00:00आज बड़ा पवित्र दिन है और पवित्र दिन हमारे लिए इसलिए भी जिस पवित्र ग्रंथ के वारे में हमारी गुरु परंपराने गुरु गोविंद सिंग्धी महराज का यादेश है कि गुरु मान्यो ग्रंथ
00:21और पवित्र गुरु ग्रंथ साहथ के प्रथम प्रकास परव के सायोचन में हमें पहले गंज के इस पवित्र गुरु द्वारा में भागिदार बनने का उसर प्रप्त होड़ा है
00:38मैं इस उसर पर आप सभी सिक्व बंधों को प्रदेश भर के सभी सिक्व बंधों को और भारत की आन मान और सान पर विश्वास करने वाले हर उस नागरिक को फिर्दे से बढ़ाई देता हो अपनी सुप कामने देता हो
01:01याद करना इध्यास में वही जाती और वही कौम जीवित रही है
01:13जो अपने पुरवजों पर उनके सौरे को उनके प्राकरम को उनके योगदान को स्मण करके उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाता ही है
01:28शिक्कों के संब्रिदी और उनके प्रगदी के पीछे भी गुरु परंपरा की प्रति उनकी अगाद निश्टा है
01:44गुरु नानक देवची से लेकर गुरु गोविंद सिंग्धी महास्तर एक ऐसी अनकम और अटूट परंपरा
01:58जिसने भारत और भारतियता के लिए सनातन भर्म के लिए बार बार अपनी सहदत दी
02:11जब भी आऊ सिकता पड़ी, जब भी सनातन पर कोई संकट आया
02:18प्रति सिक्ध गुरुहों ने आगे आकर के
02:22अपना सरवस्च बलदान करने में कोई संपोच नहीं किया
02:27और हमें पहले गंज गुरुद्वारा के इस कारिक्रम में इसके पुनुद्धार के इस कारिक्रम के साथ जुड़ने का उसर ऐसे समय में प्रप्त हो रहा है
02:38जब यह वर्स गुरुतेक बहदुर जी महराज की पावन सहीदी का तीन सो पचासवा वर्स हम लोग पुरी देश के अंदर और पुरी दुनिया के अंदर आयुजित कर रहे हैं
02:56यह नेरा सौभग्य है कि गुरुतेक बहदुर जी महराज की तीन सो पचासवे सहादा देवस के कारिक्रम को
03:07अभी पिछले दिनों मुख्य मंत्री आवाज से किर्टन करके नगर किर्टन के आवेजन और आवास में किर्टन के आवेजन के उपरान
03:20वहां से रवाना किया गया और दिल्ली के सीसकंज गुरुद्वारे तक जाकर किस पूरी यात्रा ने
03:26इस पूरे करिक्रम का सुभारंब कर दिया
03:30इस से पहले गुरु नानक देवजी महराज के
03:38पांचसो पचासवे प्रकास पर्व के उसर पर भी
03:43मुख्यमंत्री आवास पर पहली बार कि आयुचन हो पाया था
03:51कि वहां पे गुरु पानी का पाठ हो सके
03:54मुख्यमंत्री आवास पर किवल एक आयुचन होता है
03:58वह गुरु पानी का होता है गुरु गंत सहभी महराज को
04:02बड़ी पवित्रता के साथ हम इन आईजनों को साथ आगे बढ़ाते हैं और वही ताकत है कि आज जो संकल्प वहां लिया गया था जिसको नेकर के गोरकपुर के हमारे सिक बंधों की एक अविलासा होती थे नीटु आदी जो कारिक्रम बार बार कहते थे कि बीर बाल दिवस क
04:32लखनों में करिक्रम हुआ और आधनिये प्रधान मंत्री जी ने पुरी देश के अंदर 26 दिसंबर की तिथी को बीर बाल दिवस की रूप में आज आयुजित कर दिया है
04:47जब एक स्वर से हम कारे करते हैं तो उसके पैणाम भी आते हैं पैणाम भी सामने आते हैं
05:02कुर गोविन्दे सिंगी महराज की चारचार साफ जादे हैं साफ जादे बाबा अजीद सिंग बाबा जुजार सिंग बाबा जोरावर सिंग बाबा भते सिंग
05:17इस देश और धर्म के लिए उसके रक्सा करने के लिए अपने आपको बल्दान कर देते हैं
05:29उनको लोग दिया गया लालस दिया गया कि इसलाम स्विकार कर लो जान भी बखस ली जाएगी और रियासत भी दिमिल जाएगी उन्होंने का इसका हम क्या करेंगे
05:48उन्होंने का इसका हमें कोई परवा नहीं और बल्दान दे दिया
06:00कहते हैं जब गोविंद सिंग्य महराज के बड़े पुत्र युद्ध लड़ते हुए बीर गति को फराप्त होते हैं
06:13बल्दान करते हैं अपने आपको दूसरा पुत्र युद्ध लड़ता हुआ बीर गति को प्राप्त होता है
06:22तीसरे और चौथे को जब दुस्त औरंग जेब के द्वारा बंदी बना करके उन्हें लालस दिया जाता है
06:37उसके सेना पती के द्वारा लालस दिया जाता है कि इसलाम स्विकार कबलो नहीं तो इतनी कुरूरता देखने को मिलेगी
06:48कहते हैं जब छोटे पुत्र को सबसे छोटे पुत्र को जब बलदान जब दिवालों पे चिना जा रहा था
07:01तो सबसे छोटा पुत्र बलदा पुत्र उसके आँखों में आसू आते हैं तो पूसता है अपने भाई से
07:14क्या आँखों में आसू क्यों है वो कहता है कि मैं तो इस धर्टी पर पहले में आया लेकिन पहले तुम जा रहे हो
07:27इस बात से मुझे आसू आ रहे हैं क्योंकि पहले तो अपने देश और अपने धर्म के लिए मुझे जाना चाहिए था
07:36और उन्होंने अपने आपको बल्दान कर दिया
07:42लेकिन बिधर्मियों के सामने कभी जुके नहीं
07:47ये जो गौरव साली इत्यास जिस सिक जाती का हो
07:56अपने ले नहीं देश के लिए
08:00अपने ले नहीं सनातन धर्म के लिए
08:05कस्मीर के लिए
08:09जिन्होंने अपने आपको बल्दान दिया हो
08:14देश के लिए अपने आपको बल्दान दिया हो
08:16सनातन धर्म के लिए जिन्होंने अपना बल्दान दिया हो
08:19आज ये हम सब के जिम्मेदारी बनती है
08:22कि उसके प्रतिकरता क्याफित करने के लिए
08:25हम भी उन सिक्व गुरुओं की उस परंपरा के प्रति
08:30कुछ कृतग्यता ग्याफित करें
08:32और आज यह पावन आउसर है
08:37जब पहले गंज गुरुद्वारा में
08:40मैं बहुत पहले जब यहां आया था
08:42सुख्धाओं का भाव था
08:44कई बार मैंने कहा भी यहां पर कुछ होना चुकिए
08:49और मुझे प्रसंता है कि आज यहां पर
08:52अच्छी सुख्धा कुछ बन चुकी है
08:58अब यहां पर भी गुरुबानी का पाज
09:01आनंद के साथ में उत्सा के साथ में
09:05आयुजित हो पाएंगे
09:07यहां पर भी वे सारे करेक्रम हो पाएंगे जो गुर्फर्व से जुड़े वे हैं
09:12अलग-अलग अस्वरों पर जो आयुजन होते हैं
09:15महानगर के साथ साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश का
09:20हर सिक का करके उस आयुजन में भागीदार बन पाएगा
09:27यहां पर भी लंगर हो पाएंगे और याद करना गुरुद्वारे का लंगर
09:33क्यों सिक नहीं चखता है कोई भी देखते उसका नाम नहीं पोछा जाता है
09:39उसकी जाती नहीं पोछी जाती है उसका चेहरा नहीं देखा जाता है
09:45एक गुरुवाणी है
09:47गुरु का जो हुक्म है
09:50उसका पालन हर सिक आज भी करता है
09:53और इसका पालन हमें हमेशा करना चाहिए
09:56मैं आज की सौसर पर आज बहुत पवित्र दिन है
10:00याद करिए 421 वर्ष पहले आज ही के दिन
10:05पवित्र गुरु ग्रेंट सहाथ को
10:08हरे मिंदर सहाथ में रख करके
10:10गुरु के रूप में उनकी माननेता को
10:15आगे बढ़ाने का करिक्रम हुआ
10:18जिसके प्रफियाज ही पुरी देश ही नहीं पुरी दुनिया
10:21तो ये पवित्र भाव के साथ
10:23सर्दा और सम्मान के साथ
10:25उन्हें यहादर दिता है
10:27और आज है हमारा स्वभाग्य है
10:30कि पहले गंज की सायुजन के साथ
10:32इस गुरुद्वारे के साथ
10:34मुझे मिलने का उसर प्राप्त हो रहा है
10:35सायुजन कमें धागिदार बनने का उसर हो रहा है
10:38मैं
10:39यहाँ पर से जगनेन सिंग नीटू
10:42और इस
10:43गुरुद्वारा प्रवंद समीति के अपने जितने भी हमारे पदादी कारी हैं
10:47सब को मैं इस बात के लिए धन्यबाद हूँगा
10:49कि
10:51काफी दिनों के बाद
10:54यहाँ गुरुद्वारा से जड़े हुए
10:56किसी कारेकरम में मुझे भागिदार
10:59बनने का उसर प्रप्ध हो रहा है
11:02कि जब मैं गुर्पूर में नहीं रहता हूँ उसरी दोरान गुरुपरो पढ़ते हैं
11:07है तो मुझे लखनों के ही कारेकरम में बाद की � cara बनने का उसर प्राप्ध होई
11:12है कि मैं नच्यो को और बहुब जरूर जाता हूँ
11:14प्लखनों की कारिक्रों में भागिदार बनता हूं लेकिन आज मुझे गोरगपुर के इस कारिक्रम में और गोरगपुर में भी मुझे इस बात की हार दी पसंता है
11:24कि गोरकपुर में जो हमारी तीन प्रमुग गुरुद्वारे हैं जटा संकर में, मोधिपुर में और पैल्ले गंज में
11:34इन तीनों को अच्छे रूप में हम लोगों ने उसको एक स्वरूप गोरकपुर वाज़ियों की मदद से कर दिया है
11:41ये गुरु परंपरा की प्रति हम सब की कृतग्यता है, उनकी प्रति सर्धा है, एक सम्मान है, एक आदर का भाव है
11:50क्योंकि गुरु परंपरा में देश के लिए और सनातन धर्म के लिए अपना पुरा जीवन जिया था