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SCO में होगी भारत-चीन की बात, क्या कूटनीति से निकलेगा समाधान? देखें
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00:00नवस्कार वे हूँ श्मेता सिंग और आप देख रहे हैं आज तक चीन के तियांजिन शहर में मैं इस समय मौझूद हूँ जहाँ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पहुँच चुके हैं लैंड कर चुके हैं जपान का अपना सफल दौरा समाप्त करके प्रधान मंत्री चीन
00:30देने वाले भारत वंशियों के बीच के रिष्टे की यात्रा नहीं है यह यात्रा है स्सीओ के लिए स्सीओ के मंच पर इसमें शामिल होने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी चुके ट्यांजिन पहुँचे हैं यहां पर गूस चीन दोनों देशों की तरफ से बह�
01:00अमाम बाकी सदस्य देश हैं वो सब प्रधान मंत्री से मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं क्या-क्या बाइलाटरल सोंगे एक एक करके यहां पर पता चलने वाला है कितनी उमीदे हो सकती हैं इस मुलाकात से कितनी उमीदे हो सकती है सियो के मंच पे जो कुछ भी होने वाला ह
01:30प्रदामंत्री यहां पर पहुंचे हैं लेकिन इसके साथ ही भारत में साढ़े छे भजे भारत में भले राट ढलेगी लेकिन यहां पर तैयारिया उसकी चलेंगी।
02:00साफ साफ नजर आता है कि भारत से ज्यादा उमीदों से इस मुलाकात इस SCO की जो शिखर सम्मेलन है उस पर निगाहे व्लादिमिर पुतिन की होंगी श्री जिन पिंग की होंगी और मुम्किन है साथ समुंदर पार बैठे अमेरिका की भी होंगी
02:18क्योंकि डॉनल्ड ट्रम्प की तरफ से जो जो टारिफ को लेकर बातें की जा रही है उस सब के बीच वो भी देख रहे हैं कहीं एक तिकड़ी जो की विश्विशक्ति को सीधा सीधा चुनोती दे सकती है वो न खड़ी हो जाए यहाँ पर क्या इसकी उमीद करनी चाहिए क्य
02:48हमारे सात خاص मह�can भी जुड़ेंगे हमारे सात हमारे समवादाता सुमित चौधरी जुड़ रहे हैं जो की पूरी जो रक्षा का अंगल है उसपर उनकी नजर है साथ में प्रणय उपाध्या है जो विदेश जो रिष्ते हैं हमारे बाकी देशुर्ट उस हिसाब से हम इसे �
03:18बात से शुरुवात करते हुए कि जपान का दौरा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का वहां के प्रधान मंत्री से मुलाकात में जो आत्मेता रही जो सफलता रही वो सारी चीजें बहुत प्रमुकता से अंडरलाइन करते हुए प्रधान मंत्री यहां चीन पहुचे हैं तो
03:48सर जनरल मेस्टन आपके साथ चुरुबात करते हूँ
03:51ओशेता देखिए इस टाइम दो चीज़े हैं एक तो एस्टी ओ का है
03:57समेट और साथ में बाइनेटरिट मीटिंग है प्राइमिस्टर और चीजी जिपिंग के बीच में
04:02और प्राइमिस्टर और पुतिन के बीच में तो इसमें बहुत उमीद यह है
04:07कि जो बाइनेटरिटर टॉक्स हैं मेरे को लगता है कि भारत और चीज़े और भारत और रूस के रिष्टे और संदेंगे
04:13और बेतर होई गए और खासकर जिस प्रकाद प्रेजिडेंट ट्रॉक्स ने यह ट्रेड और टेरिफ्स लगाए हैं भारत के उपर और चीज़े के उपर तो इतने कड़े नहीं है और रूस को सैंक्शन लगा रखें तो मेरे को एक नया मंटी ओडर दिखता हुआ
04:30और दिखना है ग्लोबल और कि भारत की और रूस का मेरे को लगता है भी बहुत बड़ा विश्व यह बहुत बड़ा हाथ होगा और यह काउंटर हो जाएगा विस को और तो सब में एक पॉजिटिविटी दिखती है तो
04:56अच्छा अउटकम होने की उमीद है और यह वेस्ट के लिए काउंटर जरूर होगा क्योंकि प्रेजिडेंट ट्रम्प अभी एक और विल्पुल डॉमिनेटिंग लीडर होगा है इंश्वता
05:14सुरिश गोईल जी हम चीन पर शक करते रहें संदेह के साथ उससे दोस्ती करें ये एक तरफ है लेकिन चीन के साथ रिष्टे अगर सामान्य रहें तो क्या वो दोनों देशों की हितों में बहतर रहेगा
05:30देखे आप रिष्टे सामान्य तो शाइद होना बहुत मुश्किल होगा और में इसलेए कह रहा हूं कि चीन के बारे में। चाहितका हूं मैं वहां रह रह चुका हूं तो रिष्ट इसमानी होने की बात आपर हम नहीं करते हैं लेकिन हम रिष्टों को कितना आगे ले जा
06:00बहुत important मुद्धर आएगा और जहां तत मेरा ख्याल है किसी को भी ये उमीद नहीं है कि भारत और चीन के जितने जो problems हैं जो ज़्यादा तर boundary और की issue है या हमारे neighborhood में जो बीर आई है उसका issue है उसको छोड़ते हुए
06:21ये जरूर उमीद है कि अमेरिका की नीतिया भारत को चीन और रूस की तरफ जितना push कर रही है उससे चीन और भारत के बीच के trade economic investment relationship इन संबंदों में बहुत जरूर कोई न कोई सुधार काफी आगे तक बढ़त होने की उमीद है तो मैं समझता हूँ कि इन से एक जो geopolitical situation change होने
06:51होगी जी जी श्विता नहीं एक जो कूटनीती को समझता है उसकी समझ प्रणय वाकई थोड़ा सा जिजक कर सैयम से कदम रखने की जरूरत पे बार-बार जोर देते हैं अब इसमें अगर हमें जो आफ रिकॉर्ट ब्रीफिंग्स हो रही है उसमें भी कहा जा रहा है कि आ�
07:21आप यह मत समझें कि प्रधान मंत्री चीन आये हैं प्रधान मंत्री स्विता इसी तरीके से पढ़ा जाना चाहिए और इसली पर जाना चाहिए अगर भारत और चीन के संबंधों का इतिहास आप देखें तो आपको दो तस्वीरें एक साथ नजर आती हैं मुस्कुराती हु
07:51कि क्या इन मुलाकातों के जरीए हम कुछ common grounds तलाश सकते हैं जिस तरीके से तमाम विशिशक के कह रहे हैं श्वेता यहां पर कि समस्याएं पूरी तरह से खत्म नहीं होती क्योंकि हमें तीन factors को कभी नहीं भूलना चाहिए कि भारत और चीन दुनिया की दो सबसे ज़ादा �
08:21जो कोशिश चल रही है यहां पर वो यही है कि किसी तरीके से हम इतना मैने मिनिमाइज यह इतना मैनेज कर सकें संबंधों को कि हमारे जो मदभेद हैं वो युद्ध में न बदले और जो प्रचिस परदा है वो किसी तरीके से हमारे हमारी टकराओ के अंदर न बदले यही �
08:51188 किलोमेटर की जो लाइन अफ एक्शल कंट्रोल है जो की बीते कई दशकों से एक अनिरनित सी जो सीमा है उसको सॉल परने की चुनाती है वो जब तक बरकरार है जिस तरीके से दोनों देशों के बीच में पत्यस्परधा बरकरार है उसमें हमेशा ये रिलेशन्शिप एक ए
09:21समित भले ही कोई भी चाहे आर्थिक तोर पर दोनों देशों के बीच संबंधों की बात करें कूटिनीतिक संबंधों की बात करें सबसे जो बात है वो आकर उसी लाइन ओफ एक्शल कंट्रोल पर आकर रुख जाती है आप चुकि भारतिय सेनाओं को बहुत लंबे समय से क�
09:51भी जारी है बिल्कुल और बिल्कुल शोयता इसलिए महतपूर्ण है ये बैठके क्योंकि लगातार आप देखे किसी भी विवात का हल खास्तों पर जब दो देशों के बीच में होता है तो डिप्लोमेटिक चानल सही आप कह सकते हैं सुलस सकता है और यही बात है कि जब आ
10:21उसके लिहास से बहुत महतपूर्ण है देखना कि वो सारी चीजे सिर्फ टेबल तक सीम इतना रहे वो आपको जमीनी तौर पर भी देखने को मिले यानि जो जॉइंट मेकेनिजम की बात हम एकनॉमिक फोरम में करते हैं एकनॉमिक पॉइंट औफ यू से करते हैं वो हमारे
10:51बाचीत हो रही हैं उसके बाद क्या चीजें ड्राउंड पर इंप्लिमेंट की जाती हैं वो कॉन्फिदेंस बिल्डिंग किस तरीके से की जाती हैं दोनों देशों के बीच में उसको देखना बहुत जरूरी होगा शुइता
11:01सुरेश गोईल जी मैं यहाँ पर आपके साथ अपना एक निजी अनुभव साजा करके आपसे उसका आकलन जानना चाहती हूं प्रणे आपसे भी मैं उसके बाद जानूंगी
11:13क्योंकि कई दफा में मुझे चीन आने का मौका मिला है लेकिन इस बार अलग क्या हो रहा है वो यह कि आज जब मैं निकली तो समय टाक्सी बन थी क्योंकि
11:23की मीटिंग यहाँ पर हो रही है सुरक्षा बड़ी टाइट है तो मुझे सब्वे लेना पड़ा सब्वे लेने के लिए जब मैं पहुंची तुम ने यहाँ पर चीनी में आप मैंडरिन में नाम लिखकर ले जाना होता है वरना कोई समझता नहीं है तो जो सब्वे स्टे�
11:53पर मुझे लाइन चेंज करनी थी वहाँ पर एक दूसरा व्यक्ति आया वहाँ पर उसी तरीके से रिसीव करके वो दूसरे प्लाटफॉर्म पर ले गए और उसके बाद वहाँ पर मुझे दूसरे स्टेशन पर छोड़के आए यह क्या है यह चीन क्या दिखाना चाहता है क
12:23अधरी होती थी वहां के साधरा लोगों से मिलने का मौका मिलता था तो ज्यादातर लोगों के मन में यह होता था कि यह 1962 में क्यों हुआ यह होना नहीं चाहिए था एक तरफ कहते थे यह अच्छा दूसरी तरफ मेरा अनुभाव मैं अपने जब कंपान में सालीच पड़ मे
12:53यह लिए एक लीच लिए Ellie चाहिन परसाँ आपे लॉं अर जो फीलिंग है लका कैंने विड्या वी दिस परस्टाव यह डीच प्रस्ति आपने की नहीं है यह लुआ भी गलत नहीं हो सकता और हमें यह मान टर के चलना होगा ही आपका अबसर आपका अनृप den कि डे लेकिन �
13:23चीन का मानना हमेशा यह रहा है कि वो सबसे ऊपर है पूरी वल्ड का सेंटर है वो यह तो एक तरफ अमेरिका है वो समस्ते है कि सबसे बड़ा वो है एक तरफ चीन उसे समस्ते है कि वो वल्ड का सेंटर है और हम उसके बीच में हैं अगर आप यह मान के चलेंगे कि हमको दो �
13:53ने मैं बिल्कुल समझ रही है और मुझे लगता है कि ये जो हमने ओपन छोड़ दिया है इसे समझने के लिए जो दर्शक है वो भी इसे देखकर अपना-पना उसका माइने निकाल सकते हैं और इसलिए मैंने ये साजा भी किया है प्रड़े आप बताईया आपको क्या समझ मे
14:23चीन ने बीटे कुछ सालों के दोरान अपनी जो छवी है उसको सुधारने के लिए बहुत कोशिश की है ये जो आप बॉन हमी देख रही है ये जो वाम्त अफ जेस्टर देख रही है चीन में आप अगर कारोबारियों से बात करें भारती कारोबारी भी वहां जाते हैं आ�
14:53हमसे मिलने के लिए एक चीनी विरेश्विभाग का अधिकारी आया तो उसने अपना नाम चीनी बताने के साथ साथ कहा माई इंग्लिश नेम इस जान एंड वी वर सप्राइस्ट कि जान तो उन्होंने कहा आप लोगों की सुविधा के लिए उसी तरीके से एक चीनी पत्रक
15:23ये कहने के साथ साथ जहां वो एक तरफ अपनी छवी दिखाने की कोशिश कर रह जाए आज आप शाम को जब वक्त होगा तो त्यांजिन जगमगाता हुआ नजर आएगा चीन ये शोकेस करना चाहता है
15:32वो आपको impress करना चाहता है
15:35लेकिन क्या उस impression के भीतर
15:38क्या वो concession देने के लिए तयार है
15:40क्या वो उन चीजों को छोड़ने के लिए तयार है
15:42उसमें आपको चीन के लाल जंडे के साथ
15:44वो चीन की लाल लकीरे नजर आती है
15:46वो छोड़ने के लिए तयार नहीं है
15:48किसी भी तरीके की जमीन को, किसी भी तरीके की जो ऐसी, जिसे आप जिद भी कह सकते हैं, उन चीजों के उपर फिलहाल वो समझोता करता हुआ, कंसेशन देता हुआ नहीं देखता है, उसकी बिजनिस डीलिंग्स में आपको कंसेशन और रेट कट मिल जाएगा, लेकिन कम से कम
16:18से जानती हैं, कि उस गलवान के घाव के निशान जरूर बरकरार है, इसी लिए ये मल्टिलेटरल मीटिंग है, मुलाकात होगी, हैंशेक होगा, बहुत सारी बाते भी होगी, और हम आखेंगे, कि चीन जो जमीन पर कर रहा है, उसी से उसके इंटेंशन्स या उसकी जो भार
16:48करते हुए दूसरे देशों के साथ रिष्टे बनाय जाते हैं, स्थापित किया जाते हैं, हम से अंगल पर और अधिक चर्चा हम आगे बढ़ाएंगे, लेकिन पहले जो एसी ओ की जो बैठक है, उसके बारे में आपको ये रिपोर्ट दिखा देते हैं
17:18दोनल्ड ट्रम्प को ब्रिक्स और एसी ओ जैसे देशों से डर लग रहा है, क्योंकि उन्हें लगता है किस से अमेरिकी वर्चस्व को खत्रा है, लेकिन जिस रेर अर्थ ने ट्रम्प को चीन पर जुकने के लिए मजबूर किया, उस पर ब्रिक्स और एसी ओ देशों का कब
17:48बाजील दूसरे नंबर पर है, जिस पर अमेरिका ने 50-40 टेरिट लगा रखा है, एसी ओ को लेकर एक सवाल भारत के लिए भी अहम है, और वो ये कि चीन के दबदबे वाले संगठन में जाकर भारत को क्या मिलेगा, वो भी तब जब एसी ओ की वैठक को शी जिन पिंग ने
18:18कमबोडियाई राजा नुरुदम सिहमोनी, वियतनामी राश्पती लुआंग कौंग, लाउस की राश्पती फॉंग लॉंग, सियोलित, इंडोनेशाई राश्पती प्रभोवो सुवियान्तो, मलेशियाई प्रधान मंत्री अनवर इबराहिम शामिल है, इसके लावा पाक
18:48और लेखा, कि गनिश जी की छवी चीन के तांग, राजवंश और मोगाओ गुफाओं में पाई जा सकती है, ये सदियों पहले चीन और भारत के कला, आस्था और संस्कृत के आदान प्रदान का एक सुंदर उदाहरन है, इस तरह चीन की तरफ से भारत से रिष्टों की या
19:18प्रदान मंत्री मोधी के जापान और चीन की आत्रा करने का मकसद ट्रम्प के टैरिफ के भारत पर असर को कम करना है, इसके अलावा भारत दोनों देशों के साथ संबंधों को घनिश्ट बनाना चाहता है, बड़ी बात ये कि S.C.O. में प्रदान मंत्री मोधी और चीन के �
19:48बात एक दुपक्षिय बैठा करेंगे, इसके बाद S.C.O. शिखर समिलन के अधिकारिक भोच से पहले दूसरी बैठा कर सकते हैं, सोमार को देश्रावाना होने से पले प्रदान मंत्री मोधी रूस की राष्टपति पोतिव के साथ दुपक्षिय बैठा करेंगे.
20:18इन तरह बात यह की जो चीन भारत पर दोरे डाल रहा है वो अपने बाजार में भारतिया माल को रोकता है.
20:43कई तरह के सीमा नियम चेकिंग के नाम पर प्रोड़क्ट को हफतों तक बंदरगाहों पर रोकना और फिर खराब क्वालिटी का हवाला दे कर जहाजों को बैरंग वापस लाटाना उसकी हरकतों में शामिल रहा है.
20:53इसलिए सवाल है क्या चीन जो अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ भारत के साथ होने के अभी बात कर रहा है.
20:58वो भारतिया सामान को चीन के वाजार में आसानी से जाने देने के लिए सहमत होगा.
21:02क्या चीन से करीबी बढ़ाने से फाइदा होगा?
21:32अमेरिका चाहे जो कहें, लेकिन S.C.O. भारत के लिए काफी एहमित रखता है.
21:48भारत इसमंच का इस्तेमाल आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को बिनकाप करने के लिए करता है.
21:53दूसरा, रूस भारत का पारंपरिक साजिदार है और S.C.O. भारत रूस रिष्टों को मजबूत करने का एक आफसर देता है.
22:00चीन के साथ भारत के संबंध जटिल हैं, लेकिन इस मंच पर दोनों देश आमने सामने बैट कर शेत्री और वैश्विक मस्लों पर बातचीत कर सकते हैं.
22:07अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती ट्रेड वार में S.C.O. भारत को एक रणनितिक संतुलन बनाने का मौका देता है.
22:16पाकिस्तान के आतंकी गतिविदियों को S.C.O. के मंच पर भारत बार बार उठाता है.
22:21इस वज़ा से भारत के लिए S.C.O. छुड़ना विकल्प नहीं है. क्योंकि ऐसा करने पर पाकिस्तान को खुला मैदान मिल जाएगा.
22:27सीधी भाशा में कहें तो शंगाई सहीयोग संगठन वो बड़ा खेल है. जहां भारत को हर हाल में मौजूद रहना है.
22:33प्रधानवंत्री नरींद्र मोदी उस होटेल में पहुँच चुके हैं. यानि यहां पर पहुँच चुके हैं. सुरक्षा कारणों की वज़े से वहां पर क्यामरे इस समय सभी मीडिया के दूर रखे गए हैं.
22:49केवल नाशनल मीडिया का एक जो कुछी देर में हम आपको वो तस्वीरें साजा करेंगे आपके साथ. क्यूंकि भारत माता की जहे के नारे मुझे सीधे-सीधे याँ पर सुनाई दे रहे हैं. लेकिन भारत माता की जहे के इस नारे के साथ ही जनरल मेस्टन, सवाल एक उठ
23:19अभी जब ऑपरेशन सिंदूर था. इन चीजों को किस तरीके से इस समय भारत को रखना होगा? ये दो रिष्टे जो की आँखों के सामने हैं, वो किस तरीके से उलजे हैं? ये तो चीन भी जानता है.
23:35बिल्कुल, देखें आपके बड़ा उच्छे समान उताया है. पहली बात, भारत किसी भी हलात में चीन को और पाकिस्तान को इकठा होदे हैं, हमारे हित्वे नहीं है. क्योंकि इनकी अगर बिलिट्री अलाइंस ये कोई भी अलाइंस होता है, वो हमारे नैश्वल इंट्रे
24:05किया है, टेर्रीरिजम करता हा रहा है, वो उसकी स्टेट स्पॉंसर्ट पॉलिसी है. चीन के साथ, जितने भी हमारे हित्व हुएं, शिक्स्टी टू, शिक्स्टी सेवें में नतुला में जो क्लैक्ट हुआ था, उसके बाद गलवान और डोकलब, जितने भी क्लैशिद हु
24:35किया है, और एफिक्टिव बॉर्डर मारेजमेंट के लिए भी पीस और ट्रैंकुलिटी, यह जो टॉक्स चल रही है, और खासकर जो जेनरल्स, लेबल, मेकैरेजम के भी शुरू किया है, पहले यह सिर्फ वेस्टन सेक्टर में था, फोटीन कोर में शुरू हो गया था, आ
25:05तो यही कारण है, कि यहाँ पर कोई ख्लाश नहीं होगा, तो रिटेशन अच्छे रहेंगे, फिर ट्रेट वगरा सब शुरू होगा, साथ में पाकिस्तान भी इस प्रकार, थोडा सा, मैं आइस्सोलेट तो नहीं बोनोगा,
25:35चीन और पाकिस्तान की ये जो एक बिनता है वो शेर थोड़ी सी अभी भीकिक पढ़ सकती है अगर भारत चीन के साथ अच्छी बॉर्डर मैनेजमेंट करे तो मेरे ख्यात जो अभी ये सेक्रेटरी का ये जो वांगी और NSA के बीच में ये कई टॉक्स हो रखी है जो स्पेशल
26:05जितने भी युद्ध होएं वो सिर्फ बॉर्डर के प्रसेप्शन के अपर ही हुए हैं बाकी मेरे को लगता नहीं है चीन के साथ हमारी को इतनी प्रॉब्लम है आप देखिए पहले हिस्टॉरी करेंगी ये ट्रेट हमारा चला है सिल्क रूट है हिस्टॉरी को डिलेशन है
26:35वेस्ट क्या बोलने लगा है वेस्ट खासकर चीन रूस एरान और नौर्थ को नौर्थ को बोल रहा है कि एक एक्सेस ऑफ डिस्रॉप्शन है मतलब पुरी वर्ट पीस को डिस्टॉप्शन करेगा तो अब वेस्ट तोड़ा घब्रा गया है वह भारत के पास भी हमारी स्ट
27:05प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से सोचल मीडिया पर ये पोस्ट किया गया है कि सोचल मीडिया के पोस्ट पर लिखा गया है जाहिर है वो भी जानते हैं कि पूरी दुनिया ना केवल स्यों के सदस्य देश ना केवल भारत वासी बलकि पूरी दुनिया देख रही
27:35इन बाइलाटरल मीटिंग्स का जिक्र करते हुए भी साथ में ये कहा है कि गहन चर्चा होगी कई मुद्दों पर अब इस बार SCO में जो मुख्य मुद्दे हैं उसमें व्यापार तो है ही ट्रेड तो है ही लेकिन उसके साथ ही counter-terrorism भी है और भारत की तरफ से ये बहुत एहम
28:05कि कुछी महीनों पहले पहल गाम हुआ है लेकिन उसे ये भी मालूम है कि जिस अमेरिका की टारिफ के खिलाब वो भी खड़ा रहा है वहाँ पर आसिम मुनीर जाकर और पाकिस्तान की बातें रखने की जगए अमेरिका का गुणगान वहाँ पर कर रहे हैं ये विरोधा भा
28:35सबसे ज़ादा असर अगर आप देखें तो नाखास तो पर चीन और पाकिस्तान के रिष्टों पर पड़ेगा लेकिन आप जब डिप्लोमाटिक चैनल्स की बात करते हैं क्योंकि मैं सीओ की बात कर रहे हैं शोयता एक सबसे इंपॉर्टन बात ये कि अगर चीन और भारत क
29:05लगातार आप देखें कि रूस की राश्पती से भी मुलाकात होगी वो भारत भी आने वाले हैं तो निश्चिन तोर पर रूस की शोरटी ये वो गैरंटी बहुत महत्पूर्ण है पिछले साल आपको यादा प्रधान मंतरी मोधी दो बार रूस गये तो तब चीन और व्ल
29:35अब दोनों देशों के बीच में जब सयोग बढ़ेगा या फिर आपके सकते हैं बाचीत की टेबल पर चीज़े आगे बढ़ेगी तो शायद अशोरंस होगा रूस का और उसी को लेकर आज जब ये बाचीत होगी तो सबसे बड़ा महत्पूर्ण यह होगा कि रूस कि इस �
30:05इनका ये कम से कम भारतिये खेमे से ये लगभग संदेश दे दिया गया है कि हम इसको लेकर कुछ नहीं कहना चाते हैं उकुल मिलाकर ये संभव नहीं है कि यहाँ पर एक S.E.O. की बैठक के लिए आए और यहाँ पर अचानक शुरुआत हो जाए वो सरगे लावरोव अप
30:35चीन जो की 90 के दश्यक की परिकल्पना और उसके बाद कई संगठनात्मक मीटिंग्स लेकिन आज के दौर में फिर संभव है
30:42है देखिए है कि जब बड़े देश आपस में मिलते हैं और जब बड़े देशों के बीच की आपस की सबढ़ियां बड़ी होती
30:51है उसमें से कोई सा भी तीसरा इक चौोथ अगर बीच में आके समत्राई कि में गारंटी दूंगा या
30:59दूँगा या ओयल की बात अलग है वो व्यापार का मामला है वो उसमें हो जाता है मेरे शालिये रूस के लिए संभब नहीं है कि वो गारंटी या एशुरेंस दे पाए ना तो पहले था ना ये था तो मैं नहीं समझता हूं कि कोई हमारे बीच की समस्याओं के लिए खास्ता
31:29ने थी बल्कि मैं यह कहना चाहता हूं कि सबसे पहले जो एक यह इनिशियेटीव लिया था वो सोवीट यूनिय था उस टाइम पर उसने लिया था फिर रशाय ने लिया था कि रशिया इंडिया चाइना मिलकर के एक यह ट्राइलेटर संग्षन बनाएं क्योंकि रश्या कम
31:59क्योंकि हमको मालूब है कि हम अपनी स्थिति को देखते हुए और चीन की जो एंबिशन से वो देखते हुए यह संभव नहीं हो पाएगा कि हम अपने हीतों की स्वरक्षा इस ट्राइलेटर संक्टन में कर पाए मैं यह कुल करके बोल रहा हूं क्योंकि मैं अब रिटार हो
32:29है अधिक साधिक क्या होगा मैं मैं समझता हूं कि बाइलेटर तोर पर भारत और चीन अपनी वेफसाइक संबंदों को आगे बढ़ाने के दिशा में वांगी का पहले यहां पर आगवन हो चुका है अब बात्चीत हो चुकी है अब बात्चीत ज्यादा तर आर्थिक संबं
32:59है वहां पाकिस्तान उसका सदस्य है तो आप समझ सकती ही क्या बात्चीत होगी हां इतना जरूर है कि रश्या इंडिया और चाइना आपस के संबंदों को और मिला करके मजबूत करने की कोशिश करेंगे जैसे कि मैंने पहले कहा था इस समय रश्या के लिए भी चाइना के �
33:29को रस्पॉंड करने के लिए तीनों देश आपस में संब्द करेंगे लेकिन आरा इसी की उमीद मेरकों नहीं है एक जरू कहना चाहूंगा श्वेता कि भारतों चीन के बीच के जो दिक्कते हैं वो खाली बांडरी की नहीं है भारतों चीन एशिया में सबसे बड़े देश
33:59चली आ रही है आप साउसी स्टेशन में देख लीजिए दोनों के बीच में काफी स्वर्धा रही है और मैं नहीं समझता हूं कि दोनों देशों के बीच के जो यह इस परदा है वो बांडरी तक सीमी थेगी तो जहां तक मैं समझता हूं कि अगर दोनों देशों के संबंद
34:29पाकिस्परधा और सहयोग के बीच ही एक रास्ता भारत और चीन के बीच से निकलेगा
34:35लेकिन प्रणय बड़ा बड़ी अजीब सी होती है अंतराश्य कूटिनीती भी
34:41अब वही कुछ महीने पहले तक जो पाकिस्तान जो और उसकी मदद करता चीन और उसकी मदद करता तुर्किये ये सारे देश जहां पर थे
34:49वहाँ पर जब भारत आ रहा है तो वही संगठन भारत को एक उमीद के साथ देख रहा है
34:55क्योंकि यहाँ पर अमरीकी टारिफ का पाकिस्तान के लिए नहीं पर बाकी सब के लिए पूरे विश्व के लिए एक तरीके से
35:02अमरीकी टारिफ का एक आतंक सा मचा हुआ है यहाँ पर जब इस तरह की विवस्था और जो सुरेश गोईल जी भी कह रहे हैं कि बहुत बड़ी तरास्दी यह है कि काउंटर टेररिजम का जो मुद्दा जो अजेंडे पर है
35:14सीओ के वहाँ पर काउंटर टेररिजम की बात करने के लिए पाकिस्तान जैसा देश बैठा होगा
35:20निशुत रूप से अब ये तो अच्छी चीज है श्वेता कि जिसे कटगरे में खड़ा किया जा रहा है वो वहाँ पर मौझूद है कम से कम वो सुन सके वो जान सके और उससे भी सवाल किये जा सके लेकिन कूटनिती की करवट की एक छोटी सी चोटा से एक्जामपल देख
35:50और उस सैनिक परेड के अंदर पाकिस्तान के प्रधान मंतरी शहवाज शरीव भी मुक्यादिती के तौर पर वहाँ पर शामिल होंगे दुनिया के कई तमाम नेता जो है वो वहाँ पर बुलाए गए हैं हलाकि प्रधान मंतरी मोधी तो लौट आएंगे लेकिन चीन एक ब�
36:20वो जारी किया जाना है यनि उसमें अगले चरण के जो प्रस्ताव हैं अगली चरण की जो परियोजना हैं उन्हें शुरू किया जाना है अश्वेता ये वो ही CPEC है जिसको लेकर भारत हर बार एतराज जताता रहा है क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कबज
36:50कि जो सारे देश हैं इसके सदसे देश उनके अपने बार्डर डिस्प्यूट्स हैं उनकी अपनी बार्डर की समस्या हैं केवल भारत और पाकिस्तान का मसला नहीं है पाकिस्तान और इरान के बीच में भी बार्डर की समस्या हैं चीन और रूस के बीच में बार्डर की समस्
37:20या जो इसके आरे आरे ही अर्चने हैं, उनको कम किया जा सके, कुछ समाधान के बिंदू तलाशे जा सके और उसके बार स्टेप बार स्टेप आगे बढ़ा जा सके, और SEO के बाद, चुकि भारत इस बार ब्रिक्स की अध्यश्टा इस बार भारत के पास है, तो भारत को इसकी
37:50इस तरपर जो विवाद हैं, और SEO के चार्टर के अंदर ये निखा हुआ है, कि आप इसके मंच के उपर द्विपक्षी मुद्दों को नहीं लाएंगे, क्योंकि अक्सर ये देखा जाता है, द्विपक्षी मुद्दों में उलचकर, जो मर्टी रैटर सहयोग है, वो आगे
38:20पाकिस्तान और तुर्किये की बात यहाँ पर जरूर कह रही हूँ, लेकिन जैनल वेस्टन, भारत जब भी चीन के साथ रिष्टों की बात करता है, जैसा कि हम शुरुआत से ये जिक्र कर रहे हैं, कि उसमें भारत और चीन के बीच के बॉर्डर के रिष्टे जिक्र में आ
38:50और दादागीरी की जो कोशिश की गई, आपको लगता है कि इस समय में, चुकि एक तो भारत का शौरे भी पराकरम भी हमारे सैनिकों का जो सीमा पर नजर आया, एक कदम पीछे नहीं हटे, डटे रहे वहाँ पर, वो चीजें भी दूसरी तरफ भारत की कूटनीती और तीस
39:20कि देखे, उमीद करना तो मैं बोलूँगा अभी थोड़ा प्री मेचिवर होगा, लेकिन कोशिश तो करनी चाहिए, और मिले क्या भारत और चीन थोड़ी कोशिश कर रहे हैं, और जैसे मैंने पहले भी बोला, दोनों देशों के हित में है कि एफेक्टिव बार्टर मैने�
39:50कि कुछ वहां पर मुचुली एक्सेप्टिबल एरिया दो डिस्प्यूट और डिफरेंसेज हैं, आज उनको कुछ इलाके में जैसे भी फिंगर एट और फिंगर फोर की बात करते हैं, तो जीन ने फिंगर एट से आगे नहीं आगा, भारत फिंगर फोर से आगे नहीं जा�
40:20हैं, तो ये जॉइंट वर्किंग मेकैनेसल जो है, बॉर्डर कंट्रोल के लिए, एफेक्टिब मैनेजमेंट के लिए, ये कुछ एक दिशा और डिरेक्शन दिखा सकता है, और अगर ये दिशा और डिरेक्शन दिखाएगा, तो इससे फाइदा ये है कि ट्रेड बड़े�
40:50हैं, हमारा हिसा है ही, लेकिन हम अक्साइट सिंग भी अपना पूरा मांदे हैं, लेकिन ऑन ग्राउंड हो अक्साइट सिंग का काफी लाका चीन के पास है, तो ये दोनों देश के बीच में ये पॉलिटिकल रिजॉर्ट कभी हो पाएगा, इसको रिजॉर्ट करना में को म�
41:20करते हैं, रूस, भारत और चाइना की बात करते हैं, तो ये एक चीज आड़े आ जाती है, हम इस रिपोर्ट के जरिया आपको बताते हैं कि क्या ये तिकड़ी, इस तिकड़ी की ताकत संभव है?
41:31जब से अमेरिकी राष्ट्रपती डोनल्ड ट्रम्प ने ट्रेट डील की धौस दिखा कर दुनिया में टैरिफ का और छेड़ा है, तब से दुनिया में रिष्टों का इतना अकट जोड़ शुरू हो गया,
41:56क्योंकि डोनल्ड ट्रम्प और अमेरिका की तरफ से सीधे भारत पर टैरिफ की वज़ा भारत का रूस से तेल खरीदना बताया जा रहा है,
42:04तो पुतिन ने भी एक नया प्लान तैयार किया, भारत, चीन और रूस का त्रिकोड़ी अलायंस, RIC बनाने के लिए,
42:10जैसे ही रूस ने प्रस्ताव भेजा, पूरी दुनिया में खलवली मच गई,
42:15क्योंकि ये त्रिशक्ति का मेलान होता है, तो ये छोटी मोटी बात नहीं है,
42:19और पोतिन इसके लिए पूरा जोर लगा रहे हैं, अगर भारत, चीन और रूस का त्रिपक्षिय संबाद फिर से सक्क्री होता है,
42:25तो दुनिया वर्ल ओर्डर के मामले में कई ध्रुवों में बढ़ सकती है,
42:28आज हम आपको गॉर्ल ओर्डर के बारे में बताएं, लेकिन उससे पहले बता दें कि रूस ने कैसे इस त्रिकोडिये शक्ति के गठ जोड़ की शुरुवात की,
42:38रूस के उप विदेश मंत्री अंड्रेई रूंडेको ने कहा कि,
42:41आराइसी को फिर से शुरू करने को लेकर हमारी भारत और चीन से बागचीच चल रही,
42:47ये तीनों देश ब्रिक्स के संस्थापक हैं और दुन्या में इनकी धाग,
42:51पुतिन की तरफ से ये भारत चीन रूस के त्रिपक्षिय संवाद संगठन को पुनलजीवित करने का प्रस्ताव और चीन ने तुरंत इस परहामी भड़िए,
42:59यानि कि पूरी तरीके से मुश्किल लगता है रूस और चीन कितने भी कोचिशें करें,
43:10या रूस की तरफ से ज़्यादा कोचिश इसकी दिखती है, रूस से साज़दारी रहेगी,
43:13लेकिन मुश्किल लगता है कि RIC जैसी चीज की यहां से कोई नया उसका आकार लेता हुआ वो दिखे,
43:20जपान की तस्वीरे भी हम आपको दिखाते हैं, चुकि प्रधान मंत्री नरेंदर मोदी दो दिन्त का दौरा पूरा करके,
43:25और उसके बाद जपान से यहां चीन के S.C.O. बैठक के लिए 25 जो S.C.O. शिखर सम्मेलन है, उसके लिए वो रवाना हुए थे,
43:35जपान की जो का जो दौरा रहा पूरा, जो मुलाकात रही वहां के प्रधान मंत्री से, वो बेहत सकरात्मत रही है।
43:44अभी के लिए इतना ही देश और दुनिया की तमाम खबरों के लिए आप देखते रहे हैं आज करूए।