसे अब तक कितनी बार सजा मौन मिल चुकी होती
06:34गुसा बादल और बेलगाम लहरों का उत्रा खंड में क्या असर हुआ
06:42इसे समझने के लिए बस इस एक तस्वीर को देखना ही काफी है
06:46कितनी खुबसूरत तस्वीर है यह हिमाले की दरार पर बसा यह धराली गाओं है
06:53गंगोतरी हाईवे के करीब बसे इस गाओं की खुबसूरती किसी की भी आँखों को खुशनुमा करते
07:01करीब साथ सो लोगों का परिवार इस गाओं के तेर सो घरों में रहता है
07:07अपनी खुबसूरती के चलते यह टूरिस्टों की पसंदीदा जगा है
07:12मंगलवार की दोपहर के ठीक बारा बच कर चालीस मिनट हुए थे
07:17लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में मगन दे
07:20यहां आए सैलानी भी मौसम और वादियों का लुथ ले रहे थे
07:25तब ही अचानक सामने की तरफ से हिमाला की दरार के ऊपर एक तेज आवाज आती है
07:31ऐसा लगता है जैसे कोई ताकतवर पमपटा हूँ
07:37फिर पहाड के ऊपर धुआ उटता दिखाई देता है
07:42असल में ये बादल फटने की आवाज थी और सफेद धुआ जैसी चीज बेलगाम पार्ण
07:52इसके पल भरबाद ही अचानक पहाडी नाले में तेज बहाओ शुरू हो जाता है
08:02नीचे गाओं के लोगों को अब तक कुछ समझ नहीं आ रहा था
08:06पर तेज आवाज यानी बादल के फटने से वो इतना खबरा गए थे कि सभी अपने अपने घरों से बाहर निकल आए
08:13टॉरिस्ट भी होटल रिजॉर्ट सराय छोड़ कर सलकों की तरह भागने लगे
08:18जो गाड़ी चला रहे थे उन्होंने अचानक गाड़ियों की रफटार बढ़ा दी
08:22पर उपर से आ रही आफट की रफटार इनसानों और गाड़ियों की रफटार से कहीं ज्यादा तेज थे
08:30साहलाब उसी तेजी से उपर से नीचे की तरफ आ रहा था
08:37बाई तरफ की बस्तियां जो उपर की तरफ और किनारे पर थी वो बच गए
08:42पर सामने की पूरी बस्ती तिनके की तरह पहने लगी
08:47सिर्फ 34 सिकंड की आफ़त थी
08:50पर इसी 34 सिकंड में ये गुसाया सैलाम अपने साथ हर चीज़ को बहा कर ले गया
08:56क्या क्यामत इसी को कहते हैं क्या क्यामत ऐसी ही आई क्या दुनिया के खात्मे की तस्वीर ऐसी ही होगी
09:10गुसाय फूटे बादल की ऐसी बेलगाम और गातिलाना लहरे अपनी तस्वीरों से कुछ इसी तरह डरा गई
09:23ऐसा लगता है मानो नदी शहर में उतर आया ये तूफान कुछ और नहीं
09:30शेखन परवत से निकली ठीर गंगा नदी में बादलों के भटने से आए सैलाब की घुसाई लहरे
09:36जो पूरे गाउं को रौंदते हुए बस आगे बढ़ती जा रही
09:41रास्ते में जो भी मिला उसे कुचलते हुए बहाते हुए भगाते हुए परवात करते हुए
09:49क्या खर, क्या दुकान, क्या होटल, क्या सराय, क्या गारियां, क्या खेद, खलियान और क्या इनसान
09:55जो भी इसके रास्ते में आया वहीं तबाह हो गया
10:00कर्वन आया एक तीस पर आये हम इधर थे पासे में फिर देखा हमने कई आदमी उड़के जा रहे थे नीचे कई मकान बेह गए इधर हट थे सारे पेड़ थे खतम हो गए
10:26उसमें इतना भेंकर देवी आपदाई कि इसमें की लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिला और इसमें की काफी लोगों का मिस हैपनिंग होने की जो बात आई ये सामने बहुत भेंकर था मुस्किल से दस सेकेंड का पूरा फलट था उसके बाद नॉर्मल वाटर था
10:41पता ही नहीं चला एक तब जबर दसमें आगई है आदमी भाग में नहीं पाया हुआज है
10:47लहरों की रफ़तार इतनी तेस थी कि लोगों को एहसास हो उससे पहले ही वो उने बहा कर मलबे में तब्दील कर दे दी
11:00ये सर्फ 24 गंटे पहले तक कुत्राकाशी जिले का एक खुशाल और खुबसूरत काउं हुआ करता था पर जरह आप इसकी हालत देखे
11:10चारों तरफ पानी और कीचर बस निशानी के तोर पर ये बचे खुचे उजड़े घर और ये बेबस लोग
11:18गुसाए सैलाब ने इनसान और भगवान में भी कोई फर्क नहीं किया
11:26ये धराली में मौझूद 15 सो साल पुराना एतिहासिक कल्प केदार महाबे मंदिर है
11:33आसमान से आयाफत में इस मंदिर को भी नहीं बख्षा
11:38सैलाब अपने साथ इसे भी पहा लेगा
11:41तस्वीरें गवा कि पूरा इलागा मलबे में तब्दील हो चुका है
11:49अब सवाल ये उटता है कि अलागे के लोगों का क्या हुआ
11:53तो फिलहाल खबर यही है कि सो से ज्यादा लोग कुम है
11:57कहां किस हाल में पता नहीं
12:00पर तबाही की ये खौफनाग तस्वीरें सब को एक ही डर से तरा रही
12:06घुसाई लहरें थमने और मलबा हटने के बार क्या होगा
12:10क्या तस्वीरें और भी तरावनी होगी
12:13लेकिन बारिश और बादल का घुसा भी बाकी था
12:18धराली गाउं से करीब पांच किलोमेटर दूर
12:20हरशिल में दोपहर ठीक दो बजे
12:23गार नाले में आई बार ले
12:25सेना के कैम को अपनी चपेट में ले लिया
12:28सेना के हिली पेट तबाह हो गए
12:30साथी सैलाब में 11 जवान में घायब हो गए
12:34फिर ठीक एक घंटाबाद यानी दोपहर तीन बजे सुखी गाउं में बेलगाम सैलाब ने अपने तेवर दिखाए
12:50और बस्तियों और सड़कों को पहां शुरू करती है
12:53धराली क्लाउड ब्रस्ट की घटना को 18 घंटे से भी अधिका समय हो गया है
13:01लेकिन अभी तक उत्तरकासी से तमाम जो आला अधिकारी है
13:06साथ में जो रेस्क्यू टीम है वो अभी तक घटना इस तल पर नहीं पहुंच पाई है
13:09पूरा गंगोत्री नेशनल हाईवे भटवाडी के पास खंड हो गया है
13:14रेस्क्यू टीम का नपहुंच पाना सबसे बड़ा प्रमुक कारण यही माना जा रहा है
13:18गंगा जी के जलिस्तर को आप देख सकते हैं किस तरह से गंगा अपने प्रचंड बेग में बह रही है
13:24और साथ में जो गंगोत्री नेशनल हाईवे है उसको कही इस्तानों पर गंगा नदी ने अपनी चपेट में ले लिया है
13:32आप देख सकते हैं पहाडी किस तरह से दरक रही है जमीन में आप देखी है यह सड़क जो है बिलकुल नेश्ता नाबूत हो गई है
13:40पूरी धसने लगी है हर जगे क्रेक्स पड़े हैं सबसे बड़ी चुनवती बियारों को इस मार्क को खोलने की है
13:47उसके बाद ही जो यह सबसात की जिले के तमाम जो आलादिकारी है जिननोंने रेस्क्यू कारे को और ऐस्क्यू कारे को अंजाम देना था
13:59जिसमें DM, SP, सप्लाई से सम्मंदित जो तमाम प्रकार के जो डिपार्टमेंट हैं जिम्मेदार जो महक में हैं वो उसके बाद वहाँ पहुंच सकते थे
14:09लेकिन यहाँ पर मार्ग का पूरी तरह से वास आउट हो जाना सबसे बड़ा कारण माना गया है कि
14:16रेस्क्यू टीम घटना इस तल पर नहीं पहुंच पा रही है
14:20जिस धराली गाओं ने तबाही के सबसे ज्यादा मनजर दिखाए उस धराली गाओं को बरसो पहले ही
14:28भुगर्ब वग्यानिकों ने कहियां और बसाने की उत्राखंड सरकार को सलाह दी थी जिस पर कभी अमल नहीं हो पाया
14:35असल में आस्मानी आफत के लिहास से धराली एक तरह से ताइम बम पर बैठा है
14:41हिमाले की दरार पर बसे इस धराली गाओं में इस से पहले 1864, 2013 और 2014 में भी बादल फटने की घटनाए हुई थी
14:51यहां जब जब पहाड पर बादल फटे तब तब उसने खीर नाले में तबाही मचाए
14:57यह इलाका भुकम के लिहास से भी अती सम्वेदंशील जोन में आता है
15:03धराली गाओं में जिस पहाड से खीर गंगा नदी आती है वो 6000 मीटर उचा है
15:10जब भी वहाँ से सैलाव आता है धराली और धराली गाओं को बरबाद कर जाता है
15:15करीब 6 महीने पहले ही पहाडी का एक पड़ा हिस्सा तूटकर खीर नदी में गिर पड़ा था
15:22पहाडी का यह हिस्सा शायद इसी नदी में कहीं अटक गया
15:25वैग्यानिकों की माने तो मंगलवार को बादल फटने के बाद जिस तेजी से पानी उपर से नीचे आया
15:32वो पहाडी के उस तूटे हिस्से को भी बहाता हुआ अपने साथ ले आया
15:37जिस से ज्यादा तबाही हुई
15:39कहते हैं कि कुद्रत कभी किसी को परेशान नहीं करती
15:44लेकिन ये बस तब तक सही है जब तक आप उसे छेड़े नहीं
15:49उत्तरकाशी के दामन में इस वक्त खौफ के जो मंज़र इधर उधर बिखरे पड़े है
15:53वो दरसल कुद्रत के साथ सालों से की जा रही लगाता है
15:58छेड़ छाड़ का नतीजा है
16:00पिछले लगबग 30 सालों में जब से उत्राखन का जर्म हुआ है
16:04तरकी और टूरिजम के नाम पर यहां हर तरफ हर तरह की दुकाने खुल गए है
16:10मनमाने तरीके से जमीन की खरीद फरोफ्त हो रही है
16:13अंधा धुन खुदाई चल रही है
16:16बिजली के नाम पर जगा जगा डैम बना कर नदियों को बांधा और रोका जा रहा है
16:22दिकास के लिए टेहरी जैसी पुरानी बस्तियों की पली ले ली गई
16:27नतीजा सामने है कहरा आस्मानी जरूर था लेकिन बुनियात इनसानों नहीं रखी
16:33बीते दस सालों में अचाना कुत्रा खंड में बादल फटने की घटनाएं तेजी से बढ़ी है
16:40एक्सपर्ट्स इसकी तीन वजह बताते हैं
16:44पहली टेहरी डैर दूसरी मौनसून का सिकुड जाना और तीसरी मैदानी हिस्सों में जंगलों की कटाई
16:53ताकि उन जंगलों को काट कर वहां इनसानी बस्तिया पसाई जा सके
16:57एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब सिर्फ बादल नहीं फटते बलकि मल्टी क्लाउड बस्त के हालात पैदा हो गए
17:05यानि अब कई बादल एक साथ एक ही जगह पत एक ही वक्त में फटते हैं
17:11जिससे तबाही कहीं ज्यादा भैनक होती है
17:14तेहरी में भागी रती नदी पर 260.5 मीटर उंचा बांध बना है
17:20जिसका पानी लगभग 4 क्यूबिक किलोमीटर एरिया में फैला हुआ है
17:24यानि 35 लाक एकल फील्ड होगी
17:27जिस भागी रती नदी का जलगरहन इलाका पहले काफी सीमित था
17:32बांध बनने के बाद अब वो काफी पढ़ गया
17:35इतनी भारी मात्रा में एक जगा पर इतना पानी घटा होने की वज़ा से
17:41बादल बनने की प्रक्रिया बहुत तेज हो गई है
17:44खास कर मौनसून सीजन में ये बादल इस पानी को सह नहीं बाते है
17:49और इसी लिए फट पड़ने
17:51बादल फटने की घटनाओं में तेजी की एक और वज़ा रेनी डे का कम हो जाना है
17:59रेनी डे यानि किसी एक जगा पर एक दिन में धाई मिली लीटर या उससे ज़्यादा बारिश होने को कहते है
18:06एक रिपोर्ट के मताबिक मानसून सीजन में बारिश तो अब भी उतनी ही होती है
18:11लिकिन जो बारिश पहले साथ दिनों में होती थी वो अब सिर्फ तीन दिनों में ही हो रही है
18:17यानि रेनी डे कम हो रहा है जिससे हालात खराब हो रहे है
18:21मानसून सीजन पहले जून से सितंबर तक हुआ करता था
18:25अब यह सिकुड़कर जुलाई अगस्त तक सिम्ट गया
18:29पहाणों पर बादल फटने की तीसरी वजह
18:33वैग्यानिकों के हिसाब से मैदानी इलाकों में जंगलों की कटाई है
18:37उत्राखंड में सत्तर फीसदी से ज्याता इलाके जंगलों में आते हैं
18:42लेकिन इसके उलट मैदानी इलाकों में जंगल बेहत कम है
18:45टुरिजम और इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के नाम पर
18:48यहां तेजी से जंगलों की कटाई कर बस्तियां बसाई जा रही है
18:52जिसकी वज़ा से मानसूनी हवाओं को मैदानों में बरसने के लिए
18:57सही बाता वरत नहीं मिल पाता
18:59ऐसे में मानसूनी बादर पहाड़ी इलाकों में घने जंगलों के उपर पहुचकर बरस पड़ते हैं
19:06और इसी बरसने में कई बार वो साह बादर फट भी पड़ते है
19:10हाल के दशक में उत्राखंड की जिस चीज ने खुद्रत को सबसे ज़्यादा नारास किया है
19:17वो है अंधातुन नदियों के रुख को मोड़ कर या उने रोक कर बिजली के वास्ते डैम बनाना
19:23डैम बनाने के लिए सीना ताने खड़े पहाडों के सीने में बड़े बड़े सुराख करना
19:29बड़ी बड़ी मशीनों से उनकी बुनियादों को कमजोग करना
19:33ये सब को पता है कि नदियों का रुख मोड़ना या रोकना कितना खतरनाक होता है
19:38क्योंकि इनके मिजाज में ढहरना होता ही नहीं
19:41उन्हें तो अपना रास्ता खुला चाहिए
19:44लेकिन इनसानों ने साइंस के नाम पर जो तरक्टी की
19:47उस तरक्टी के बल्बूते पानी से बिजली बनानी सीख लिए
19:51बिजली बनाने के लिए नदियों को रोप कर एक तरह से उसकी रफ़तार और तेज करती
19:57उतरकाशी के दामन में जो तबाही के मनजर पहले हैं वो इसी इनसानी भूल का नतीजा है
20:03यह कुद्रत हम इनसानों को जीने के लिए सब कुछ देती है
20:07लेकिन जब वही इनसान उसका रास्ता रोपने की कोशिश करता है
20:11तो मचबूरां उसे अपना रास्ता खुद साफ करना पड़ता है
20:16यह शक्स जो दोड़ता हुआ चला आ रहा है
20:20इस ते बस अभी अभी मौत को मात दी है
20:22सैलाब को पीछे छोड़ कर या आगे निकल चुका
20:25इसलिए बच गया
20:26लेकिन इसी के करीब ये दूसरा शक्स सैलाब से तो बच निकला
20:31लेकिन सैलाबी पानी से बने दलदल में चापासा
20:34अब यहां से इसकी जिन्दगी की चत्व जहत शुरू होती है
20:38और आखर में ये भी मौत को मात दे कर बाहर निकलाता है
20:42इस तबाही से बच कर निकले हर शक्स की अपनी एक अलगी कहानी है
20:48किसी बथपस्मत की खुशक्समती ये है कि वो बच गया
20:52उस आफ़त से जिसमें लजाने कितने गायब हो गया
20:55तो किसी खुशकिसमत की बत्पिसमती ये है कि वो अपनों को ढूंड नहीं बारा है
21:00जरा सूचिए इसे क्या नाम देंगे जिसके साथ ये दोनों चीजें में
21:05दर्द भरी खुशी की ये वो अजीब दास्तान है
21:09जो जिन्दगी और मौत दोनों से एक साथ रूपरू है
21:13कैसा सैलाब थाई जिसने सब कुछ पानी पानी कर दिया
21:18और कैसा सैलाब थाई जो नामालूम कितने ही लोगों को प्यासा मार गया
21:24इस सैलाब का पानी तो एक रोज उतर जाएगा
21:28पर उनाखों का क्या जो जब भी रोएंगी सैला भी आंसु ही रोएंगी
21:34अफसोस घुसायल बादल के भटने का इल्जाम हम उपर वाले के कहर पर लगा रहा है
21:40जबकि इस कहर के जिम्मेदार हम इनसान ही
21:44ये तबाही ये जानमाल का नुकसान ये खुद्रत के उस घुसे का सबसे छोटा नमना है
21:51जो सिर्फ ये कहने की कोशिश कर रहा है कि सम्हल जाओ
21:55होश में आजाओ ताकि तुम्हें वक्त से बहने कायामा न देखने पर
22:01आज तक पियो
22:03आसमानी साज़िश और जमीन पर मौझूद इनसानों की गल्टी से आई
22:10इसाफत पर फिलहाद इतना है
22:13देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रही आज तक
22:33झाल