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  • 11 months ago
"इस कहानी में एक अनोखी सीख छुपी है जो आपके जीवन को बदल सकती है! यह कहानी न केवल बच्चों के लिए बल्कि बड़ों के लिए भी एक प्रेरणा साबित होगी। अगर आपको नैतिक कहानियाँ (Moral Stories), प्रेरणादायक कहानियाँ (Inspirational Stories) और हिंदी लघु कथाएँ (Short Stories in Hindi) पसंद हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है। पूरी कहानी देखें और अपने विचार हमें कमेंट में बताएं!


🔹 वीडियो की खास बातें:
✅ सुंदर एनीमेशन और इमोशनल कहानी
✅ हर उम्र के लिए अनुकूल
✅ सीखने और समझने योग्य नैतिकता

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Transcript
00:00कुछी समझ नहीं आता ये घर वाले खुले हाथ से खाना खाने में इतनी चिचक क्यों रही है
00:04और रात का उसका बचा कुछा कंजूसी वाला खाना खा रहे है
00:08कुछ ससुराल वालों का कभी कुछ नहीं हो सकता
00:10खाना खिलाओ तो नाट करती है और ना खिलाओ तो नाट करती है
00:14पहुं फिर कभी ऐसा खाना बना तो बुला लेना
00:17मैं बड़ी shock से खाता हूँ हाँ
00:20ऐसे कहकर शर्मा जी निकल जाते हैं
00:22शाम को मदू फिर से 3-3 सबजी बना लेती है
00:25जी ठानी जी आपको कितना कुछ भी कहलो आप जादा खाना बनाने से चोकती नहीं है आपको पता है अंदर राशन के डबे में सूखा धनिया खराब हो चुका है मीची खराब हो चुकी है सौफ में कीड़े पढ़ चुके हैं और सूखे मसाले में भी आपको इतना स्टॉक कर
00:55बिल्कुल भी मतलब नहीं है बात सिर्फ इतनी सी है कि जायस खाना बनाया जाए ना सामान खरीदा जाया जायस आप बहुत पैसी खर्च करती है अगर ये पैसे बच जाएं तो हमारे एमर्जेंसी के वक्त में काम आ जाएंगे हाप उनम बहुत ही कह रही है मधो तुम्हें
01:25बच्चों को उनके मन का बना कर खिला देती हूं ये बुरा है अरे यार कम बनाया करो बच्चों को भी समझाया करो टिंको निशा सिर्फ आप दोनों को संडे संडे को ही अपनी मर्जी का खाना मिलेगा बागी दिन मम्मी और चाची जो बनाया है वो ही खाना है ठीक है बा�
01:55घर से बहार जाने को मिला, अब मैं कल बहुत अच्छा अच्छा खाना बनाओंगी, मामी मामी पास्ता जरूर बनाना, निशा पापा ने क्या समझा रहे था,
02:03हाँ, कल के दिन सब चलता है, अगले दिन सुबा सुबा पूरा परिवार पिकनिक के लिए, कैज़ूल कपड़े में तयार हो जाता है, बच्छे और बड़ों ने चश्मा टोपी लगा रखी होती है, वहीं लेडिस भी अलग अंदाज में थी, जिटानी अभी भी खुले हाथ
02:33नहीं बनाया, और ये भी नहीं कि मैं जो बना रही हूं उसमें मदद करवा दो, दिदी हम कोई बहुत दूर ट्रेन में बैठकर नहीं जा रहे हैं, जो आप इतना सारा खाना बना रही है, आपको इतना खाना नहीं बनाना चाहिए था, ये बात आपको अभी नहीं बाद मे
03:03अरे बहू, कुछ खाने का लाई हो तो बना कर दे दो
03:06हाँ पापा जी, आए, मैंने चिकन फ्राइट, मंचूरियन पास्ता, शाही पनीर, पूरी और दही बल्ले बनाए है
03:12आज तो इतना सारा खाना बना है
03:16मदू प्लेट निकाल कर बैट गई होती है, जैसे ही सारी टिफिन खोलती है, समय से बदबू आने लगती है
03:21ओहो भावी, बदबू कैसे आ रही है
03:23अरे बहू, तु दही भले में चटनी और दही डाल कर लाई थी, ये तो सड़ गया
03:28जी ठानी जी आपने शाही पनिल की सबसी करम-करम रख दी थी, वो भी भुस गई, थोड़ी हवा लगा के रखना चाहिए था, हमेशा चिकन भी खराब निकला
03:36मंचूरियन वाला
03:39बच्चों का पास्ता भी खराब हो गया, मदू क्या करती हो या
03:42अब हम क्या खाएंगे बाबा, हमारा पिकनिक खराब हो गया
03:45इसलिए जी ठानी जी, आपको मैं समझा रही थी, लेकिन आपने सुना नहीं, पर बच्चों तुम परिशान मत हो, तुम्हारी चाजी तुम्हारी पिकनिक खराब नहीं होने देगी
03:53पूनम फटाफट से एक बड़ा बाउल निकालती है, जिसमें नमकीन कुरकुरे चिट्स के पैकेट डालती है, और फिर टमाटर मेर्च प्यास चौपिंग करके उसे नमकीन में डाल देती है, और उपर से नीमू मसाला डालकर सब को चटपटा जालमूरी खिलाती है
04:06वहीं आइस बॉक्स में आइस क्रीम लेकर आई होती है, साथी रात के बचे हुए चावल के कटलेट बनाया हुआ परोस्ती है
04:12वह भावी, आपने क्या दिमाग लगाया है, ताजा ताजा यहीं बना दिया कुरकुरे की जट, आइस क्रीम भी नहीं बिखली, कटलेट भी मस्त है
04:19बाहुत बड़िया बहु, अगर तूद बना कर नहीं लाती तो अभी 1500 रुपए बाहर से खाना खाने में खर्च हो जाती
04:26बच्चे अपने पापा के साथ जोला जूल रहे होते हैं, वहीं घर के बाकी लोग वैडमिंटन खेल कर टाइम पास करते हैं
04:43और जूस पीकर घूम फिर के घर वापस आ जाते हैं
04:45इतना समझाने पर भी मधू मानती नहीं है और दोनों जिठानी दिवरानी में खाने के बीच के टकराओ होती रहती है
04:51वो कुले हाथ से बनाती है और कंजूस बहू अपनी समझदारी से हमेशा खाना बरबाद होने से बचा लेती है
04:57और घर वाले खुशी-कुशी नई तरीके का खाना खाते हैं
04:59आप नागिंद्र अपने बैंक के काम से हमेशा के लिए रिटार्मेंट ले लेता है
05:03तो उसके कुछ खास दोस्त घर पर आने वाले होते हैं उसी सुभा
05:07अरे मधु बहु, पूनम बहु, मैंने तो दस लोगों को बलाया था
05:11लेकिन आप मेरे दोस्त अपने घर के फैमली मेंबर को भी ला रहे हैं
05:14तो खाना उसे साथ से बना लेना, एक देट घंटे में वो आने वाले हैं
05:18क्या, इतनी चल्दी कोई बात नहीं, मैं सबजी तो एक्स्ट्रा बनाई है, बाके सब और बनाना पड़ेगा
05:23आप तो बजार जाने का टाइम भी नहीं वचा, पापजी आप चिंता मत कीजी, सब हो जाएगा
05:28कल रात को जिठानी जी आपने 25-30 रोटी बनाई थी, और सब ने खाया चावल थे, अब मुझे भी कुछ बनाना होगा
05:34अरे ओ, पापजी के खास दोस्ता आ रही हैं, बेज जती मत करवाना, उन्हें बार सा खाना खिला कर, मेरे पास इतने पैसे हैं कि बाहर से खाना ओडर करके खिला सकती हो, लेकिन मैं घर का खाना खिलाना चाहती हो उन्हें
05:46हाँ ठीक है दीदी, मैं ताजी पूरी बनवा देती हूँ आपके साथ
05:50एक गैस पर मिक्स वेज बन रहा था, दूसरी पर बहु राजमा चावल बनाती है, तीसरी पर पूरियां बना रही थी
05:55सभी महमान आ जाते हैं, अवंति काउने बिठाती है, सौमया सबको पानी पिलाती है, इतने में सिलेंडर खतम हो जाता है
06:02ही भगवान, ये क्या हो गया? सिलेंडर को भी अभी खतम होना था, ओ गॉड, में राजमा में भी अभी तीन चाव सिटी आने थी, मिक्स वेज भी आदा कच्चा अदा पका हुआ है, अब खाली चावल कैसे खिलाओंगी, और ये पूरियां बीस पच्चिस कोड़ियों से क
06:32अरे कंजूस मक्यचोस, इस टाइम तु चुप रहे लो, या आज भी मैं इतने सारे मेमान के आने पर खुले हाथ से नहीं बनाती है और खाने में कटोती करती, ऐसे कंजूसी करती हो, जैसे कोई तुम्हारे खजाने से राशन चुड़ा के लिए जा रहा हो, छोड़ी दि�
07:02सारे मिठाई निकाल कर अलग-अलग प्लेट में मठिया तोड कर डालती है और उस पर फ्रिज में से दही फेट कर डाल देती है, साथ में चटपटा मिर्च मसाला जिससे चाट पापड़ी बन जाती है, दूसी तरफ रात की रोटियों से एवं मैं उसे पर टोमेटो, सॉस �
07:32पूनम रसुई में जाकर अंगीठी पर दूद गरम करती है और एक ट्रे में ब्रैड बेच कर उस पर दूद और ड्राइफ रूट डाल देती है, जिससे एक मीठी मिठाई बन जाती है और पूनम सब को खिला देती है, ऐसे ही वो अंगीठी पर आधा बचा हुआ खाना भी
08:02पूरी भी बनाई है, लेकिन मेरी कंजो सिवरानी आप लोगों को वे मीठी, मठी, पापड़ी दही और वो बच्ची हुई रोटी का पिंजा के लाकर शेह तवीद खराब करवाना चाहती है,
08:11क्या, बास ही खाना? ये क्या है नागिन भाई साहब? हम आपके रेटार्मेंट के खोशी में यहाँ पर ये सारा खाना नहीं खाने आए।
08:41सिलिंडर खत्म हो गया था, आधा कच्चा पका खाना आपको नहीं दे सकती थी, तो जो जल्दी बन सकता था वही दे दिया।
08:48वह पुनम वह, मगर मच के आसो निकलने में एक्सपर्ट है, लोगों को बासी कंजूसी वाला खाना खिला कर भी खिला ही दिया।
08:55और अच्छा खाना बनाने का क्रेडिट भी, खुद ले लो, ये तो कोई तुम से सीखे।
09:00अरे बहू इतनी सफाई से और हेंदी खाना तो होटल में भी नहीं मिलता।
09:05वही तो खाना खतम भी हो गया, सबका मन भी भर गया, बर्बादी भी नहीं हुई, इसे बोलते हैं असली दावत।
09:10खाश, मधू, बहू, तु भी ये बात को समझ जाए, कि आज पैसे बचा लेगी, तो कल हमें ही फाइदा होगा, इतना खाना बर्बाद भी नहीं होगा।
09:20आप सब शेय ठीक कहे रहे हैं, अगर आज में 15-20 लोगों का खाना 40 लोगों की तरह नहीं बना दी, तो खाना चल्दी बन जाता, सिलिंडर बिखतम नहीं होता, और ऐसे समय में पूनन तुमने जो करना चाहिए था, बिल्कुल ठीक किया, मैं शर्मिन्दा हूँ अपनी गल
09:50देती है तब सास, अरे आज डाल में से खुश्बू कैसे आ रही है मुझे, और रसोई में 2-3 सबजी दिखाई नहीं दे रही, आज बस एक ही है, दादिया मामी भी चाची की तरह कंजूस हो गई है, अब रोज एक सबजी बनाएंगी, मेरा मतलब मामी चाची की तरह स्मार

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