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  • 1 year ago
'खेकरिया' के दौरान पशुपालक पशुओं के बाड़े में जाता है और उसके हाथ में मौजूद लकड़ी को बचाने का प्रयास करता है.

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00:00दिवाली के अउसर पर अलग-अलग परमपराएं निभाई जाती है तो मैं पशुपालक मवेशी खेकर या एक खेल का आउजन करते हैं जिसमें पशुओं की शक्ती की ताकत आजमाई जाती है और ये खेल एक बाड़े में आउजित किया जाता है जिसमें सभी पशुओं के �
00:30करते हैं दूसरी तरफ दिवाली के उसर पर ही पशुओं को गले में हूल डाली जाती है ये हूल मोर पंक से तयार होती है और पशुपालकों का कहना है कि करीब एक महीने पहले से इसके तयारी वे शुरू कर देते हैं
01:00जो अपने मोर पंक होते हैं उनकी विशेज तरह के माला बनाई जाती है उसको हम बोलते हूल उसके लिए कम से कम भी महीने पहले मोर के पंक के किये जाते है जंगलों में जा जाती है फिर उनको कम से कम 15-20 इंतर पाने में भी बिगो के रखना पड़ता है किसी तलाव या कह
01:30सबी की पूजा अर्चना भी करते हैं और सबी पशों को परिवार जैसा ही माना जाता है क्योंकि इन से ही उनकी आजी विका चल रही है मनीज गौतम एटीवी भारत कोटा

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