00:00तो तो पुपिया एक 25 साला पाकिस्तानी लड़की अपने लंबे घुंग्रियाले बालों के साथ जो धूप में सुनहरे रंग की चमक बिखिर रहे थे
00:08सहराई हवा में लहरा रहे थे
00:10उसका जिसमानी साख्त मनही औ जाजब थी
00:13जिसे नीले फूलदार जीन्स, कलर कुर्ता और काले टाइट्स ने खूबसूर्ती से उजागर किया था
00:19वो कदम बकदम चोलिस्तान के वसी और लामतनाही सहराओं में दाखिल हुई
00:24जहां रेत की लकीरें और सुनहरी धूप एक खाबनाक माहौल तखलीक कर रही थी
00:29इसके साथ इसकी दो वफादार दोस्तें आईशा और निदा भी थी
00:34जो अपने मजबूत अजम और मस्ताइद मिजाज के साथ सूफिया के साथ कदम से कदम मिला कर चल रही थी
00:41काफले की रहनुमाई में एक बुजर्ग बाबा मौजूद थे जिनकी आँखों में सहराई हिकमत और तजर्बे की जलक नुमाया थी
00:49सहराई रेत के तूफान उनके चेहरे पर रेत के छोटे जर्रात फैंकते
00:53और पिघलती धूप से पसीना उनके माथे पर बह रहा था
00:57लेकिन सूफिया की हिम्मत, एतिमाद और मुज़हमती रूह उन सब को आगे बढ़ने पर मजबूर करती रही
01:04वो काफले के दरमयान खड़ी हुई, अपने बाजू आहिस्ता से पहलाते हुए
01:09और बोली, दोस्तो, आज हम काफले के साथ नई जमीन की तरफ चलेंगे
01:14उसकी आवाज में एक पुरजोश लहजा था, जो दोस्तों के दिलों में भी वलवला पैदा कर रहा था
01:19रात के वक्त, जब आस्मान पर तारों की जलक नजर आती, वो एक पुरिसरार खेमे के करीब पहुँचें
01:25धकन के बावजूद, सूफिया और उसकी दोस्तें खेमे में दाखिल हुई, जहां बाबा ने गरम जोशी से उनका इस्तकबाल किया
01:33आग के गिर्द बैटकर खेमे की नरम रोशनी में सूफिया ने कहा, बाबा ये खेमा घरसा लग रहा है
01:40उस लम्हे एक खामोश सुकून उनके दिलों में उतर गया, और वो सब कुछ भूल कर महज आग की रोशनी और रेद की नरम खुश्बू में घुल गए
01:49सुब के वक्त तुलूए अफ्ताब के साथ वो दुबारा काफले के साथ रवाना हुई
01:54रेद के समंदर में हर कदम उनके अजम और ताकत का इंतिहान ले रहा था
02:00शदीद धूप में सोफिया ने दूर एक पानी की सराब देखी और बाबा से कहा
02:06बाबा सामने पानी दिख रहा है लेकिन हकीकत में ये सिर्फ धोका था जो इनकी ठकन को और बढ़ाता रहा
02:13इस लम्हें सोफिया की आंखों में मायूसी और उमीद दोनों के अकसाफ दिखाई दे रहे थे
02:19मगर उसका हौसना तूटने ना पाया
02:21रास्ते में वो पुराने सहराई देहात से गुजरती हैं
02:25जहां इंटों के मकानात सुनहरी रोशनी में चमक रहे थे
02:28और पहाडी किनारे से गुजरते हुए वो गुदरत की खामोश अजमत को महसूस कर रही थी
02:34हर मनजर में सुफिया और बाबा के दर्मयान रिश्टा और मजबूत होता गया
02:38बाबा की नर्म आवाज, तजर्बे की नसीहतें और सुफिया की चमकती आँखों में जोश और हैरत
02:44इस सफर को एक रुहानी तालुक की शकल दे रहे थे
02:48शाम के वक्त वो एक पहाडी किनारे पर खड़ी होकर सुरज के गरूब को देखती है
02:53जो उफक के किनारे पर सुर्ख और सुनहरी लंगों में डूब रहा था
02:57वो बोली, बाबा, कभी कभी लगता है ये सुरज बस हमारे लिए डूबता है
03:03उसकी आवाज में एक अजीब सुकून और गद्र थी
03:06जैसे सहराई हवा और सूरज के रंग उसके दिल की कहराईयों तक जा पहुँचे हों
03:12रात के वक्त, खेमे के आग के गिर्द बैट कर
03:16सुफिया अपने सफर, ठकन और आग की रोशनी पर गोर करती है
03:20उसका दिल और दिमाग दोनों इस तजर्बे की शिदत में घुल रहे थे
03:25ये सफर ना सिफ जिस्मानी ठकन का था बलके रुहानी भी
03:29जो उसे जिन्दगी के नए रंग, तजर्बात और खुद्शनासी का एहसास दिला रहा था
03:35हर रित का जर्रात, हर सहराई हवा का चौंका
03:39और हर शाम की रोशनी सूफिया के वजूद में एक नई कहानी छोड़ रहे थे
03:43सूफिया की ये मुहिम, उसकी हिम्मत, दोस्तों के साथ वाबस्तगी और बाबा की रहनमाई
03:50चौलिस्तान के सहराओं में एक ऐसी दास्तान तखलीब कर रही थी
03:54जो ना सिर्फ इनके सफर की कहानी थी
03:57बलकि अंदरूनी ताकत, होसले और जिन्दगी की खूबसूरती का एक जीता जागता अक्स भी थी
04:04चंद दिनों के सहराओं सफर के बाद सूफिया और उसकी दोस्तें आईशा और निदा काफले से कुछ फासले पर भटक गई
04:13रेत की लामतनाही यकीरों में वो अपना रास्ता तलाश कर रही थी
04:18हर कदम के साथ धूब की शिदत और रेत की नर्म मगर चिपचिपी तैह उनकी धकन को बढ़ा रही थी
04:25मगर सूफिया की हिम्मत एतमाद और मुजाखमती रूफ सबसे नुमाया थी
04:31वो अपने दोनों दोस्तों के साथ आगे बढ़ती रही
04:34हर रेत के जर्रे में अपने होसले की चाप छोड़ती
04:38उनके सफर के दर्मयान एक बज़र्ग शखस नमदार हुआ
04:42जिसने फॉरन उनकी तवज्जो अपनी जानिब खींची
04:45वो बाबा थे पुराने सहराई लिबास में मलबूस
04:49उनकी आँखों में नर्मी, हिकमत और तजर्बे की जलक नुमाया थी
04:53उनका कदम धीरे और मजबूत था
04:56और हर हरकत में कदीम सहराई दास्तान चिपी हुई महसूस होती थी
05:01सूफिया ने उसे देखकर हैरत से कहा, बाबा आप यहां कैसे?
05:05बाबा ने मुस्करा कर जवाब दिया, मैं सहरा में मुसाफरों की रहनमाई करता हूँ
05:10और ठकन को दूर करने में मदद देता हूँ
05:12सूफिया और उसकी दोस्तें बाबा के साथ रहने लगी
05:16वो उनके साथ सफर करती रही
05:18और बाबा की सादा मगर पुरासर जिन्दगी ने उनके दिलों में एक नई सुकूनत पैदा कर दी
05:24सूफिया और बाबा के दरमयान आहिस्ता आहिस्ता एक खास रिश्ता परवान चड़ने लगा
05:29उनके दरमयान एतराम, हसी और खामोश लमहात ने महबबत की बनյाद रखी
05:35और हर दिन के सहराई तजर्बात ने उनके रिश्ते को मजबूत बनाया
05:40वक्त गुजरता गया और सूफिया और बाबाने शादी कर ली
05:44ڈونوں کے درمیان محبت اور اعتماد نے
05:47سہرائی زندگی کو ایک نیا رنگ دیا
05:49سوفیہ نے بابا کے ساتھ زندگی کی ہر کھٹنائی
05:52اور ہر خوشی کو بانٹنا شروع کیا
05:54کچھ عرصے بعد سوفیہ کے بچے پیدا ہوئے
05:57اور اب وہ سہرائی زندگی کے تمام لمحات
06:00مشکلات اور خوشیوں کو ایک ساتھ محسوس کرتی تھی
06:04ہر دن کے طلوع و غروبے آفتاب
06:06ہر ریت کا طوفان اور ہر ہوا کا جھونکہ
06:10and their children for a new heart.
06:12One day, the deal of rebellion was again.
06:14One day, the car came again in the Kopi.
06:16It was a dream of the Devil,
06:18and a new dream of the night.
06:20The idea of the Prophet,
06:22that was the whole family of this country.
06:24One day, the story of the Prophet,
06:26it was a dream of the people.
06:28The story of the Prophet,
06:30the Holy Spirit,
06:32and the story of the Prophet,
06:34the story of the Prophet.
06:36The story of the Prophet,
06:38Sofiyah's story was not only the first story of Sifar, but also the whole story of Sifar's story.
06:47The only story of Sifiyah, the first story of Sifiyah, the first story of Sifiyah, the second story of Sifiyah.
07:00Sifiyah's story was made of Sifiyah.
07:04We are coming out with new children...
07:34a new voice feels like a new story.
07:36Every day of life is a new story
07:39where in the morning,
07:41new challenges,
07:42new challenges,
07:43new experiences,
07:44new experiences,
07:45new experiences.
07:46Sofiyah's heart's heart
07:47has always been told
07:49that every day
07:51that every day,
07:52whether it be difficult
07:53or difficult
07:54or difficult
07:55to make a difference
07:56in order to make a difference.
07:58One day,
07:59one day,
08:00one day,
08:01one day,
08:02one day,
08:04one day,
08:05the reality,
08:06this is my own view.
08:07Oh,
08:08the love of a nun,
08:10the meaning of an image
08:12has been created,
08:14and it's not the difference.
08:16he said that
08:18it is being said
08:19that the real journey
08:20has never one.
08:22the humanitarian lives
08:24and the children
08:25have realized
08:27the life of a new room.
08:29He said that
08:30उसने समझा कि चाहे रास्ते सहराई हो या शहरी, होसला, महबत और खानदान की ताकत हमेशा इनसान को आगे बढ़ाती है
08:39हर दिन की छोटी छोटी खुशिया, हर चहरे की मुस्कुराहट और हर लम्हे की यादें सूफिया के दिल में एक नही रोशनी पैदा कर रही थी
08:49यो सूफिया और उसके खानदान में नए शहर में अपने सफर का अगास किया
08:53वो माज़ी की यादों को दिल में रखते हुए और मुस्तक्बिल की उमीदों और खावों के साथ हर दिन को एक नई कहानी की तरह जीते रहे
09:01हर दिन हर लमहा हर मुस्कुराहट और हर चैलेंज ने उन्हें जिन्दगी की गहराईयों और मुहबत की ताकत का एहसास दिलाया
09:08और सूफिया ने महसूस किया कि असल सफर ना खतम होने वाला है बलकि ये हर दिन नए रास्ते और नए तजर्बात के साथ जारी रहता है
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