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  • 1 year ago

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Animals
Transcript
00:00महा काटून टीवी
00:05शरार्ती गिलहरी
00:08किसी जंगल में चुन्चुन नाम की शरार्ती गिलहरी अपनी मा किट्टू के साथ रहती थी
00:16चुन्चुन कभी भी किट्टू की बात नहीं मानती थी
00:20चुन्चुन की हरकतों से जंगल के सभी जानवर बहुत परिशान रहते थे
00:26एक दिन चुन्चुन पेड़ पर खेल रही थी
00:30और उसी पेड़ पर फर्राटा नाम का एक बंदर भी सो रहा था
00:35फर्राटा को देख चुन्चुन ने अपनी मा से कहा
00:39मा ये बंदर हमारे पेड़ पर क्यों सो रहा है
00:43ये पेड़ तुम्हारा कब से हो गया चुन्चुन? सोने दो उसे
00:47लेकिन मा जंगल में और भी तो पेड़ है
00:51इससे कहो किसी दूसरे पेड़ पर जाकर सोई
00:55चुन-चुन, जैसे ये जंगल सबका है, वैसे ही ये पेड़ भी सबका है
01:01इसलिए तुम इस पेड़ से उसे नहीं हटा सकती
01:05किट्टू ये बोलकर चली गई
01:08लेकिन चुन-चुन को एक शरालत सुझी
01:11वो बंदर के पास पहुँची
01:13उसने बंदर की पूँच को पेड़ की टहनी से बान दिया
01:17उसके थोड़ी ही देर बाद, जब फराटा बंदर सो कर उठा
01:22तो उसने दूसरी टहनी पर छलांग लगाने की कोशिश की
01:26लेकिन उसकी पूँच बंदी होने के कारण
01:29वो दूसरी टहनी तक नहीं पहुँच सका और वहीं पेड से उल्टा लटक कर चिलाने लगा
01:34बचाओ, बचाओ, मैं यहाँ पेड पर उल्टा लटक गया हूँ, बचाओ
01:41फर्राटा के चिलाने की आवाज सुनकर सभी जानवर वहां आ गए
01:47और तभी वहां मौझूद जंगल का राजा शेर सिंग बोला
01:51अरे फर्राटा, तुम इतना चिला क्यों रहे हो?
01:55किसी ने मेरी पूँच टहनी से बांदिये
01:58लेकिन तुम्हारी पूँच टहनी से कौन बांदेगा?
02:05किसी को क्या मिलेगा ऐसा करके?
02:07ये काम उस शरारती चुन-चुन ने किया होगा
02:10वो ही जंगल के सभी जानवरों को परिशान करती है
02:14ये बाते किट्टू और चुन-चुन पेड़ के उपर बैठ कर सुन रहे थी
02:19इतने में चुन-चुन बोली
02:21हाँ, मैंने ही बंदर की पूँच पेड़ से बांदी है
02:25लेकिन तुमने ये सब क्यूं किया?
02:29बंदर ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?
02:32जंगल में इतने सारे पेड़ हैं
02:34तो ये बंदर इस पेड़ पर क्यो सोया?
02:37ये हमारा पेड़ है
02:38ये सुनकर सभी जानवर हैरान रह गए
02:41तभी हीरन बोला
02:43चुन-चुन, एक बात कान खोल कर सुन लो
02:47ये जंगल सब का है
02:48इसलिए यहां के पेड़ों पर भी सब का अधिकार है
02:52चुन-चुन, अगर अब तुमने जंगल में किसी जानवर को तंग करने की कोशिश की
02:58तो मैं तुम्हें इस जंगल से निकाल दूँगा
03:01ये सुनकर किट्टू जल्दी से बोल पड़ी
03:04नहीं, नहीं महाराज
03:06चुन-चुन अभी छोटी है
03:08उसको माफ कर दीजे
03:10आज के बाद वो ऐसी शरारत कभी भी नहीं करेगी
03:14मैं अभी फर्राटा के पूँच खोल देती हूँ
03:17ये कहकर किट्टू फर्राटा बंदर की पूँच पेड के टहनी से खोलने लगी
03:22और तभी फर्राटा बंदर पेड से गिर गया
03:26इतने में शेर सिंग बोला
03:29किट्टू, किट्टू, समझा देना अपनी बेटी को
03:34ये उसके लिए आखरी चेतावनी है
03:37ये बोलकर शेर सिंग और जंगल की बाकी जानवर वहां से चले गए
03:42और किट्टू ने चुन-चुन से कहा
03:44चुन-चुन, तुम ये शरारते करना कभ छोड़ोगी?
03:48तुम्हारी ये ना समझी, किसी दिन तुम्हारे लिए मुसीबत बन जाएगी, समझी?
03:54किट्टू की बात का चुन-चुन पर कोई असर नहीं हुआ
03:57ऐसे ही कुछ दिन बीट गए
03:59कि तभी किट्टू को किसी काम से जंगल से बाहर जाना पड़ गया
04:04और उसने चुन-चुन से कहा
04:06चुन-चुन, मैं एक जरूरी काम से जंगल के बाहर जा रही हूँ
04:11लेकिन तुम यहां किसी को परिशान मत करना
04:14और जंगल से कहीं दूर मत जाना
04:16ठीक है मा, आप चिंता मत करो
04:19मैं किसी को परिशान नहीं करूँगी
04:22लेकिन चुन-चुन की बात पर किट्टू को विश्वास नहीं था
04:27इसलिए उसने अपने पडोस में रहने वाले कालू कववे से कहा
04:32कालू भाई, मैं जंगल से बाहर जा रही हूँ
04:37एक दो दिन में वापस आ जाऊंगी
04:39क्या तुम चुन-चुन का खयाल रखोगे
04:41ठीक है किट्टू, लेकिन जल्दी आने की कोशिश करना
04:48तुमारी बेटी को ज्यादा दिन तक संबालना
04:51मेरे बस की बात नहीं है
04:54कालू भाई, चिंता मत करो
04:58मैं जल्दी आने की कोशिश करूँगी
05:00ये बोलकर किट्टू चली गई
05:03और चुन-चुन वहीं जंगल में रहने लगी
05:06एक दिन चुन-चुन पेड़ पर अकेली बैठी सोच रही थी
05:11मा को गय हुए इतने दिन हो गए
05:14क्यो ना मैं भी जंगल से बाहर जाकर मा से मिलूँ
05:19मा मुझे देखकर कितना घुशोंगी
05:22ये सोचते हुए वो पेड़ से उतरने लगी
05:25ताकि वो जंगल से बाहर जा सके
05:28लेकिन पेड़ से उतरते हुए उसे कालू ने देख लिया
05:32और वो बोला
05:34चुन-चुन तुम कहां जा रही हो?
05:37पेड़ से नीचे के उतर रही हो?
05:40कहीं नहीं कालू अंकल
05:41मैं तो बस पानी पीने जा रही थी
05:44पानी पीकर जल्दी आ जाऊंगी
05:46ठीक है जाओ
05:48लेकिन जल्दी आ जाना
05:50राद होने वाली है
05:52कालू की बात सुनकर चुन-चुन
05:55वहां से चली जाती है
05:56और वो जंगल से बाहर जानी की कोशिश में
05:59रास्ता भूल जाती है
06:01अब उसे दूर-दूर तक कोई नहीं दिखाई दिता
06:05जिससे वो रास्ता पूछ सके
06:07उधर किट्टू जब पेड़ पर वापस आई
06:10तो उसे चुन-चुन कहीं नहीं दिखाई दी
06:12उसने कालू से पूछा
06:14कालू भाई, कालू भाई, चुन-चुन कहा है
06:18उसने थोड़ी देर पहले मुझ से कहा था
06:22कि वो पानी पीने जा रही है
06:24उसके बाद वो अभी तक नहीं लोटी
06:27कहीं वो किसी मुसीबत में न फस जाए
06:30हमें जाकर उसके मदद करनी चाहिए
06:33और रात भी होने वाली है
06:35हमें अभी जाकर जंगल की सभी जानवरों को बताना चाहिए
06:39ये कहकर किट्टू और कालू ने जंगल की सभी जानवरों को सारी बात बता दी
06:45सभी चुन-चुन को इधर उधर ढूनने लगी
06:48लेकिन वो कहीं नहीं मिली
06:51तभी कालू को आस्मान में एक बाज उड़ता हुआ दिखाई दिया
06:56तभी कालू ने कहा
06:58वो देखो आस्मान में बाज उड़ रहा है
07:02इस समय ये बाज आस्मान में क्या कर रहा है
07:06लगता है वो अपना भरजन धून रहा है
07:10हिरन की बात सुनकर किट्टू घबरा गई और बोली
07:14कहीं ऐसा तो नहीं उस बाज की नजर मेरे किट्टू पर पड़ गई हो
07:18तुम चिंता मत करो मैं अभी अपने दोस्त मिट्टू तोते के साथ जाता हूं और पता करता हूं
07:26ये कहकर कालू मिठ्टू के साथ बाज का पीछा करने चला गया
07:32उसने देखा कि बाज चुन-चुन के उपर मनरा रहा था
07:37ये देखकर कालू समझ गया कि उस बाज का शिकार चुन-चुन ही थी
07:43उसने सारी बाज जंगल के जानवरों को बता दी
07:46और वापस चुन-चुन की मदद करने मिठू तोते के साथ चला गया
07:51अब बाज ने मौका पाकर चुन-चुन को अपने पंजो में दबा लिया
07:56ये देखकर कालू बोला
07:59मिठू चल दे उस बाज के बाज चलो
08:02नहीं तो वो चुन-चुन को खा जाएगा
08:05ये सुनकर मिठू और कालू आसमान में बाज से लड़ने लगी
08:09वो दोनों बाज पर अपनी चुन्च से लगातार वार करने लगी
08:14इसी दोरान चुन-चुन बाज के चंगुल से छूट गई
08:18चुन-चुन को नीचे गिरता देख जानवरों ने पत्तियों और घास से बना हुआ जाल नीचे बिछा दिया
08:25चुन-चुन उस नरम जाल पर आ गिरी
08:28चुन-चुन बेटा तुम ठीक तो हो ना?
08:32हाँ मा, मैं बिलकुल ठीक हूँ
08:34चुन-चुन, हम तुम्हें इसलिए समझाते थे कि शरारत मत किया करो
08:40देखा, तुम कितनी बड़ी मुसीबत में भस गई
08:44ये सुनकर चुन-चुन अपनी मा से बूली
08:47मुझे माफ कर दो मा, मैंने कभी आपकी बात नहीं सुनी
08:52अब से मैं कोई शरारत नहीं करूंगी
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