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Transcript
00:00पसंथी
00:01मालकिन
00:07तेरी इतनी हिममत
00:08कि तुमेरे बसपर पे सो गई
00:10माफ कर दीजे मालकिन
00:12हम से गलती हो गई
00:14मैंने तुझे कुछ जादा ही छूट दे दी है ना
00:18नई, नई, नई मालकिन पारतीजे मों मालकिन
00:20हम, हम कुछ हु सोचे नहीं
00:24हामरी कमर में तक दायद था कि बिना सोचे ही लेट गए
00:28अच्छा? ऐसा कौन सा काम किया था? जो तेरी कमर में दर्द हो रहा है?
00:34वो मालकिन का है न कि हमारा मरद हमें राद को सोने नहीं देता है
00:39कौन? हरिया? वो शराबी?
00:43जी मालकिन
00:44मतलब खुल के बोल
00:46वो का है न कि हमरा मरद राद पर हमरी जमीन पर हल जोतता है
00:53वो खुद तो सोता ही नहीं है और हमें भी सोने नहीं देता है
00:57तो ये तो अच्छी बात है न?
01:01जमीन पर हल चलता रहेगा तो तेरे जमीन की जाड अपने आप साफ होती रहेगी
01:05तुझे साफ सफाई करने की जरूरत ही नहीं बढ़ेगी
01:09मालकिन जाड जाडियां तो साफ हो जाएंगी और घास भी नहीं उगेगी
01:15लेकिन उके बाद हमरे जो बदन में दर्ध होता है उका का
01:19और अब तो देखिये हमसे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहे ठीक से न चला जा रहे
01:24अच्छा अच्छा वो शराबी इतना बड़ा मर्द है क्या
01:36अरे मालकिन कहां बताएं हम तो परिसान ही हो गए है
01:41उका हल तो यह लौकी से भी बड़ा है
01:45ठीक है एक काम कर तू कल दिन में उसे मेरे पास भीष दे
01:51मैं उसे समझा दूँगी हो सकता है फिर तेरे साथ ऐसा ना करे
01:55आपके पास हाँ अब यह छोड़ और जाकर आराम कर
02:01अरे मालकिन थोड़ा सा ही तो बचा है हम काट देते हैं
02:05कोई बात नहीं हम कर लेंगे तू जा अरे मालकिन हम कर लेंगे आप जाके आराम कीजिए ठीक है तुम काटो
02:12हुआ है
02:42वाह, क्या वादियां है
03:06इन वादियों के बीस से जब गड़ी गुजरे गई तो बड़ा मज़ा आएगा
03:12अरे बसंती
03:18आज खाना खाके आई हो के नहीं
03:22बड़े धीमे धीमे हाथ चल ला है तुम्हारे
03:28नहीं न मालिक, सावेरी सुवेरे हमारे मरत से हमारे जगड़ा हो गया
03:34ओहो
03:35ये ले
04:01केला खाले तेरी भूग मिट जाएगी
04:05ये भी ले
04:13अरे नहीं न मालिक, आपका एक केला ही इतना बड़ा है कि इसी से हमारे भूग मिट जाएगी
04:20मैं दूसरे केली की ज़रूत नहीं पड़ेगी
04:23खाले खाले ये मेरा केला है जो एक बार खाता है न उसकी सारी भूग मिट जाती है
04:30सई के अरे मालिक आप, एक हमारा मरग है जब दे को छोटे-छोटे केली लाता है
04:50अरे बसंथी, तू नहीं जानती
05:01जिनका छोटा होता है न
05:06उन्हें छोटा केला ही पसंद आता है
05:11मालिक हम समझे नहीं
05:16इससे उनके अंदर की सभाव का पता चलता है
05:19क्या रहे बसंथी
05:24यहां केला खाने आती है, काम करने आती है
05:29नहीं नीं मालिक वो तो मालिक हमारे हाथ में केला खावा दिये थे
05:34चुप चाप उपर जा और अपना काम खतम कर
05:39जब देखो काम चोड़ी करती रहती है
05:41विकल
05:42और आप
05:48क्या मुक्या आगे दूसरा केला रखके बैठे है
05:53दूसरा केला भी उसी के मुँ में देंगे क्या?
06:00हमें तो नहीं पकड़ाये कभी केला
06:02अरे ठकराइन
06:03केले तो मैं अपने लिए लाये था
06:06लेकिन बिचारी भूकी प्यासी ठकी हरी काम कर रही थी
06:10इसलिए अपना केला उसको दे दिया
06:13तुम तो बेकार मेराई का पहाड़ बनाने लगती हो
06:16हाँ, हम सब समझते है
06:19आज आपको देड़ नहीं हो रही है
06:22पंचायत नहीं जाना
06:26अले हाँ हाँ, जाना है, जाना है
06:28मगर तुम्हारा गुस्सा हमेशा साथ में आसमान पर रहता है
06:34संबालो
06:43प्रुम्हारा प्रुम्हारा प्रुम्हाम जाना है
06:49कर दो कर दो
07:19कर दो कर दो
07:21कर दो कर दो
07:22खालाई
07:23नहीं जिया
07:49अरे कहा धर रहो
07:59कम सकम खाना तो खा लेते
08:01फूके पेट नहीं आएगी
08:03अरे मेरी रानी
08:05कौन कमबक सोना चाहता
08:07आज तो पुरी राच जागेंगे
08:09पहले ये खाना खालें
08:11बाद में वो खाना खालेंगे
08:13छोड़ो छोड़ो ना
08:15हाथ तो धोलो
08:17हाथ तो धोलो
08:19हमें मिर्च लगेगी
08:21मिर्ची फे जो आसो निकलते हैं न
08:24उसे मिर्ची सुक कहते हैं
08:26और आज मुझे मत रुको
08:28मिर्ची सुक का अनन लेने दो
08:30क्या हो आप
08:32क्यो धक्का दे रही हो
08:34तुम्हें तो मज़ा आ रहा है
08:37पर हमरी तो हालत खराब हो रही है न
08:39क्यों
08:41एक बार उचल कुद मचानेक बाद तो माउट हो गई
08:43फिर से तुम्हारा पाने निकल गया
08:45तुम्हा तो बल्ला जब चालू होता है न एक बार
08:47तो शान्त होने का नाम नहीं लेता
08:49लेकिन हमरी तो
08:51हालत खराब हो जाती है
08:53तो हमें केच आउट होना पड़ता है
09:11अवरी जमीन पर
09:13कम से कम यह शहराबी रेगिस्तान तो नहीं बना पाएगा
09:15आँ
09:17आँ आँ आँ आँ आँ
09:19आँ
09:21आँ
09:27आँ
09:33आँ
09:40कमर
09:45आँ
09:47आई, हमरा कमर इतना दर्द कर रहा है
09:55मालकिन भी नहीं है, ऐसे मैं कमर सिधी कर लेते है
10:02पसंती
10:10मालकिन
10:15तेरी इतनी हिम्मत कि तु मेरे बेस्तर पेस हो गई
10:19माफ कर दीजे मालकिन, हम से गलती हो गई
10:23मैंने तुझे कुछ जादा ही छूट दे दी है न
10:27नई, नई, मालकिन, माफ कर दीजे वो मालकिन
10:30हम, हम कुछ सोचे नई
10:32हमरी कमर में तक दार था कि बिना सोचे ही लेट गए
10:38अच्छा, ऐसा कौन सा काम किया था, जो तेरी कमर में दर्द हो रहा है
10:42मालकिन का है न कि हमरा मरद हमें रात को सोने नहीं देता है
10:48कौन, हरिया, वो शराबी
10:51जी मालकिन
10:53मतलब, खुल के बोल
10:55वो का है न कि हमरा मरद रात पर हमरी जमीन पर हल जोतता है
11:02वो खुद तो सोता ही नहीं है, हमें भी सोने नहीं देता है
11:06तो ये तो अच्छी बात है ना
11:08जमीन पे हल चलता रहेगा
11:12तो तेरे जमीन की ज़ाड अपने आप साफ होती रहेगी
11:14तुझे साफ सफाई करने की ज़रूरत ही नहीं बढ़ेगी
11:18मालकिन ज़ाड ज़ाडियां तो साफ हो जाएंगी
11:22और घास भी नहीं उगेगी
11:24लेकिन उके बाद हमरे जो बदन में दर्ध होता है उका का
11:28और अब तो देखिये हमसे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहे ठीक से न चला जा रहे
11:33अच्छा
11:36अच्छा वो शराबी इतना बड़ा मर्द है क्या
11:45अरे मालकिन कहां बताएं हम तो परिसान ही हो गए है
11:50उका हल तो यह लौकी से भी बड़ा है
11:54ठीक है एक काम कर तू कल दिन में उसे मेरे पास भीष दे
12:00मैं उसे समझा दूँगी हो सकता है फिर तेरे साथ ऐसा ना करें
12:04आपके पास?
12:06हाँ अब यह छोड़ और जाकर आराम कर
12:10अरे मालकेन थोड़ा सा ही तो बचा है हम काट देते हैं
12:14कोई बात नहीं हम कर लेंगे तू जा
12:16अरे मालकेन हम कर लेंगे आप जाके आराम कीजिए
12:20ठीक है तुम काटो
12:21चाकुर साब उठीए
12:51ठाकुर साब उठीए आपके लिए दूद लेकर आये हैं
12:58ठाकुर साब उठीए गरम दूद लाये हैं आपके लिए छुवारे वाला
13:10साला मेरी जिंदिगी खराब हो गई है
13:23पता नहीं इनको क्या हो गया है
13:26सारी सारी राज सोरते रहते हैं
13:29मेरी तरफ तो देखते ही नहीं है
13:31अब इनको कौन बताए कि हमारा कितना मन करता है
13:36कि हमारी खेती पे भी कोई ज़ताई करे है
13:39अब इनको कौन समझाए
13:41बड़े-पड़े ये खेत बंजर हो गया
13:51अरे मालकेन का बताए हम तो परिसान ही हो गए है
13:55उपका हल तो ये लॉकी से भी बड़ा है
14:00पेव को फॉरत सारी लौकी काटके चले गए
14:20मैंने बसंती को बोला भी था कि लौकी पूरी मत काटना
14:24अब क्या करूं
14:30आज काजर सही काम चलाते हूं
14:48काजर भी तो पेट के लिए लाबदायक होता है
15:00आज से पहले मेरे दिमाग में ये बात क्यों नहीं है
15:07जब काजर में इतना स्वाध है तो लौकी में कितना होगा
15:12कितनी किस्मत वाली ये बसंती जो उसके पास अरिया है
15:15है याओ याओ तो बसंती आने लादाए बसंती नहीं होगा ये येद्ट से हिरी आने आना स्वाद्ये में ये येघ्यों
15:29अरे राद को सोने से पहले कपड़े कहा है पहन रही हो
15:55उतारने में टाइम लगेगा
15:56दारेक बल्ले बाजी शुरू करते हैं ना
15:59इह अपने बल्ले को ना तुम तनिक काबू में रखा करो
16:03हमको नो मैदान नहीं है जब देखो बल्ले बाजी करने चले आते हो
16:08इंसान की जब भूग घर में नहीं मिटती है ना
16:16तो बाहर तलाश करता है बाद में हम पर कोई इलजा मतलग आना
16:21इह मर्दों की ना नियत पर निर्भर करता है तुम तनिक हमरे बारे में भी तो सोचा करो
16:27एकाद दिन का हमें भी मौका दिया करो आराम करने का
16:30आदमे शादी कहाँ करता है ताकि जब मन करे वो समुंदर में तैर सके तैर ना तो दूर की बात है तुम तो तरंगे ने उठने देती हो
16:45का टुकर टुकर देख रहे हो तुमसे कछू बचा है का कुछ ज़्यादा ही तुमारी जुबान ने चल रही आज करे
16:57टेम से सोचो, कल मालकिन के पास चले जाना, बुलाया है तुम्हें
17:03मालकिन? मालकिन ने क्यों बुलाया मच या
17:06उन्हें तुम से कछु बात करनी है
17:09और हाँ, इन असे मधुतों के मच जाना
17:12तुम्हें रख कछु नहीं हो सकता
17:27झाल झाल
17:57अरे हरिया
18:21तुमा गए
18:25जी मेल गिन
18:27आओ
18:29बैठो
18:30बैठो
18:37मालकिन
18:40यहां कैसे बैठ सकते हैं
18:42यहां पर तुमालिक बैठते हैं
18:43मालिक के चिंता तुम मत करो
18:45हम कह रहे ना बैठो
18:46ने नी मालकिन
18:48मालिक को बता चलो तो हमें बहुत डाटेंगे
18:49और नौकरी से भी निकाल देंगे
18:51हमने कहा ना मालिक को हम समाल लेंगे
18:54पैटो जुपचाब
18:55जी मालकी
19:16पसंती बता रही थी कि तु उसे बड़ा परिशान करता है
19:20पूरी पूरी रात सोने नहीं देता
19:24अरे नहीं मालकीन वो बहुत जुट बोलती है
19:26उसने मेरी जिन्दगी खराब करके रख दी है
19:31अच्छा
19:34मालकीन अपने हाथ नहीं दोया
19:36मिर्ची आँखों में लगेगी
19:38अरे हरिया
19:40तुझे नहीं पता
19:46मिर्ची लगने के बाद जो आँखों निकलते है
19:50उसे मिर्ची सुक कहते है
19:53हाथ तो धोलो मिर्ची लगेगी
19:58मिर्ची से जो आँशों निकलते हैं उसे मिर्ची सुक कहते है
20:05मिर्ची सुक का आनन लेने दू
20:06सही समझा तुँ हरिया
20:13मिर्ची वाला सुक
20:15अच्छा सुन
20:16मैंने सुना है
20:19तु बसंती को बड़ा दर्द देता है
20:21रुपता ही नहीं है
20:23क्यासी बाते करें मालकीन आप
20:26ऐसी कुछ भी नहीं है
20:27वो जूट बोलती है
20:28मुझे से जूट मत बोल
20:31मुझे सब पता है
20:33और तु
20:35इतना शर्मा क्यों हो रहा है
20:38नहीं
20:46सुना है
21:07तेरे हल में बहुत तम है
21:09सूखी से सूखी जमीन को भी जोट कर मुलाइम बना देता है
21:14मालकीन
21:16वो तो आपका खिच जोटने के बादी पता चलेगा
21:19कि मुलाइम हुआ की नहीं आपका की
21:21मालकीन नहीं
21:23पसंती बोल पसंती
21:25ऐसा हल चला कि मेरी जमीन की सारी खांस फूस खतम हो जागी
21:30आप की जुआ जागी फिरने के जागी ज़तु हमी अलकीन
21:37Oh, oh, oh
22:07अरे मालकिन, इक का कर रहे हैं आप, मालिक देखेंगे तुम्हें बहुत मारेंगे, हम इन आउकरी से निकाल देगे
22:23ठाकूर की चिंता तुम मत करो, उनी की वज़ा से एक खेत कपसे बंचर पड़ा हुआ है
22:28वाहरिया, तू तो सच में बहुत बड़ा मर्द है रे, चल
22:35तुछे आज से यहीं पर नौकरे में लगवाते हैं
22:39शक्रिया मालकिन
22:42सुनिये जी
23:00हाँ हाँ
23:03हाँ बोलो क्या बात है
23:06वो हमारी काम वाली है न बसंती
23:09यह उसका मरद हरीया
23:12नमस्ते मालिक
23:13पिचार बहुत परिशान है
23:16कल ही डोक्टर से चेक अप कराया है
23:18और उसने भारी काम करने से मना किया है
23:21ऐसी क्या बात हो गई
23:24कि ये हमारे खेतों में काम नहीं कर सकता
23:26तरसल इसके गुर्दे में पत्री है
23:31जी मालिक, दो दिन पहले ही चेक अप कराया है
23:36गुर्दे में पत्री है
23:39अरे तो मैं क्या कर सकता हूँ
23:42मैं इसके गुर्दे की पत्री कैसे निकालूँ
23:45वो मैं सोच रही थी कि
23:48इसको घर की रखवाली के लिए रख लेता है
23:51जब तक ये ठीक नहीं हो जाता
23:53ये और रखवाली?
23:58मुझे पता चला है कि ये दारू पीकर
24:00पूरे गाउं में घुमता रहता है
24:02अरे नहीं मालिक, हमने कली दारू छुड़ दी
24:05ये अब सुधर गया है जी
24:12क्यों अरे, सही बोल ला है ना?
24:16जी मालिक
24:17अरे मैंने तो सुना है कि ये हमारे खेट की जुताई करने की जगह ठुकाई करता रहता है
24:25दारू के नशे में तुने हमारे खेट की ठुकाई करकर के उसे बंजर बना दिया है
24:29अरे नहीं मालिक, हमने कल लिए आपके खीत की जुदाई की है
24:32और आपका पूरा बंजर जम्विन एक दम उलायम कर दिया है
24:35चाहे तो आप चेक कर सकते हैं
24:37अच्छा, ठीक है ठीक है
24:38तू ऐसा कर, अभी से घर की रखवाली का काम शुरू कर दे
24:42जब तक तेरे गुर्दे की पत्री ठीक नहीं हो जाती
24:45जी मालिक, आप बिल्कुल भी टेंसर मत लीजे
24:47हम आपके खीत की अच्छे फूर ठुकाई करेंगे
24:49अरे?
24:52ठुकाई? यहाँ अबर ठुकाई कहां से आ गई?
24:55अरे होश में तो है?
24:56तारू पिकर तो नहीं है
24:58इसका मतलब है कि
25:00जब यह हमारे घर की रखवाली करेगा
25:02और हमारे घर पे किसी ने भी बुरी नजर डाले
25:04पर यह उसकी अच्छे से ठुकाई करे
25:06अच्छा-च्छा, ठीक है, ठीक है
25:09आज इसे काम शुरू कर दो
25:12जी मालिक
25:14बसंती बता रही थी कि इसने कल सतारू को हाथ तक नहीं लगाया
25:17जी मालिक
25:18अच्छा-च्छा, ठीक है, ठीक है
25:20आप बैठिये, मैं आपके लिए चाय लेकर आते हूँ
25:23ठीक है
25:24और तुम
25:27चलो, अब इसे काम पे लगो
25:44अब तो मज़े की मज़े
25:51और ठुकाई के साथ पैसे भी
25:54वाहरी आप
25:55तेरी तो निकल पड़ी
25:57तो फिर शुरू हो गया
25:59लो, अभी तो मैं शुरू नहीं हुआ
26:06और तुम कह रही हूँ कि मैं शुरू हो गया
26:08तुने बोला था ना मालिक को
26:09कि तुने शुराब भी नहीं छोड़ दी है
26:11अच्छा
26:13तु शुराब की बात कर रही है
26:16मैंने तो कुछ और ही सोचा था
26:22वैसे बसंती
26:23तुमालिक के चिंता मत कर
26:25मालकिन हमसे बहुत खुश है
26:28वैसे भी
26:29मालकिन के आगे ना
26:31तेरे मालिक ये कुछ नहीं चलती है, बुढ़ा साला, हर्या तो कभी नहीं सुधरेगा न, हम कैसे कैसे करके न, घर की रखवाली पे लगवाया है, ताकि तु मालिक मालकिन के आखों के आगे रहे, तारू पीना छोड़ दे, लेकिन तु, तु है कि सुधरने का नाम ही नहीं
27:01घर में और भी बहुत काम है, बसंती, तु छोड़ना, मैं सारे काम कर दूँगा, हट न, हम जानते हैं, तुम कहें इतनी प्यारी-प्यारी बाते कर रहे हो, तुमको बस एकी चीज़ चाहिए न, हटो, बसंती, संतो,
27:31ध जरते बाते कर दो चाहिए
27:32कज कि व. इन्म, जरते हैं, हम व. इन्म recibि, इन्म, जरते नॆँज़ घ्जाए, हम जरते कर दो
27:56काल
27:57अरे ठकुराइन
28:02ठकुराइन
28:04हान जी
28:05अरे ये सामान क्यों बिखरा पड़ा है
28:08बसंते नहीं आई क्या
28:10वो उसकी तबेत खराब थी तो आज मैंने उसे चुट्टी दे दी
28:13अरे अच्छी वली तो गई थी कल
28:15ऐसी क्या तबेत खराब हो गई कि आज काम पे नहीं आई
28:18आप समझते नहीं है न
28:20और तो वाली परिशानी है
28:23महीना हुआ है उसे
28:24अच्छा अच्छा अच्छा देखो ठकुराइन
28:27मैं शहर जा रहा हूँ
28:29कुछ जमीन की खरीदारी करनी है
28:30शाम तक लोटाऊंगा
28:32ठीक है ठीक है
28:34हम भी जाके नहाले तो
28:35अरे हरिया
28:37जी मालिक
28:39देखो हरिया मैं शहर जा रहा हूँ
28:42शाम तक लोटूंगा
28:43घर की अच्छी तरह रखवाली करना
28:46अरे मालिक आप बिल्कुल भी टेंचर मत लीजे
28:48मैं आपके माल का पूरा खयाल रखूंगा
28:50कैसी भशा बोल ला ये
28:52इसका मतलब है कि
28:55हमारे गण में जो रुपया, पैसा, कहना है
28:58वो हमारा माली तो है
29:00ये उसकी अच्छी से रखवाली करेगा
29:04अच्छा, अच्छा, ठीक है
29:06हमारे मालकी अच्छे से रखवाली करना
29:10जी मालिक
29:11मैं शाम तक लोटाऊंगा
29:13और हाँ
29:14शहर से कुछ मगाना हो तो मुझे फोन कर देना
29:16लोटते वक्त लेता आऊंगा
29:18ठीक है?
29:19ख्याल रखना हरिया
29:20हम चाहा रहे हैं न हम
29:31क्या बात है?
29:49आज मालिक ने खुदी बोल दिया
29:50माल का ध्यान रखने के लिए
29:51तो फिर आज ऐसी रखवाली करूँगा
29:55कि मालिक ने में जिन्दे की भरियाद रखेंगे
30:01बात है जिन्दे के लिए और में जिन्दे के लिएका
30:31अरे ये क्या कर रहे हूँ
30:50मालिक के माल का ख्याल रख रहा हूँ
30:53मालिक नहीं तो कहा था
30:55तुम मालिक की बड़ी बात मानने लगया
30:58अब मालिक मालकिन तो भगवान की तरह होते हैं
31:04उनकी वज़े से तो नौकर के घर की रोटी चलती है
31:07अब उनकी बात नहीं मानेंगे तो किसकी बात मानेंगे
31:12ए भगवान आज कोई न टोके
31:17नहीं तो बना बनाया काम बिगड़ जाएगा
31:20पिछली बार किसे ने टोक दिया था तो मेरा काम ही बिगड़ गया था
31:24नमस्कार ठाकुर साहब
31:27नमस्कार नलकी
31:29इतनी सुवा सुवा कहा चल दिये ठाकुर साहब
31:32ओ गया न सत्या नाश
31:34अरे नलकी वो अपना गंगा राम है ना
31:38जी
31:38उसके लुगाई की तबियत बड़ी खराब है
31:41तो इलाज के लिए रुप्यों की जरूरत है
31:43अपनी जमीन बेच रहा है
31:44उसी की लिखा पड़ी के लिए जा रहा हूँ
31:47ठी
31:48अरे किसका फोन आ गया
31:51हाँ गंगा राम
31:55बोलो
31:56क्या कह रहे हो
32:00तुमारी लुगाई भाग गई
32:02ओ अच्छा अच्छा स्वर्ख सिधार गई
32:11ख्याल रखो ख्याल रखो
32:16कर दिया न सत्यानाश
32:19तुम जैसा आदमी
32:22अगर आवाज लगा दे न
32:24तो बनता काम भिगड जाए
32:27टोग दिया न मुझे
32:29हाथ में आतावा सोना
32:31मट्टी बन गया
32:59अरे ये हरीया के धर गया दिखाई ने दे रहा
33:01अरे, ये हरिया किधर गया, दिखाइने दे रहा है, हरिया,
33:31हरिया, ये सौले गाउं के लोग भी अजीब है, मुझे टोकने की क्या जरुवत्ती, कर दिया ना मेरा काम खराब, और ये हरिया भी नहीं दिखाई दे रहा है, हरिया, हरे हरिया, और ये ठकराइन कहां चली गई, ठकराइन,
34:00हरे, ये दोनों सुन क्यों नहीं रहे, कहां चले गए, ठकराइन, हरे, ये पेसा भी अभी लगनी थी,
34:16अरे, तरवाजा कैसे बंद है, औरे कौन है अंदर, कौन है अंदर, कौन है, तरवाजा खोल,
34:38अरे, पॉलता क्यों नहीं है, दर्वाजा तोड़ो, पॉल, बेकराइन, ओरे, अर्यू
34:47जर्वाना फोल
34:50अभी ने अधाला कोई दूदा
34:51फोल
34:54अडिया
35:01कराइन
35:04साले
35:06मेरी बीवी के साथ रंग्रेलिया मनाता है
35:08अभी तेरी लुगाई को बलाता
35:11नहीं ठाकु साब
35:12प्लीस है में माफ कर दीजे
35:13ठाकु साब प्लीब
35:14नहीं ठाकु साब
35:16प्लीस ठाकु साब
35:18ठाकु साब
35:19मैज प्रपघ त्यूँ
35:21प्लीस मुझे माफ कर दीजे
35:28संती
35:29जल्दी मेले घरपर आयाओ
35:31माले, यल्धी आना
35:42
35:43प्लीस ममफ कर दीजे
35:44दूपर आइसी कलती नहीं होगी
35:45थाकूर थाप्री समय माफ कर दीजी
35:47थाकूर साथ, मैं बहग गई
35:54प्लीज मुझे माफ कर दीजी
36:14काओ अमालेक, आप हमें कहेता जल्दी बुलाए
36:32काओ मालेक, आप हमें कहेता जल्दी बुलाए
36:39मालिक, आप हमें कहये तह जल्दी बुलाए !
36:44पसंति, मैंने तेरे पती और तेरे मालकुन की रंग्डेलियों की बात तुझे बताने के लिए याँ बुलाया है !
36:51मालिक? हम कछू समझी ना ही ?
36:54तेरे पति के, तेरी मालकुन के साथ आवेज संबन्हे ہے...
36:58क्या!?
36:59मैंने इन दोनों को रंगी हाथों पकड़ा है
37:03क्या बात करें मालिक आप
37:06तू हरिया जिस थाली में खाया उसी में छेट कर दिया
37:17मसंती प्लीस आफ कर दो
37:20और आप आप मालकिर आप तो हमारा घर सवारने चली थी
37:25और आप ही हमारा घर उजाड रही है
37:28पसंती मुझे माफ कर दो
37:31प्लीस
37:34थाकुर जे मुझे माफ कर दीजे न मुझे बहुत बढ़ी गलती हो गई
37:47चुपकर
37:47माफी नहीं तुझे सजा मिलेगी
37:58जो हरिया ने मेरी बीवी के साथ किया है न वही मैं हरिया की बीवी के साथ करूँगा
38:04बिल्कुस सही कह रहे हैं आप मालिक
38:10मैं भी अब आपके साथ वही करूँगी जो हरिया ने अपके घर की इज़त के साथ किया है
38:15तब ही इसे पता चलेगा कि दूसरे के घर की इज़त पर हाठ डाला क्या होता है
38:20नहीं बसंती तुम इसे कुछ नहीं करूगी मैं यही करूँगी तुम इस मुसे माफ कर दो
38:26जब मैं मालिक के साथ सूँगी तब ही तुम्हें पता चलेगा
38:30और यही तुम्हारी सजा है चलिए ठागुर साब ठागुर साब ठागुर साब
38:38तुम्हारे भी यही सजा है, तुम अपने पती को किसी और की पतनी के साथ रंग्रेलिया मनाते हो वे देखो
38:46आओ बसंदी
38:48आओ, आओ, यही ठीक रहेगा, यही ठीक रहेगा
39:08तुमसे दूरी बरदास नहीं होती है, हमको भी तुमरे साथ रहना है, हमें अपने साथ ले चलो
39:23मैं भी तुम्हें बहुत चाहता हूँ, लेकिन तुम्हें अपना नहीं सकता
39:30क्योंकि अगर हमारे प्यार की बाट ठकराइन को बता चल गई
39:35तो ये बात वो अपने बाप को बता देगी
39:37और सारी जमीन को अपने कबजे में कर लेगी
39:41और मुझे धक्ये देकर बाहर निकाल देगी
39:44इका मतलब हम हमेशे ऐसे चिपचिप कर ही मिलेंगे
39:49नहीं वसंती कुछ नकुछ तो करना ही होगा
39:53कोई ब्लांद सोचता हूँ मैं
39:57तो जल्दी सो कुछ कीजी ना
39:59अब हमको इस तर आपी के साथ नहीं रहना है
40:02देखो अब मैं जैसा कहूँ तुम वैसा ही करना
40:06खुल के बोलिये ना कि का करना है
40:10देखो अब जब भी तुम्हारा पती तुम्हारे पास प्यार करने के लिए आए
40:15तो तुम तैयार ना होना
40:19और मैं भी ठकराइन के साथ ऐसा ही करूँगा
40:22थोड़े दिनों में ये दोनों प्यार के लिए बेचेन हो जाएंगे
40:26बस उसके बाद तुम ना ठकरना है
40:32तुम ठकराइन के पास जाना
40:34और उससे कहना
40:35कि तुम्हारा पती तुम्हे इस तरह प्यार करता है
40:39कि तुम्हे बेचेन कर देता है
40:41उसके बाद हमारा नाटक शुरू हो जाएगा
40:44प्यार के लिए बेचेन ये दोनों पंची
40:49एक दूसरे के पास करीब आने के लिए दड़पेंगे
40:53और फिर हमारे जाल में फश जाएगे
40:57और फिर हमारा खेल शुरू हो जाएगा
41:00उसके बाद जो होगा समझ लो
41:03अगर हम दोनों चिपकते हुए भी इनके पास जाएगे ना
41:06तो ये हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगे
41:09सच
41:36अब तक बहुत मज़े किये तुम दोनों ने
41:44आज से हम दोनों मज़े करेंगे
41:50और सुन लो
41:54आज से बसंती ही मेरी बीवी है
41:57अगर आपकी यही मर्जी है तो
41:59मैं भी हरिया के साथ खुश हो दिखूँ
42:06चलो हुआ है
42:11देखा
42:23मैंने तुम से कहा था ना
42:25कि एक दिन ये दोनों ही हमें मिलवाएंगे
42:36झाल
42:38झाल
42:40मैं तुम से रखूँ
42:41झाल
42:44झाल
42:46झाल
42:48झाल
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