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  • 1 year ago
माधवी पॉल की बनाई मूर्तियां रांची में बहुत लोकप्रिय हैं. पति की मृत्यु के बाद, माधवी के लिए मूर्तिकार बनना एक संघर्षपूर्ण काम था

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00:00ॐ ॐ ॐ
00:30मादवी पॉल
00:31मादवी पहले से कोई मूर्तिकार नहीं थी
00:52लेकिन 2012 में इनके मूर्तिकार पती बाबु पॉल का दिल का दौरा पढ़ने से निधन हो गया
00:59इसके बाद मादवी अपने पती के विरासत को संभालने के लिए घर के चौकट से बाहर निकली
01:05अपने लगन और मेहनत की बदावलत मादवी ने मूर्तिकला की बारेकिया सिखी
01:10मेरा हजबन डेट करने के बाद ही हमको इलाइन में आना पड़ा है करके उसी टाइम तो एवला स्टूडिय चल रहा था तो बंद कैसे हो जाएगा मूर्ति उसी ताम दुर्गा मूर्ति का काम चल रही है इहां
01:25शुरूआत में मादवी को थोड़ी बहुत परिशानिया आई उनके पती के साथ काम करने वाली कारिगर उनका साथ छोर कर चले गए
01:50लेकिन अब तो उनके साथ काम करने वाले मूर्ति कार उनकी तारीफ करते नहीं थकते
02:14माधिपॉल के बेटे चन्नाई के निजी कमपनी में और बेटी ब्यांगलूरू में काम करती है
02:19ऐसे मी माध भी अकेले पर जाती है
02:22सरकार से इनको बस इतनी शिकायत है कि उन जैसे कलाकारों की भलाई के लिए सरकार कुछ नहीं करती
02:28कि संगहर्स के बीच से इन्होंने रास्ता बनाया है ना सरिफ अपने लिए अपने बच्चों के लिए
02:33बलकि कई और जो मूर्तिकार हैं जो इनके अंदर में काम करते हैं उनके घर परिवार भी इससे चल रहे है
02:40कि सरकार की से अभी साहता इन्हें नहीं मिली है जरूरत है कि मूर्तिकारों के लिए सरकार कुछ पहल करें इनके
03:02कि मूर्तिकारों का जीवन भी सुख़ॅध और सुखमे हो सके के मारा पर्रसन पर्मानंत के साथ, उपे अंदोर इटी भारत, राची

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