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  • 1 year ago
Zarb e Mehmet Episode 100 on Green TV in high quality 23rd September 2025, Green TV drama Zarb e Mehmet Episode 100 telecast on 23rd September 2025. Watch latest episodes of Zarb e Mehmet

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Transcript
00:00बाबा मैं जड़ा इदारे का चक्कर लगा के आती हूँ
00:26ज्यादा देर नहीं लगेगी जल्द आ जाओंगी
00:31अगर कोई काम हो तो मखदूम चाचा को भेज दीजेगा बाबा
00:33अब खुश हो तुम
00:35मुझसे क्या कहना चा रहे हैं बाबा
00:42चूट गई जान जफीर से तुम्हारी
00:45ये शादी अब कभी नहीं होगी
00:48सुकून मिल गया ने तुम्हें
00:51आप ऐसा कैसे सोच सकते हैं बाबा
00:53उसके साथ ये सब वो ऐसा नहीं चाहती थी मैं
00:57अब कैसे आखे मिलाओगी तुम अबदॉल्ला से हाँ
01:02कैसे है
01:08क्या तुम ये कहोगी अबदॉल्ला से
01:10कि उसे तुम्हारे लोगों ने मार डाला
01:12बाबा
01:13जफीर अपनी मर्जी से खुद तुर्कों की छाउनी में जाके घात लगा के हमला आवर हुआ था
01:19कितने ही सिपाही शहीद किये उसने
01:21उसने जो किया उसी की सजा मिली है उसे
01:24जफीर और अब्दुल्ला उसी जग की कीमत चुका रहे हैं जिसमें वो खुद शामिल हुए थे बाबा
01:28बाकी सब भी चुका रहे हैं
01:30जग खून का खेल होता है
01:32कई जाने निगल लेता है
01:33आपको ये बात अभी तक समझ नहीं आई क्या
01:35इस वतन के लिए जफीर से पहले कितने ही दुख सिपाही शहीद हो चुके है
01:40लेकिन वो अपनी सरजमीन का दिफा करते हुए कुर्बान हुए
01:44ना के जफीर की तरह घद्दारी करते हुए
01:46फात्मा खामोश
01:47जफीर की मौत हो जा ऐसा में कभी नहीं चाहती थी
01:56लेकिन इस वतन की सलामती हमारे जाती दुख से कहीं बढ़कर है बाबा
02:02ये कैसा ज़राऊना खाब है
02:08और सिर्फ वोही शखस ज़राऊने खाब से बाहर निकल सकता है जिसका दिल और जमीर जिन्दा हो बाबा
02:15बाबा
02:26आपको अगर मेरा ये रवया जाले माना लग रहा है बाबा तो ये जान ले
02:38जफीर ने जिस दिन से बरतानियों का साथ दिया था उसी दिन मेरे दिल से उतर गया था वो
02:56बजाहिर तो काफी सहत मंद हो तुम मैं कैप्टन हैमिल्टन को तुम्हारे बारे में बता दूँगी
03:14क्या बताने वाली है डॉक्टर
03:15ओ शामदीद कैप्टन हैमिल्टन
03:17आरतिन के हालत अब काफी बहतर है
03:20मेरे खयाल से इससे मजीद किसी दवा की अब कोई ज़रूरत नहीं है
03:23अगर आप ऐसा कह रही है तो ठीक है
03:26आप दोनों के लिए एक सर्प्राइज है
03:28कैसा सर्प्राइज?
03:30मैं कुछ समझा नहीं कैप्टन
03:31मेरे साथ चलो, सब चांच जाओगे
03:50मैं जानती हूँ इससे आपका दुख कम नहीं हो
04:20लेकिन यहाँ ताजियत करने के लिए आई हूँ मैं
04:23उसकी जिन्दगी की सबसे बड़ी खाहिश तुम से शादी करना थी
04:35मेरा बेटा अपनी शादी को लेके कितना खुश था
04:44मैंने शांदार शादी का इंतजान किया था
04:50दादा बनने के खाब देख रहा था और जंग खतम होने के बाद अपने पोते पोतियों के साथ इस शहर की गलियों में खेलता
04:57मुझे अफसोस है काश के ऐसा कुछ नहुआ होता
05:02फात्मा
05:07मैं जानता हूँ तुम जफिर को कभी पसंद नहीं करती थी
05:19लेकिन तुमने उससे निकाह के लिए हमी भरी
05:26उसे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी थी
05:29कम असकम वो खुशी के आलम में तो मारा
05:32बस यही सुकून है मुझे
05:34मगर जब इस कैद से बाहर निकलूँगा
05:38तो उसका इंतकाम जरूर लूँगा
05:41जिन तुर्कों ने मेरे बेटे को मारा उनकी खाल उतार दूँगा
05:45और ये बरतानवी ये लोग पच्टाइंगे कि इन्होंने आखिर क्यों मुझे कहित किया
05:49अब मुझे कोई फरक नहीं पड़ता
05:51इस दिल में सिर्फ मेरे बेटे के बिचनने का नकाबले परतास तर्थ है
05:56इस शेहर का चपपचपचा जान मारूँगा मैं
05:59फात्मा बेटा
06:01तुम अब भी मेरे लिए बहु जैसी हो
06:04और ये मत भूलना
06:06कि जब मैं जफीर का बदल हूंगा तो तुम मेरे साथ होगी
06:09अगर चाहती हो कि मेरे गुसे के कहर से बच जाओ
06:13तो ये रिष्टा दोने का तुम सोचना भी मत
06:16हरकिस नहीं
06:29कमांडर
06:40आजओ नूरी
06:41हाँ कहो
06:44आपकी पेशन गोई दुरुस्ती बरतानवी जासुस मौचों के करीब आ गए है
06:49आपके हुकम के मताबि कोई मुदाखलत नहीं की
06:51मुझे पूरा यकीन था कि वो मेहमत पर भरोसा नहीं करेंगे
06:54ये देखने आएं कि में वाकई मर चुका हूँ या नहीं
06:59उन्हें अपना काम करने दो
07:00और जाहर है कि हम अपना काम करेंगे
07:04आपका क्या हुकम है
07:05हमारे मौर्चों पर
07:10हमारे सिपाहियों की तर्तीब थोड़ी बदल दो
07:12और सिपाहियों की तादाद भी थोड़ी कम कर दो
07:15सारे निशानबाजों को छुपा दो
07:18और उसके बाद जनाजे की तयारी करो
07:21ताकि उन्हें यकीन हो जाए
07:24मतलब ये कि मेरा ताबूत तयार करो नूरी
07:28अल्ला आपकी इफाज़त करे कमांडर
07:29आपके शहीद होने का तो मैं सोच भी नहीं सकता
07:32जल्द या बदेर
07:36शायद आज या कल
07:39जो मुकदर में है वो होकर रहेगा
07:42और वो दिन हमारे लिए ईद का होगा
07:45ये मत भूलना
07:46समझ गया कमांडर
07:47नूरी
07:49हगम कीज़े कमांडर
07:50तुम्हें नूरुत दिन साहब ने मेरे सुपूर्ट किया था
07:52अगर चाहो तो मैं तुम्हें वापस भीज़ देता हूँ
07:56बहुत शुक्र या कमांडर
07:57मुझे फकर नूरुत दिन साहब की खिद्मत में
07:59अगर आपकी इजाज़त हो तो मैं ईद का दिन
08:01आपके साथ ही गुजरना चाहता हूँ
08:03तो फिर हर दिन को चांद रात का दिन समझो नूरी
08:05और ईद के इस्तक्बाल के लिए तयार रहो
08:08समझ गया कमांडर
08:31महमद
08:49पट्टी अटा उसकी आंकों से
09:01हर जे आपकी आपके अगल
09:09आपके आपके वे लिए
09:13जापके अपके अपके लिए
09:14प्रून गाल
09:22का यू भी खैरत इंसान इसे यू यहाले गाना, है
09:29कौन है ये औरत कैप्टन
09:34क्यूं लेकर आया है और ये क्या कह रही है
09:37जब तुम्हें हमारे जासूस के तौर पर भेजा गया था तो तुम इस औरत के शोहर थे
09:51लेकिन ये भी उसी तंजीम की रुकन है
09:56इसे ग्रिफता किया है
10:00कैप्टन आखिरकार
10:03मुझे तो लगा था आप इस जहरीली महबत से कभी निकल ही नहीं पाएंगे
10:06खुशी है क्या आखिर आपने सेच जान लिया
10:11अलीजा
10:12अगर वक्त और हालात मुक्तलिफ होते तो मैं इस औरत से शादी भी कर लेता
10:21बहुत खुशूरत है यह
10:24लेकिन दुश्मन की जासूस बनकर इसने अपनी तखदीर खुद अपने हाथों लिखी
10:35तो अब हम क्या करेंगे
10:41डॉक्टर अलीजा पूच कच करेंगी जानने की कोशिश करेंगे कि बाकी लोग कहां छुपे हैं
10:49बहुत इंतजार किया मैं इस दिन का
11:05जिल्दी बताओ वो कहां छुपे हैं वरना वो हाल करूँगी जो तुमने सोचा भी नहीं होगा
11:19कुछ नहीं बताओंगी मैं
11:21तुम मुझे सिर्फ इसलिए मार पारी हो क्योंकि मेरे हाथ बंदे हुए हैं
11:39तुम सारे के सारे बरतान भी बसने ली होते हो
11:42पो कुम मार जिल्हां जिल्द हैं
11:53कर दुम उन्देट
12:00रिजल
12:10इन बरतानियों का खात्मा बहुत करीब है
12:17हम अजीम फता के बहुत करीब पहुंच चुके हैं
12:21नजम जब बरकरा रखते हुए
12:22हम लोगों पर वार करते रहेंगे
12:24बरतानियों पर किया गया हमारा हर वार
12:29उन्हें उनके खात्मे के करीब तर ले जाएगा
12:32इन्शाल्ला
12:34तो अब हम क्या करेंगे?
12:37जब लड़ाई का आगास होगा
12:39तो तुम अगली सफों में होगे
12:41और तुम सब जंग के दौरान
12:43उनका साथ छोड़कर
12:45हमारी तरफ आ जाओगे
12:47सुल्तान अलपरसलान ने
12:49जब लासकर्द में क्या था हम भी वही करेंगे
12:51हाँ बिलकुल
12:52वो बहुत बड़ा नुकसान उठाएंगे
12:55उनकी फौज में बद हवासी फैल जाएगी
12:57तुम हमारे एक-एक हिंदुस्तानी भाई से बात करो
13:01और उन्हें राजी करो सल्मान
13:02ताके कोई मसला ना हो
13:04विगण नहीं करें कमांडर
13:05और हाँ सल्मान
13:08हैमिल्टन ने तुम्हें जैनब के इलाज के लिए
13:10दुबारा नहीं बुलवाए क्या
13:12कोई मालुमा थैं उसके बारे में
13:13नहीं कमांडर
13:14हस्पदाल के बाद मैंने जैनब साहिबा को नहीं देखा
13:17वो कमबखत जैनब को नुक्सान ना पहुँचा है
13:22मैं कहती हूँ बताओ मुझे कहां छपे हुए हैं वो लोग
13:32बताओ मुझे कहां है वो लोग
13:38मिले कुछ नहीं बताओंगी तुम्हें
13:47मार डालो मुझे
13:53इतनी असानी से तुम्हारी जन नहीं लूगी मैं
14:02मुझे माफ करना जाना लेकिन मैं यू खड़े ओकर तुम्हें ऐसे नहीं देख सकता
14:11डॉक्तर अली साथ
14:15यह क्या किया तुमने
14:22साफ जाहरे के यौरत कुछ नहीं बताईगी
14:25बिला वज़ा हम वक्त जाया कर रहे है
14:27और यहां इसे मारने से बैतर है कि हमें चाहिए उन लोगों को भागने से रोका जाए
14:31कैप्टन है मिलिटन
14:33मैंने खलील को मार डाला
14:35अपनी जान की बाजी लगा दी
14:37अब कारवाई करने का वक्त है
14:41आर्तिन ठीक क्या रहा है
14:43यह कुछ नहीं बोलेगी इसे मार दिना चाहिए
14:45लेकिन अभी नहीं
14:49आँखों पर पट्टी बांदो
14:54आपको अब भी मुझे पर यकीन नहीं कैप्टन
14:58वो तुम्हें अपने बाप पर भी नहीं करता
15:17चलो आजाओ
15:17मैं वापस आओंगा जैनब
15:19जरूर आओंगा
15:23तांबा कूटने की आवास
15:32मस्जिस से दो सो गस के फासले पर
15:35फिर दाएं तरफ तेरा कदम
15:47ग्यारा
15:49बारा
15:52बकरियों की आवास
15:55गंड़ी
16:06बीस कदम
16:08फिर दाएं तरफ तीस कदम
16:15बाजार वाली गली
16:16चालिस कदम पर खाने का ठेला
16:43पचास कदम पर चादर
16:50पैंसट च्यासट सड़ सट
16:54डॉक्टर अलीसा की आँखों से पट्टी हटा दो
16:58जो आपका हुकम कैप्टन
16:59मैं फिर मिलता हूँ अलीसा
17:06अभी जा सकती हो
17:07ठीक है कैप्टन हिमिल्टन
17:09सत्तर कदम और हम बजार वाली कली के अखताम पर पहुँचके
17:25पंदरा कदम और रुक जाओ
17:34अब सब खतम करते हैं आर देन
17:44जीब कल
17:45पंदरा करते हुँचके
18:15वावाव देखो मेहमत ने कैसे चकमा दिया हमें
18:23ऐसे दोके बास पर तो मैं भरोसा नहीं कर सकता
18:28अगर एक बार ऐसा किया है तो दुबारा भी करेगा
18:30ये क्या कह रहो भाई
18:31उसने खलील कमांडर की जान बचाई है
18:34अगर वो भी एक चाल हुई तो हाँ
18:36मुझे तो लगता है कि वो अब भी चाले चल रहा है
18:40क्या तुम अली कमांडर और
18:42खलील कमांडर से ज्यादा जानते हो मेरे बाई
18:43सारजेंट आपने खुद देखाई
18:45कमांडर के है कमाद पर सवाल मत करो और अपना काम करो
18:48बरतान भी जल्द हमला करेंगे
18:50मोर्चों की जहांच परताल की फिकर करो
18:53तमाम सिपाहियों को गोला बारूद दिया जाएगा
18:55काम पे लगो
18:56मेरे भाई मैं जानता हूँ कि तुम क्यों खौफजदा हो
19:09लेकिन कमांडर हमसे बहतर जानते है
19:11अभी कोई चाले नहीं बस जंग है
19:14मेरे कहने का मकसद कुछ बुरा नहीं था है मत
19:16हमें फिर भी मौतात रहना चाहिए
19:19बरतान भी कब क्या कर जाए हमें नहीं मालूम
19:38तुम्हें यकीने के खलील मर चुका है कैप्टन
19:40अगर वो बच गया तो
19:43जिन्दा रहने का कोई अमकान नहीं
19:44पीट में चुरा गौंपा था
19:47आपकी बेचे नहीं बचा है चर्णल
19:49मैंने भी ये खबर सुनते ही तुर्क फौज में अपने चासूस भीज दिये थे
19:53उनकी चाउनी में जंडे सरनगों है
19:55अजीब हल्चल मची हुई है
19:57बहुत उम्दा काम किया
20:01मबारको हैमिल्टन
20:03शुक्रिये चर्णल
20:04ये खबर लंदन वालों को बहुत खुश करेगी और हमारी गदर मजीद बढ़ चाहेगी
20:09अगर आप मुझे जाज़द दें तो मैं मजीद भी कुछ करना चाहता हूँ
20:12तुर्क फॉच की गायदत में अभी इंतिशार है और हमें इसका फाइदा उठाना चाहीए चर्णल
20:17हमला करने का वक्त आ चुका है
20:19दुरुस्त कहा तुमने
20:21हम उन सब को खत्म कर देंगे
20:25फॉरन तैयारी शुरू करो
20:27जो आपका हौकम चर्णल
20:28तो अब
20:37वक्त आच चुका है कि इस खिस्से का इक्तिताम किया चाहे
20:42आप कमाल के कैप्टन है
20:45बहुत शुक्रियों आर्तिन
20:48इस तारीज की वज़ा जान सकता हूँ
20:50जो कुछ आपने किया
20:51तुर्कों को अंदर और बाहर हर तरफ से शिकस्त दे
20:55अंदरूनी महास पर वो कामिया भी वी बाकी है
20:57वो वक्त भी आएगा
20:59क्यूंके वो जासूस ओरत जरूर बोलेगी
21:03तुमने खुद देखा हर दिन
21:05उस पहर अजियत बेसर है
21:07हम जासूस ऐसे ही तरबियत से गुजरते हैं
21:09कि तशद्द्द में भी खामोश रहें
21:11शायद उसकी तरबियत भी कुछ ऐसे ही हुई हो
21:13लेकिन एक पहलू है जिसका फाइदा उठा सकते हैं
21:17तुम कहना कह चाते हो
21:21वो आरत मेरी बीवी थी यही बताया था ना आपने
21:26और वो मुझे देखकर बेबस्ती हो गई थी
21:28रहम की भीक मागने लगी
21:30मतलब मुझसे महबबत करती है
21:33यानी
21:35यानी वो आरतिन को तो कुछ नहीं बताएगी
21:38लेकिन हुसरुफ के बेटे महमद को जरूर बताएगी
21:42मैं उसे कहूँगा कि मेरी यादाश वापस आ गई है
21:44ताकि जान सकूँ कि उसके साथी कहां चुपे है
21:47लेकिन वो तुम पे भरुसा क्यों करीगी
21:49शायद ना करे
21:51लेकिन कोशिश करने में क्या हर्च है
21:53क्याप्टन
21:54मुझे उसके पास जाने दे
21:56मैं कहूँगा जब उसे अजियत में देखा
21:59तो मेरी यादाश वापस आ गई थी
22:01उसे मनाऊँगा कि उसका मैभूब मैं ही हूँ
22:04और कहूँगा कि स्कूपलो के बाद जाना चाता हूँ मैं
22:07ठीक यार दिन
22:16लेकिन उसूल वो ही होंगे
22:18तुमारी आँखों पर पटी होगी
22:20और अल्फरेट साथ जाएगा
22:21समस्किया कैप्टन
22:24शाम को ले जाना
22:26तैयार हो जाओ
22:39जैसे ही ये जंग शुरू होगी
22:42हम हिंदुस्तानी सबसे आगे होंगे
22:44अमला करने के हुकम पर
22:47कोई भी गोली चलाए बगएर
22:48उस्मानी फोच के तरफ दोड़ पड़ना
22:51और हंदुस्तानी मुसल्मानों के लिए
22:52बड़ा दिन आ गिया था
22:54जंग के दुरान उन्हें अपनी फोच छोड़कर
22:56अपने मुसल्मान भाईयों के साथ शामिल होना था
22:59मेरी बाद गौड़ तो सलो
23:26एकटे हो जाओ
23:27हमले का हुकम मिलते ही
23:33हंदुस्तानी सिपाही हमारी दरफ दोड़ेंगे
23:36लेकिन उन पर कोई गोली नहीं चलाएगा
23:40और जैसे ही वो आएं उन्हें मोर्चों में ले जाना
23:46उस्मानी फोच को सक्ती से इदाया दी गई थी
23:49कि चब हंदुस्तानी सिपाही अपना रुख बतलेंगे तो उस्मानी फोच उनकी इफाज़त करेगी अब वो हमारे दुश्मन नहीं दोस्त थे
23:59हैमिल्टन को ये मालूम ही ना था कि हमले के दौरान उसे क्या दच कर लगेगा
24:06उसने जैनब को छोड़कर एक नया साथी डूण लिया था
24:11डॉक्टर अलीसा ने हैमिल्टन से दुश्मनी छोड़कर दोस्ती करने का फैसला किया
24:16लेकिन ये दोस्ती सिर्फ औ सिर्फ बर्बादी ही लाएगी
24:46या अल्ला ये इम्तिहान कब खत्म होगा
24:52ये इन्तिजार कितना लंबा है
24:58ओ मेरी मेहमिद
25:05अगर तुम्हे पता होता किसको तकलीफ दे रहे हूँ
25:16तो तुम मरताश नहीं कर पाते
25:19लेकिन ठीक है
25:21तुम्हें पता नहीं था
25:25मेरे अल्ला
25:28तुम्हे सबसे प्यारा है
25:32मेरे अल्ला
25:37बस एक बार मुझे मेहमिद को दिखा दे
25:41ताकि वो अपनी जैनब को देख सके
25:47एक बार फिर मेरी आँखों को देख सके
25:53मेरे अपना चाहरा मेरी तरफ घुमाओ जैनब
26:08ताकि तुम्हारी आँखों में देख सको
26:11मेहमिद, मेहमिद, मेहमिद
26:19मेहमिद, मेहमिद की तुम हो
26:23मेह हूँ, हाँ मेह हूँ, तुम्हारे पास
26:27मेहमच, क्या ये तुम्हारी आगे
26:32मेरे अल्ला, बहुत बहुत शुक्रिया तेरा
26:40मेहमच
26:42मुझे माफ कर दो सेन
26:46तुम्हारे साथ अच्छा सुलुक नहीं किया
26:52मेरा रवय्या नाकाबले माफी है
26:57जो भोजाओ, जो हुआ भोलजाओ से
27:03सबकत मोगया, गुसर के वो दिन मेहमच
27:09बहुत, ये सब कैसे हुआ, तुम्हे सब कैसे यादाया
27:19इदर बेटा, बुरसुक्वन होजा
27:22वो नहीं जानते के मेरी यादाश्ट वापस आ गई है
27:30मैंने जूट बोला उन से, उन से जूट बोला था कि तुम से मिल सको मैं
27:35कैसे, ये अजब कब खत्म होगा महमच
27:42बहुत चल्द जनब, बहुत चल्द
27:49वो हमारी फौच पर अमला करेंगे, लेकिन तबाहों पर बात हो जाएंगे
27:56तो चलो भी, भाग चलते हैं यासे, जंग में साथ लड़ेंगे
28:00फिर से, तुम्हारे साथ रहना चाती हूँ मैं
28:04अब मौट से भी नहीं डरती मैं
28:06अभी नहीं साथ, अभी नहीं
28:09मैंने हमिल्टन को बताया कि खलील कमांडर को मारती है
28:12यही बात पूरी मौहिम की बुनियाद है
28:16अगर तुम्हे अभी निकालने की कोशिश की, सब पर बात हो जाएगा
28:21वो बदबखत अल्फरिट दर्वासे पर इंतसार कर रहा है
28:27अपने कौम के खातिर मज़ीद कुछ अर्सा अलग रहना होगा
28:34ठीक है
28:40ठीक है महमद
28:45मेरी एक ही खाहिश थी
28:50कि बस तुम एक बार मुझे मोहमद से देख लो
28:57मैं हार नहीं मालूगी
29:09हमारा वतन जिन्दा बात
29:10जैनब तुम डिरो मत
29:12मैं वादा करता हूँ तुम्हें यहां से भार निकालूगा
29:16मैं वापस आउँगा तुम्हारे लिए
29:19मैं डरती नहीं महमद
29:28तुमने मेरा सारा खौफ खत्म दर दिया
29:32जा इंतिजार करूँगी मैं तुमारा पहले बतन आता है
29:48पहले बतना आता है
30:18मेरा पहले बतना आता है
30:48दुमन के आने तक सामने नहीं आएंगे
30:52गोली तब चलाएंगे जब हिंदुस्तानी सिपाही हमारी तरफ आजाएंगे
30:57खलील कमांडर अपने खैमे में रहकर जंग की कयादत करेंगे ताके बरतनियों को उनकी शहादत का यकीन आ जाए और वो उन पर हमला कर दे
31:07ए मेरे ल्ला हमारी फौश को जल्म और कुफर से बचाना
31:13आमीन
31:15हमारे कदमों की हिफाज़त करना और हमें हर किस्म की बुराई से और शिकस से महफूज रखना मेरे ल्ला हमारे होश और होश और हावास सलामत रखना मेरे ल्ला हमारी खलतियां और गुना माफ फर्मा मेरे रब आमीन
31:33इतिहाद इसलाम के लिए हमें शहादत का रुद्बा दा फर्मा मेरे अल्लाह, आमी, आमीन, वल्हम्दु लिल्लाह रुबिलावलमी, अली कमांडर और उनके साथियों के पास, इस जंके खात्मे के इंतिजार के लाव और कुछ नहीं था, तैयारिय मुकमल थी, उन्होंने अ
32:03हिंदुस्तानी दस्ता हमला करो
32:33जैसे ही हैमिल्टिन ने सिपाईयों को हमला करने का हुकम दिया, तो उसने अपने ही पैर पर कुलहरी मार ली, पहले इस रफ के हिंदुस्तानी सिपाईयों का मुखिफ, उस्मानियों पर गौली चलाना नहीं, बलके अपने आजजादी तक पहुँशना था
33:03जब इमल्टिन ने देखा कि इंदुस्तानी सिपाई तुर्कों में जा मिले हैं, तो वो जान गया कि ये एक चाल है
33:27बतान नी दस्ता, हमलाँ
33:57करना भौल-क तूर्कों में धने भी Almost M
34:19करना फर्कों में घज़्ा Σवर्च पर चाना तॉक PRS
34:27बाद बाद बाद एक टूर बाद बाद रचाल
34:57अब कमांडर खलील की बारी थी
35:24उन्होंने गबराई हुई बरतानवी फौच पर
35:27पुरी ताकत के साथ गहड़ा दिया

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