00:00अगर मैं इसे चिंगारी भी कहूं तो ये छोटी सी बात इतना बड़ा शोला के से बन गई
00:06अगर जिला इंतजामिया चाहता तो बात चीज से हल हो जाता मसला
00:13बात कितनी ही बढ़ जाए लेकिन रास्ता तो टेबल पर बैटकर ही निकलता है
00:20आप पूरी जंगों के फैसले देख लीजे फरस्ट वर्ल्ड वार का नतीजा देख लीजे अधी दुनिया जिसमें मारी जा चुकी थी
00:30उसमें जब संधी और समझोता हुआ तो टेबल पर बैटकर ही हुआ अच्छे माहौल में हुआ
00:37तो खतरनाक से खतरनाक मसले का हल निकाला जा सकता है
00:42जाहिर है अगर कोई किसी से महबबत करता है वो कोई हो
00:45तो महबबत करना तो उसका इक्तियार है उसका पैदाईश ही हख है
00:50मुझे तो ताज्जब है
00:52अगर मैं इसे चिंगारी भी कहूं
00:58तो ये छोटी सी बात इतना बड़ा शोलाके से बन गई
01:02अगर जिला इंतिजामिया चाहता
01:07तो बाद चीज से हल हो जाता मसला
01:13क्योंकि बहरहाल बात कितनी ही बढ़ जाए
01:17लेकिन रास्ता तो टेबल पर बैटकर ही निकलता है
01:21आप पुरी जंगों के फैसले देख लीजए
01:23फरस्ट वर्ल्ड वार का नतीज़ देख लीजए
01:26सेकिंड र्ल्ड वार का नतीज़ देख लीजए
01:29आद ही दुनिया जिसमें मारी जा चुकी थी
01:31उसमें जब सन्धी और समझहता हुआ
01:34तो टेबिल पर बैट करी हुआ, अच्छे माहौल में हुआ
01:38तो हम बातों को बहुत बिगड़ने से पहले
01:43अगर संभालने की कोशिश करें
01:45और समवाद का स्लसला खतम न करें
01:49बाचीत का स्लसला, मस्ले को हल करने का स्लसला
01:53तो खतरनाक से खतरनाक
01:56मसले का हल निकारा जासकता है
01:58और ये तो
02:00आपसी सौहार्थ को
02:04बिगाडने का एक शड़ियंत रथा
02:07और जाहिर है अगर कोई
02:10किसी से महबबब करता है
02:11वो कोई हो
02:12तो महबबब करना तो उसका अख्तियार है
02:15उसका पैदाईश ही हख है
02:17मुझे तो इस वक्त यादा आ रहा है
02:21कौर मेहंदा सिंग
02:23बेदी का बेदी सहर का
02:25नात का
02:27एक शेर है शायद वो पूरा मुझे याद भी
02:30नहीं है इश्ख हो जाए
02:32किसी से
02:32कोई चारा तो नहीं
02:35इश्ख हो जाए
02:38किसी से
02:40कोई चारा तो नहीं
02:41सिर्फ मुस्लिम का
02:43मुहम्मद पर इजारा तो नहीं
02:46तो हमें
02:48लाना पड़ेगा
02:50इस एसास को वापस
02:51वो सिख थे
02:53सरदार थे
02:55लेकिन क्या
02:57कह गए? जो बुजर्ग होते हैं, जो मजभी पेश्वा होते हैं, वो इसलिए मजभी पेश्वा होते हैं, क्यों किसी एक मजभ के नहीं होते हैं, वो मशल रह बनके आते हैं, इंसानियत के लिए, हर धर्म हर मजभ के लिए, हम उने महदूद नहीं कर सकते हैं, हम उनके नाम प
03:27लागू सिर्फ एक धारंग एक मजभप पर नहीं होता है।
03:31तमाम धर्म और तमाम मजभप पर लागू होता है।
03:35ऐसा नहीं कि हम अपने लिए तो मीठा मीठाता है कर लें और दूसरे के लिए कड़वा ना।
03:41जो कड़वा है और सब के लिए कड़वा है।
03:43जो मीठा है, सबके लिए मीठा है