- 1 year ago
KHATU SHYAM BHAJAN
Category
🎵
MusicTranscript
00:00सुन्दर सजादर बार खाटू शाम का भगतों डंकाव बजे दुनिया में शाम नाम का भगतों
00:30हम याद रगाते हैं खाटू धाम की भगतों जै बोल के शुरू करेंगे शाम की भगतों
00:43गाते हैं जिनकी वंद नसुर और मुनी जन स्रेष्ट है कल युग में शाम नाम का भगतों
00:52बिगडी हुई तक दीर सवरती है धाम पे होती सुबह शुरू यहाँ पे शाम नाम से
01:06जग में है उची शान खाटू शाम की भगतों जै गूंजती यहाँ पे शाम नाम की भगतों
01:16मिलती नहीं जग में कहीं ऐसी मिसाल है बाबा का बे मिसाल यहाँ पे कमाल है
01:27आओ करे हम यात रश्री शाम नाम ले भल करेंगे शाम जी का हाथ थाम ले
01:36दुख्डे सदा हर ले जा शाम नाम है ऐसा
02:02विगडी को देसा वार शाम धाम है ऐसा
02:06चप शाम शाम शाम शाम शाम शाम नाम को
02:11चल खाटू दाम दाम दाम खाटू दाम को
02:16शीश के दानी दयालू शाम है मेरे फूरन करेंगे शाम जी हर काम को तेरे
02:29ऐसा दयालू दानी जग में और नहीं है अहिलवती के लाल सादू जाना कहीं है
02:39भगतों की नाव की है पतवार शाम जी देते हैं सदा लख लख दातार शाम जी
02:50माम में है नाम चल रे चल खाटू दाम चल रे
03:09पावन धरा मरू धरा पे धाम है पावन जब शाम शाम शाम शाम नाम है पावन
03:20सीकर है जिला एक मरू देश में जहां एक गाव खाटू धाम के है नाम से वहां
03:29अहिलवती के लाल का दरबार है यहां सुन्दर सजीला शाम सरकार है यहां
03:43हर एक सहारा सदा देते हैं शाम जी हर पल सदा खाटूम रहते हैं शाम जी
03:52एक बार शाम जी के जो दर बार आ गया हर वार आ गया वो बार बार आ गया
04:04भावन है नाम चल रे जल पाटू गाम चल रे
04:09चड़ते है भजा नारियल ने शान यहां पे है शाम की अदबुत निराली शान यहां पे
04:34बैठा हो जैसे सेट दर बार लगाके बैठा है मेरा शाम जरा देख ले आके
04:43जाकी सजी है शाम की नजरे नहीं भरती जितना भी देखता हूं काम न यहीं करती
04:57बस देखता रहूं मैं शाम शाम की सूरत मन भागई मेरे तो शाम शाम की मूरत
05:06विश्वास लेके मन में शाम जी के द्वार आ जग जाएगी सोई हुई तक दिर भी यहां
05:17माम में है नाम चल रे चली खाटू थाम चल रे
05:27खाटू के जैसा थाम जग में दूसरा नहीं दर बार शाम जी के जैसा और ना कहीं
05:48आओ करे हम यात रा खाटू के धाम की जै बोलके शुरू करेंगे शाम नाम की
05:57जैपूर भी का नेर राज मार्ग पे रिंगस शाम जी के धाम पे जाती यहां से बस
06:11रिंगस के लिए रेल मार्ग भी रहे उत्तम होती है रेल गाडियों की आतरा सुगम
06:20रिंगस से अठारा किलो मीटर पे धाम है मेरे बाबा शाम रहते है वो खाटू गाव है
06:31है धन्य खाटू गाव धन्य गाव की भूमी श्री शाम ने अपने लिये जगा यही चुनी
06:41मावन है नाम चली रे चली खाटू थाम चली रे
06:46हर माह में आती है शुकल पक्ष की क्यारस
07:06इस रोज खाटू धाम में रहता है बड़ा रशित लगते यहां मेले बड़े हर साल में है दो
07:15आओ चले श्री शाम के दर्शन कला भुलो
07:20कार्टिक सुधिये काद शिलो आ गई पावन श्याम चन्म देख के हरशित हुआ है मन
07:34फागु महा और शुकल पक्ष की है दश्म मेला लगे ऐसा न जाए बात भी परनी
07:43दार पे आते हैं भक्त दूर दूर से गुजरात महाराष्ट कोई कानपूर से
07:55बावन है नाम चलिए जली खाटू घाम चलिए
08:04बंगाल कोल काता गोहा दिया साम से भर्यान से भी आते हैं वावा के धाम पे
08:25साउथ से दिली से कोई बैंगलूर से धाम पे आते हैं भक्त दूर दूर से
08:34मरु प्रदेश के बसे जन जन में शाम जी हर पल सदा रहते हैं इनके मन में शाम जी
08:48भगतों की हर गड़ी लगी रहती कतार हैं सबको वला लगता है वो खाटू का द्वार है
08:57साफ मन से कम न जो लेके आ गया समझो वो दूजे पल मैं जो मांगा सुपा गया
09:09मांगन है नाम चली रे जली खाटू घाम चली रे
09:18अब ध्यान से सुनो नियम बता रहे हैं हम
09:34उनकी भी करो पाल ना सुना रहे जो हम गर भाव ना हो साफ स्वच्छ तन रहे विमल मन में अपार शद्धा हो विश्वाश हो अठल
09:48यात्रा से पूर्व ध्यान शाम का धरो बाबा की जोत लेके पूजा अर्च ना करो
10:01निशान बाबा का जो लेके जाना चाहो तुम निशान की पूजा के नियम कह रहे हैं हम
10:11निशान की पूजा का जो विधान है सुनो पहले इस नान करके फिर निशान को चुओ
10:22माव में है नाम चले रे जल खाटू खाम चले रे
10:31धंडे में डाल के निशान को सजाईए
10:48मोर पंक खूल माला को लगाई है शिर्ष पे चान्दी का छत्र ऐसा बांध दो फिर शाम शाम शाम शाम शाम शाम नाम लो
11:02के सर्या बंद और दुपटा गले में हो जला के धूप दी तु बाबाजी की जोत लो
11:15शथा के अनुसार प्रसाद तुम करो कसवीर सावरे की तुमारे समक्ष हो
11:25पूजा करो भजन करो जैकार लगाओ भली करेंगे बाला जी को भी मनाओ
11:36मिसरी के साथ मेवे का प्रसाद है उत्तम पूजा के बाद कीजिए प्रसाद का वित्रण
11:45बाब में है नाम चली रे जली खाटू घाम चली रे
11:55वित्र को निशान बेयर पण करो भगतों भगतों में इसको पाद में वित्रण करो भगतों
12:15कमर पे हो निवार में लोहे की कटोरी रख के निशान हाथ में ठाम लो डोरी
12:25संकल्प यातरा का सब साथ में करो साब ले सरकार का आध्यान सब धरो
12:38जैशाम की जैशाम की गाते हुए चलो मार्ग में जो भी मिले जैशाम की कहू
12:48भद्दे न काले वस्त्र हो आपके तन पे चमडे की कोई वस्तु रह न पाए बदन पे
12:59माह में है नाम चली रे जली खाटू खाम चली रे
13:08खाटू में सवा मंड की फेरी लगाईये निशान को बाबा के दर्वार लाईये
13:29मरपण करो श्री शाम के चरणों में ये निशान हुई है आपकी दयासे यातरा आसान
13:39हनुमान का भी जो निशान साथ में लाए उसको भी हनुमान के चरणों में चड़ाए
13:52पूरण करेंगे काम न श्री शाम विहारी सब कावला करते हैं तीन कान के धारी
14:04बस और रेल मार्ग से जो भक्त आ रहे उनको भी कुछ बात हम यहां बता रहे
14:13माहन है नाम चल रे जल खाटू धाम चल रे
14:22जब खाटू धाम आप पहुच जाओगे भगतों मन में नई उमंग एक पाओगे भगतों
14:43ठहर के धर्म शाला में विश्राम कीजिए विश्राम के भी वक्त शाम नाम लीजिए
14:52भरी पड़ी है धर्म शाला खाटू धाम में मिल जाती है जगा वहां बाबा के नाम से
15:06खुला हुआ भंडार मेरे शाम का यहां सजा हुआ तरवार मेरे शाम का यहां
15:17विश्राम के पश्चात करना चाहिए असनान कपड़े बगल के साफ स्वच्छ कीजिए प्रस्धान
15:27माह में है नाम चलिए जली भार खाम चलिए
15:36अपने समान की सुरक्षा आप कीजिए श्री शाम शाम शाम शाम चाप कीजिए
15:57मंदिर के सामने तुम्हें प्रसाद मिलेगा प्रसाद अपनी श्रत के अनुसार मिलेगा
16:06प्रसाद लेके साथ में पंगत में खड़े हो भगतों को लेके साथ में संगत में खड़े हो
16:20सुन्दर सजादर बार सामने है शाम का मुरली मनों हर सावरे गिर घर के पाल का
16:29पंगत में खड़े हो के पीछे देखना नहीं अप शब्द अपने मुख से कभी बोलना नहीं
16:41छोटा पड़ा जो भी मिले सब का सम्मान हो ना वेद भाव मन में और ना विमान हो
16:50पावन में नाम चल रे जल खाटू घाम चल रे
16:59पावन बड़ी है भूमी खाटू घाम की भगतों
17:15महिमा बड़ी है शाम जी के नाम की भगतों
17:20दर्शन के हे तु आपकी बारी जो आएगी शाम की सुंदर छभी मन खोल भाएगी
17:29प्रसाद चड़ा करके जाप मन से कीजिए
17:38कामना पूर्ती का आशिरवाद लीजिए प्राणाम अपने सर को जुका करके कीजिए
17:47ध़जा प्रसाद नारी अलचड़ा के कीजिए
17:52आशिश पुजारी से फिर लीजिए भगतों जब शाम जी का नाम फेर दीजिए भगतों
18:03मावन हे नाम चली रे, चली ठार भुझाम जली रे
18:09हर काम ना पूरी करेंगे मेरे शामझी छोली सदा सब की भरेंगे
18:31परेंगे मेरे शामजी देनी हो तान तक्षिणा मंदिर में दीजिए मंदिर केहे तु योगदान मन से कीजिए
18:43कहते हैं जैसी भाव न रहती है जाके मन देता है उसको सावरा वैसे ही दर्शन
18:57अहिल्वती के लाल मेरी भी अरत सुनो कब से निहारता हूँ थोड़ा सातो ध्यान दो
19:06बना हुआ है शाम कुंड भी यहां भगतो इस कुंड में नाहा के तन मन सवार लो
19:18माव मेरे नाम चलिए चलि पार्टु घाम चलिए
19:36महिमा है शाम कुंड की आली मेरे भगतो है बात शाम जल की निराली मेरे भगतो
19:48इस जल में नहाने से कट जाती है व्याधा कहते है शाम कुंड की भी एक है गाथा
19:57प्रगता था शीश शाम का है कुंड जिस जगा इक गाए रोज आके रुक जाती थी यहां
20:11पीते थे शाम रोज दूद थन की धार से निकला था शीश शाम का भूमी के पार से
20:20ग्वाले ने इस जगा को जब खोट के देखा सुनी जो एक आवाज को तो चौक के देखा
20:32भूमी से श्री शाम में आवाज लगाए धीरे धीरे करना मेरे भाई को दाए
21:02जो खोद के देखा तो एक सावली सूरत सामने खड़ी थी बाबा शाम की मूरत
21:11राजा जो थे यहां के उनको सपन दिखाया राजा को श्री शाम ने आदेशी सुनाया
21:25मंदिर यहां पे एक मेरा शीक्र बनाओ मंदिर बना के मेरी मूरती को बिठाओ
21:34तब से पना मंदिर यहां पे शाम नाम का चरचा है सारे जग में खाट के धाम का
21:45कल युग में एक देव तीन बान का धारे शाम सावरा है मेरा क्रिष्ट मुरारे
21:55आवन है नाम चलिरे जलिखाट धाम चलिरे
22:15अब शीश के दानी के सुनो एक कहानी करते हैं चिन की बन्द ना देव का ग्यान
22:24द्वापर में पांड पुत्र एक भीम सेन था उस युग में उसके जैसा कोई भी ना एक था
22:34उनका था पुत्र एक नाम था घटोत कच जिसका हुआ विवाह कामकंट का के सन
22:48अहिल्वती भी कामकंट का का नाम है उनके हुआ था पुत्र जो मेरा शाम है
22:57परबरिक का ये शाम नाम किस तरह पड़ा कहते है शाम नाम की लिला सुनो यहां
23:09वाह में है नाम चली रे चली भातु घाम चली रे
23:18अवतार है कल युग में तीन बान का धारी सुना रहे है इनकी जो लीला है प्यारी
23:38बच पन से ही थे धीर वीर और बलवान थास्त शस्त्र और वे दो का पूर्ण ज्यान
23:48क्रिपाधि भगवती की भोले वाव थे प्रसन शंकर ने किये तीन बान इनको थे अरपन
24:01शिव ने कहा ये पान तीन लोक जीत ले पल भर में दुश्मनों का ये प्राण की चिले
24:11शिव का दिया वर्दान खाली जान नहीं सकता वर्वरीक को जग में कोई हरा नहीं सकता
24:22बावन में है नाम चली रे जली पादू धाम चली रे
24:31संग राम होगा तौरबों के पांडबों के बीच भाई को आज भाई लेके आया रण में खूँच
24:52सदियों रहेगा याद जो संग राम होगा दसो दिसा में गूंज उठी रण की ये आवाज
25:01रण भेर की आवाज बरबरीक तक गई समर को देखने की इच्छा माता से कही
25:15माता ने कहा एक वचन मुझ को लाल दो जो हारने लगेगा रण में उसका साथ दो
25:24मैया को देव चन चला धनुष को तान के वागा चला रण देखने एक आनवान से
25:36अश्वते सवार होके दीरीक चला पाका लड़ा का वीर रण दीरीक चला
26:05बाथे पे टेज और रूप था वे मिसार शांत सौम्य रूप पे घुंग राते हुए बार
26:15निले पे हो सवार चला जा रहा था वीर छूटा हुआ कमान से जैसे हो कोई तीर
26:29नदी पहाड जंगलों को लांगता चला समा जहां से भी चला वो बांगता चला
26:39शेरों की थीदा हाड आवाज में उसकी हर देखने बालों की शांस शांस तीर की
26:49देखे जो वह कहता न देखा वीर आज तक दूसरा जहां में ना है इसके जैसा एक
26:59मावन है नाम चली रे चली खाट खाम चली रे
27:08भगवान से भला है कौन बात जो छुपी माया पती ने पल में सारी बात जान ली
27:29आते हुए परवर्क को देखा जो कृष्ण ने ब्रामण का वेश धार के जा बैठ राह में
27:43पीपल की छांब के तले ब्रामण को जो देखा खेहर गए कदम रूप उसका था ऐसा
27:52कुछ सोच के विश्राम की घोडे से नीचे आ सादर किया प्राणाम और बैठ गए जा
28:01प्रामण ने पूछा कौन और कहां से आये हो किस और जा रहे हो किस कुल के जाए हो
28:13मावन है नाम चली रे जली खाटू खाम चली रे
28:22नाम है परबरिक मेरा वंच है पांडव।
28:38मैं जा रहा हूँ देखने कुल में छिडा है द्वन्ग।
28:43पौत हूँ मैं भीमता पिता गटोत कच।
28:47न बोलता हूँ जूट मैं कहता सता हूँ सच।
28:52होगा समर महान ऐसा मैंने सुना है जो हर दिखाने के लिए इस रण को चुना है
29:06हारे का दूंगा साथ मेरी माने कहा है करना न भेद भाव मेरी माने कहा है
29:15बोले यू मुस्कु राके मोर पंक के धारी तर कश्म तेरे तीन ही तो बान है सारी
29:27मावन है नाम चल रे जली पाटू घाम चल रे
29:36होंगे वहां पे योधा भिश्म त्रोन के जैसे
29:52एक एक में सो सो हाथियों का जोर है ऐसे
29:56रण भूं में एक करण जैसा शूर वीर है काल विथर आये उसके ऐसे तीर है
30:06अश्वठा मदुर योधन और वीकरण तत पर खड़े है रण के लिए हर एक खण
30:20ऐसे है वीर तुम भला कब जीत पाओगे लोट जाओ वरना काम युद में आओगे
30:29ब्राभण ये तीन बाण तीन लोक जीत ले एक बाण ही इस युद में सब के प्राण खीच ले
30:41माव में है नाम चलिरे जलि खाटू खाम चलिरे
30:59पर लोक सब को भेज देख पाण ही मेरा तरकश में लोट आएगा फिर पाण ये मेरा
31:11लक्ष है या चूक ऐसा बाण है मेरा दुश्मन को कर दे टूक ऐसा बाण है मेरा
31:20इक पल में ये संहार कतले आम मचा दे पच पाए एक बिना सब का रख बहा दे
31:34विपल है इसके आगे खडग तीर तलवार बच पाएगा ना एक भी ऐसी है इसकी मार
31:44ब्राम्भन ने कहा व्यर्त एहंकार है तेरा तुमने कहा उस पे ना एतबार है मेरा
31:55पढ़ते हो कुम कसी दे अपनी ही शान के मुझे को तो न विश्वास है तेरे बयान पे
32:04माम में है नाम चली रे जली खाटू आम चली रे
32:13मा मूली तीर है नहीं ये है मेरी शक्ती तब का प्रबल प्रताप है मेरी है भक्ती
32:34आराध देव भोले बाबा का प्रसाद है मा भगवती का शीश पे आशीरवाद है
32:43प्राम्हन ने कहा शक्ती का प्रमान दो मुझे हर पत्ता पत्ता ब्रिक्ष का बेंध दो ऐसे
32:57जैसे पड़े हो शीश रण भूमि के अंदर तुमको मैं मान लूँगा हो इर धुरंधर
33:06परवरिक ने चड़ा के धन वापे पान को छोड़ दिया याद कर भगवान को
33:18माहन है नाम चलिरे जली खाटू खाम चलिरे
33:27छुटा हुआ वो तीर पत्ता पत्ता बेंध कल देने लगा परिक्रमा ब्रामभन के चरणो पल
33:48रामभन ने कहा तीर क्यों पड़ा मेरे पीछे शायद कोई पत्ता दबा हो पाउं के नीचे
33:57विनती है श्री मान पाउं आप उठा ले ताकी मेरा ये तीर उस पे सेंध लगा ले
34:11मेरा आदेश इसको पत्ते बेंधने का है ना की पाउं आपका छेदने का है
34:20अपना पाउं जैसे ही प्रामभन ने उठाया वैसे ही पत्ता बेंध के तरकश में हो आया
34:32माहन है नाम चल रे जली खाटू धाम चल रे
34:41संचै नहीं के तुम हो वीर और बुद्धि मांग बता दो मुझे को इतना सा जो तुम को ये श्री मांग
35:01किस और से करोग युद्ध वीर तुम कहो किस का दोगे साथ शूर वीर तुम कहो
35:11पहली तो है इच्छा के रण देखू गोर से जो हारने लगेगा साथ दूस और से
35:25प्रामण ने मन में सोचा होने वाला है अनर्ग हारे हुए जो कौर हों का लेगा ये पक्षू
35:35इस तरह तो धर्म का मिट जाएगा निशान चड़ जाएगा संसार में अधर्म परवान
35:46प्रामण ने कहा वीर सारे होते है तानी ना उनके जैसा धर्म कर्म में कोई सान।
36:15परवर्ग ने कहा जो इच्छा है वो मांग लो देता हूं मैं वचन इसको सत्य जान लो
36:25प्रामण ने कहा वीर दान शीष का देदो बरवर्ग ने कहा भले ही शीष को लेलो इतना तो मुझे आप है श्रीमान बताओ
36:43होगा क्या मेरे शीष का उप योग सुनाओ
36:48वीराट रूप कृष्ण ने अपना जो दिखाया बरवर्ग ने चरणों में शीष अपना जुकाया
36:59श्री कृष्ण ने कहा जो उस वीर ने सुना रण भूमी की बली के लिए तुमको है चुना
37:09कुछ काम आया आपके मैं भाग्यवान हूँ चरणों में आपके मैं करता शीष दान हूँ
37:38है आरजू इतनी सी है ये मेरी काम ना रण देखने की आखरी है मेरी भावना
37:48देता हूँ मैं वर्दान होगी इच्छा ये पूरन कल युग में होगा तेरा मेरे नाम से सुमिरन
38:01शाम नाम तेरा घर घर में गूजेगा भाग्यवान होगा जो तुम को पूजेगा
38:11संसार में डंका वजेगा तेरे नाम का संकट कटेगा जो भी नाम लेगा शाम का
38:21माह निह नाम चली रे जली भागु धाम चली रे जली भागु धाम चली रे
38:31एका दशी थी शुकल की था माह पागु पर बरी ने शाम चरण की लगा के दुन
38:52शीश काट करके दान कृष्ण को किया श्री कृष्ण ने उस शीश को अमरित पिला दिया
39:01परवत पे रख शीश युद का हाल दिखाया आशीश श्री कृष्ण से बरवर्क ने पाया
39:15कल युग में पूजा होती है शाम नाम से आज विवैठा है शाम ठाट धाम में
39:24दानी नहीं है कोई शाम सा जहान में रहता सदा है शाम भगतों के प्राण में
39:36वर्णन किया है हमने या तुरा का प्रेम से श्री शाम को मनाते है नित्य नेम से
40:05उसको न कोई पीडा और कष्ट सताए एक बार जो विशाम के दरबार में आए
40:14रखना सदा भगतों पे अपने प्यार का साया वर्णन किया जो हमने है वो शाम की माया
40:28रखना सदा भगतों को अपनी छत्र छाओं में है धन्य जो रहते है शाम जी के गाओं में
40:38करना हमें मुआप भूल हमसे हो अगर देना ख्षमा का दान ना दान जान कर
40:50माघ में है नाम जली रे जली खार को घाम जली रे
41:20क्राओं में जह जाै ड्रएंट फ pussycffर प्लो ship की बिल्ल Council
41:29कि में जली सक्वर्ण kवद हुड़ कर दläट예요
41:33क्राओं में जली ऑल में है जली जल में है 2 लाम जलीव जली कर दान देकी कि मौल