Skip to playerSkip to main content
  • 1 year ago
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं के दादा कतरूसी नारायण आज भी शामिल नहीं होते हैं. जानिए दशकों पुरानी परंपरा के पीछे क्या है मान्यता?

Category

🗞
News
Transcript
00:30इसके पीछे यह कारण है कि जब कुलू के राजा ने लगघाटी के राजा को युद में परास्त किया था तो उसके बाद वो लगघाटी के देवताओं को उनकी देवसंस्रिती के हिसाब से कुछ नहीं कर पाया
00:49जिसके चलते आज भी लगघाटी के प्रमुक देवी देवता यहां कुलू दशेरा उत्सम में बिलकुल भी भाग नहीं लेते हैं हलांकि पुराने समय में राजा के द्वारा उन्हें जोर जबरश्ती भी लाने की कोशिश की गई लेकिन वो उसमें भी असफल रहे
01:03ऐसे में लगघाटी के निचले इलाके से देवी देवता तो यहां पर आते हैं लेकिन देवी देवताओं के दादा की उपाधी पाने वाले प्रमुक देवता कतुरुसी नारायन आज भी दशेरा उत्सम से दूर रहते हैं
01:15रविवार को भी यहां अजारों के संख्या में लोग ढालपूर मैदान पहुंचे हैं हलांकि यहां पर सुआ बारिश के चलते थोड़ी समस्या जरूर हुई लेकिन अब घाटी में बारिश रुक गई हैं और लोग फिर से देवी देवताओं के दर्शन कर रहे हैं
01:27जिला कुलू के बिविनी लाकों से आए देवी देवताओं के एक ही मैदान में दर्शन हो रहे हैं

Recommended