00:00जोहर का वक्व जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त जोब्त
00:30क्या है उसे समझते हैं
00:32हम जानते हैं
00:33कि सूरज पूरब से निकलता है
00:36पस्चिम की तरफ डोबता है
00:38अब ये निकलने
00:40और डूबने तब
00:41जितना वक्त है
00:43इस पूरे वक्त को
00:45अगर हम दो हिस्सों में बाटें
00:47तो बीच का जो वक्त है
00:49उसको निस्फ नहार
00:51यानि दिन का बीच वाला हिस्सा
00:54या इस्तवाई शम्स कहा जाता है
00:56इसी के थोड़ी दिर बाद
00:58जब सूरज पस्चिम की तरफ
01:00थोड़ा सा आगे बढ़ जाता है
01:02इसे ही जवाल कहते हैं
01:04यानि सूरज का ढ़लना कहते हैं
01:07और इसी से जहर का वक्त शुरू होता है
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