00:00हमने अपने मंदीद में शाजी गरनी है, अब हमको हमारे मामा पापा ने बुलाया है, और हम आगे अपने बरूसर पे कि हमारे आगे शाजी करवाएंगों और अगर अगर हमें कुछ हुआ तो हो जाए हूँ
00:16पिता को छोड बिजली वाले के साथ कई शद्धा, मांग में टहक लाल सिंदूर, फूलों की माला, तेरह सेकंड का सबूत दिखाया, कैसी अपडेट?
00:40शद्ध तिवारी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है, वो घर से भागी थी सार्थक नाम के लड़के के लिए, जिससे वो बहुत प्यार करती थी, लेकिन जब वो इंदौर स्टेशन पहुँची और सार्थक का इंतिजार किया, तो वो आया नहीं, वो बहुत परिशान हु�
01:10करण ही वो लड़का है, जिसे शद्धा पहले से जान की थी, वो शद्धा की कॉलेज में इलेक्टरीशन का काम करता था, करण ने शद्धा को समझाया, रोका और उसे हिम्मत दी, शद्धा कहती है कि उसी वक्त उसमें फैसला कर दिया, कि वो करण से ही शादी करेगी, इसक
01:40की माला पहनाए, मांग ने सिंदूर भरा और साथ पेरे लिए, इसका एक 13 सेकंड का विडियो है, जो उनकी शादी का सबूत है, शादी के बाद दोनों मनसौर गए, और करण के इश्देदारों के खर पर कुछ दिन रुके, फिर दोनों इंदार लोड़े, और फुलिस स्�
02:10कहानी में ट्विस्ट तबाया, जब शद्धा के पिता अनिल्तिवारी ने कहा कि बेटी को दस दिन के लिए अकेले छोड़ दो, ताकि वो सोच समझ कर फैसला करे, अगर वो परण को चुनती है, तो हम धूम धाम से शाती करवाएंगे, लेकिन शद्धा के पिता की ये बात
02:40वो मेरी बेटी को कैसे संभालेगा, पर शद्धा का जवाब साफ था, हमें अब अपने घरवालों से जान का खत्रा है, हमें बस शान्ती चाहिए
02:49शद्धा ने ये भी कहा कि अब उसकी जिंद्धी में सार्थक के लिए कोई जखा नहीं है, वो अब करण के साथ रहना चाहती है, क्योंकि जब सबने उसका साथ छोड़ा, तब करण ही वो लड़का था, जिसने उसका आथ थामा
03:05ये कहानी सिर्फ एक लड़की की फ्रेम कहानी नहीं, बल्कि उसके आग्म विश्वास और अपने फैसले पर तिके रहने की एक मिसाल भी मानी जा रही है, शद्धा ने अपना जीवन साथी पुद चुना, मुश्किल हालात में भी भार नहीं मानी और अपने दिल के सुनी,
03:35सबस्टेकाइ।